नई दिल्ली – भारतीय रेलवे के वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क पर यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 2.97 करोड़ यात्रियों की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर्शाती है। यह तीव्र वृद्धि देश भर के यात्रियों के बीच तेज, आरामदायक और आधुनिक रेल यात्रा के लिए बढ़ती प्राथमिकता को उजागर करती है। वंदे भारत एक्सप्रेस ने इसकी शुरुआत से लेकर अब तक, 1 लाख यात्राओं के माध्यम से 9.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की है, जो व्यापक जनविश्वास और निरंतर मांग को दर्शाती है।
भारतीय रेलवे, देश की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित सेमी-हाई-स्पीड रेलगाड़ी, वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ यात्रियों की यात्रा को लगातार नया रूप दे रहा है। फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर शुरू की गई यह सेवा, मेक इन इंडिया पहल के तहत गति, आराम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है और एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क में विकसित हो गई है।
नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग सबसे व्यस्त मार्ग बना हुआ है। इस मार्ग पर अब तक 73 लाख से अधिक यात्री वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा कर चुके हैं। नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग पर लगभग 56 लाख यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो तीर्थयात्रा के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है। दक्षिण भारत में, सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम मार्ग पर 48 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है, जबकि पुरची थलाइवर डॉ. एमजीआर सेंट्रल (चेन्नई)-मैसूरु मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो मजबूत क्षेत्रीय मांग को दर्शाता है। ये सेवाएं पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरी हैं, जो प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और तटीय स्थलों तक पहुंच में सुधार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि कर रही हैं।
भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी के संपर्क को और मजबूत करते हुए जनवरी 2026 में वंदे भारत शयनयान सेवा शुरू की। परिचालन के पहले तीन महीनों में ही, इस सेवा ने 119 फेरों में 1.21 लाख यात्रियों को वंदे भारत शयनयान सेवा से यात्रा कराई, जिससे 100 प्रतिशत से अधिक की ऑक्यूपेंसी दर प्राप्त हुई, जो मजबूत मांग और प्रीमियम रात्रिकालीन रेल यात्रा में यात्रियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की नवाचार, यात्री-केंद्रित सेवा और स्वदेशी विनिर्माण के की दिशा में प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महानगरों, तीर्थ स्थलों, विरासत शहरों और उभरते आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले निरंतर विस्तार और शयनयान श्रेणी के जुड़ने से भारतीय रेलवे तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्राएं प्रदान करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और वंदे भारत एक्सप्रेस भारत में आधुनिक रेल यात्रा के परिवर्तन का नेतृत्व कर रही है।
नई दिल्ली – हिंदू कॉलेज द्वारा आयोजित वक्तव्य 2026 को संबोधित करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि यह रिएक्टर तरल सोडियम को शीतलक के रूप में उपयोग करते हुए प्लूटोनियम का प्रयोग करता है, जिससे कम लागत में अधिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित होता है और भारत के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाते हुए थोरियम आधारित रिएक्टरों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विकास भारत की क्षमता को मजबूत करता है और दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अपरिहार्य है और शासन तथा दैनिक कार्यों का अभिन्न अंग बनती जाएगी। उन्होंने कहा कि एआई एक शक्तिशाली सहायक उपकरण के रूप में अनुसंधान, विश्लेषण और निर्णय लेने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि मानवीय बुद्धिमत्ता दब न जाए। उन्होंने इसे एक संकर मॉडल बताया जहां प्रौद्योगिकी मानवीय क्षमताओं की पूरक है।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश अब वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्टार्टअप देशों में शुमार है, और पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है, जिसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन स्टार्टअप्स में से लगभग 50% सोनीपत, पानीपत और सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, जो अवसरों के लोकतंत्रीकरण और महानगरों से परे नवाचार के प्रसार को दर्शाता है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में विस्तार से बताते हुए इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया, जिसने छात्रों को शैक्षणिक मार्ग चुनने और बदलने की स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र अब कठोर विषय धाराओं से बंधे नहीं हैं और अंतर्विषयक शिक्षा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे वे अपनी शिक्षा को अपनी विकसित रुचियों और योग्यताओं के अनुरूप ढाल सकते हैं।
प्रतिभा और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने “वैभव” कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को घरेलू संस्थानों से जोड़ना और सहयोग के अवसर पैदा करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाने में मदद कर रही हैं जहां वैश्विक विशेषज्ञता भारत के वैज्ञानिक विकास में योगदान दे सकती है।
उन्होंने “प्रतिभा सेतु” पोर्टल के बारे में भी बात की, जिसे यूपीएससी परीक्षा के उन्नत चरणों में पहुंचने वाले उम्मीदवारों को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म संगठनों को सत्यापित उम्मीदवारों की प्रोफाइल तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन लोगों के लिए अवसर पैदा होते हैं जो अंतिम चयन में भले ही न पहुंच पाएं लेकिन उनमें मजबूत क्षमताएं हों।
छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, मंत्री जी ने मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में विकास अलग-थलग रहकर नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों को पारंपरिक करियर विकल्पों से परे विविध अवसरों का पता लगाने और उपलब्ध तकनीकी उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना की सुलभता, तकनीकी प्रगति और नीतिगत सुधारों के कारण वर्तमान युग युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों से इस अनुकूल वातावरण का भरपूर लाभ उठाने और भारत की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज निर्माण क्षेत्र में नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत पद्धतियों के महत्व पर बल दिया, साथ ही अवसंरचना विकास के भविष्य के लिए वैकल्पिक ईंधन और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता का उल्लेख किया।
नई दिल्ली में आयोजित 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ में सभा को संबोधित करते हुए श्री नितिन गडकरी ने कहा कि ज्ञान को धन में परिवर्तित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कुशल कार्यप्रणालियां आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी परिवर्तनों के कारण निर्माण क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है।
श्री गडकरी ने निर्माण लागत कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्रक्रियाओं में सुधार करने से दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और परियोजना लागत में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास के लिए त्वरित निर्णय लेने, बेहतर परियोजना योजना बनाने और गुणवत्ता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
श्री गडकरी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों जैसी प्रमुख पूर्व-आवश्यकताओं को समय से पहले पूरा करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में लंबित स्वीकृतियों और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण हुई देरी ने परियोजना की समयसीमा और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया था।
श्री गडकरी ने परियोजना कार्यान्वयन में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि लागत संबंधी विचारों के साथ-साथ गुणवत्ता और प्रदर्शन को उच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सतत समाधानों पर बल देते हुए उन्होंने हितधारकों से जैव ईंधन, जैव द्रव्यमान आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियां पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और परिचालन लागत को घटाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और इस्तेमाल किए गए टायरों के पुनर्चक्रण सहित अपशिष्ट-से-धन प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग का भी आह्वान किया।
श्री गडकरी ने सफल नवाचारों का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से नागपुर में कार्यान्वित परियोजनाओं जैसे कार्यों में पहले ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिल चुके हैं, जो बुनियादी ढांचे के विकास में टिकाऊ सामग्रियों की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
उन्होंने भविष्योन्मुखी प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान-आधारित समाधानों को अपनाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग को प्रोत्साहित किया।
श्री गडकरी ने कहा कि भारतीय अवसंरचना कंपनियों ने दुबई, कतर और कई अफ्रीकी देशों में प्रमुख परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करके वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और शॉर्टकट से बचना भारत के निर्माण उद्योग की वैश्विक प्रतिष्ठा को और बढ़ाएगा।
