राँची, आज पुलिस मुख्यालय, राँची स्थित सभागार में महानिदेशक सह पुलिस महानिरीक्षक, झारखण्ड की अध्यक्षता में वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से “अपराध और नक्सल परिदृश्य“ पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। इस बैठक में पुलिस महानिदेशक, झारखण्ड के द्वारा सभी क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षकों एवं जिलों के पुलिस अधीक्षकों से उनके क्षेत्र एवं जिलों में आपराधिक, वतर्मान नक्सल परिदृश्य तथा विधि-व्यवस्था में आ रही कठिनाईयों एवं उसके निराकरण हेतु बनायी गई ठोस नीति पर कार्य करने तथा नक्सल अभियानों की जानकारी सहित पूर्व से दिये गये एजेंडा बिन्दुओं पर विस्तृत चचार्यें कीं। उन्होंने नक्सलियों के विरूद्ध चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों में आ रही कठिनाईयों के संबंध में जानकारी लेते हुये उसके तत्काल निवारण हेतु आवष्यक दिशा-निर्देश दिये।
1. वामपंथी उग्रवाद और उनके विरूद्ध किये जाने वाली कारर्वाई हेतु विशेष शाखा एवं अभियान शाखा द्वारा विस्तृत प्रस्तुति दी गई, तथा राज्य में घट रही नक्सली घटनाओं को रोकने के लिये बनाये गये रोडमैप के क्रियान्वयन हेतु विशेष दिशा-निर्देश दिये गये।
2. पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग एवं ए0टी0एस0 के द्वारा संगठित अपराध को रोकने, उनके विरूद्ध कड़ी कारर्वाई करने का निर्देश दिया गया तथा की गई कारर्वाई की जानकारी भी ली गई तथा भविष्य के लिए रोडमैप की जानकारी दी गई।
3. पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, द्वारा अपराध परिदृश्य पर एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
4. पुलिस अधीक्षक,अपराध अनुसंधान विभाग, द्वारा प्रस्तुतिकरण के द्वारा अनुसंधानित काण्डों की जाँच, लंबित वारँट/कुर्की के निष्पादन में हो रहे विलंब तथा कठिनाईयों पर राज्य के सभी जिलों को दिशा-निर्देश दिये गये।
5. राज्य में विधि-व्यवस्था से संबंधित मुद्दे और उनकेे निराकरण हेतु की जाने वाली कारर्वाई के संदभर् में विस्तृत चचार्यें की गई।
6. पुलिस मुख्यालय से आवश्यक सहायता के संबंध में प्रस्तुत किए गए ठोस प्रस्तावों की समीक्षा भी की गई।
इस बैठक में क्षेत्रवार सभी क्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षकों यथा-पलामू क्षेत्र, राँची क्षेत्र, कोल्हान क्षेत्र, हजारीबाग क्षेत्र , बोकारो क्षेत्र तथा दुमका क्षेत्र के स्तर से झारखण्ड राज्य में नक्सल एवं आपराधिक गतिविधियों तथा उन पर अंकुश लगाने के लिए की जा रही कारर्वाही तथा नक्सल काण्डों की मॉनिटरिंग की प्रस्तुतियों सहित अन्य जानकारी दी गयीं । इसके अतिरिक्त बैठक में विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों एवं सभी क्षेत्रीय पुलिस उप-महा निरीक्षकों को विशेष दिशा- निर्देश दिये गये।
इस बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक, अप0अनु0वि0, झारखण्ड, अपर पुलिस महानिदेशक, मुख्यालय, झारखण्ड, अपर पुलिस महानिदेशक अभियान, झारखण्ड, ,पुलिस महानिरीक्षक, मानवाधिकार, झारखण्ड, पुलिस महानिरीक्षक, अभियान, झारखण्ड, पुलिस महानिरीक्षक, प्रोविजन, झारखण्ड, पुलिस उप-महानिरीक्षक, राँची, पुलिस उप-महानिरीक्षक, विशेष शाखा, झारखण्ड, पुलिस अधीक्षक, अप0अनु0विभाग, पुलिस अधीक्षक, विशेष शाखा, पुलिस अधीक्षक, ए0टी0एस0 तथा वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के द्वारा सभी क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक, तथा सभी जिला के पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
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कनाडा की पहली हिंदू मंत्री अनीता आनंद को मिला रक्षा मंत्रालय
टोरंटो, कनाडा की पहली हिंदू कैबिनेट मंत्री अनीता आनंद ने देश की दूसरी महिला रक्षा मंत्री बनकर इतिहास रच दिया।
वह भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक हरजीत सज्जन की जगह लेंगी। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने नए मंत्रिमंडल की घोषणा की है, जिसमें पता चला है कि अनीता आनंद देश की रक्षा मंत्री होंगी।
सज्जन को अंतर्राष्ट्रीय मामलों का मंत्री बनाया गया है।
एक अन्य भारतीय-कनाडाई महिला कमल खेड़ा, जो ब्रैम्पटन वेस्ट से 32 वर्षीय सांसद हैं, ने भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए मंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे ट्रूडो कैबिनेट में भारतीय-कनाडाई महिला मंत्रियों की संख्या तीन हो गई है।
कनाडा की विविधता, समावेशन और युवा मंत्रालय संभालने वाली मौजूदा भारतीय-कनाडाई महिला मंत्री बर्दिश चागर को हटा दिया गया है।
नए मंत्रिमंडल में छह महिला मंत्रियों में दो भारतीय-कनाडाई महिलाएं शामिल हैं।
ट्रूडो ने कनाडाई सेना में यौन दुराचार के आरोपों को दूर करने में विफल रहने के लिए हरजीत सज्जन को पदावनत कर दिया और अनीता आनंद और कमल खेड़ा को महामारी के दौरान उनके काम के लिए पुरस्कृत किया।
महामारी के चरम पर स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के रूप में काम पर वापस जाने के लिए आनंद की ओर से खरीद मंत्री और खेड़ा – एक पंजीकृत नर्स के रूप में उनके काम के लिए प्रशंसा की गई है। 2015 से तीन बार के सांसद, खेरा ने स्वास्थ्य और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्रियों के संसदीय सचिव के रूप में भी काम किया है।
अनीता का जन्म 1967 में नोवा स्कोटिया में भारतीय मूल के माता-पिता के घर हुआ था, जो दोनों चिकित्सा पेशेवर थे। उनकी मां सरोज डी. राम पंजाब से और पिता एस. वी. आनंद तमिलनाडु से संबंध रखते हैं।
अनीता, जो टोरंटो विश्वविद्यालय में कानून की प्रोफेसर के रूप में छुट्टी पर हैं, को टोरंटो के पास ओकविले से सांसद के रूप में चुने जाने के बाद 2019 में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी।
अनीता ने व्यापक शोध के साथ एयर इंडिया जांच आयोग की सहायता की। आयोग ने 23 जून 1985 को एयर इंडिया कनिष्क उड़ान 182 की बमबारी की जांच की थी, जिसमें सभी 329 लोग मारे गए थे।
मॉन्ट्रियल-दिल्ली की उड़ान में जो बम फटा था, उसे एक साल पहले 1984 में स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई का बदला लेने के लिए वैंकूवर स्थित खालिस्तानियों द्वारा लगाया गया था।
अनीता आनंद से पहले, कनाडा की एकमात्र महिला रक्षा मंत्री पूर्व प्रधानमंत्री किम कैंपबेल थीं, जिन्होंने 1993 में 4 जनवरी से 25 जून तक छह महीने के लिए पोर्टफोलियो संभाला था।(एजेंसी)
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने नवनिर्मित वेजिटेबल मार्केट एवं सरदार पटेल पार्क का लोकार्पण किया
रांची, वेजिटेबल मार्केट सभी सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नागा बाबा सब्जी बाजार की पूर्व की स्थिति से हम सभी अवगत हैं।
सरकार का प्रयास रहता है कि हर चीज व्यवस्थित रूप में राज्य की जनता को प्राप्त हो। अब यहां स्वच्छ वातावरण में सब्जियों की खरीद बिक्री होगी। हमें इसे अपना बाजार समझ कर रख रखाव में सहयोग करना है। ये बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने नागा बाबा सब्जी बाजार स्थित नवनिर्मित वेजिटेबल मार्केट के लोकार्पण समारोह में कही। मुख्यमंत्री ने कहा यहां दुकान लगाने वालों के लिए यह मार्केट उनके परिवार के जीवन यापन का साधन बनने जा रहा है। इसे स्वच्छ और सुरक्षित रखना बड़ी जिम्मेवारी है। यह जिम्मेदारी हम सब को उठानी पड़ेगी।
हमें पर्यावरण को चुनौती नहीं देनी चाहिए
मुख्यमंत्री ने हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित सरदार पटेल पार्क के उद्घाटन समारोह में कहा कि शहरीकरण बढ़ रहा है। वृक्षों को काटकर गगनचुंबी इमारतें बन रहीं है। जबकि हमें पर्यावरण को कभी चुनौती नहीं देनी चाहिए। यहां के निवासियों के लिए यह पार्क भौतिकवादी समय में जीवन के अमूल्य क्षण को व्यतीत करने में सहायक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार की इस सम्पति का मालिक हरमुवासियों को बनाया जा रहा है। यहां के निवासी इसकी सुरक्षा करें। ताकि खूबसूरत पार्क की खूबसूरती हमेशा बनी रहे।
सब्जी विक्रेताओं को मिलेगी दुकान
नवनिर्मित वेजिटेबल मार्केट में 300 से अधिक सब्जी विक्रेताओं को दुकानें मिलेंगी। इसके लिए नगर निगम ने 191 प्लेटफार्म का निर्माण मार्केट में कराया है। बड़े प्लेटफार्म में दो-दो दुकानदारों को बसाया जाएगा। इसके अलावा मार्केट के दोनों तरफ बनाए गए सेड में ठेला पर फल बेचने वालों को जगह दी जाएगी।
मार्केट की छत पर बना है फूड कोर्ट, जाम से मिलेगी मुक्ति
वेजिटेबल मार्केट की छत पर फूड कोर्ट बनाया गया है। यहां सात अलग-अलग किचन की व्यवस्था निगम ने की है। मार्केट के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। नागा बाबा सब्जी मार्केट में सड़क पर दुकान लगने के कारण दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। अब इससे लोगों को राहत मिलेगी।
इस अवसर पर सांसद श्री संजय सेठ, राज्यसभा सांसद श्री दीपक प्रकाश, विधायक श्री सीपी सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विनय कुमार चौबे, नगर आयुक्त नगर निगम श्री मुकेश कुमार, महापौर श्रीमती आशा लकड़ा, उपमहापौर श्री संजीव विजयवर्गीय एवं अन्य उपस्थित थे
राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ बैगा और माडिय़ा जनजाति के प्रमुख लोक नृत्य
ललित चतुर्वेदी
राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोक गीत, नृत्य और संपूर्ण कलाओं से परिचित होगा देश और विदेश। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यह आयोजन 28 से 30 अक्टूबर तक किया जा रहा है। राजधानी का साईंस कॉलेज मैदान आयोजन के लिए सज-धज कर तैयार हो चुका है। इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों के आदिवासी लोक नर्तक दल के अलावा देश-विदेश के नर्तक दल भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
छत्तीसगढ़ राज्य की 5 विशेष पिछड़ी जनजातियों में से एक बैगा जनजाति है। राज्य के कबीरधाम, मुंगेली, राजनांदगांव, बिलासपुर और कोरिया जिले में निवासरत है। बैगा जनजाति अपने ईष्ट देव की स्तुति, तीज-त्यौहार, उत्सव एवं मनोरंजन की दृष्टि से विभिन्न लोकगीत एवं नृत्य का गायन समूह में करते हैं। इनके लोकगीत और नृत्य में करमा, रीना-सैला, ददरिया, बिहाव, फाग आदि प्रमुख हैं। इसी प्रकार दण्डामी माडिय़ा जनजाति गोंड जनजाति की उपजाति है। सर डब्ल्यू. वी. ग्रिगसन ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘द माडिय़ा जनजाति के सदस्यों द्वारा नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट के आधार पर ‘बायसन हार्न माडिय़ा’ जनजाति नाम दिया। प्रसिद्ध मानव वैज्ञानिक वेरियर एल्विन का ग्रंथ ‘द माडिय़ा-मर्डर एंड सुसाइड’ (1941) दण्डामी माडिय़ा जनजाति पर आधारित है। बैगा और माडिय़ा जनजाति के रस्मों-रिवाजों पर आधारित प्रमुख लोक नृत्य इस प्रकार हैं।
‘रीना सैला नृत्य’
बैगा जनजाति का प्रकृति एवं वनों से निकट संबंध है। जिसका बखान इनके लोक संस्कृति में व्यापक रूप से देखने को मिलता है। बैगा जनजाति की माताएं, महिलाएं अपने प्रेम एवं वात्सल्य से देवी-देवताओं और अपनी संस्कृति का गुणगान गायन के माध्यम से उनमें गीत एवं नृत्य से बच्चों को परिचित करने का प्रयास करती है। साथ ही बैगा माताएं अपने छोटे शिशु को सिखाने एवं वात्सल्य के रूप में रीना का गायन करती हैं। वेशभूषा महिलाएं सफेद रंग की साड़ी धारण करती हैं। गले में सुता-माला, कान में ढार, बांह में नागमोरी, हाथ में चूड़ी, पैर में कांसे का चूड़ा एवं ककनी, बनुरिया से श्रृंगार करती हैं। वाद्य यंत्रों में ढोल, टीमकी, बांसुरी, ठीसकी, पैजना आदि का प्रयोग किया जाता है।
सैला बैगा जनजाति के पुरूषों के द्वारा सैला नृत्य शैला ईष्ट देव एवं पूर्वज देव जैसे-करमदेव, ग्राम देव, ठाकुर देव, धरती माता तथा कुल देव नांगा बैगा, बैगीन को सुमिरन कर अपने फसलों के पक जाने पर धन्यवाद स्वरूप अपने परिवार के सुख-समृद्धि की स्थिति का एक दूसरे को शैला गीत एवं नृत्य के माध्यम से बताने का प्रयास किया जाता है। इनकी वेशभूषा पुरूष धोती, कुरता, जॉकेट, पगड़ी, पैर में पैजना, गले में रंगबिरंगी सूता माला धारण करते है। वाद्य यंत्रों में मांदर,ढोल, टीमकी, बांसुरी, पैजना आदि का प्रमुख रूप से उपयोग करते हैं। बोली बैगा जनजाति द्वारा रीना एवं शैला का गायन स्वयं की बैगानी बोली में किया जाता है। यह नृत्य प्राय: क्वार से कार्तिक माह के बीच मनाए जाने वाले उत्सवों, त्यौहारों में किया जाता है।
