Delhi visa trap Bribed and then forced to spy on the army;Pakistani embassy's big game exposed

दिल्ली में ‘वीजा ट्रैप’: रिश्वत देकर फंसाया, फिर कराई सेना की जासूसी; पाकिस्तानी दूतावास का बड़ा खेल उजागर

नई दिल्ली 05 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी उच्चायोग की आड़ में चलाए जा रहे एक और जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

इस मामले में हरियाणा के पलवल निवासी एक सिविल इंजीनियर वसीम अकरम को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारी के लिए जासूसी कर रहा था।

इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे पाकिस्तानी दूतावास वीजा डेस्क का दुरुपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, वसीम अकरम को मंगलवार को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA) के तहत गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आया है कि अकरम पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी जफर उर्फ मुजम्मिल हुसैन के लिए काम करता था। अकरम की मुलाकात जफर से तब हुई जब वह पाकिस्तान के कसूर में अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए वीजा का आवेदन करने गया था।

पहले तो उसका वीजा खारिज कर दिया गया, लेकिन जब अकरम ने 20,000 रुपये की रिश्वत दी, तो वीजा स्वीकृत हो गया। मई 2022 में जब वह पाकिस्तान से लौटा, तो अधिकारी जफर ने उससे व्हाट्सएप के जरिए संपर्क बनाए रखा।

आरोप है कि जफर ने अकरम को कमीशन का लालच देकर उसका बैंक खाता “वीजा सुविधा कोष” के लिए इस्तेमाल किया।

अकरम के खाते में लगभग पांच लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जिसमें से उसने 2.3 लाख रुपये (डेढ़ लाख नकद समेत) वापस अधिकारी को दिए।

इसके अलावा, अकरम ने पाकिस्तानी अधिकारी को भारतीय सिम कार्ड, ओटीपी और भारतीय सेना के जवानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी मुहैया कराई।

अधिकारियों ने बताया कि यह “पलवल मॉड्यूल” ठीक उसी पैटर्न पर काम कर रहा था, जैसे पहले मलेरकोटला और नूंह में उजागर हुए मॉड्यूल कर रहे थे। इस साल की शुरुआत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत मलेरकोटला मामले का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी दानिश ने स्थानीय लोगों को वीजा का लालच देकर जासूसी के लिए इस्तेमाल किया था।

इसी तरह नूंह में भी अरमान नाम के एक व्यक्ति को डिफेंस एक्सपो के वीडियो और सिम कार्ड मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह पैटर्न साफ ​​दिखाता है कि पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारी भ्रष्टाचार के जरिए वीजा आवेदकों का शोषण करते हैं और फिर उन्हें जासूसी के लिए मजबूर करते हैं।

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