श्री गडकरी ने समारोह में विजेताओं को 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किए और निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में गुणवत्ता और नवाचार में उनके योगदान के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर, बिल्डर और पेशेवर विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली – भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने आज शिलांग में कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में संसदीय परामर्श समिति की बैठक और उसके बाद एनआईएफटीईएम परिषद की बैठक का आयोजन किया।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान की अध्यक्षता में हुई इन बैठकों में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री अविनाश जोशी और संयुक्त सचिव श्री देवेश देवल और संसद सदस्य व अन्य हितधारक उपस्थित थे।
संसदीय परामर्श समिति की बैठक के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की व्यापक समीक्षा की गई। इसमें मंत्रालय की ओर से चलाए रहे सुधार कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों को भी शामिल किया गया। एमओएफपीआई द्वारा कार्यान्वित और प्रस्तावित सुधारों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसके बाद समिति के सदस्यों ने इस क्षेत्र को सुदृढ़ करने और इसकी पहुंच व प्रभाव को बेहतर बनाने को लेकर सुझाव दिए।
एनआईएफटीईएम परिषद की बैठक में देश में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने से संबंधित प्रमुख संस्थागत और नीतिगत मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। सदस्यों ने संस्थागत ढांचों को उद्योग की आवश्यकताओं और इस क्षेत्र में उभरते अवसरों के अनुरूप बनाने के तरीकों पर चर्चा की।
बैठकों को संबोधित करते हुए मंत्री ने फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन बढ़ाने में खाद्य प्रसंस्करण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बुनियादी ढांचे की कमियों, वित्त तक पहुंच और तकनीकी बाधाओं सहित इस क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मंत्री ने व्यापार करने में आसानी के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व को भी रेखांकित किया और जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने, खाद्य सुरक्षा नियमों को सुव्यवस्थित करने और सभी विभागों के प्रयासों के समन्वय पर सरकार की पहल की प्रशंसा की।
इन चर्चाओं में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सुदृढ़ करने, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के प्रति सकारात्मक धारणा बनाने और मूल्य शृंखला में किसानों और हितधारकों के लिए अधिक लाभ के साथ सतत विकास सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता झलकती है।
मंत्रालय ने नीतिगत समर्थन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से इस क्षेत्र में विकास को गति देने पर अपना ध्यान केंद्रित करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि भारत को खाद्य प्रसंस्करण में वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित किया जा सके।
मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने, चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर, आज तमिलनाडु राज्य में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों (सामान्य, पुलिस, व्यय) के साथ एक समीक्षा बैठक की; तमिलनाडु में 23 अप्रैल, 2026 को मतदान होना निर्धारित है।
तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सहित कुल 326 केंद्रीय पर्यवेक्षकों और विशेष व्यय पर्यवेक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ब्रीफिंग में भाग लिया। पर्यवेक्षकों का विवरण इस प्रकार है:
तमिलनाडु में आम चुनावों में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या
एसी की संख्या
सामान्य पर्यवेक्षकों की संख्या
पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या
व्यय की संख्या
कुल केंद्रीय पर्यवेक्षक
234
136
40
150
326
आयोग ने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि चुनाव उत्सव के माहौल में, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से तथा किसी भी प्रकार के प्रलोभन, धमकी या हिंसा से मुक्त होकर संपन्न हों।
आयोग ने आदर्श आचार संहिता के कड़ाई से पालन और उल्लंघन की किसी भी शिकायत के मामले में त्वरित कार्रवाई पर भी जोर दिया।
पर्यवेक्षकों से यह भी अनुरोध किया गया था कि वे अपने संपर्क नंबरों और जनता/राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों से शिकायतें सुनने के स्थान और समय को सार्वजनिक रूप से प्रचारित करें।
उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि वे इस बात की निगरानी करें कि पीठासीन अधिकारियों का प्रशिक्षण ठीक से हुआ है या नहीं, जिसमें ईसीआईएनईटी के मतदाता मतदान मॉड्यूल पर प्रत्येक 2 घंटे और मतदान बंद होने के समय मतदाता मतदान और अन्य डेटा की समय पर फीडिंग, अमिट स्याही का उचित उपयोग, फॉर्म 17-सी भरना और मतदान बंद होने के समय उपस्थित मतदान एजेंटों के साथ साझा करना, नकली मतदान डेटा को हटाना आदि पर विशेष जोर दिया गया हो।
पर्यवेक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि सभी मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा और मतदाता कतारों में बैठने के लिए बेंच सहित न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि भीषण गर्मी को देखते हुए सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
वेबकास्टिंग मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं की ठीक से जांच की जानी चाहिए और वहां निगरानी के लिए तैनात सभी कर्मचारियों की उपस्थिति में एक परीक्षण चलाया जाना चाहिए, जिन्हें त्रुटियों की पहचान करने और यदि कोई त्रुटि हो तो उसे चिह्नित करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (एनटीडब्ल्यूबी) की 9वीं बैठक श्री सुनील जे. सिंघी की अध्यक्षता में वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
अध्यक्ष ने जन विश्वास संशोधन का स्वागत किया और व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किये गये कई महत्वपूर्ण सुधारों और पहलों पर प्रकाश डाला:
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026: जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 में 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिसमें 717 प्रावधानों को अपराध से मुक्त करना शामिल है, ताकि अनुपालन का बोझ कम हो और व्यवसाय करने की आसानी को बढ़ावा मिले।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई): खाद्य व्यवसायों के लिए लाइसेंस और पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के लिए अनुपालन आसान हो गया है।
राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति, 2025: ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए प्लेटफ़ॉर्म शुल्क (शिपिंग शुल्क को छोड़कर) की 75% वापसी के जरिये समर्थन दिया जा रहा है, जो एक वर्ष के लिए ₹50,000 तक है।
उद्यम पंजीकरण और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: ये पहलें व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को बिना गिरवी के ऋण प्रदान कर रही हैं, जिससे उद्यमिता और व्यापार विस्तार को प्रोत्साहन मिल रहा है।
डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में, ओएनडीसी टीम द्वारा “डिजीदुकान” पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जो एक बी 2 बी प्लेटफार्म है और वर्तमान में हैदराबाद में संचालित हो रहा है। इसकी योजना जयपुर और बेंगलुरु में विस्तार करने की है। इस प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य छोटे खुदरा विक्रेताओं और किराना स्टोरों को उनकी डिजिटल क्षमताओं और बाजार पहुँच बढ़ाने के जरिये सशक्त बनाना है।
इस बात पर भी जोर दिया गया कि, व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर आउटरीच और राज्य सरकारों, उद्योग विभागों और व्यापार संघों के साथ समन्वय के माध्यम से, राज्य-स्तरीय व्यापारी कल्याण बोर्डों की स्थापना की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से सुदृढ़ किया गया है। पश्चिम बंगाल में पहले ही एक राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर तथा अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रयास जारी हैं।
विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ निरंतर समन्वय के माध्यम से, बोर्ड देश भर के व्यापारियों और व्यापार निकायों से प्राप्त प्रस्तुतियों का समयबद्ध और परिणामोन्मुख समाधान सुनिश्चित कर रहा है। व्यापक लक्ष्य व्यापार को आसान बनाना, व्यापारियों को सशक्त करना और सहभागी एवं समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
बैठक में विभिन्न व्यापार संघों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-आधिकारिक सदस्य तथा भारत सरकार के नौ मंत्रालयों और विभागों के पदेन सदस्य उपस्थित थे।
नई दिल्ली – तीनों सेनाओं की रणनीतिक संगोष्ठी रण संवाद का दूसरा संस्करण 9 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) के तत्वावधान में प्रारंभ हुआ। वायु सेना प्रशिक्षण कमान द्वारा आयोजित की जा रही इस दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया। संगोष्ठी का विषय “बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता” है। एमडीओ सिद्धांत का उद्देश्य सैन्य और गैर-सैन्य संस्थाओं के विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित कर भारत की संयुक्त युद्ध क्षमता को सभी छह क्षेत्रों—स्थल, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक—में सशक्त बनाना है।
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपने मुख्य भाषण में बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) पर केंद्रित भारत के सैन्य भविष्य के लिए एक परिवर्तनकारी विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप मौलिक रूप से बदल चुका है और अब यह सिलसिलेवार नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर स्पेस, विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम और संज्ञानात्मक क्षेत्र में एक साथ संचालित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए बहु-क्षेत्रीय अभियान कोई भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की अनिवार्यता है।