‘दशहेरा करमा नृत्य’
बैगा जनजाति समुदाय द्वारा करमा नृत्य भादो पुन्नी से माधी पुन्नी के समय किया जाता है। इस समुदाय के पुरूष सदस्य अन्य ग्रामों में जाकर करमा नृत्य के लिए ग्राम के सदस्यों को आवाहन करते हैं। जिसके प्रतिउत्तर में उस ग्राम की महिलाएं श्रृंगार कर आती है। इसके बाद प्रश्नोत्तरी के रूप में करमा गायन एवं नृत्य किया जाता है। इसी प्रकार अन्य ग्राम से आमंत्रण आने पर भी बैगा स्त्री-पुरूष के दल द्वारा करमा किया जाता है। करमा रात्रि के समय ग्राम में एक निर्धारित खुला स्थान जिस खरना कहा जाता है में अलाव जलाकर सभी आयु के स्त्री, पुरूष एवं बच्चे नृत्य करते हुए करते है। अपने सुख-दु:ख को एक-दूसरे को प्रश्न एवं उत्तर के रूप में गीत एवं नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते है।
करमा नृत्य के माध्यम से बैगा जनजाति में परस्पर सामन्जस्य, सुख-दु:ख के लेन देन के साथ ही नव युवक-युवतियां भी आपस में परिचय प्राप्त करते है। इस नृत्य में महिला सदस्यों द्वारा विशेष श्रृंगार किया जाता है। जिसमें यह चरखाना (खादी) का प्राय: लाल एवं सफेद रंग का लुगड़ा, लाल रंग की ब्लाउज, सिर पर मोर पंख की कलगी, कानों में ढार, गले में सुता-माला, बांह में नागमोरी, कलाई में रंगीन चूडिय़ा एवं पैरों में पाजनी और विशेष रूप से सिर के बाल से कमर के नीचे तक बीरन घास की बनी लडिय़ां धारण करती हैं, जिससे इनका सौंदर्य एवं श्रृंगार देखते ही बनता है। पुरूष वर्ग भी श्रृंगार के रूप में सफेद रंग की धोती, कुरता, काले रंग की कोट, जाकेट, सिर पर मोर पंख लगी पगड़ी और गले में आवश्यकतानुसार माला धारण करते हैं। वाद्य यंत्रों में मांदर, टिमकी, ढोल, बांसुरी, ठिचकी, पैजना आदि का उपयोग किया जाता है।
‘करसाड़ नृत्य’
दण्डामी माडिय़ा जनजाति नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट, बस्तर, दशहरा के अंतिम दिनों में चलने वाले विशालकाय काष्ठ रथ को खींचने का विशेषाधिकार और स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है। इस नृत्य में दण्डामी माडिय़ा पुरूष सिर पर कपड़े की पगड़ी या साफा, मोती, माला, कुर्ता या शर्ट, धोती एवं काले रंग का हाफ कोट धारण करते हैं। वहीं महिलाएं साड़ी, ब्लाउज, माथे पर कौडिय़ा से युक्त पट्टा, गले में विभिन्न प्रकार की माला और गले, कलाई, पैरों पर बाजार में मिलने वाले सामान्य आभूषण पहनती हैं।
करसाड़ नृत्य के लिए पुरूष सदस्य अपने गले में लटका कर ढोल एवं मांदर का प्रयोग करता है। महिलाएं लोहे के रॉड के उपरी सिरे में लोहे की विशिष्ट घंटियों से युक्त ‘गुजिड़’ नामक का प्रयोग करती है। एक पुरूष सदस्य सीटी का प्रयोग करत है, नृत्य के दौरान सीटी की आवाज से ही नर्तक स्टेप बदलते हैं। नृत्य के प्रदर्शन का अवसर दण्डामी माडिय़ा जनजाति में करसाड़ नृत्य वार्षिक करसाड़ जात्रा के दौरान धार्मिक उत्सव में करते हैं। करसाड़ दण्डामी माडिय़ा जनजाति का प्रमुख त्यौहार है। करसाड़ के दिन सभी आमंत्रित देवी-देवाताओं की पूजा की जाती हैं और पुजारी, सिरहा देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्हों जैसे-डोला, छत्रा, लाट बैरम आदि के साथ जुलूस निकालते हैं। जुलूस की समाप्ति के पश्चात् शाम को युवक-युवतियां अपने विशिष्ट नृत्य पोषाक में सज-सवरकर एकत्र होकर सारी रात नृत्य करते हैं।
‘मांदरी नृत्य’
दंडामी माडिय़ा जनजाति नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट, बस्तर दशहरा के अंतिम दिनों में चलने वाले विशालकाय काष्ठ रथ को खींचने का विशेषाधिकार और स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है। दंडामी माडिय़ा जनजाति के सदस्य नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट को माडिय़ा समुदाय के वीरता तथा साहस का प्रतीक मानते हैं।
इस नृत्य की वेशभूषा में दंडामी माडिय़ा पुरूष सिर पर कपड़े की पगड़ी या साफा, मोती माला, कुर्ता या शर्ट, धोती एवं काले रंग का हाफ कोट धारण करते हैं। वहीं महिलाएं साड़ी, ब्लाउज, माथे पर कौडिय़ों से युक्त पट्टा, गले में विभिन्न प्रकार की माला और गले, कलाई, पैरों पर बाजार में मिलने वाले सामान्य आभूषण पहनी हैं। वाद्य यंत्र मांदरी नृत्य के लिए पुरूष सदस्य अपने गले में लटकाकर ढोल एवं मांदर वाद्य का प्रयोग करते हैं। महिलाएं लोहे के रॉड के उपरी सिरे में लोहे की विशिष्ट घंटियों से युक्त ‘गुजिड़’ का प्रयोग करती हैं। एक पुरूष सदस्य सीटी का प्रयोग करता है, नृत्य के दौरान सीटी की आवाज से ही नर्तक स्टेप बदलते हैं।
यह नृत्य दंडामी विवाह, मेला-मंड़ई, धार्मिक उत्सव और मनोरंजन के अवसर पर किया जाता है। विवाह के दौरान अलग-अलग गांवों के अनेक नर्तक दल विवाह स्थल पर आकर नृत्य का प्रदर्शन करते हैं। जिसके बदले में उन्हें ‘लांदा’ (चावल की शराब) और ‘दाडग़ो’ (महुए की शराब) दी जाती हैं। दंडामी माडिय़ा जनजाति के सदस्यों का मानना है कि गौर सिंग नृत्य उनके सामाजिक एकता, सहयोग और उत्साह में वृद्धि करता है। वर्तमान में दंडामी माडिय़ा जनजाति का गौर सिंग नृत्य अनेक सामाजिक तथा सांस्कृतिक आयोजनों में भी प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया जाता है।
(लेखक उप संचालक जनसंपर्क हैं)
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जैप – 9 में पारण परेड (पासिंग आउट) का निरीक्षण किया और सलामी ली
*मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण के उपरांत आयोजित परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ
प्रदर्शन करने वाले 15 आरक्षियों को सम्मानित किया
*गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ मुठभेड़ में
शहीद साहिबगंज के शहीद सैनिक
कुंदन कुमार ओझा की आश्रिता को
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्रदान किया
*श्रीनगर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में
शहीद सीआरपीएफ जवान कुलदीप
उरांव की आश्रिता और छत्तीसगढ़ में उग्रवादी हमले में
शहीद मुन्ना यादव( सीआरपीएफ) की आश्रिता
को 10 -10 लाख रुपए की अनुग्रह
अनुदान राशि मुख्यमंत्री ने प्रदान की
*आपने प्रशिक्षण में जो सीखा है , उसका इस्तेमाल
अपने दायित्व निर्वहन में करेंगे – श्री हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री झारखंड
साहिबगंज, मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज जैप -9, साहिबगंज में प्रशिक्षु आरक्षियों के पारण परेड (पासिंग आउट) का निरीक्षण किया और आकर्षक परेड की सलामी ली । मुख्यमंत्री ने बुनियादी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आरक्षियों को शुभकामनाएं देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की । मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपके कंधों पर आज से एक नई जिम्मेदारी आ रही है । मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का भलीभांति निर्वहन करेंगे । मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रशिक्षण के उपरांत आयोजित परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 15 सर्वश्रेष्ठ आरक्षियों को मेडल और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया ।
ट्रेनिंग में जो सीखा है उसका इस्तेमाल अपने कार्यों में करेंगे
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु आरक्षियों से कहा कि आपने बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम में जो कुछ सीखा है , उसका बखूबी इस्तेमाल अपने कार्यों एवं दायित्व निर्वहन में करेंगे । मुझे पूरा विश्वास है कि आप परिवार और समाज के साथ तालमेल बनाकर अपने उत्तरदायित्व और जनता के प्रति संवेदना दिखाएंगे ।
महिला सशक्तिकरण का परिचायक
मुख्यमंत्री ने गर्व जताते हुए कहा कि बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 502 आरक्षियों में 94 महिलाएं हैं । यह दर्शाता है कि पुलिस महकमे में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है । आज महिलाएं हर मोर्चे पर अपने दायित्वों को सफलतापूर्वक निभा रही हैं ।मुख्यमंत्री ने महिला प्रशिक्षु आरक्षण का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आपने जो जिम्मेदारी मिल रही है उसमें वे बेहतर समाज बनाने में अपना अमूल्य योगदान देंगी ।
शहीदों के आश्रिता को नियुक्ति पत्र और अनुग्रह अनुदान की राशि मिली
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गलवान घाटी में 16 जून 2020 को चीनी सेना के साथ मुठभेड़ में शहीद साहिबगंज के जांबाज़ सैनिक कुंदन कुमार ओझा की आश्रिता नम्रता कुमारी को नियुक्ति पत्र प्रदान किया । उन्हें पहले 10 लाख रुपए शहीद सहायता राशि दी जा चुकी है । मुख्यमंत्री ने 2 जुलाई 2020 को श्रीनगर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद सीआरपीएफ के जवान कुलदीप उरांव की आश्रिता श्रीमती वंदना उरांव को 10 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान की राशि प्रदान की । वे बंगाल पुलिस में पहले से ही कार्यरत हैं । मुख्यमंत्री ने 11 मई 2020 को छत्तीसगढ़ में उग्रवादी हमले में शहीद साहिबगंज के रहनेवाले मुन्ना यादव (सीआरपीएफ) की आश्रिता श्रीमती निताई कुमारी को 10 लाख की अनुग्रह अनुदान की राशि प्रदान की । उन्हें नियुक्ति पत्र पहले ही मिल चुका है ।
इस मौके पर सांसद श्री विजय हांसदा, विधायक श्री अनंत कुमार ओझा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, पुलिस महानिदेशक श्री नीरज सिन्हा, एडीजी श्री संजय लाटकर, पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती प्रिया दुबे, साहिबगंज के उपायुक्त श्री रामनिवास यादव, पुलिस अधीक्षक श्री अनुरंजन किस्पोट्टा और पदमा हजारीबाग पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के पुलिस अधीक्षक श्री कौशल किशोर समेत कई पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे।
विधवा पेंशन के लिए जरूरी नहीं होगा राशनकार्ड – मुख्यमंत्री
*मुख्यमंत्री ने किया गोड्डा जिले में विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन
*सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत 650 लाख रुपये की राशि लाभुकों के बीच किया वितरित
गोड्डा। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान भी जीवन को सामान्य बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सुदूर प्रखंड में आज हम एकत्रित हुए हैं। सरकार की कई योजनाओं से लोगों को जोड़ा गया है। करोड़ों रुपये की जनहित योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन हुआ है, जिससे जनसामान्य की समस्यायों के निराकरण में सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधवा पेंशन के लिए राशन कार्ड आदि की आवश्यकता नहीं रहेगी। जो विधवा असहाय हैं, उनको सरकार द्वारा पेंशन उपलब्ध करायी जाएगी। वे आज गोड्डा जिले के राजाभिट्टा स्टेडियम में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्धघाटन के साथ लाभुकों के बीच परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा जिले में 3458.17 लाख रुपये से संचालित विभिन्न योजनाओं का उद्धघाटन एवं 2618.49 लाख रुपये की लागत से संचालित होनेवाली विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र का वितरण, प्रधानी पट्टा का वितरण, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों को घर की चाबी एवं स्वीकृति पत्र का वितरण भी किया। कार्यक्रम में लाभुकों को फूलो झानों योजना के लाभुकों के बीच चेक का वितरण किया गया। कार्यक्रम में सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच 650 लाख रुपये की परिसंपत्ति वितरित की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत ही दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां बिजली की समस्या रहती थी। बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए यहां पावर सब स्टेशन का भी उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि सुंदर डैम को लेकर हमेशा चर्चा की जाती है कि इसके आसपास के गांवों में कैसे खुशहाली आए, इसके लिए सरकार प्रयासरत है। विस्थापित गांव में लिफ्ट इरिगेशन के तहत सिंचाई योजना का भी शिलान्यास किया गया है । 10 स्कूल भवनों का निर्माण किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा के लिए आठ एंबुलेंस जिला स्तर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना, फूलों झानों योजना आदि से लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है।