आधुनिक युग को “विखंडित, अघोषित विश्व युद्ध” के रूप में वर्णित करते हुए सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि युद्धक्षेत्र अब केवल नक्शे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बहु-स्तरीय और जटिल अनुकूलनशील प्रणाली बन चुका है। उन्होंने “स्थायी संघर्ष” वाली दुनिया की वास्तविकता को रेखांकित करते हुए बताया कि एक थल सेना कमांडर को अब विभिन्न क्षेत्रों में फैल रहे युद्ध को समझना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि कार्रवाइयों के दौरान ये क्षेत्र किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं। उन्होंने कहा कि सेना एमडीओ को एक अवधारणा से आगे बढ़ाकर वास्तविक क्षमता में बदल रही है। उनके अनुसार, एमडीओ का आशय छह क्षेत्रों का समानांतर संचालन नहीं, अपितु यह निरंतर और गतिशील अंतःक्रिया है, जहां महत्व बदलता है और नेतृत्व भी परिवर्तित होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सेना “डोमेन शुद्धता” से आगे बढ़कर पूर्ण “डोमेन फ्यूजन” की दिशा में अग्रसर होने के लिए एकीकरण, सूचनाकरण और इंटेलिजेंटाइजेशन की प्रक्रिया को तेज कर रही है।
ऑपरेशनल उपलब्धियों की चर्चा करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ने एकीकृत युद्ध समूह (आईबीजी), दिव्यास्त्र ड्रोन बैटरीज और कमांड साइबर ऑपरेशन्स प्रकोष्ठों सहित अनेक क्षमताओं को संचालित किया है। उन्होंने एक ऐसी नई कमांड संस्कृति की आवश्यकता पर बल दिया, जहां नेतृत्व को “केवल तकनीक का उपयोग करने के बजाय उसे कमांड करना चाहिए”, ताकि निर्णय लेने में फायदा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यद्यपि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की एकजुटता सिद्ध की है, लेकिन अंतिम लक्ष्य एक ऐसे बेजोड़ “संपूर्ण राष्ट्र” की संरचना करना है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के बीच की सीमाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएं।
नौसेना प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने अपने संबोधन में बहु-क्षेत्रीय अभियान का व्यापक समुद्री दृश्यांकन प्रस्तुत किया, जिसमें आधुनिक नौसैनिक रणनीति को तकनीक के मेल और कौटिल्य की समझ दोनों आधार पर दिखाया गया। उन्होंने आधुनिक समुद्री क्षेत्र को समुद्र की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष तक फैले परस्पर जुड़े ग्रिड के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार समुद्री युद्धक्षेत्र अब एक सघन, पारदर्शी और गहराई से परस्पर जुड़ा हुआ नेटवर्क बन चुका है, जो गति, पैमाने और एक साथ होने वाली गतिविधियों से आकार लेता है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में दृढ़तापूर्वक अग्रसरहै और शामिल किए जाने वाले हर नए जहाज में प्रतिरूपकता और तकनीकी विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही, नौसेना “मानव रहित प्रणालियों के लिए भारतीय नौसेना का विजन 2022-30” के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के माध्यम से अपनी फ्लीट क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी तीनों सेनाओं के बीच क्रमिक आधार पर प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इसमें तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, थिंक-टैंक के विशेषज्ञ, उद्योग जगत के दिग्गज तथा मित्र देशों के विदेश सेवा अताशे सम्मिलित होते हैं और विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श सत्रों में भाग लेते हैं। यह संगोष्ठी भारतीय सशस्त्र बलों को बहु-क्षेत्रीय संघर्ष के लिए तैयार करने से लिए एक सहयोगात्मक रोडमैप के साथ 10 अप्रैल 2026 को समाप्त संपन्न होगी।
सिंधी भाषा में संविधान के विमोचन समारोह में उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं में संविधान उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की
“भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की वाहक हैं” – उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, “मातृभाषा में संविधान नागरिकों को सशक्त बनाता है”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में संविधान का सिंधी भाषा में, नवीनतम संस्करण जारी किया
उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर सिंधी भाषी समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सिंधी सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांतिक दर्शन और सूफी विचारों के अनूठे संगम को दर्शाती है, जो एकता, प्रेम और भाईचारे के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार सिंधी भाषा में विशेष रूप से देवनागरी लिपि में संविधान का प्रकाशन, भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा है, जो इसकी आकांक्षाओं को समाहित करती है, अधिकारों की रक्षा करती है और लोकतांत्रिक शासन का मार्गदर्शन करती है
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल नागरिकों और शासन के बीच के अंतर को कम करने में सहायक होती है, क्योंकि इससे लोग संविधान को अपनी मातृभाषा में समझ पाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वास मजबूत होता है।
उपराष्ट्रपति ने संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली आदि भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाते हैं।
सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा का वर्णन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभाजन के बाद के कठिन समय में यह भाषा दृढ़ता और एकता का प्रतीक रही। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा को 1967 में 21वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जिससे इसके सांस्कृतिक महत्व को मान्यता मिली और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका संरक्षण सुनिश्चित हुआ।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा के साथ-साथ सभी भाषाओं को समान महत्व और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की महत्वपूर्ण वाहक हैं।
उपराष्ट्रपति ने संविधान को क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय, विशेषकर क्षेत्रीय भाषा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी पहल नागरिकों को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करने में योगदान देगी।
उपराष्ट्रपति ने विविधता में एकता की भावना और “राष्ट्र प्रथम” के मार्गदर्शक सिद्धांत को दोहराते हुए नागरिकों से अपनी मातृभाषाओं के साथ-साथ राष्ट्र की सामूहिक भाषाई विरासत का सम्मान करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी और विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
रांची,10.04.2026 – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सीआरपीएफ शौर्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
X पर जारी पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “सीआरपीएफ वीरता दिवस पर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन। 1965 में आज ही के दिन सीआरपीएफ के वीर जवानों ने कच्छ का रण के सरदार पोस्ट पर दुश्मनों के मंसूबों को ध्वस्त करते हुए बहादुरी का स्वर्णिम अध्याय रचा। राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”
नई दिल्ली – रेल यात्रा अब और भी सुरक्षित व आरामदायक होगी। रेल मंत्रालय में हुई बैठक में रेल मंत्री जी ने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
महत्वपूर्ण निर्णय में यह तय किया कि ब्रिज एप्रोच एवं पॉइंट्स, क्रॉसिंग में प्रयोग किए जाने वाले स्लीपर अब कॉम्पोजिट होंगे।
ब्रिज अप्रोचेज़
लोहे तथा कंक्रीट के मौजूदा भारी स्लीपरों के मुकाबले ये नए स्लीपर न सिर्फ हल्के हैं बल्कि अधिक लोड लेने में सक्षम हैं। इसकी कुशनिंग बेहतर है। इन्हें बिछाना और इनकी मरम्मत आसान है।
ये स्लीपर ऐसे हैं कि जिस स्थान पर इन्हें लगाना है, वहां की विशेष परिस्थितियों के अनुसार बनाया व लगाया जा सकता है। इनके लगने से पुलों और पॉइंट्स, क्रॉसिंग से गुजरते समय रेल यात्रा में यात्रियों का अनुभव और बेहतर होगा।
कंक्रीट पुल पर टर्नआउट्स
रेल भवन, नई दिल्ली में आज अधिकारियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में रेल मंत्री ने यह बड़ा निर्णय लिया। कंक्रीट और लोहे के मुकाबले कॉम्पोजिट पदार्थों से बने ये कॉम्पोजिट स्लीपर प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भार उठा सकते हैं। ये कॉम्पोजिट स्लीपर अधिक समय तक भी चलेंगे। इनके लगने से रेलवे को मौजूदा स्लीपरों के रखरखाव में आने वाली लागत में भी कमी आएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया कि रेलवे ट्रैक की निगरानी अब एआई की मदद से होगी। इसके लिए उपयोग में लाई जा रही निरीक्षण गाड़ियों में एआई तकनीक से लैस एक विशेष डिवाइस लगाई जाएगी। ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार नाम की यह डिवाइस रेलवे ट्रैक के आधार का जायजा लेगी।
रेल पटरियों में होने वाली वेल्डिंग की गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए एक नई तकनीक—मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग—के उपयोग का निर्णय लिया गया। यह परीक्षण आपस में जोड़े जाने वाली वेल्डिंग के सूक्ष्म दोषों को पहचानने में काफी कारगर है।
आज लिए गए सभी निर्णय भारतीय रेल की लोगों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। ये निर्णय यात्रियों के प्रति रेल परिवार की सुरक्षा तथा सुविधाजनक यात्रा के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों और हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) ने 08 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित अपनी तीसरी बैठक के दौरान, पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर भारत की तैयारियों का जायजा लिया। इस बैठक में वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव; संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए।
अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने हेतु तत्परता, समन्वय और लचीलापन बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करते रहें। एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है, किसानों के लिए उर्वरक उपलब्ध करा रही है और देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुगम बना रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार नागरिकों को संघर्ष के प्रभावों से बचाने के लिए असाधारण कार्य कर रही है।
आईजीओएम को बताया गया कि भारत ने पिछले 40 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम किया है। कुल 8 एलपीजी जहाज सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य से गुजर गए, जिनमें लगभग 340टीएम एलपीजी थी और भारत की लगभग 11 दिनों की आयात जरूरत के बराबर है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता मजबूत हुई है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और पूरे देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी लगातार जारी है।
प्रवासी मजदूरों सहित कमजोर समुदायों की मदद के लिए, 7 अप्रैल को प्राथमिकता वाले वर्गों के लिए तय की गई 20% हिस्सेदारी के अलावा, 5 किग्रा वाले मुफ्त एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति दोगुनी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों (पीएसयू) के रिटेल पंप आउटलेट सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑटो एलपीजी देना जारी रखे हुए हैं। हालांकि, निजी ऑपरेटरों को अपनी खरीद से जुड़ी चुनौतियों के कारण आपूर्ति में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सरकारी आउटलेट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है।
8 अप्रैल को एक बड़ा फैसला लिया गया, जिसके तहत औद्योगिक क्षेत्र को एलपीजी की आपूर्ति और आसान बनाने के लिए, ईंधन की कुल मांग का 70% हिस्सा गैर घरेलू थोक ग्राहकों को आवंटित किया गया। इसमें फार्मा, फूड, पॉलिमर, खेती, पैकेजिंग, पेंट, इस्पात, रक्षा से जुड़े सामान जैसे अहम क्षेत्रों को आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई। इस कदम से उम्मीद है कि आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें नहीं आएंगी, जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद औद्योगिक कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।
जहां भी मुमकिन है, वहां पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) को जोर-शोर से बढ़ावा दिया जा रहा है। एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए शुरू किए गए पीएनजी कनेक्शन कैंपेन से लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिसके चलते 3.16 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए। यह मार्च 2025 के स्तर के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। इस अभियान का नतीजा यह भी रहा कि नागरिकों ने 16,700 से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब तेजी से पीएनजी को अपना रहे हैं।
आईजीओएम को संघर्ष-विराम के मद्देनजर ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्रियों को सूचित किया गया कि प्रमुख क्षेत्रीय मापदंडों पर लगातार बारीकी से नजर रखी जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे।
आईजीओएम को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा उठाए गए पर्याप्त उपायों के बारे में भी अवगत कराया गया।
खाद्य सुरक्षा की तैयारी
चावल और गेहूं का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिससे पीडीएस के लिए और किसी भी आपातकालीन जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम कमजोर वर्गों के लिए खाद्यान्न की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
बाजार में हस्तक्षेप: खुली बाजार बिक्री योजना (घरेलू) – ओएमएसएस (डी)
सरकार खाद्यान्न की कीमतों पर नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर, ओएमएसएस (डी) के जरिए बाजार में हस्तक्षेप करती है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) आपूर्ति बढ़ाने, कीमतों को स्थिर करने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए खुले बाजार में अतिरिक्त गेहूं और चावल जारी करता है। ऐसे हस्तक्षेपों के लिए एफसीआई के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। यह योजना राज्य सरकारों को उनकी अतिरिक्त जरूरतों के लिए रियायती निश्चित कीमतों पर चावल बेचने की सुविधा भी देती है।
खरीद: रबी विपणन सत्र (आरएमएस) 2026–27
एमएसपी संचालन के तहत गेहूं की खरीद शुरू हो गई है, जो मुख्य रूप से राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है। विभाग राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा कर रहा है। खरीद कार्यों के लिए पर्याप्त पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
खाद्यान्न पैकेजिंग
आरएमएस 2026–27 के दौरान पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं। विभाग, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा रसायन और पेट्रो रसायन विभाग के परामर्श से, पैकेजिंग के स्रोतों में विविधता ला रहा है और किसी भी संभावित कमी से निपटने के लिए आकस्मिक उपाय किए जा रहे हैं।
खाद्य तेल की स्थिति
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है। प्रमुख साझेदारों (इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, ब्राजील) से आयात लगातार जारी है। सरसों के उत्पादन में सुधार से घरेलू आपूर्ति मजबूत हुई है। कुल आपूर्ति स्थिर बनी हुई है; सरकार इस पर कड़ी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी।
चीनी क्षेत्र
चीनी का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। 2025-26 में चीनी उत्पादन पर्याप्त रहने की उम्मीद है। 15.80 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसमें से अब तक 3.73 एलएमटी चीनी का निर्यात किया जा चुका है। निर्यात मुख्य रूप से श्रीलंका, पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका को किया जा रहा है। खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति (महंगाई) का स्तर कम (~3%) रहा है।
मंत्रियों को सूचित किया गया कि उपभोक्ता मामले विभाग देश भर के 578 केंद्रों से प्राप्त होने वाली 40 खाद्य वस्तुओं की दैनिक कीमतों पर नज़र रख रहा है। मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ने के बाद कीमतों में किसी भी तरह की असामान्य अस्थिरता पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। अब तक, कीमतों में कोई असामान्य अस्थिरता देखने को नहीं मिली है और अधिकांश वस्तुओं की कीमतें स्थिर हैं; केवल खाद्य तेलों की कीमतों में मामूली वृद्धि देखी गई है।
सरसों के तेल के घरेलू उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है (~5% ज्यादा उत्पादन), जिससे आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम होगी। कीमतों को स्थिर रखने के लिए बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद जल्द ही शुरू होगी, जिससे मंडी की कीमतों को सहारा मिलेगा। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने खरीद की तैयारी शुरू कर दी है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्याज का निर्यात 15.40 एलएमटी रहा, जो पिछले वर्ष से ज्यादा था और इस वर्ष इसमें और सुधार होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली – कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता एवं कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे की सह-अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय द्वारा दिनांक 8 व 9 अप्रैल, 2026 को कौशल भवन, नई दिल्ली में दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में श्री सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी जी ने कहा की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में अपनी बात रख कर हिंदी और देश का गौरव बढ़ाया है, हम सभी को उनसे सीखने की आवश्यकता है। श्री रेड्डी ने यह भी उल्लेख किया कि हिंदी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा को भी महत्व दिया जाना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि मंत्रालय को राजभाषा हिंदी के विकास हेतु प्रतिबद्ध होकर कार्य करना होगा।
कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि हम हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में ही नहीं, अपितु जन-जन की भाषा, ज्ञान की भाषा और भविष्य की भाषा बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
उन्होंने कोयला मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में भी अवगत कराया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद श्री सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय भाषाओं के अंतर संबंध के बारे में विस्तार से बताया और शब्दों की उत्पत्ति तथा विकास के संदर्भ में अपनी बात रखी। साथ ही, उन्होंने भारतीय संस्कृति के महत्व एवं गौरव पर भी प्रकाश डाला।
वार्षिक प्रारूप एवं टिप्पण-लेखन प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को मंत्रीगणों के कर-कमलों से शील्ड प्रदान की गई। इस सम्मेलन में कोयला मंत्रालय के ध्येय गीत को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा पर्यावरण आधारित संगीतबद्ध नाट्य प्रस्तुति, भारतीय संस्कृति की झलक को दर्शाते हुए नृत्य प्रस्तुति, कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन के दूसरे दिन श्री बालेंदु शर्मा दाधीच द्वारा ‘हिंदी और तकनीकी दुनियां’, श्री अनिल शर्मा जोशी द्वारा ‘वैश्विक स्तर पर हिंदी की स्थिति और चुनौतियां’ तथा श्री राजेश चेतन द्वारा ‘संवाद की कला’, विषय पर वक्तव्य दिये गए।
इस सम्मेलन के समापन सत्र में कोयला मंत्रालय और अधीनस्थ कंपनियों के प्रतिभागियों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के संबंध में अपने-अपने विचार रखे गए और काव्य प्रस्तुतियाँ दी गईं।
इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, आर्थिक सलाहकार, निदेशक, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारियों और एनएलसी के अध्यक्ष-सह प्रबंध निदेशक, कोल इंडिया लिमिटेड और सभी अनुषंगी कंपनियों के निदेशक (मानव संसाधन), कोयला खान भविष्य निधि संगठन व कोयला नियंत्रक कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), 10 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्रमें अपना 25वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है।
वर्ष 2001 में स्थापित, एनएसटीएफडीसी देशभर में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए समर्पित एक सर्वोच्च संगठन के रूप में कार्य करता है। निगम आय सृजन गतिविधियों के लिए राज्य चैनलिंग एजेंसियों के माध्यम से रियायती वित्तीय सहायता प्रदान करके आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जनजातीय मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में जनजातीय मामलों के माननीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके और जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा के साथ-साथ पूर्व सीएमडी, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे। उपस्थित लोगों का स्वागत एनएसटीएफडीसी के सीएमडी श्री टी. रूमुआन पैते करेंगे ।