सरकार मुख्यमंत्री पशुधन योजना का लाभ दे रही है, जिससे ग्रामीण बकरी पालन, गाय पालन, सूअर पालन आदि कर खुद को स्वावलंबी बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूली बच्चों को हफ्ते में 6 दिन अंडा देने का काम कर रही है। इसके लिए निकटवर्ती राज्य से अंडा खरीदना होता है। यदि ग्रामीण मुर्गी पालन करें, तो उनसे सरकार अंडा खरीद लेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार महुआ हड़िया बेचने वाली महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए फूलों झानों योजना के तहत लोन उपलब्ध करा रही है, जिससे वे एक सम्मानजनक व्यवसाय कर इस दलदल से बाहर निकलने का काम कर सकती हैं ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष को सरकार नियुक्ति वर्ष के रूप में मना रही है। विभिन्न विभागों द्वारा नियमावली तैयार की जा रही है, जिससे जल्द से जल्द सभी विभागों में रिक्त पद भरे जा सकेंगे। साथ ही रोजगार के नए अवसर से लोगों को जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आप सब को भी जागरूक रहना होगा। सरकार आपके हित के लिए कई तरह के नियम बना रही है, जिसका फायदा आप सजग रह कर उठा सकते हैं।
इस अवसर पर राजमहल के सांसद श्री विजय कुमार हांसदा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार श्री अभिषेक प्रसाद, उपायुक्त गोड्डा श्री भोर सिंह यादव, पुलिस अधीक्षक श्री वाईएस रमेश सहित गोड्डा जिले के अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
झारखण्ड प्रदेश के क्षत्रिय महासम्मेलन का आयोजन संपन्न
रांची,अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के तत्वाधान में झारखण्ड प्रदेश के क्षत्रिय महासम्मेलन का आयोजन फोकस क्लब एंड रिसोर्ट, रिंग रोड, दलादिली में किया गया |इस कार्यक्रम में प्रदेश कार्य समिति एवं जिला कमिटी का विस्तार किया गया | साथ ही कार्यक्रम में पूरे झारखण्ड से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के कोडरमा, गिरिडीह, सिमडेगा, हजारीबाग, चतरा, खूंटी, खलारी आदि जिला का विस्तार किया गया | साथ ही साथ सर्वसम्मति से लिया गया की संगठन को और व्यापक स्तर पर विस्तार करने हेतु व्यापक सदस्यता अभियान चलाया जायेगा | शिक्षा, चिकित्सा एवं व्यावसायिक रूप से समाज को मजबूती प्रदान करने के लिए शिक्षा, चिकित्सा एवं व्यावसाय प्रकोष्ठ का गठन किया गया | इस दौरान विगत कुछ दिनों पहले माननीय मुख्यमंत्री द्वारा हिन्दी, भोजपुरी, मगही भाषा पर गलत टिप्पणी का विरोध किया गया एवं भोजपुरी, मगही, अंगिका भाषा को झारखंड की सूची मे शामिल करने की मांग की गयी। साथ ही महासभा द्वारा यह चेतावनी भी दी गयी की अगर इन भाषाओं को जल्द ही सूची में शामिल नहीं किया तो महासभा द्वारा प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में प्रदेश कार्य समिति एवं जिला कमिटी का विस्तार किया गया |
इस कार्यक्रम के दौरान झारखण्ड प्रदेश संरक्षक श्री अजय कुमार सिंह जी ने रांची जिला में क्षत्रिय भवन बनाने हेतु 51लाख रूपए की राशि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा को देने की घोषणा की | इस कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री विनय कुमार सिंह उर्फ बीनू सिंह एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार पंकज उर्फ ललन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश कार्यकारिणी एवं जिला कमिटी का विस्तारीकरण किया गया | इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में हुसैनाबाद के विधायक सह झारखण्ड सरकार के पूर्व मंत्री श्री कमलेश सिंह, डा० सूर्यमणि सिंह, डा० सुरेश प्रसाद सिंह (पूर्व कुलपति), शिवपूजन सिंह, रेणु सिंह, अजय सिंह, नवीन नाथ शाहदेव, विजय सिंह (पूर्व आइ०ए०एस०), प्रतुल शाहदेव, पूनम सिंह, अर्चना सिंह आदि उपस्थित हुए | कार्यक्रम का संचालन मुख्य रूप से श्री आदर्श सिंह एवं श्री विजय सिंह ने संयुक्त रूप से किया |
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से संतोष सिंह, कामख्या सिंह, धीरेन्द्र सिंह, देव कुमार सिंह, सुधीर सिंह, विजय सिंह, सुनील सिंह बादल, चेतन सिंह, प्रभाकर सिंह, अलका सिंह, प्रीती सिंह, पूनम सिंह, यश सिंह परमार आदि प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित हुए |
उक्त जानकारी मनोज कुमार सिंह उर्फ ललन सिंह कार्यकारी अध्यक्ष ने दी है
संयुक्त राष्ट्र संघ-शक्तियां ,शांति प्रस्ताव एवं दुर्बलताएं
( 24 अक्टूबर, संयुक्त राष्ट्र दिवस पर विशेष)
विकास कुमार
युद्ध दोनों पक्ष के लिए भयानक होता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त होने के पश्चात संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे संगठन का संरचनात्मक विचार अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट के मस्तिष्क में आया। उनकी मृत्यु हो जाने के कारण इसका उद्घाटन उनकी पत्नी ने किया था। यह संगठन कई सम्मेलनों और बैठकों के परिणाम स्वरूप स्थापित हुआ क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध के समय राष्ट्र संघ का निर्माण किया गया था जिसकी नीतियों का संचालन और क्रियान्वयन नहीं हो पाया और अंतत: वह स्थिर होकर समाप्त हो गया था। 24 अक्टूबर, 1945 को इसकी स्थापना 51 देशों में मिलकर किया ।हालांकि पोलैंड का प्रतिनिधि वहां पर उपस्थित नहीं था, परंतु मूल रूप से 51 देशों के सदस्य प्रतिनिधि एकमत होकर इस पर हस्ताक्षर किए थे ।भारत भी इसका संस्थापक सदस्य था और भारत के लक्ष्मण मुदलियार प्रतिनिधि थे। वर्तमान समय में इस संगठन के कुल 193 देश सदस्य हैं। जिसमें पांच स्थाई सदस्य हैं और 10 अस्थाई सदस्य हैं। पांच स्थाई सदस्य जिनके पास निषेध अधिकार है ,को लेकर कई देशों के मध्य विवाद चलता रहता है, क्योंकि इन देशों ने अपने हितों को देखते हुए उस अधिकार का गलत प्रयोग किया है । शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और अमेरिका में वैचारिक द्वंद उत्पन्न हुआ जिसके परिणाम स्वरूप इन देशों ने अपनी और देशों को मिलाना चाहा जिससे इनका गुट मजबूत हो सके। यहीं से वीटो पावर का गलत प्रयोग प्रारंभ हुआ क्योंकि जिस देश का मुद्दा होता था। अगर वह किसी गुट के विचारधारा से संबंधित होता था तो उस के पक्ष में वीटो पावर का प्रयोग करते थे ।अगर उसके विपक्ष में होता था तो विपक्ष में वीटो शक्ति का प्रयोग किया जाता था। उस समय विजित राष्ट्रों को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थाई सदस्यता दे दी गई थी एक आधार इसमें यह भी देखा गया था कि उनकी आर्थिक और सैन्य शक्ति मजबूत हो। आज मुख्यत: भारत, जर्मनी ,ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए प्रयासरत हैं। क्योंकि इन देशों की जनसंख्या आर्थिक शक्ति सैन्य शक्ति और संयुक्त राष्ट्र पर आर्थिक अनुदान पूर्ववत सदस्य देशों के बराबर होता दिख रहा है। आवश्यकता भी इस बात की है की भारत जैसे संपन्न और विशाल देश को आज सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता दे देनी चाहिए। इसके पीछे कई कारण और तर्क बताया जा सकते हैं। भारत ने सदैव शांति के पक्ष में ही अपना निर्णय दिया है और जो भी काम इस संगठन ने भारत को सौंपा, उसे बखूबी सफलता के साथ पूरा किया है। आज आतंकवाद , पर्यावरण शरणार्थी समस्या, सतत विकास लक्ष्य की पूर्ति, भुखमरी एवं मानव अधिकार जैसे कई मुद्दे ऐसे हैं जिन का मुकाबला मिलजुल कर ही किया जा सकता है। जिसमें संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों की भूमिका प्रमुख व महत्वपूर्ण बन सकती है। आतंकवाद को लेकर भी आज कई देशों और संगठनों में मतभेद है ।2001 के पहले अमेरिका यह मानने को ही तैयार नहीं होता था कि भारत जैसा देश पाकिस्तान जैसे देशों के आतंकी गतिविधियों से परेशान रहता है । जब उसके ट्रेड सेंटर में अलकायदा का हमला हुआ तब उसने ऑपरेशन ड्यूरिंग फ्रीडम नाम से एक मूवमेंट चलाया । जिसका मिशन था आतंकवाद को खत्म करना। आतंकवाद और मानव अधिकार को लेकर अमेरिका अपने निजी हितों के लिए कई देशों पर बेवजह हस्तक्षेप किया है। यही दृष्टिकोण चीन का भी रहता है ।उसने पाकिस्तान को लेकर सदैव अपने वीटो शक्ति का प्रयोग किया है। म्यांमार में सैन्य शासन एवं अफगानिस्तान में तालिबानी संगठन का सत्ता में आना । इसके बावजूद भी इस संगठन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। आज शरणार्थियों की समस्या व्यापक रूप से बढ़ती जा रही है ।इसमें भी संयुक्त राष्ट्र संघ को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। क्योंकि इससे उन शरणार्थियों के आने वाले भविष्य और भावी पीढ़ी का जीवन अंधकार में हो जाता है। इसकी कई विशिष्टक्रित एजेंसियां हैं जो अपने काम विशेष रूप से करती है जैसे ए किसी की एजेंसी है यूनिसेफ वह बच्चों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर काम करती है। मानवाधिकार परिषद वैश्विक स्तर पर मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यरत एवं प्रयासरत रहती है। इस के चार्टर में कुल 111 अनुच्छेद एवं 19 अध्याय हैं जिसमें अनुच्छेद प्रथम में संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धांतों का विवेचन किया गया है इसमें विश्व शांति बनाए रखना एवं युद्ध को रोकना प्रथम सिद्धांत के रूप में दर्शाया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धांतों में यह भी पंडित है कि कोई भी देश किसी भी देश की एकता ,अखंडता और संप्रभुता पर हस्तक्षेप नहीं करेगा। परंतु अनुच्छेद 2(7) में प्रावधान है कि अगर मानव अधिकारों का उल्लंघन कोई देश करता है तो संयुक्त राष्ट्र संघ अपने सिद्धांतों के अनुसार वहां पर हस्तक्षेप कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कई मामलों में अपनी भूमिका तटस्थ रूप से निभाई है जिसकी पहल की सराहना बस शुक्र ऊपर हो रही है परंतु वह आज संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष कई बड़ी चुनौतियां हैं जिनसे निपटना उसके लिए अत्यंत आवश्यक है। हाल ही में तालिबान का सत्ता में आना और संयुक्त राष्ट्र संघ का वहां हस्तक्षेप ना करना, यह संयुक्त राष्ट्र संघ पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा किया।
यह संगठन सेना , संसाधन और वित्तीय सहायता के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है जिस कारण से विकसित देश इसका फायदा उठा लेते हैं क्योंकि आर्थिक रूप से अनुदान उन्हीं का अधिक होता है । भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख रूप से वित्तीय अनुदान प्रदान करने वाला देश है। भारत में कभी भी किसी भी देश पर आक्रमण की पहल नहीं की और सदैव शांति का रास्ता अपनाया है। साथ ही उसके समस्त सिद्धांतों और प्रावधानों को मान्यता प्रदान किया है इसलिए भारत की सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता होनी चाहिए संयुक्त राष्ट्र संघ को भी चाहिए कि वह तटस्थ रहकर अपनी भूमिका निभाई ,क्योंकि इस संगठन के साथ विश्व के नागरिकों की आस्था जुड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख पदों की नियुक्तियों में भी तटस्थता होनी चाहिए और सदैव हां चार्टर के अनुच्छेदों की आधार पर होना चाहिए
(लेखक- केंद्रीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में रिसर्च स्कॉलर है एवं राजनीति विज्ञान में गोल्ड मेडलिस्ट हैं।)
रांची एअरपोर्ट के बाहर ख़राब टैक्सी सर्विस का शिकार हुआ एक परिवार
रांची, रांची एयरपोर्ट टर्मिनल से बाहर ट्रेवल एजेंसी में हुआ हंगामा .सूत्रों के अनुसार एयरपोर्ट से बाहर आने वाले एक परिवार ने पहले से टैक्सी बुक कर रखा था लेकिन लगभग डेढ़ घंटे इंतज़ार करने के बाद भी टैक्सी नहीं मिलने पर उक्त परिवार की महिला सदस्य ने संबंधित ट्रेवल एजेंसी के बाहर जमकर हंगामा कर दिया. एयरपोर्ट थाना प्रभारी के आने के बाद मामला शांत हुआ. यह जानकारी वहाँ मौजूद प्रत्यक्षदर्शी के द्वारा फाइनल जस्टिस डिजिटल मीडिया कार्यालय में दी गयी. इस संबध में उक्त महिला यात्री से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका है. उक्त ट्रेवल एजेंसी से हमारी बात हुयी उन्होंने बताया की ट्रैफिक के कारण टैक्सी समय पर नहीं पहुँच पाया बाद में हमने उन्हें टैक्सी मुहैया करा दिया था.