समारोह के अंतर्गत, एनएसटीएफडीसी भारत भर के उन सफल अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने एनएसटीएफडीसी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करके स्थायी उद्यम स्थापित किए हैं। ये लाभार्थी विभिन्न जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पारंपरिक व्यंजन, स्वास्थ्य सेवाएँ, मुर्गी पालन, डेयरी, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, खुदरा व्यवसाय, सिलाई आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम स्थापित किए हैं।
इस कार्यक्रम में आदिवासी नृत्यों और नुक्कड़ नाटक सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे , जो आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत और परंपराओं को दर्शाते हैं।
एनएसटीएफडीसी के अधिकारी इस समारोह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ कर रहे हैं और आदिवासी सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में समर्पित सेवा के 25 वर्षों के इस महत्वपूर्ण अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों, हितधारकों और प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री ने भारत सरकार और लोगों की ओर से भूटान नरेश को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत और भूटान के बीच विशिष्ट और प्रगाढ़ मैत्री तथा साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में भूटान नरेश के निरंतर मार्गदर्शन और नेतृत्व के प्रति सराहना व्यक्त की।
बातचीत में श्री मनोहर लाल ने भूटान के राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम, ग्यालसुंग के लिए बधाई दी, जो युवाओं में कौशल एवं राष्ट्र निर्माण पर केन्द्रित सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है। उन्होंने सतत एवं नियोजित विकास के लिए भूटान नरेश के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी दृष्टिकोण की भी सराहना की।
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने भूटान नरेश को बताया कि वे पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना के बांध निर्माण कार्य आरंभ होने के अवसर पर उपस्थित रहेंगे, जिससे इस परियोजना के पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त होगा। विद्युत मंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग की तेज़ गति को दर्शाती है।
श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश को आज सुबह पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना के निर्यात दर संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर होने की जानकारी दी। 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भूटान नरेश ने 11 नवंबर, 2025 को किया था और इससे 19 सितंबर, 2025 से ही आपसी सहमति से तय प्रारंभिक दर पर भारत को अधिशेष बिजली का निर्यात आरंभ हो गया था।
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने भूटान नरेश को यह भी बताया कि वे भूटान के ऊर्जा मंत्री के साथ 10 अप्रैल, 2026 को पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना बांध में कंक्रीट डालने के समारोह में शामिल होंगे। यह दोनों देशों के लोगों के लिए 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना में बांध निर्माण कार्य आरंभ होने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश को, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित, वहां के प्रधानमंत्री और ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री सहित भूटान नेतृत्व के साथ अपनी रचनात्मक बातचीत की जानकारी दी।
केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने इस बात पर बल दिया कि ऊर्जा सहयोग भारत-भूटान संबंधों का प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने इसके ठोस क्रियान्वयन से दोनों देशों की परस्पर लाभकारी साझेदारी रेखांकित की।
नई दिल्ली – सड़क परिवहन तथा राजमार्ग एवं कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता पहल केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि देश भर में जिम्मेदार सड़क उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन के अभिन्न अंग हैं।
श्री मल्होत्रा ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित उत्तराखंड एडवेंचर राइड के तीसरे संस्करण को झंडी दिखाकर सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत ने सड़क अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी और आचरण पर निर्भर करता है।
उन्होंने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड एडवेंचर राइड के सफल आयोजन और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने के लिए पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल साहसिक पर्यटन को जन जागरूकता के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण संदेश को व्यापक रूप से पहुंचाया जा सकता है।
श्री मल्होत्रा ने इस चुनौती की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई हैं, जिनमें प्रतिवर्ष लगभग 1.8 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन दुर्घटनाओं में से लगभग 45 प्रतिशत दोपहिया वाहनों से संबंधित होती हैं, जो चालकों के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से, सड़क सुरक्षा के राजदूत के रूप में कार्य करने और उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
सरकार के सक्रिय और व्यापक दृष्टिकोण को दोहराते हुए, श्री हर्ष मल्होत्रा ने मंत्रालय की 4ई रणनीति—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल —के बारे में विस्तार से बताया, जो भारत के सड़क सुरक्षा ढांचे की आधारशिला है। उन्होंने सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुधारने, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 जैसे विधायी उपायों के माध्यम से प्रवर्तन को सुदृढ़ करने और देशव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को बढ़ाने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता पहुंचाने के लिए पीएम राहत योजना और राह-वीर योजना जैसी कई नागरिक-केंद्रित पहलें शुरू की गई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मृत्यु दर को कम करने और दुर्घटना के बाद देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण समाज का निर्माण करना आवश्यक है।
युवाओं की सहभागिता पर दिए जा रहे बल की सराहना करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि संवादात्मक सत्रों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में सड़क अनुशासन की दीर्घकालिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कम उम्र से ही जिम्मेदार ड्राइविंग की आदतें विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और हेलमेट के बिना वाहन चलाना, तेज गति से वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना और कम उम्र में वाहन चलाना जैसे जोखिम भरे व्यवहारों से बचने का आग्रह किया।
श्री मल्होत्रा ने सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए टिप्पणी की:
“हेलमेट पहनना कोई विकल्प नहीं है, यह सुरक्षा का साधन है।”
“गति शक्ति नहीं, जोखिम है।”
“जीवन महत्वपूर्ण है—सुरक्षा से बढ़कर कोई और जरूरी पुकार नहीं है।”
प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री मल्होत्रा ने सड़क सुरक्षा परिणामों में सुधार लाने में एआई-आधारित यातायात निगरानी प्रणालियों, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस), स्वचालित प्रवर्तन तंत्र और फास्टैग-सक्षम निर्बाध गतिशीलता के उपयोग का उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्थक और स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकीय प्रगति के साथ-साथ जिम्मेदार मानवीय व्यवहार भी आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, सरकारी मंत्रालयों, कंपनियों और मोटरसाइकिल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 सवारों ने भाग लिया। श्री मल्होत्रा ने उनके समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की बहु-हितधारक भागीदारी सुरक्षित सड़कों के निर्माण की दिशा में एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास को दर्शाती है।
अपने संबोधन के समापन करते हुए श्री मल्होत्रा ने सभी नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, जिम्मेदारी से वाहन चलाने और अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सरकार, संस्थानों और नागरिकों के निरंतर एवं सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण पर समाचार पत्र में लिखे विचार आधारित अपने लेख की कुछ झलकियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करना एक विधायी प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:
“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण पर एक संपादकीय विचार आधारित लेख लिखा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।”
यह थ्रेड लेख के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालता है।
“समाज की प्रगति तभी होती है जब महिलाओं की प्रगति होती है।”
“आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी का आधार मज़बूत करना है।”
“जब महिलाएं प्रशासन और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं, तो उनके अनुभव और अंतर्दृष्टि से चर्चा समृद्ध होती है और शासन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।”
“अब ज़रूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और साथ ही विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं। ”
“सितंबर 2023 में, संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।”
“महिलाओं के प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने में होने वाली हर देरी, वास्तव में, हमारे लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को मजबूत करने में होने वाली देरी है।”
“महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पारित करने में अधिकतम व्यापक सहमति झलकनी चाहिए और यह व्यापक राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित होना चाहिए।”
आइए हम सब मिलकर आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाएं तथा राष्ट्रीय प्रगति के लिए अपनी नारी शक्ति को सशक्त बनाएं।
झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग, राँची द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026 (रविवार) को आयोजित होने वाली झारखण्ड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के सुचारू संचालन एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु ब्रीफिंग
उपायुक्त सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी द्वारा बैठक में दिए गए आयोग के दिशा निर्देश
परीक्षा में नकल, अनुचित साधनों का उपयोग या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वाले दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश
परीक्षा दिनांक 12 अप्रैल 2026 को राँची के विभिन्न केंद्रों पर तीन शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। सभी अभ्यर्थियों से अपील है कि वे एडमिट कार्ड, परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें
परीक्षा को निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है
राँची,09.04.2026 – झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग, राँची द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026 (रविवार) को आयोजित होने वाली झारखण्ड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के सुचारू संचालन एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु उपायुक्त सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज आर्यभट्ट सभागार में एक महत्वपूर्ण ब्रीफिंग बैठक आयोजित की।
ब्रीफिंग में अपर जिला दंडाधिकारी विधि- व्यवस्था राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक नगर राँची, श्री पारस राणा, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार एवं जिला योजना पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला कोषागार पदाधिकारी राँची, श्रीमती सारिका भगत एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों, पेट्रोलिंग मजिस्ट्रेटों, उड़न दस्ता टीमों, केंद्र अधीक्षकों तथा परीक्षा कार्य से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति रही। बैठक के दौरान श्री भजन्त्री ने परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी द्वारा बैठक में दिए गए प्रमुख दिशा निर्देश :
परीक्षा केंद्रों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाए।
सभी परीक्षा केंद्रों पर उड़न दस्ता एवं पेट्रोलिंग मजिस्ट्रेट की सक्रिय निगरानी रखी जाए।
नकल, अनुचित साधनों का उपयोग या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत रोका जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
परीक्षा केंद्रों के आसपास 500 मीटर की परिधि में निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाए, जहां मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहे।
उम्मीदवारों तथा स्टाफ की सुविधा के लिए केंद्रों पर पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
सभी केंद्र अधीक्षक अपने-अपने केंद्रों पर समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें तथा कोई भी अनियमितता तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को सूचित करें।
विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया गया।
परीक्षा को निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ संपन्न कराना सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि झारखण्ड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 एक महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया है। इसमें हजारों युवाओं की मेहनत और भविष्य जुड़ा हुआ है। इसलिए परीक्षा को निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ संपन्न कराना सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अधिकारियों से पूर्ण सतर्कता, समर्पण और निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की।
बैठक में जिला पुलिस तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए।
परीक्षा दिनांक 12 अप्रैल 2026 को राँची के विभिन्न केंद्रों पर तीन शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। सभी अभ्यर्थियों से अपील है कि वे एडमिट कार्ड, परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें।
उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन हेतु फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया
दो बैचों में तीन-तीन दिवसीय प्रशिक्षण, CMMS पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण
कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया
जनगणना 2027 भारत सरकार की महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना है, जो देश की विकास योजनाओं के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराएगी:- उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
राँची,09.04.2026 – उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन हेतु फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, अपर समाहर्ता राँची, श्री रामनारायण सिंह, DSO, श्री शेषनाथ बैठा एवं सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा राँची, श्री रविशंकर मिश्रा, सम्बंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं जनगणना कार्य निदेशालय के जिला समन्वयक पदाधिकारी श्री संजीव कुमार, जिला के मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित थे।
राँची जिले में कुल 70 फील्ड ट्रेनर्स हैं, जिन्हें 35-35 की संख्या में दो ग्रुप (बैच) में विभाजित किया गया है। प्रशिक्षण समाहरणालय बी ब्लॉक, कमरा संख्या 505 में जिला के मास्टर ट्रेनर्स तथा जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड, राँची के द्वारा CMMS Portal एवं Mobile App के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बैच-01 (प्रथम ग्रुप) – 35 फील्ड ट्रेनर्स
प्रशिक्षण तिथियाँ: 09, 10 एवं 11 अप्रैल 2026
संबद्ध प्रखंड:
नगड़ी
मांडर
राहे
सोनाहातु
कांके (कॉकें)
बुण्डू
बेड़ों (बेरो)
तमाड़
बुढमू
लांपुग (लपुंग)
विशेष: प्रथम दिन (09 अप्रैल 2026) को संबंधित चार्ज पदाधिकारी भी प्रशिक्षण में भाग लेंगे।
बैच-02 (द्वितीय ग्रुप) – 35 फील्ड ट्रेनर्स
प्रशिक्षण तिथियाँ: 13, 15 एवं 16 अप्रैल 2026
संबद्ध क्षेत्र:
नगर पंचायत बुण्डू
प्रखंड चान्हों (चान्हो)
सिल्ली
रातु
खलारी
ओरमांझी (ओरमांझी )
नामकुम
ईटकी (इटकी) अनगड़ा
विशेष: प्रथम दिन (13 अप्रैल 2026) को संबंधित चार्ज पदाधिकारी प्रशिक्षण में शामिल होंगे।
यह प्रशिक्षण फील्ड ट्रेनर्स को मकान सूचीकरण, मकानों की गणना, डिजिटल डेटा संग्रहण, CMMS पोर्टल एवं हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन मोबाइल ऐप के उपयोग आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स आगे प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
जनगणना 2027 भारत सरकार की महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना है, जो देश की विकास योजनाओं के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराएगी.
उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची ने सभी फील्ड ट्रेनर्स से अपील की है कि वे प्रशिक्षण के दौरान पूर्ण रूप से सक्रिय रहें तथा बाद में अपने-अपने क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण का आयोजन सुनिश्चित करें।
जनगणना 2027 की कार्य से विकास योजनाओं एवं नीति निर्धारण के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध होंगे।
रांची,09.04.2026 – रांची रेल मंडल में कमांडेंट श्री पवन कुमार के निर्देशन में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा “ऑपरेशन NARCOS” के अंतर्गत मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में दिनांक 08.04.2026 को RPF पोस्ट हटिया के अधिकारी एवं स्टाफ तथा CIB रांची की टीम द्वारा हटिया रेलवे स्टेशन पर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम हेतु चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। यह अभियान PC/RPF/हटिया के पर्यवेक्षण में प्रारंभ किया गया।
चेकिंग के दौरान प्लेटफॉर्म संख्या 02, फुट ओवर ब्रिज के नीचे एक व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में ट्रॉली बैग के साथ बैठा हुआ पाया गया। संदेह होने पर पूछताछ करने पर उसने अपना नाम विशाल पुरकायत, उम्र लगभग 25 वर्ष, पिता स्व. निर्मल पुरकायत, निवासी महराटोली, रेलवे क्वार्टर के पीछे, थाना जगन्नाथपुर, जिला रांची बताया। पूछताछ के दौरान उक्त व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसके ट्रॉली बैग में प्लास्टिक में लिपटा हुआ गांजा रखा हुआ है।
सूचना पर ASC/RPF/रांची मौके पर पहुंचे तथा उनके निर्देशानुसार विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान एक नीले रंग के ट्रॉली बैग से 01 पैकेट तथा काले रंग के ट्रॉली बैग से 02 पैकेट गांजा बरामद किया गया। कुल 03 पैकेटों की DD किट से जांच की गई, जिसमें मादक पदार्थ गांजा पाया गया। तत्पश्चात सभी पैकेटों का वजन किया गया, जो कुल 16.900 किलोग्राम पाया गया।
बरामद गांजा की अनुमानित कीमत लगभग ₹8,45,000/- आंकी गई। पूछताछ में आरोपी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहा। आरोपी ने यह भी बताया कि वह 04.04.2026 को धुर्वा निवासी समेथी नामक व्यक्ति के निर्देश पर बस से रांची से अंगुल गया था, जहां दो दिन रुकने के बाद 07.04.2026 को एक अज्ञात व्यक्ति ने उसे दो ट्रॉली बैग सौंपे।
इसके बाद वह ट्रेन संख्या 18403 एक्सप्रेस से सामान्य श्रेणी में यात्रा कर हटिया पहुंचा, जहां RPF द्वारा पकड़ा गया।सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूर्ण करने के उपरांत आरोपी को जब्त गांजा के साथ GRPS/हटिया को सुपुर्द कर दिया गया। इस संबंध में GRPS/हटिया द्वारा कांड दिनांक 08.04.2026, धारा 20(b)(ii)(B)/29 NDPS Act 1985 के अंतर्गत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई में शामिल अधिकारी एवं स्टाफ: LSI रीता कुमारी, कांस्टेबल अमरेश कुमारRPF टीम रांची: ASI अनिल कुमार, स्टाफ आर. के. सिंह.CIB टीम रांची: स्टाफ अरविंद कुमार यादव.