प्राइवेट स्कूलों को बर्वाद करने पर तुली है झारखण्ड सरकार – रामप्रकाश तिवारी
रांची, स्वतंत्र राष्ट्रवादी पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री राम प्रकाश तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि झारखण्ड सरकार हजारों सरकारी स्कूलों की पढ़ाई लिखाई को सुधारा नहीं अब अच्छी शिक्षा दे रहे प्राइवेट प्ले, प्राइमरी स्कूलों को बर्वाद करने पर तुल गए हैं लगातार बीस महीने से सभी प्राइमरी स्कूलों के कक्षा-नर्सरी से पांच की पढ़ाई लिखाई बंद रखा है। कोरोना लाॅकडाउन में झारखंड सरकार के आदेश लाॅकडाउन बंदी के दौरान किराये के मकान में चल रहे हजारों प्राइमरी, मिडिल हाई स्कूल बंद हो गए हैं लाखों प्राइवेट स्कूल संचालक,
शिक्षक शिक्षिका, कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं, झारखण्ड सरकार के शिक्षा विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि कक्षा-नर्सरी से पांच की लगातार बीस महीने से स्कूली पढ़ाई लिखाई बंद रखकर झारखण्ड सरकार लाखों गरीब आदिवासी दलित पिछड़े अगड़े अल्पसंख्यक बच्चों बच्चियो का शैक्षणिक भविष्य बर्वाद कर रहे हैं कक्षा-6 से काॅलेज स्तर के सभी कक्षाओं की पढ़ाई लिखाई शुरू हो गई है बच्चों की कम उपस्थिति चिंता का विषय है पढ़ाई शुरू होने के दौरान किसी भी स्कूल काॅलेज में छात्र-छात्राओं को कोरोनावायरस से संक्रमित होने के मामले नहीं मिले,कोरोना महामारी लगभग नियंत्रित होने के बावजूद मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अभी तक कक्षा-नर्सरी, एलकेजी,यूकेजी,और कक्षा-1 से पांच की पढ़ाई लिखाई शुरू नहीं करके झारखंड राज्य के प्राइमरी शिक्षा को लगभग चौपट कर दिया है।
श्री राम प्रकाश तिवारी ने कहा है कि झारखण्ड सरकार के कैबिनेट वित्तमंत्री श्री रामेश्वर उरांव सार्वजनिक रूप से बयान देते रहते हैं की कक्षा-नर्सरी से पांच की पढ़ाई दशहरा पूजा के बाद शुरू करेंगी लेकिन आजतक पढ़ाई शुरू नहीं हुआ, हेमंत सरकार के वरिष्ठ वित्तमंत्री श्री रामेश्वर उरांव आजकल शिक्षक सम्मान समारोह कार्यक्रम में अधिक शामिल होकर मात्र अखबारों में बयानबाजी करके प्राइवेट स्कूलों को राजनीतिक मोहरा बना रहे है कैबिनेट की विभिन्न बैठकों में कांग्रेस के चारो कैबिनेट मंत्री श्री रामेश्वर उरांव, कैबिनेट मंत्री श्री बन्ना गुप्ता, कैबिनेट मंत्री श्री बादल पत्रलेख, कैबिनेट मंत्री श्री आलमगीर आलम प्राइमरी कक्षा नर्सरी से पांच की पढ़ाई लिखाई शुरू करने हेतु आवाज नहीं उठाया और न ही मुख्यमंत्री पर दबाव डाला लेकिन पढ़ाई-लिखाई जल्द शुरू करने का बयान देकर खानापूर्ति कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष श्री रामप्रकाश तिवारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि प्राइमरी कक्षा नर्सरी से पांच एवं कक्षा-6 से 12 में पढ़ने वाले लाखों बच्चे मोबाइल गेम खेलते हैं झारखण्ड सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर छोटे बच्चों बच्चियो को मोबाइल के गंदे आदत लगा दिया है अब अपने बच्चों के बीस माह से लगातार बंद स्कूली पढ़ाई लिखाई के नुक़सान से बच्चो के भविष्य को लेकर अभिभावक लोग चिंतित है और प्राइमरी प्ले स्कूलो को बंद रखने के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के अड़ियल रूख से जन आक्रोश भड़क रहा है।तीन से पांच वर्ष के बच्चे कभी स्कूल नहीं गए,आज अशिक्षित बनके प्राथमिक शिक्षा से वंचित लाखो बच्चे अपने घर के गली मोहल्ले में खेल-कूद रहे है सबसे बुरा हाल ग्रामीण बच्चों का है जो बकरी,भैड़ चढ़ाते दिखाई देते हैं सरकारी स्कूलों के साथ प्राइवेट स्कूलों के बच्चे पढ़ाई लिखाई से पिछड़ गए है,सबसे बुरा हाल प्राइवेट शिक्षकों, कर्मचारियों का है बीस माह तक सभी छोटे मध्यम प्ले प्राइमरी स्कूल बंद रहने से आज हजारो शिक्षक, कर्मचारी दाने दाने के मोहताज हो गए हैं भूखमरी के कगार पर है विडंबना है आज प्राइवेट शिक्षक शिक्षिका अंडा,सब्जी का दुकान लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजबूर हैं। उन्ह प्राइवेट शिक्षकों को हर जिला में सम्मानित करने का कार्य करने के लिए कैबिनेट मंत्री श्री रामेश्वर उरांव बहुत फुर्सत में दिखाई दे रहे हैं उन्हें राज्य के लाखों गरीब बच्चों बच्चियो के भविष्य की चिंता नहीं है अब राजनीति की हदें पार हो गई है सरकारी शिक्षकों के खिलाफ बयान देने वाले कैबिनेट वित्तमंत्री श्री रामेश्वर उरांव अब पासवा के बैनर तले सरकारी शिक्षकों को सम्मानित करने का भी कार्यक्रम के आयोजन करने वाले हैं आज शिक्षक सम्मान के पवित्र कार्य को मजाक बना दिया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष श्री रामप्रकाश तिवारी ने कहा झारखण्ड सरकार को गरीब,मध्यम वर्ग के लाखों गरीब बच्चों की शैक्षणिक भविष्य की चिंता नहीं है आने वाले दिनों में बच्चों के भविष्य चौपट होने का खामियाजा खुद अभिभावकों को झेलना पड़ेगा।
श्री तिवारी ने झारखण्ड सरकार से अपील करते हुए कहा है कि लाखों गरीब बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए कोविंद गाइडलाइन में कक्षा नर्सरी से पांच की स्कूली पढ़ाई लिखाई को जल्द शुरू करें।
प्रदेश अध्यक्ष श्री रामप्रकाश तिवारी ने यह प्रेस बयान जारी किया।
टीम इंडिया- सफलतापूर्वक चुनौतियों का सामना – नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
*भारत ने टीकाकरण की शुरुआत के मात्र 9 महीनों
में टीके की 100 करोड़ खुराक का लक्ष्य हासिल कर लिया
*21 अक्टूबर, 2021 को टीके की 100 करोड़ खुराक का लक्ष्य हासिल कर लिया है
*मानवता 100 साल बाद इस तरह की वैश्विक महामारी का सामना कर रही थी
*चिंता से आश्वासन तक की यात्रा पूरी हो चुकी है
*इसे वास्तव में एक भगीरथ प्रयास मानना चाहिए,
जिसमें समाज के कई वर्ग शामिल हुए हैं
न्यू दिल्ली, भारत ने टीकाकरण की शुरुआत के मात्र 9 महीनों बाद ही 21 अक्टूबर, 2021 को टीके की 100 करोड़ खुराक का लक्ष्य हासिल कर लिया है। कोविड -19 से मुकाबला करने में यह यात्रा अद्भुत रही है, विशेषकर जब हम याद करते हैं कि 2020 की शुरुआत में परिस्थितियां कैसी थीं। मानवता 100 साल बाद इस तरह की वैश्विक महामारी का सामना कर रही थी और किसी को भी इस वायरस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। हमें यह स्मरण होता है कि उस समय स्थिति कितनी अप्रत्याशित थी, क्योंकि हम एक अज्ञात और अदृश्य दुश्मन का मुकाबला कर रहे थे, जो तेजी से अपना रूप भी बदल रहा था।
चिंता से आश्वासन तक की यात्रा पूरी हो चुकी है और दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के फलस्वरूप हमारा देश और भी मजबूत होकर उभरा है।
इसे वास्तव में एक भगीरथ प्रयास मानना चाहिए, जिसमें समाज के कई वर्ग शामिल हुए हैं। पैमाने का अंदाजा लगाने के लिए, मान लें कि प्रत्येक टीकाकरण में एक स्वास्थ्यकर्मी को केवल 2 मिनट का समय लगता है। इस दर से, इस उपलब्धि को हासिल करने में लगभग 41 लाख मानव दिवस या लगभग 11 हजार मानव वर्ष लगे।
गति और पैमाने को प्राप्त करने तथा इसे बनाए रखने के किसी भी प्रयास के लिए, सभी हितधारकों का विश्वास महत्वपूर्ण है। इस अभियान की सफलता के कारणों में से एक, वैक्सीन तथा बाद की प्रक्रिया के प्रति लोगों का भरोसा था, जो अविश्वास और भय पैदा करने के विभिन्न प्रयासों के बावजूद कायम रहा।
हम लोगों में से कुछ ऐसे हैं, जो दैनिक जरूरतों के लिए भी विदेशी ब्रांडों पर भरोसा करते हैं। हालाँकि, जब कोविड -19 वैक्सीन जैसी महत्वपूर्ण बात सामने आयी, तो देशवासियों ने सर्वसम्मति से ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन पर भरोसा किया। यह एक महत्वपूर्ण मौलिक बदलाव है।
भारत का यह टीका अभियान इस बात का एक उदाहरण है कि अगर यहां के नागरिक और सरकार जनभागीदारी की भावना से लैस होकर एक साझा लक्ष्य के लिए मिलकर साथ आएं, तो यह देश क्या कुछ हासिल कर सकता है। जब भारत ने अपना टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, तो 130 करोड़ भारतीयों की क्षमताओं पर संदेह करने वाले कई लोग थे। कुछ लोगों ने कहा कि भारत को 3-4 साल लगेंगे। कुछ अन्य लोगों ने कहा कि लोग टीकाकरण के लिए आगे नहीं आएंगे। कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने कहा कि टीकाकरण प्रक्रिया घोर कुप्रबंधन और अराजकता की शिकार होगी। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि भारत सप्लाई चेन को व्यवस्थित नहीं कर पाएगा। लेकिन जनता कर्फ्यू और उसके बाद के लॉकडाउन की तरह, भारत के लोगों ने यह दिखा दिया कि अगर उन्हें भरोसेमंद साथी बनाया जाए तो परिणाम कितने शानदार हो सकते हैं।
जब हर कोई जिम्मेदारी उठा ले, तो कुछ भी असंभव नहीं है। हमारे स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को टीका लगाने के लिए कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में पहाडिय़ों और नदियों को पार किया। हमारे युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों, सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं को इस बात का श्रेय जाता है कि टीका लेने के मामले में भारत को विकसित देशों की तुलना में बेहद कम हिचकिचाहट का सामना करना पड़ा है।
अलग-अलग हितों से संबद्ध विभिन्न समूहों की ओर से टीकाकरण की प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकता देने का काफी दबाव था। लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि हमारी अन्य योजनाओं की तरह ही टीकाकरण अभियान में भी कोई वीआईपी संस्कृति नहीं होगी।
वर्ष 2020 की शुरुआत में जब दुनिया भर में कोविड -19 फैल रहा था, तो हमारे सामने यह बिल्कुल स्पष्ट था कि इस महामारी से अंतत: टीकों की मदद से ही लडऩा होगा। हमने जल्दी तैयारी शुरू कर दी। हमने विशेषज्ञ समूहों का गठन किया और अप्रैल 2020 से ही एक रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया।