नई दिल्ली – भारतीय सेना का एक दस्ता भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘साइक्लोन-IV’ के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए मिस्र रवाना हो गया है। यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 9 से 17 अप्रैल, 2026 तक मिस्र के अंशास क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
यह अभ्यास भारत और मिस्र के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की निरंतरता का प्रतीक है, जिसे भारत में आयोजित पिछले सफल संस्करण के बाद आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय दल में विशेष बलों की इकाईयों के 25 चयनित जवान शामिल हैं और वे सभी अपने मिस्र के समकक्षों के साथ वास्तविक युद्धक माहौल में संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विशेष अभियानों में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के माध्यम से संयुक्त मिशन नियोजन क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर बनाना है। इसके अंतर्गत भाग लेने वाले सैनिक रेगिस्तानी व अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में विशेष अभियान से जुड़ी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों की श्रृंखला में भाग लेंगे।
यह संयुक्त अभ्यास पेशेवर विशेषज्ञता के आपसी आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा और दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, यह एक-दूसरे की सैन्य परंपराओं, कार्य संस्कृति और कार्य कुशलता के दृष्टिकोण को समझने का महत्वपूर्ण मंच भी बनेगा।
अभ्यास साइक्लोन जैसे द्विपक्षीय सैन्य कार्यक्रम भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ये अभ्यास न केवल आपसी विश्वास को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं।
नई दिल्ली – नवी मुंबई का टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र चक्रीय प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के जरिए वस्त्र अपशिष्ट को अवसरों में बदल रहा है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत वस्त्र अपशिष्ट को अवसरों में बदलने की यह पहल लैंडफिल कचरे को कम करती है, आजीविका का सृजन करती है और शहरी भारत के लिए एक विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करती है।
भारत में प्रतिवर्ष उपयोग के बाद बेकार हो चुके लगभग 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो घरों, संस्थानों और उद्योगों में उपयोग होने वाले वस्त्रों की व्यापकता और विविधता को दर्शाता है। साड़ियों और वर्दी से लेकर डेनिम और घरेलू लिनेन तक, वस्त्र शहरी अपशिष्ट प्रवाह का एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर उपेक्षित तत्व हैं। वस्त्रों की पुनर्प्राप्ति, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए शहर सुनियोजित प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता को तेजी से पहचान रहे हैं। चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण और संसाधन दक्षता पर इन दिनों ध्यान बढ़ता जा रहा है और नगरपालिकाएं ऐसे नवीन समाधानों की खोज शुरू कर रही हैं जो वस्त्रों को लैंडफिल में जाने से रोकते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत, नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है। व्यवस्थित कार्यक्रमों के जरिए वस्त्र अपशिष्ट की समस्या से निपटने के अवसर को पहचानते हुए, एनएमएमसी ने नवी मुंबई के बेलापुर में देश का पहला नगर निगम टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र (टीआरएफ) स्थापित किया। कपड़ों का विकेंद्रीकृत संग्रहण, वैज्ञानिक छंटाई, बेकार वस्त्रों का पता लगाने की क्षमता और महिलाओं के नेतृत्व में आजीविका सृजन को एकसाथ जोड़कर टीआरएफ वस्त्र अपशिष्ट को एक उपेक्षित धारा से शहरी चक्रीय अर्थव्यवस्था के एक मूल्यवान घटक के रूप में पुनर्स्थापित करता है।
नवी मुंबई में स्थित टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र (टीआरएफ) की परिकल्पना एक स्वतंत्र संग्रह केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक चक्रीय परितंत्र के रूप में की गई है जो संग्रह, छंटाई, प्रौद्योगिकी और आजीविका सृजन को एकीकृत करता है।
इस मॉडल की शुरुआत विकेंद्रीकृत संग्रहण प्रणाली से होती है, जिसके तहत सभी 8 नगर निगम वार्डों में स्थित हाउसिंग सोसाइटियों में ब्रांडेड कपड़े के कूड़ेदान रणनीतिक रूप से लगाए गए हैं। अब तक 140 कूड़ेदान स्थापित किए जा चुके हैं और अब आगे 250 कूड़ेदान लगाने का लक्ष्य है, जिससे जमीनी स्तर पर सुलभता और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
नवी मुंबई में बेलापुर के एक पुराने शहरी स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित अंतरिम टीआरएफ (अनुकरण और पता लगाने की क्षमता) में वैज्ञानिक छंटाई और पता लगाने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इकट्ठे किए गए कपड़ों का वजन किया जाता है, उन पर टैग लगाए जाते हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से पुन: प्रयोज्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य, डाउनसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में छांटकर रखा जाता है। कोशा हैंडहेल्ड स्कैनर के एकीकरण से कपास, पॉलीकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम सहित रेशों की तत्क्षण पहचान संभव हो पाती है, जिससे इनका वैज्ञानिक तरीके से छांटने के काम को मजबूती मिलती है और सामग्री की पुनर्प्राप्ति का प्रयास किया जाता है।
दाता से लेकर अंतिम उत्पाद तक वस्तु की यात्रा का मानचित्रण करने के लिए एक समर्पित एमआईएस प्लेटफॉर्म के विकास के साथ डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा मिलता है। पहचान के बाद, आगे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वस्त्रों को कपड़े के प्रकार, रंग और स्थिति के आधार पर अलग किया जाता है। छांटे गए पदार्थों को पुनः उपयोग में लाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह से कीटाणुरहित किया जाता है।
उपयुक्त कपड़ों को स्वयं सहायता समूहों की कुशल महिलाएं हस्तनिर्मित बैग, चटाई, सहायक उपकरण, परिधान और घरेलू सजावट की वस्तुओं में बदल देती हैं। इन पुनर्निर्मित उत्पादों को बाद में प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और बेचा जाता है, जिससे उन सामग्रियों को नया जीवन और उद्देश्य मिलता है जिन्हें कभी कचरा माने लिया गया था।
300 से अधिक महिलाओं ने फाइबर की पहचान, पृथक्करण प्रोटोकॉल, मरम्मत तकनीक और अपसाइक्लिंग कौशल की जानकारी देने के लिए बनाए गए 8 दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) मॉड्यूल में भाग लिया है। 150 से अधिक महिलाएं अब प्रमुखता से कपड़ा छंटाई, सिलाई और उत्पाद रूपांतरण के माध्यम से प्रति माह 9,000 रुपए से 15,000 रुपए के बीच कमा रही हैं।
इस पहल से एक क्रांतिकारी बदलाव आया है – इसने गृहिणियों को कुशल चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रणेता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। यह सुविधा एक समर्पित अपसाइक्लिंग केंद्र के रूप में कार्य करती है जहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य पुनः प्राप्त वस्त्रों से बैग, कपड़े, पाउच और घरेलू सजावट के उत्पाद बनाते हैं। वस्त्र पुनर्चक्रण एक सुनियोजित आजीविका का साधन बनकर उभरा है – यह हरित रोजगार सृजित करता है, स्थानीय उद्यम को मजबूत करता है और शहरी स्थिरता के ढांचे के भीतर श्रम की गरिमा को सुदृढ़ करता है।
टीआरएफ मॉडल ने उपभोक्ता के इस्तेमाल किए गए 30 मीट्रिक टन कपड़ा अपशिष्ट को इकट्ठा करने में मदद की है, जिसमें से 25.5 मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से छांटा गया है। प्रतिदिन औसतन लगभग 500 वस्तुओं की दर से 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया गया है। इस पहल के जरिए 1,14,575 से अधिक परिवारों तक पहुंचा गया है, 75 से अधिक आईईसी कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं और 350 से अधिक समाज प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जो मजबूत नागरिक भागीदारी और संस्थागत जुड़ाव को दर्शाता है। 400 से अधिक अपसाइकल्ड उत्पाद नमूने विकसित किए गए हैं, जिनमें अस्वीकृत कपड़ा अपशिष्ट से निर्मित कागज का एक सफल प्रायोगिक बैच भी शामिल है – जो संसाधन पुनर्प्राप्ति में नवाचार को दर्शाता है।
जागरूकता बढ़ाने और बाज़ार के अवसरों का विस्तार करने के लिए, टीआरएफ ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से भाग लिया है। इन मंचों ने उपभोक्ता के उपयोग किए गए वस्त्रों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही महिला कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर भी प्रदान किए हैं।
नवी मुंबई में टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र के कार्यान्वयन में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं, जिनमें कूड़ेदान लगाने का विरोध, वस्त्र पृथक्करण के बारे में सीमित जागरूकता और मिश्रित रेशों की छंटाई में जटिलताएं शामिल थीं। इन चुनौतियों को चरणबद्ध कार्यान्वयन, निरंतर नागरिक सहभागिता, अंतर-एजेंसी समन्वय और फाइबर-स्कैनिंग तकनीक को अपनाने के माध्यम से दूर किया गया।
बेलापुर में अंतरिम टीआरएफ की सफलता के आधार पर, अगले चरण में निसर्ग उद्यान के पास कोपरखैरान में एक स्थायी, उच्च क्षमता वाली कपड़ा पुनर्प्राप्ति सुविधा की परिकल्पना की गई है।