आज तक केवल कुछ चुनिंदा देशों ने ही अपने स्वयं के टीके विकसित किए हैं। 180 से भी अधिक देश टीकों के लिए जिन उत्पादकों पर निर्भर हैं वे बेहद सीमित संख्या में हैं। यही नहीं, जहां एक ओर भारत ने 100 करोड़ खुराक का अविश्वसनीय या जादुई आंकड़ा सफलतापूर्वक पार कर लिया है, वहीं दूसरी ओर दर्जनों देश अब भी अपने यहां टीकों की आपूर्ति की बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं! जरा कल्पना कीजिए कि यदि भारत के पास अपना टीका नहीं होता तो क्या होता। भारत अपनी इतनी विशाल आबादी के लिए पर्याप्त संख्या में टीके कैसे हासिल करता और इसमें आखिरकार कितने साल लग जाते? इसका श्रेय निश्चित रूप से भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने इस बेहद कठिन चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में अपनी ओर से कोई भी कसर नहीं छोड़ी। उनकी उत्कृष्ट प्रतिभा और कड़ी मेहनत की बदौलत ही भारत टीकों के मामले में वास्तव में ‘आत्मनिर्भरÓ बन गया है। इतनी बड़ी आबादी के लिए टीकों की व्यापक मांग को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए हमारे टीका निर्माताओं ने अपना उत्पादन स्तर वृहद रूप से बढ़ाकर यह साबित कर दिया है कि वे किसी से भी कम नहीं हैं।
एक ऐसे राष्ट्र में जहां सरकारों को देश की प्रगति में बाधक माना जाता था, हमारी सरकार इसके बजाय बड़ी तेजी से देश की प्रगति सुनिश्चित करने में सदैव अत्यंत मददगार रही है। हमारी सरकार ने पहले दिन से ही टीका निर्माताओं के साथ सहभागिता की और उन्हें संस्थागत सहायता, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आवश्यक धनराशि मुहैया कराने के साथ-साथ नियामकीय प्रक्रियाओं को काफी तेज करने के रूप में भी हरसंभव सहयोग दिया। ‘संपूर्ण सरकारÓ के हमारे दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप सरकार के सभी मंत्रालय वैक्सीन निर्माताओं की सहूलियत और किसी भी तरह की अड़चन को दूर करने के लिए एकजुट हो गए।
भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में सिर्फ उत्पादन करना ही काफी नहीं है। इसके लिए अंतिम व्यक्ति तक को टीका लगाने और निर्बाध लॉजिस्टिक्स पर भी फोकस होना चाहिए। इसमें निहित चुनौतियों को समझने के लिए जरा इसकी कल्पना करें कि टीके की एक शीशी को आखिरकार कैसे मंजिल तक पहुंचाया जाता है। पुणे या हैदराबाद स्थित किसी दवा संयंत्र से निकली शीशी को किसी भी राज्य के हब में भेजा जाता है, जहां से इसे जिला हब तक पहुंचाया जाता है। फिर वहां से इसे टीकाकरण केंद्र पहुंचाया जाता है। इसमें विमानों की उड़ानों और ट्रेनों के जरिए हजारों यात्राएं सुनिश्चित करनी पड़ती हैं। टीकों को सुरक्षित रखने के लिए इस पूरी यात्रा के दौरान तापमान को एक खास रेंज में बनाए रखना होता है, जिसकी निगरानी केंद्रीय रूप से की जाती है। इसके लिए 1 लाख से भी अधिक शीत-श्रृंखला (कोल्ड-चेन) उपकरणों का उपयोग किया गया। राज्यों को टीकों के वितरण कार्यक्रम की अग्रिम सूचना दी गई थी, ताकि वे अपने अभियान की बेहतर योजना बना सकें और टीके पूर्व-निर्धारित तिथि को ही उन तक सफलतापूर्वक पहुंच सकें। अत: स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह निश्चित रूप से एक अभूतपूर्व प्रयास रहा है।
इन सभी प्रयासों को कोविन के एक मजबूत तकनीकी मंच से जबर्दस्त मदद मिली। इसने यह सुनिश्चित किया कि टीकाकरण अभियान न्यायसंगत, मापनीय, ट्रैक करने योग्य और पारदर्शी बना रहे। इसने सुनिश्चित किया कि टीकाकरण के काम में कोई पक्षपात या बिना पंक्ति के टीका लगवाने की कोई गुंजाइश ना हो। इसने यह भी सुनिश्चित किया कि एक गरीब मजदूर अपने गांव में पहली खुराक ले सकता है और उसी टीके की दूसरी खुराक तय समय अंतराल पर उस शहर में ले सकता है जहां वह काम करता है। टीकाकरण के काम में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड के अलावा, क्यूआर-कोड वाले प्रमाणपत्रों ने सत्यापन को सुनिश्चित किया। इस तरह के प्रयासों का न केवल भारत में बल्कि दुनिया में भी शायद ही कोई उदाहरण मिले।
2015 में अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में मैंने कहा था कि हमारा देश ‘टीम इंडिया’ की वजह से आगे बढ़ रहा है और यह ‘टीम इंडिया’ हमारे 130 करोड़ लोगों की एक बड़ी टीम है। जनभागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। यदि हम 130 करोड़ भारतीयों की भागीदारी से देश चलाएंगे तो हमारा देश हर पल 130 करोड़ कदम आगे बढ़ेगा। हमारे टीकाकरण अभियान ने एक बार फिर इस ‘टीम इंडिया’ की ताकत दिखाई है। टीकाकरण अभियान में भारत की सफलता ने पूरी दुनिया को यह भी दिखाया है कि ‘लोकतंत्र हर उपलब्धि हासिल कर सकता है’।
मुझे उम्मीद है कि दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में मिली सफलता हमारे युवाओं, हमारे शोधकर्ताओं और सरकार के सभी स्तरों को सार्वजनिक सेवा वितरण के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी जो न केवल हमारे देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी एक मॉडल होगा
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श्री हेमन्त सोरेन ने 11वीं राष्ट्रीय महिला जूनियर हॉकी प्रतियोगिता 2021 का शुभारंभ किया
*मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सिमडेगा में 11वीं राष्ट्रीय महिला जूनियर हॉकी प्रतियोगिता 2021
का शुभारंभ एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम का शिलान्यास किया
*27 करोड से अधिक की लागत से 25 योजनाओं का शिलान्यास
32 करोड़ से अधिक की लागत 35 योजनाओं का उद्घाटन हुआ है
*28 करोड़ से अधिक की राशि की कुल 6 योजनाओं के जरिये 990 लाभुकों को लाभान्वित किया गया
एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के स्वावलंबन हेतु बकरी, मुर्गी, सुकर पालन हेतु आर्थिक सहायता दी गई।
क्रेडिट लिंकेज से लाभान्वित हुईं एसएचजी की महिलाएं
*कुल 101.590 करोड़ की विकासशील एवं कल्याणकारी योजनाओं
उद्घाटन और शिलान्यास एवं परिसंपत्तियों का वितरण
*मुख्यमंत्री ने सांकेतिक तौर पर 12 युवक एवं युवतियों को नियुक्ति पत्र सौंपा, कुल 79 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र
सिमडेगा के लिये अविस्मरणीय दिन है। सिमडेगा में पुनः राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। एक ओर 11वीं राष्ट्रीय महिला जूनियर हॉकी प्रतियोगिता 2021 का शुभारंभ हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, बड़े पैमाने पर सिमडेगा में विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास,उद्घाटन एवं युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपा गया। हॉकी को उसकी पराकाष्ठा और खिलाड़ियों को उम्दा संसाधन उपलब्ध कराने के
उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी स्टेडियम के निर्माण की आधारशिला रखी गई। यह सुखद क्षण है। यहां आयोजित प्रतियोगिता की गूंज दूर तलक जाएगी। ये बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कही। मुख्यमंत्री सिमडेगा के एस एस बालिका उच्च विद्यालय परिसर में 11वीं राष्ट्रीय महिला जूनियर हॉकी प्रतियोगिता 2021 के शुभारंभ एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के शिलान्यास और परिसंपत्तियों के वितरण समारोह में बोल रहे थे।
खिलाड़ियों को मिल रहा है सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकार अपना अंग बनाकर सीधी नियुक्ति दे रही है। झारखण्ड के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है। आज उसके तहत 79 नवयुवकों व नवयुवतियों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया।
जहां भी है संभावना, वहां सरकार बढ़ावा देगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सब जूनियर टूर्नामेंट का आयोजन कुछ माह पूर्व ही सम्पन्न हुआ। पुनः राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। राज्य के लिए यह सौभाग्य की बात है कि यहां देश भर से हॉकी खिलाड़ी आये हैं। देश की बच्चियां जो देश-विदेश में अपना जौहर दिखाती हैं। आज वे सिमडेगा की भूमि पर आईं हैं। झारखण्ड के खिलाड़ियों को बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। खेल एक ऐसा कार्यक्रम है जहां सौहार्द और प्रेम का सम्प्रेषण होता है। झारखण्ड सिर्फ खनिज के लिए ही नहीं बल्कि खेल के लिए भी जाना जाएगा। सरकार का संकल्प है कि खेल में जहां की संभावना है वहां सरकार खेल को बढ़ावा देगी।
खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति मिली
सिमडेगा विधायक श्री भूषण बाड़ा ने कहा कि आज का काफी अहम है। आज यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी स्टेडियम का शिलान्यास हुआ है। राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को सम्मान देने का कार्य कर रही है। सरकार ने 39 खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी है। राज्य भर में खेल के मैदान का निर्माण पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर किया जा रहा है।
खेल सामुहिक एकता को प्रतिविम्बित करता है
कोलेबिरा विधायक श्री नमन विक्सल कोंगाडी ने कहा कि खेल हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। खेल सामुहिक एकता को प्रतिविम्बित करता है। यह रोजगार पाने का बड़ा साधन है। यही वजह है कि राज्य सरकार खेल के विकास को लेकर कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को हर संभव सुविधा प्रदान करने की कोशिश की जा रही है।
खिलाड़ियों से मिले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने 11वीं राष्ट्रीय महिला जूनियर हॉकी प्रतियोगिता 2021 में भाग ले रहीं सभी टीमों के खिलाड़ियों से मिलकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और प्रतियोगिता के शुभारंभ की घोषणा की। इस प्रतियोगिता में देश भर की 26 टीमें भाग ले रहीं हैं।
इस अवसर पर सिमडेगा विधायक श्री भूषण बाड़ा, कोलेबिरा विधायक श्री नमन विक्सल कोंगाडी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विनय कुमार चौबे, सचिव पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग श्री अमिताभ कौशल, उपायुक्त सिमडेगा श्री सुशांत गौरव, हॉकी इंडिया के अध्यक्ष श्री ज्यान्द्रों दियोंगम, अध्यक्ष हॉकी झारखण्ड के अध्यक्ष श्री भोलानाथ सिंह, खिलाड़ी एवं अन्य उपस्थित थे।
समाजवादी लोकतंत्र के अग्रणी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया
कश्मीर में हिंदुओं की टारगेट किलिंग क्यों?