नवी मुंबई स्थित टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र यह दर्शाता है कि पारंपरिक रूप से बेकार समझे जाने वाले अपशिष्ट पदार्थों को आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्य के चालक के रूप में पुनः स्थापित किया जा सकता है। यह स्वच्छ भारत 2.0, स्मार्ट सिटी मिशन और सतत विकास लक्ष्य 12 – जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन – के सिद्धांतों के अनुरूप है।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का अग्रणी निर्देशित मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी जारी तैनाती के तहत 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा पहुंचा। केन्या में इस तैनाती का उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना और भारत तथा केन्या के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना है।
इस बंदरगाह पर आईएनएस त्रिकंद युद्धपोत के आगमन के साथ ही पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफवाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भी केन्या यात्रा पर पहुंचे।
इस यात्रा के दौरान व्यावसायिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा और आवश्यक सामग्री केन्या रक्षा बलों को सौंप दी जाएगी। इसके अलावा युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर केन्या के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
मोम्बासा से प्रस्थान करने से पहले आईएनएस त्रिकंद केन्या नौसेना की इकाइयों के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लेगा। इस अभ्यास में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाया जाएगा और द्विपक्षीय समुद्री अंतर संचालनीयता को बढ़ावा मिलेगा।
आईएनएस त्रिकंद का मोम्बासा बंदरगाह पर आना भारत के महासागर (हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है।
नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026-27 पर उत्तरी क्षेत्र के हितधारकों के साथ परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में राज्य सरकारों, उद्योग निकायों, उद्यमियों, शिक्षाविदों, वस्त्र अनुसंधान संघों, निर्यात संवर्धन परिषदों और पुरस्कार विजेता बुनकरों और कारीगरों सहित 200 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया।
यह परामर्श मंत्रालय द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित प्रमुख योजनाओं और पहलों पर विचार-विमर्श करने के प्रयासों का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य कार्यान्वयन पद्धतियों पर संरचित संवाद को सुगम बनाना, परिचालन संबंधी चुनौतियों की पहचान करना और प्रस्तावित हस्तक्षेपों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक सहयोगात्मक रोडमैप तैयार करना है।
परामर्श बैठक को अलग-अलग सत्रों में बांटा गया था ताकि केंद्रित और योजना-विशिष्ट विचार-विमर्श संभव हो सके। सत्रों में निम्नलिखित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया :
वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम, जिसमें वस्त्र विस्तार और रोजगार (टीईईएम) योजना, टेक्स- इको पहल और मेगा टेक्सटाइल पार्क शामिल हैं।
राष्ट्रीय फाइबर मिशन
समर्थ 2.0
राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (एमजीजीएसआई)
इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय के विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार श्री असित गोपाल ने प्रस्तावित योजनाओं को जमीनी हकीकतों और कार्यान्वयन चुनौतियों के अनुरूप बनाने के लिए राज्यों और हितधारकों के साथ निरंतर जुड़ाव के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बजट पहलों के इच्छित परिणामों को प्राप्त करने के लिए सहयोगात्मक योजना और संस्थानों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
यह परामर्श सत्र माननीय प्रधानमंत्री के बजट पश्चात वेबिनार में व्यक्त किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप है, जहां उन्होंने केंद्रीय बजट को भारत की “विकसित भारत” यात्रा को गति देने के लिए एक मजबूत ढांचा बताया। उन्होंने “अधिक निर्माण करो, अधिक उत्पादन करो, अधिक संपर्क स्थापित करो और अधिक निर्यात करो” की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति का विस्तार करते हुए घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हथकरघा), ने हितधारकों से प्रस्तावित योजनाओं के विभिन्न घटकों से संबंधित जमीनी स्तर की चुनौतियों और व्यावहारिक समाधानों को सक्रिय रूप से साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नीतिगत उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से जोड़ने और हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती और स्थिरता को बढ़ाने के लिए इस तरह के परामर्श अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
श्रीमती अमृत राज, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), ने माननीय प्रधानमंत्री के “गांव को वैश्विक स्तर पर ले जाने” के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसमें मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने भारतीय वस्त्रों और हस्तशिल्पों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए उत्पादन प्रक्रियाओं, उत्पाद डिजाइन और परिष्करण, साथ ही आपूर्ति श्रृंखलाओं और लॉजिस्टिक्स में गुणवत्ता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन भाषण में, श्रीमती नीलम शमी राव, सचिव, वस्त्र मंत्रालय, ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का वस्त्र उद्योग 2030 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने के लिए तैयार है, जिसमें निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने, योजनाओं में समन्वय मजबूत करने और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा सतत विकास को समर्थन देने वाले एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रस्तावित योजनाओं का उद्देश्य विनिर्माण, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। उन्होंने मूल्य श्रृंखलाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने, वैश्विक बाजारों में “इंडिया हैंडमेड” की स्थिति मजबूत करने और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने आगे कहा कि गुणवत्ता, स्थिरता और नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करके भारतीय वस्त्रों की विश्वसनीयता बढ़ाना सर्वोपरि है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परामर्श के दौरान प्राप्त बहुमूल्य सुझावों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाएगा और आगामी योजनाओं के डिजाइन और कार्यान्वयन में उन्हें उचित रूप से शामिल किया जाएगा।
परामर्श का समापन सभी हितधारकों के बीच वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करने, आजीविका में सुधार लाने, रोजगार सृजित करने और “इंडिया हैंडमेड” को वस्त्र और पारंपरिक शिल्पों के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहयोगात्मक रूप से काम करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
भारत के चुनाव आयोग ने आज नई दिल्ली में असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आगामी आम चुनावों के लिए अंतरराष्ट्रीय चुनाव आगंतुक कार्यक्रम (आईईवीपी), 2026 का शुभारंभ किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर आज भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (आईआईडीईएम) में कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
सीईसी श्री ज्ञानेश कुमार ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि चुनाव आयोग भारत में चुनावों को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में मनाता है और इसे सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से राज्यों के दौरे का आनंद लेने, सीखने, देखने और भारत की विविधता का अनुभव करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के पहले चरण में, प्रतिनिधि 8-9 अप्रैल 2026 को असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा करेंगे। दूसरे चरण में, प्रतिनिधि 20 अप्रैल 2026 से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु राज्यों का दौरा करेंगे।
कार्यक्रम के पहले चरण में दिल्ली स्थित पांच विदेशी दूतावासों के प्रतिनिधियों सहित 23 देशों के 43 प्रतिनिधि भाग लेंगे।
प्रतिनिधियों को आज IIIDEM में ईवीएम का प्रदर्शन दिखाया गया और उन्होंने मतदान प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का उपयोग करके मॉक पोल में भाग लिया।
प्रतिनिधियों ने भारत में चुनाव प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेप और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों में गहरी रुचि दिखाई। प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्र में भाग लिया और अपने संदेह/प्रश्नों को स्पष्ट किया।
प्रतिनिधिमंडल 8 अप्रैल 2026 को असम, केरल और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की यात्रा करेंगे। वे वितरण केंद्रों और जिला नियंत्रण कक्षों तथा मीडिया निगरानी केंद्रों सहित अन्य सुविधाओं का दौरा करेंगे। वे 9 अप्रैल 2026 की सुबह वास्तविक मतदान भी देखेंगे।
IEVP, चुनाव प्रबंधन आयोग (ECI) का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMB) और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और जुड़ाव स्थापित करना है।
IEVP भारत के चुनावी ढांचे, संस्थागत तंत्र और परिचालन संरचना का व्यापक अवलोकन प्रदान करता है, साथ ही विदेशी EMB प्रतिनिधियों को चुनाव प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों से परिचित कराता है।
IEVP अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भारत की चुनावी प्रणाली की खूबियों को प्रदर्शित करता है और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव संचालन के लिए अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करता है।