महर्षि बाल्मीकि का विश्व विख्यात रामायण और भ्रातृत्व स्नेह
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से श्री राजीव लोचन बख्शी ने शिष्टाचार भेंट की
रांची, मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, झारखण्ड रांची के पद पर नवनियुक्त निदेशक श्री राजीव लोचन बख्शी ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से श्री राजीव लोचन बख्शी की यह शिष्टाचार भेंट थी. ज्ञातव्य है कि श्री राजीव लोचन बक्शी पुनः सुचना एवं जनसंपर्क विभाग झारखण्ड का निदेशक बनाया गया है। इसके पहले वे मुख्य. वन संरक्षक-सह-परियोजना निदेशक, परियोजना समन्वय ईकाई, झारखण्ड सहभागी वन प्रबन्धन परियोजना, रॉची व सेवा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखण्ड, राँची के पद पर पदस्थापित थे।
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नाले में गिरते लोग कुम्भकर्णी नीद में रांची नगर निगम अधिकारी
श्री राजीव लोचन बक्शी पुनः सुचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक बने
रांची, श्री राजीव लोचन बक्शी पुनः सुचना एवं जनसंपर्क विभाग झारखण्ड का निदेशक बनाया गया है। इसके पहले वे मुख्य. वन संरक्षक-सह-परियोजना निदेशक, परियोजना समन्वय ईकाई, झारखण्ड सहभागी वन प्रबन्धन परियोजना, रॉची व सेवा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखण्ड, राँची के पद पर पदस्थापित थे।
शारदीय नवरात्र पर रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को विजयादशमी की बधाई और शुभकामनाएं दी है
नाले में गिरते लोग कुम्भकर्णी नीद में रांची नगर निगम अधिकारी
अलाई बलाई सामाजिक एकता और सद्भावना को देता है बढ़ावा : पीएम मोदी
*एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करते हुए अलाई बलाई एक बेहतरीन मंच
को प्रस्तुत करता है
*इस उत्सव ने तेलंगाना के लोगों में त्यौहार के जश्न की भावना को और बढ़ा दिया है
*अलाई बलाई समाज में एकता और सद्भावना को बढ़ावा देती है
*यह उत्सव समावेशी भावना के साथ-साथ सामाजिक सद्भभावना की दिशा में अपना
योगदान देगा
हैदराबाद, (आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद के नेकलेस रोड पर जल विहार में आयोजित अलाई बलाई समारोह के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करते हुए अलाई बलाई एक बेहतरीन मंच को प्रस्तुत करता है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के लोक कलाकार अपनी कला को प्रस्तुत कर सकेंगे।
हरियाणा के राज्यपाल बण्डारु दत्तात्रेय को संबोधित एक पत्र में श्री मोदी ने कहा कि हैदराबाद में आयोजित अलाई बलाई समारोह के बारे में जानकर खुशी हो रही है। विजयादशमी के तुरंत बाद मनाए जा रहे इस उत्सव ने तेलंगाना के लोगों में त्यौहार के जश्न की भावना को और बढ़ा दिया है। यह हमारी अदम्य इच्छाशक्ति का भी सबूत है।
उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध संस्कृति के एक हिस्से के रूप में अलाई बलाई समाज में एकता और सद्भावना को बढ़ावा देती है। इस तरह के खुशी के अवसर सभी बाधाओं को तोड़ते हुए लोगों को साथ में लाते हैं। यह अवसर सभी को एक मौका देता है कि वे तेलंगाना की संस्कृति, परंपराओं और व्यंजनों के बारे में जाने।
प्रधानमंत्री ने लिखा, मुझे यकीन है कि यह उत्सव समावेशी भावना के साथ-साथ सामाजिक सद्भभावना की दिशा में अपना योगदान देगा। एकता और अच्छाई की भावना हर किसी के दिल में हो। तेलंगाना के राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदर्यराजन ने इस सांस्कृतिक उत्सव का उद्घाटन किया, जिसे श्री दत्तात्रेय की बेटी सुश्री बंडारू विजयलक्ष्मी द्वारा दशहरा मिलन के रूप में आयोजित किया गया है।
अलाई बलाई दशहरे से पहले नवरात्रि के जश्न के रूप में आयोजित किया जाने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। यह तेलंगाना में रहने वाले लोगों के जीवन को दर्शाता है। इस त्योहार का मकसद लोगों में भाईचारे की भावना को पैदा करना है। इसकी शुरुआत हरियाणा के राज्यपाल, पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री बण्डारु दत्तात्रेय ने निजाम कॉलेज में की थी। इसे हर साल हैदराबाद में दशहरे के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।इसमें समाज के सभी वर्गों क लोग और हर प्रांत के नेता भाग लेते हैं।
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रक्षा निर्माण को मिली नयी उड़ान
* 7 नई कंपनियों का उदय
*देह शिव बर मोहे ईहे, शुभ कर्मन ते कबहूं न डरूं
*रक्षा निर्माण को मिली नयी उड़ान
*रक्षा में आत्मनिर्भरता, भारत की रक्षा उत्पादन नीति की आधारशिला रही है
*इन नई कंपनियों में से अधिकांश के पास पर्याप्त कार्य आदेश होंगे
*ओएफबी के सभी लंबित कार्य आदेश,
जिनका मूल्य लगभग 65,000 करोड़ रुपये से अधिक है
– राजनाथ सिंह
किसी भी बड़े सुधार को शुरू करने और पूरा करने के लिए बहुत धैर्य, प्रतिबद्धता तथा संकल्प की आवश्यकता होती है। हितधारकों की प्रतिस्पर्धी आकांक्षाओं को पूरा करते हुए यथास्थिति में बदलाव के लिए सूक्ष्म संतुलित प्रयास की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में, हमारी सरकार ऐसे मजबूत निर्णय लेने और महत्वपूर्ण सुधार करने में कभी नहीं हिचकिचाती है, जो लाभदायक होने के साथ-साथ राष्ट्र के दीर्घकालिक हित में हों।
रक्षा में आत्मनिर्भरता, भारत की रक्षा उत्पादन नीति की आधारशिला रही है। सरकार द्वारा हाल ही में आत्मनिर्भर भारत के आह्वान से इस लक्ष्य की प्राप्ति को और गति मिली है। भारतीय रक्षा उद्योग, मुख्य रूप से सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करता है और इसने बाजार तथा विभिन्न उत्पादों के साथ स्वयं को भी विकसित किया है। निर्यात में हाल की सफलताओं से प्रेरित होकर, भारत एक उभरते हुए रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य करने के लिए तैयार है। हमारा लक्ष्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से, निर्यात सहित बाजार तक पहुंच के साथ-साथ डिजाइन से लेकर उत्पादन तक में, भारत को रक्षा क्षेत्र के सन्दर्भ में दुनिया के शीर्ष देशों में स्थापित करना है।
2014 के बाद से, भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में कई सुधार किये हैं, ताकि निर्यात, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और स्वदेशी उत्पादों की मांग को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक अनुकूल तंत्र तैयार किया जा सके। आयुध निर्माणी बोर्ड, रक्षा मंत्रालय के अधीन था, जिसे 100 प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली 7 नई कॉर्पोरेट संस्थाओं में बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, ताकि कार्य स्वायत्तता व दक्षता को बढ़ाया जा सके और नई विकास क्षमता तथा नवाचार को शुरू किया जा सके। इस निर्णय को निश्चित रूप से इस श्रृंखला का सबसे महत्वपूर्ण सुधार माना जा सकता है।
आयुध निर्माण संयंत्रों का 200 से भी अधिक वर्षों का गौरवशाली इतिहास रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। उनका बुनियादी ढांचा और कुशल मानव संसाधन देश की महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में, सशस्त्र बलों द्वारा ओएफबी उत्पादों की उच्च लागत, असंगत गुणवत्ता और आपूर्ति में देरी से संबंधित चिंताएं व्यक्त की गयी हैं।
आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) की मौजूदा प्रणाली में कई खामियां थीं। आयुध निर्माणी बोर्ड के पास अपनी आयुध निर्माणियों (ओएफ) के भीतर सब कुछ उत्पादन करने की विरासत थी, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति श्रृंखला प्रभावहीन थी और प्रतिस्पर्धी बनने तथा बाजार में नए अवसरों की खोज करने को लेकर प्रोत्साहन की कमी थी। आयुध निर्माणी बोर्ड द्वारा एक ही जगह विविध श्रेणी की वस्तुओं के उत्पादन में शामिल होने के कारण विशेषज्ञता का अभाव था।
सात नई कॉरपोरेट इकाइयां बनाने का यह निर्णय व्यापार प्रशासन के मॉडल में उभरने के लक्ष्य के अनुरूप है। यह नई संरचना इन कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनने और आयुध कारखानों को अधिकतम उपयोग के माध्यम से उत्पादक और लाभदायक परिसंपत्तियों के रूप में बदलने के लिए प्रोत्साहित करेगी; उत्पादों की विविधता के मामले में विशेषज्ञता को गहराई प्रदान करेगी; गुणवत्ता एवं लागत संबंधी दक्षता में सुधार करते हुए प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देगी और नवाचार एवं लक्षित सोच (डिजाइन थिंकिंग) के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी।
सरकार ने इस फैसले को लागू करते हुए यह आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी।
इन सात नई कंपनियों को अब सूचीबद्ध कर लिया गया है और उन्होंने अपना कारोबार शुरू भी कर दिया है। म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल), जोकि मुख्य रूप से विभिन्न क्षमता वाले गोला-बारूद और विस्फोटकों के उत्पादन से जुड़ी होगी और इसकी न सिर्फ मेक इन इंडिया के जरिए बल्कि मेकिंग फॉर द वर्ल्ड के माध्यम से भी तेजी से बढऩे की व्यापक संभावना है। बख्तरबंद वाहन कंपनी (अवनी) मुख्य रूप से टैंक और बारूदी सुरंग रोधी वाहन (माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल) जैसे युद्ध में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के उत्पादन में संलग्न होगी और इसके द्वारा अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करते हुए घरेलू बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की उम्मीद है। यही नहीं, यह नए निर्यात बाजारों का भी पता लगा सकती है। उन्नत हथियार एवं उपकरण (एडब्ल्यूई इंडिया) मुख्य रूप से तोपों और अन्य हथियार प्रणालियों के उत्पादन में संलग्न होगी और इसके द्वारा घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ उत्पाद विविधीकरण के माध्यम से घरेलू बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की उम्मीद है। अन्य चार कंपनियों के साथ भी यही स्थिति रहेगी।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि इन नई कंपनियों में से अधिकांश के पास पर्याप्त कार्य आदेश होंगे। ओएफबी के सभी लंबित कार्य आदेश, जिनका मूल्य लगभग 65,000 करोड़ रुपये से अधिक है, को अनुबंधों के जरिए इन कंपनियों को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा, विविधीकरण और निर्यात के जरिए कई क्षेत्रों में नई कंपनियों के फलने-फूलने की काफी संभावनाएं हैं। असैन्य इस्तेमाल के लिए दोहरे उपयोग वाले रक्षा उत्पाद भी इनमें शामिल हैं। इसी तरह आयात प्रतिस्थापन के जरिए भी नई कंपनियों का कारोबार बढऩे की व्यापक संभावनाएं हैं।
इस दिशा में एक नई शुरुआत कर दी गई है। वैसे तो आयुध कारखानों को पहले केवल सशस्त्र बलों की जरूरतों को ही पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन नई कंपनियां अब उस तय दायरे से भी परे जा सकेंगी और देश-विदेश दोनों में ही नए अवसरों का पता लगाएंगी। पहले के मुकाबले कहीं अधिक कार्यात्मक एवं वित्तीय स्वायत्तता मिल जाने से ये नई कंपनियां अब आधुनिक कारोबारी मॉडलों को अपना सकेंगी और इसके साथ ही नई तरह के सहयोग सुनिश्चित कर सकेंगी।
वर्तमान में हम आत्मनिर्भरता और निर्यात के लिए देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर सुव्यवस्थित ढंग से विशेष जोर देने के लिए विभिन्न विशिष्ट क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह परिकल्पना की गई है कि इन नई कंपनियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा कंपनियां देश में एक मजबूत ‘सैन्य औद्योगिक परिवेशÓबनाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करेंगी। इससे हमें समय पर स्वदेशी क्षमता विकास की योजना बनाकर आयात को कम करने और इन संसाधनों को स्वदेश में ही बने रक्षा उत्पादों की खरीद में लगाने में काफी मदद मिलेगी। इसमें सफलता मिलने पर हमारी अर्थव्यवस्था में व्यापक निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
हालांकि, इस दिशा में आगे विभिन्न तरह की चुनौतियां हैं। सदियों पुरानी परंपराओं और कार्य संस्कृति को रातों-रात बदलना वाकई मुश्किल है। मेरा यह मानना है कि यह एक बेहद जटिल परिवर्तन प्रक्रिया की शुरुआत है और हमारा मंत्रालय शुरुआती मुद्दों को हल करने एवं मार्गदर्शन करने के साथ-साथ इन नवगठित कंपनियों को व्यवहार्य या लाभप्रद व्यावसायिक इकाइयों में परिवर्तित करने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगा। मुझे विश्वास है कि नई कंपनियों के कर्मचारी और प्रबंधन एक नई संगठनात्मक संस्कृति के बीज बोएंगे, ताकि उनकी कंपनियों में व्यापक सकारात्मक बदलाव आए और उनका कारोबार काफी तेजी से बढ़ सके।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को विजयादशमी की बधाई और शुभकामनाएं दी है
सभी के लिए ब्रॉडबैंड- पीएम गति शक्ति पहल का एक प्रमुख पहलू
नाले में गिरते लोग कुम्भकर्णी नीद में रांची नगर निगम अधिकारी
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को विजयादशमी की बधाई और शुभकामनाएं दी है
रांची, मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को विजयादशमी की बधाई और शुभकामनाएं दी है।उन्होंने ने अपने संदेश में कहा कि दशहरा का त्यौहार अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है ।उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम सभी समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराई को खत्म करने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री सपरिवार मुख्यमंत्री आवास स्थित मंदिर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर राज्य में अमन- शांति, सुख -समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
रांची के ऐतिहासिक रातू किला में विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा के पूजन अनुष्ठान में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन शामिल हुए । इस अवसर पर राज परिवार की श्रीमती माधुरी मंजरी देवी, श्री नितेश कुमार शाहदेव और श्री उज्जवल नाथ चौधरी ने मुख्यमंत्री का परंपरा अनुसार स्वागत किया।
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शारदीय नवरात्र पर रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मध्यरात्रि से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था
श्रद्धालुओं की कतार लंबी होते हुए दो किमी दूर तक पहुंच गया
भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां माता छिन्नमस्तिके की पूजा अर्चना की
रामगढ, शारदीय नवरात्र के महानवमी व विजयादशमी तिथि के शुभ मुहूर्त पर रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़. शारदीय नवरात्र के महानवमी व विजयादशमी तिथि के शुभ मुहूर्त को लेकर देश के प्रसिद्ध सिद्धपीठ स्थल रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मध्यरात्रि से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। इसके कारण सुबह होते ही श्रद्धालुओं की कतार लंबी होते हुए दो किमी दूर तक पहुंच गया। महानवमी के शुभ मुहूर्त को लेकर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां माता छिन्नमस्तिके की पूजा अर्चना की। वहीं मंदिर न्यास समिति के पुजारी छोटू पंडा ने बताया की देर रात्रि से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
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नाले में गिरते लोग कुम्भकर्णी नीद में रांची नगर निगम अधिकारी
न्यू इंडिया व जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं मोदी सरकार के मंत्री
*पिछले 30 वर्षों से सीमा-पार आतंक और उग्रवाद के कारण हम पीछे रह गए हैं
*चरार-ए-शरीफ में एसडीएच एक उच्च गुणवत्ता युक्त केंद्र है
– सभी आधुनिक सुविधा मौजूद हैं
* छात्रों ने अवसरों के लिए अनुरोध किया तथा ऑटोमोबाइल सहायक उद्योगों
को जिले में स्थापित करने की बात कही
– राजीव चंद्रशेखर
मैंने हाल ही में सितंबर के अंतिम सप्ताह में पहली बार जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। यह यात्रा कई बातें को स्पष्ट करती है। पिछले कई वर्षों में, मैंने देश-विदेश की यात्राएँ की, तो मैं अब-तक जम्मू-कश्मीर नहीं जा सका/नहीं गया। निराशा होती है, लेकिन यह सच है। न्यू इंडिया के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं मोदी सरकार के मंत्री
मुझे ईमानदार होना चाहिए – कुछ लोगों द्वारा जारी अशांति के इस अंतर्निहित विवरण की पृष्ठभूमि में एक प्रौद्योगिकी और कौशल विकास मंत्री के रूप में मुझे क्या कहना चाहिए या क्या करना चाहिए, इस बारे में मैं घबराहट का अनुभव करता था।
मैंने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, बडगाम और बारामूला जिलों की यात्रा की। हमारे प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप, मेरा कार्यक्रम लोगों से मिलने और बातचीत करने पर आधारित था। इसके साथ ही मुझे कुछ विकास परियोजनाओं का शुभारम्भ करना था, जिन्हें इस चुनौतीपूर्ण कोविड अवधि के दौरान पूरा किया गया था।
यात्रा की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने मुझसे एक बात कही और यह बात पूरी यात्रा में मेरे साथ रही। पुलिस अधिकारी भी मेरी पूरी यात्रा के दौरान मेरे साथ रहे थे। उन्होंने कहा, हमारे राज्य के बच्चे जानते हैं कि पिछले 30 वर्षों से सीमा-पार आतंक और उग्रवाद के कारण हम पीछे रह गए हैं। शेष भारत और दुनिया की तरह हम भी बेहतर जीवन चाहते हैं।
मैंने एक नए सब-डिवीजन अस्पताल और चरार-ए-शरीफ दरगाह का दौरा किया तथा युवा कश्मीरियों, उद्यमियों, किसानों, सरपंचों और जनजातीय समुदाय के सदस्यों और इन जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। प्रत्येक बैठक में, बातचीत के विषय, उनकी मांग और उनके अनुरोध वर्तमान और भविष्य के सम्बन्ध में थे। कोई उन खोए हुए वर्षों को पीछे मुड़कर नहीं देख रहा था। उन्हें खोए हुए अवसरों पर पश्चाताप जरूर था। जिन युवा छात्रों से मुझे बडगाम, बारामूला और श्रीनगर में बातचीत करने का मौका मिला, तो मैंने यह महसूस किया कि वे सभी अपने कौशल को बेहतर करने या नौकरी पाने के अवसरों में सुधार करने को लेकर गंभीर थे। चरार-ए-शरीफ में एसडीएच एक उच्च गुणवत्ता युक्त केंद्र है – सभी आधुनिक सुविधा मौजूद हैं, स्वास्थ्यकर्मियों की एक सक्षम टीम है और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से जिला अस्पताल तक की लंबी कठिन यात्रा से लोगों को राहत मिली।
बडगाम डिग्री कॉलेज की एक बैठक में, पॉलिटेक्निक कॉलेज की छात्राओं ने बातचीत के क्रम में कहा, हम अपने पॉलिटेक्निक में नए पाठ्यक्रम चाहते हैं – हम केवल मैकेनिकल और सिविल डिप्लोमा की बजाय इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर पाठ्यक्रम चाहते हैं। वे उत्साहित और आश्वस्त थीं। मैंने जितने भी तकनीकी कॉलेजों को अब-तक देखा है, उनमें आईटीआई, बडगाम को शीर्ष पायदान पर रखा जा सकता है। इस कॉलेज में एक उत्कृष्ट मोटर वाहन रखरखाव प्रशिक्षण सुविधा है, जहां मैंने यहाँ छात्रों को प्रमाण पत्र सौंपे। प्रमाण पत्र पाने वालों में कई युवा छात्राएं थीं।
बातचीत में छात्रों ने अवसरों के लिए अनुरोध किया तथा ऑटोमोबाइल सहायक उद्योगों को जिले में स्थापित करने की बात कही, ताकि प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिल सके। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने की उत्सुकता थी, क्योंकि वे महसूस करते हैं कि नरेन्द्र मोदी सरकार के रिकॉर्ड को देखते हुए यह घोषणा पिछली सरकारों से अलग होगी। यह सुनिश्चित किया जायेगा कि 3 स्तरीय प्रणाली के माध्यम से, यह पैसा आर्थिक गतिविधि का विस्तार करे और / या सीधे लोगों तक पहुंचे। मैंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी कौशल विकास को रोजगार का प्रवेश द्वार मानते हैं और रोजगार को कौशल विकास के साथ जोडऩे की जरूरत पर बल देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विजऩ के बारे में जानकर छात्र वास्तव में उत्साहित हुए। दूसरे राज्यों की तरह यहां के युवा भी आईटी उद्योग के विकास में शामिल होना चाहते हैं, क्योंकि वे शेष भारत में प्रगति के बारे में पढ़ते और सुनते हैं।
मैंने बडगाम और बारामूला में दो पारंपरिक कौशल क्लस्टर का भी दौरा किया। यहाँ स्थानीय कारीगर कालीन, कागज़ की लुगदी और परिधानों का उत्पादन करते हैं तथा उद्यमी इनका निर्यात करते हैं। पिछले कई वर्षों में, इन उद्यमों के लिए जरूरी कार्य-कुशलता में और कारीगरों की संख्या में गिरावट आई है। इन सुन्दर उत्पादों का जम्मू-कश्मीर से वर्तमान निर्यात 600 करोड़ रुपये का है और दुनिया में मांग लगभग 10-15 हज़ार करोड़ रुपयों की है, जो करीब 25-30 लाख कारीगरों को रोजगार दे सकता है। पारंपरिक कौशल से जुड़े उद्योग के सन्दर्भ में पीएम के विजन को ध्यान में रखते हुए, मैंने इन समूहों के विकास, उनके व्यापार और इन व्यवसायों को विकसित करने हेतु आवश्यक, कारीगरों के कौशल-विकास के लिए समर्थन देने का निर्णय लिया है।
किसी भी बैठक में मेरे सामने सुरक्षा या आतंक का मुद्दा एक बार भी नहीं उठा। यह मेरे स्वयं के अनुभव के लिए उल्लेखनीय था। श्रीनगर का खतरनाक माने जाने वाला लाल चौक भी चहल-पहल से भरा हुआ था और रोज शाम को यहाँ तिरंगे की आभा फैलती थी।
मेरा मानना है कि एक राजनीतिक नेता के लिए सर्वोत्तम उपायों में से एक यह है कि वह अपने लोगों के दिल और दिमाग में कितनी अधिक आकांक्षा और महत्वाकांक्षा पैदा करता है। इस सन्दर्भ में, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 75 वर्षों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में आकांक्षाओं को एक नया प्रोत्साहन दिया है। निस्संदेह जम्मू-कश्मीर प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों ने बहुत प्रयास किये हैं, सेवा और बलिदान का उदाहरण प्रस्तुत किया है तथा लोगों को सुरक्षित रखने के लिए चौबीसों घंटे काम किया है। ऐसे समय में जब हमारे पड़ोस और दुनिया के कई हिस्सों में, महिलाएं और युवा दमनकारी शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि निरंकुश शासन उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को नष्ट कर रहे हैं, पीएम मोदी सरकार दृढ़ संकल्प के साथ हमारे युवाओं को अधिक से अधिक सपने देखने और आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बना रही है – सरकार की भूमिका, पूरे देश में हमारे युवाओं के लिए आशा और आकांक्षा की किरण बनना है, क्योंकि भारत अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष की ओर आगे बढ़ रहा है।
यात्रा के दौरान यह कहने में मुझे आनंद का अनुभव हुआ कि जम्मू-कश्मीर का भाग्य 3 सामंती परिवारों और शायद एक केंद्रीय मंत्री द्वारा नियंत्रित किया जाता था।न्यू इंडिया के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं मोदी सरकार के मंत्री अब नरेन्द्र मोदी सरकार की पूरी ताकत है और 77 मंत्रियों की उनकी टीम, भारत के सभी लोगों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रही है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास का प्रेरणादायी विचार, न्यू इंडिया को गति दे रहा है।
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आम जनता को झटका देने की तैयारी में सरकार, जीएसटी में बढ़ोतरी पर कर रही विचार
नई दिल्ली, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार कुछ सामान और सेवाओं पर टैक्स बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम पर ज्यादा सरल टैक्स रेट स्ट्रक्चर करने के मकसद के साथ विचार किया जा रहा है। जीएसटी दरों को बढ़ाने की यह योजना ऐसा समय पर की जा रही है, जब अगले साल की शुरुआत में देश के बड़े राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। जीएसटी पर पैनल की बैठक दिसंबर में होने की उम्मीद है। इस पैनल की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं। इसमें वर्तमान के चार रेट वाले सिस्टम से बदलाव किया जा सकता है। इस समय देश में 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी की दर से जीएसटी लगाया जाता है। इसमें कुछ जरूरी सामान जैसे खाने की चीजों पर सबसे कम दर और लग्जरी सामान पर सबसे ज्यादा रेट से टैक्स लगता है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने ब्लूमबर्ग को बताया है कि अगली बार सबसे कम दो रेट में बढ़ोतरी की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम दो दरों में से एक 5 फीसद को बढ़ाकर 6 फीसद और 12 को 13 फीसदी किया जा सकता है। इन दो दरों से सबसे ज्यादा प्रभावित आम आदमी ही होता है। इस चरणबद्ध योजना के तहत दरों को चार से घटाकर तीन पर लाया जाएगा। राज्य के वित्त मंत्री अगले महीने के आखिर तक इस मामले में अपने प्रस्तावों को रख सकते हैं। ब्लूमबर्ग ने वित्त मंत्रालय को इस पर प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया, लेकिन वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।
बता दें जुलाई 2017 से मोदी सरकार ने जीएसटी लागू किया था। जीएसटी की एक देश, एक टैक्स व्यवस्था के तहत आपको एक ही टैक्स देना होता है। जीएसटी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि किसी भी सामान या सर्विस पर इस टैक्स की दर पूरे देश में एक जैसी होती है। यानी देश के किसी हिस्से में मौजूद कस्टमर या कंज्यूमर को उस वस्तु या सेवा पर एक जैसा ही टैक्स देना होता है. जीएसटी को 3 प्रकार में बांटा गया है— सेंट्रल जीएसटी(ष्टत्रस्ञ्ज), स्टेट जीएसटी(स्त्रस्ञ्ज) और इंटीग्रेटेड जीएसटी(ढ्ढत्रस्ञ्ज)। (एजेंसी)
मानवाधिकारों के नाम पर देश की छवि खराब करते हैं कुछ लोग, रहना होगा सावधान – मोदी
*महिलाओं की सुरक्षा के लिए 700 जिलों में वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए गए हैं
*यहां मेडिकल. पुलिस, मेंटल काउंसिलिंग और लीगल हेल्प दी जाती है
*650 से ज्यादा फास्ट ट्रैक कोर्ट भी स्थापित किए गए हैं
(आरएनएस) पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि कुछ लोग मानवाधिकारों के नाम पर देश की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने यह बात कही। इसके साथ ही उन्होंने मानवाधिकारों और महिलाओं के लिए किए गए कामों का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, महिलाओं की सुरक्षा के लिए 700 जिलों में वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए गए हैं। यहां मेडिकल. पुलिस, मेंटल काउंसिलिंग और लीगल हेल्प दी जाती है। इसके अलावा 650 से ज्यादा फास्ट ट्रैक कोर्ट भी स्थापित किए गए हैं। इनमें रेप जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई की जा रही है।
मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाए जाने का भी उन्होंने जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, दशकों से मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ कानून की मांग कर रही थीं। हमने उनके अधिकारों को प्रदान किया। इसके अलावा हज के दौरान मुस्लिम महिलाओं को हमने महरम से भी मुक्त करने का काम किया है। अपने नेतृत्व वाली सरकार की पीठ थपथपाते हुए पीएम मोदी ने कहा, गरीब लोगों को जब टॉयलेट, कुकिंग गैस जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं तो उनकी आकांक्षाएं बढ़ती हैं और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी मिलती है।
तीन तलाक के खिलाफ कानून के अलावा मैटरनिटी लीव का भी किया जिक्र
तीन तलाक के खिलाफ कानून के अलावा पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए 26 सप्ताह की मैटरनिटी लीव के प्रावधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए संघर्ष और हमारा इतिहास मानवाधिकारों के मूल्यों और उनके लिए प्रेरणा का बहुत बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हमारे यहां लोकतंत्र और अधिकार कायम रहे हैं। लेकिन कई ऐसे देश हैं, जहां बीते दशकों में ये अधिकार छीने गए हैं।
मानवाधिकारों पर सेलेक्टिव रवैये से होगा देश को नुकसान
पीएम नरेंद्र मोदी ने मानवाधिकारों को लेकर सेलेक्टिव अप्रोच अपनाने वालों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग किसी घटना में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात करते हैं, लेकिन वैसी ही किसी दूसरी घटना पर चुप्पी साध जाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इस तरह का सेलेक्टिव व्यवहार लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। ऐसे लोग अपने बर्ताव से देश की छवि को खराब करने की कोशिश करते हैं। इस कार्यक्रम में होम मिनिस्टर अमित शाह भी मौजूद थे।
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हिमाचल प्रदेश में झारखंड के मजदूरों के साथ मारपीट की घटना पर झारखंड सरकार ने लिया संज्ञान
*राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने कंपनी से बात कर मामले को सुलझाया
*मारपीट की घटना के बाद कई मजदूरों ने वापस आने की इच्छा जताई
*पहले समूह के 16 मजदूरों के वापस आने के लिए ट्रेन टिकट की व्यवस्था की गई
रांची, राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला स्थित लंबर नामक स्थान पर झारखंड के मजदूरों के साथ बीते दिनों हुई मारपीट की घटना पर संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर श्रम विभाग के राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष के पदाधिकारियों ने किन्नौर के लंबर में स्थित नोरवेन कंपनी के मालिक धर्मेंद्र राठी से बातचीत की। नोरवेन वहीं कंपनी है जिसमें झारखंड के मजदूर काम करने गए थे।
झारखंड के मजदूरों के साथ मारपीट की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए कंपनी से कहा है।
कंपनी के मालिक धर्मेंद्र राठी ने जानकारी दी है कि घटना में घायल हुए मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कंपनी झारखंड के उन मजदूरों को, जो वापस लौटना चाहते हैं, आवेदन देने को कहा है।
इसके अलावा पहले समूह के 16 मजदूरों को वापस झारखंड भेजने के लिए ट्रेन टिकट की व्यवस्था की गई है। ये मजदूर रविवार (10 अक्टूबर) को झारखंड आने के लिए ट्रेन में बैठ गए हैं। सभी मंगलवार को कोडरमा पहुंचेंगे। वहां से बस से वापस अपने गृह जिला खूंटी लौटेंगे।
मजदूरों को 1 माह का वेतन और बकाया उनके बैंक खाते में भेज देने की मांग कंपनी ने स्वीकार कर ली है। कंपनी ने कहा है कि झारखंड के जो भी मजदूर वापस घर लौटना चाहते हैं, वे आवेदन दें। कंपनी समूह में उनके लौटने की व्यवस्था करेगी।
मारपीट की घटना के बाद मामले में किन्नौर में एफआईआर दर्ज किया गया है। इस पर भी पहल कर समझौता कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि बीते 40 वर्षों से झारखंड के मजदूर हिमाचल प्रदेश आकर काम करते रहे हैं और झारखंड के मजदूरों के साथ उनकी सहानुभूति है। वे झारखंड सरकार से इस मामले में सहयोग करते रहेंगे।
बता दें कि झारखंड के खूंटी सहित अन्य जिलों के 150 मजदूर हिमाचल प्रदेश में काम करने गए थे। बीते दिनों किसी बात पर विवाद होने पर वहां के स्थानीय मजदूरों ने झारखंड के मजदूरों की पिटाई कर दी थी।
इसमें झारखंड के दो तीन मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनका इलाज हिमाचल प्रदेश के अस्पताल में चल रहा है।
इधर वापस लौट रहे मजदूरों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने घर वापसी पर पहल करने के लिए मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता सहित राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष के प्रति आभार जताया है।
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खाद्य सुरक्षा के तहत खाद्य सुरक्षा जांच अभियान चलाया गया
देवघर, अभिहित अधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी श्री दिनेश कुमार यादव के निर्देशानुसार “eatrightdeoghar” कैम्पिंग के तहत शहरी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा के तहत खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दिनेश मरांडी द्वारा जांच अभियान चलाया गया। जिसके तहत शहरी क्षेत्र के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट से सैंपल लेकर जांच की गई।
इसके अलावा शहर के आज़ाद चौक में मिलावटी पनीर बेचने वाले दुकानदार का पनीर को सीज कर 2000 का जुर्माना किया गया। साथ ही इसके गंदगी, साफ-सफाई, गैर खाद्य colour का प्रयोग करने वाले दुकानों पर फाइन किया गया जिसमें चंदवंसी होटल पर 1000,यादव होटल पर 2000,संतोष मिस्ठान भंडार पर 10000,बासुकी मिस्ठान भंडार पर 5000, पीपल छाया पर 3000, माँ तारा स्वीट्स पर 3000 पर जुर्माना किया गया। वही अभिहित अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि आने वाले दिनों में खाद्य सामग्री बेचने वालों पर छापेमारी की जाएगी एवं खाद्य सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन पर कड़ी करवाई की जाएगी।
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‘31 दिसंबर तक करें मजदूरों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन’
ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर जिला क्रियान्वयन समिति की बैठक
उपविकास आयुक्त श्री विशाल सागर की अध्यक्षता में बैठक
पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन निःशुल्क है
रांची, असंगठित क्षेत्र का मजदूरों का ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर आज दिनांक 08 अक्टूबर 2021 को उप विकास आयुक्त, रांची श्री विशाल सागर की अध्यक्षता में जिला क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में जिला श्रम अधीक्षक, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी रांची, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता रांची पूर्वी एवं पश्चिमी प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल रांची शहरी एवं ग्रामीण, कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग कार्य मामले रांची, कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 एवं 2, कार्यपालक अभियंता भवन निर्माण निगम, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई प्रमंडल रांची, डीपीएम जेएसएलपीएस, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं जिला समन्वयक सीएससी जुड़े थे।
‘31 दिसंबर तक करें मजदूरों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन’
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त श्री विशाल सागर ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर पदाधिकारियों के साथ आवश्यक जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर मजदूरों का रजिस्ट्रेशन 31 दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना है। इस कार्य हेतु सभी विभागों में नोडल ऑफिसर बनाए गए हैं, जिन्हें उप विकास आयुक्त द्वारा निर्देश दिया गया कि विभाग अंतर्गत जो भी असंगठित मजदूर हैं, उनका पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।
रजिस्ट्रेशन के बाद मजदूरों को मिलेगा लाभ
ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का डाटाबेस तैयार किया जाएगा और इसके बाद उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ आसानी से मिल पाएगा। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से संबंधित विस्तृत जानकारी नोडल पदाधिकारियों को देने का निर्देश उप विकास आयुक्त द्वारा दिया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त ने कहा कि ई-श्रम पोर्टल पर मजदूरों के रजिस्ट्रेशन में सीएससी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने जिला समन्वयक सीएससी को इसे लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
ये हैं असंगठित मजदूर, जिनका हो सकेगा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
सन्निर्माण कामगार, प्रवासी कामगार, खेतीहर कामगार, पशुपालन मजदूर, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, घरेलू कामगार, मछुआरा, ईट भट्ठा/क्रशर में काम करने वाले मजदूर, मनरेगा कामगार, एनआरएलएम/एनयूएलएम के अंतर्गत एसएसजी सदस्य, स्ट्रीट वेंडर्स, रिक्शा चालक, मिड डे मील कामगार, फेरीवाला इत्यादि।
*ई-श्रम पोर्टल पर निबंधन के लिए आवश्यक पात्रता
*श्रमिक की उम्र 16 से 59 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
*जो आयकर दाता न हो।
*ईपीएफओ/ईएसआईसी/एनपीएस का सदस्य न हो।
*असंगठित श्रमिक श्रेणियों में कार्यरत हो।
*पोर्टल पर निबंधन के लिए आवश्यक
*आधार संख्या
*आधार से जुड़ा मोबाइल एवं एक्टिव मोबाइल नंबर।
*आईएफएससी कोड के साथ बचत बैंक खाता।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक अगर किसी भी श्रमिक के पास उसका आधार लिंक मोबाइल नंबर नहीं है तो वह अपने नजदीकी सीएससी सेंटर में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के द्वारा रजिस्ट्रेशन करवा सकता है।
ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से लाभ
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक रजिस्ट्रेशन के बाद असंगठित कामगारों को पीएमएसबीवाई के तहत दो लाभ का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। भविष्य में ऐसे कामगारों के सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ इस पोर्टल के माध्यम से प्रदान किये जाएंगे। यह कार्ड पूरे देश में मान्य होगा तथा असंगठित कामगारों को पहचान मिलेगी। आपातकालीन और राष्ट्रीय महामारी जैसी स्थितियों में पात्र असंगठित कामगारों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए इस डेटाबेस का उपयोग किया जाएगा।
कैसे होगा निबंधन
असंगठित कामगार इस पोर्टल पर या निकटतम सीएससी सेंटर पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण निःशुल्क है। कामगारों को सीएससी ऑपरेटर सहित किसी तरह की कोई शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है।
आर्थिक रूप से कमजोर युवा भी कर सकेंगे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी
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