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अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से 4.30 घंटे हुई पूछताछ, 60 करोड़ के फ्रॉड मामले में EOW ने दर्ज किए बयान

मुंबई 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का बयान दर्ज किया है। एक अधिकारी के अनुसार, शिल्पा से लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक पूछताछ की गई और उनके बयान को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड किया गया।

EOW की टीम ने यह पूछताछ शिल्पा शेट्टी के घर पर की। इस दौरान शिल्पा ने अपनी ऐडवर्टाइजिंग कंपनी के बैंक खाते से जुड़े लेनदेन की जानकारी दी और कई दस्तावेज भी पेश किए, जिन्हें अब पुलिस जांच रही है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यह कपल लुकआउट सर्कुलर (LOC) के निलंबन के लिए कोर्ट पहुंचा था ताकि वे थाईलैंड के फुकेत में 2 से 5 अक्टूबर तक की अपनी यात्रा कर सकें।

कपल की ओर से वकीलों ने बताया कि उनके पास यात्रा और ठहरने की पूरी बुकिंग है और उन्होंने पहले भी जांच एजेंसियों का सहयोग करते हुए विदेश यात्रा की है। इस केस में 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है, जो कपल की अब बंद हो चुकी कंपनी Best Deal TV Pvt. Ltd. से जुड़ा है।

UY Industries Pvt. Ltd. के डायरेक्टर दीपक कोठारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2015 से 2023 के बीच राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया और उन्होंने करीब 60.48 करोड़ रुपये का निवेश किया। शिल्पा ने इस निवेश पर व्यक्तिगत गारंटी भी दी थी।

राज कुंद्रा ने 15 सितंबर को पुलिस के समन पर EOW के सामने पेश होकर पूछताछ में भाग लिया था। अब इस मामले में मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की बेंच ने राज्य पक्ष से 8 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

कपल ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि वे अक्टूबर और दिसंबर में अमेरिका, श्रीलंका, मालदीव, दुबई और लंदन की यात्राएं करना चाहते हैं। कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को करेगा।

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बाल-बाल बचे एक्टर विजय देवेरकोंडा, कार हुई हादसे का शिकार

हैदराबाद 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)- हैदराबाद-बेंगलुरु राजमार्ग यानी एनएच-44 पर हुए एक हादसे में एक्टर विजय देवेरकोंडा बाल-बाल बच गए। उऩकी कार हादसाग्रस्त हो गई। एक्टर की कार को पीछे से अन्य कार ने टक्कर मार दी।

विजय देवरकोंडा पुत्तापर्थी से हैदराबाद लौट रहे थे। खबरों के मुताबिक, उनकी कार को मामूली नुकसान हुआ, लेकिन सौभाग्य से न अभिनेता को कोई चोट आई और न ही उनके साथ सफर कर रहे किसी को।

पुलिस के मुताबिक, ‘एक्टर विजय देवरकोंडा पुट्टपर्थी से हैदराबाद कार से जा रहे थे, तभी आगे चल रही बोलेरो गाड़ी अचानक राइड साइड की ओर मुड़ गई, जिससे उनकी कार बोलेरो के बाएं हिस्से से टकरा गई. कार के बाएं हिस्से को नुकसान पहुंचा है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

विजय देवरकोंडा और दो अन्य लोग कार में सवार थे, वह तुरंत एक दूसरी गाड़ी में बैठ गए, और उनकी टीम ने इंश्योरेंस के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।’

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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने आरईसी की 5.71 करोड़ रुपए की मोबाइल चिकित्सा इकाइयों को हरी झंडी दिखाई

अलवर 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): दूरस्थ समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने मिशन के अनुरूप, आरईसी लिमिटेड ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, अलवर को तीन वर्षों की अवधि में पाँच मोबाइल चिकित्सा इकाइयों (एमएमयू) के संचालन के लिए ₹5.71 करोड़ का सहयोग दिया है।

इन एमएमयू को 5 अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, राजस्थान सरकार संजय शर्मा द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

समारोह में आरईसी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) टीम और महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष श्री एम. एल. मीणा के साथ-साथ जिला प्रशासन और भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

जीपीएस-सक्षम ट्रैकिंग सिस्टम से लैस, ये एमएमयू राजस्थान के कुछ सबसे वंचित और आदिवासी इलाकों को कवर करते हुए, अलवर, भरतरी और बहरोड़-कोटपुली जिलों के समुदायों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाएँगे।

इस पहल से हर महीने 10,000 से ज़्यादा लोगों को मुफ़्त चिकित्सा परामर्श, उपचार, दवाइयाँ और निवारक स्वास्थ्य सेवा जागरूकता का लाभ मिलने की उम्मीद है।

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अब अस्पताल नहीं कर पाएंगे कैशलेस इलाज से इनकार, केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स को सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

नई दिल्ली 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): केंद्र सरकार ने देश के करीब 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों में एक दशक बाद बड़ा संशोधन किया है।

इलाज की नई दरें 13 अक्टूबर से लागू हो जाएंगी, जिससे निजी अस्पतालों द्वारा कैशलेस इलाज से इनकार करने की समस्या खत्म होने की उम्मीद है। सरकार ने अस्पतालों के लिए दरों में औसतन 25-30% की बढ़ोतरी की है और सभी CGHS-पैनलबद्ध अस्पतालों को नई दरें स्वीकार करने का सख्त निर्देश दिया है।

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

पिछले कई सालों से यह एक बड़ी समस्या बन गई थी कि CGHS से जुड़े ज्यादातर निजी अस्पताल पुरानी दरों को बहुत कम बताकर कैशलेस इलाज देने से मना कर देते थे। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले अपनी जेब से देना पड़ता था और बाद में रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था।

वहीं, अस्पतालों का तर्क था कि 2014 के बाद से दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था, जबकि मेडिकल खर्चों में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। कर्मचारी यूनियनों की लगातार मांग के बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया है।

नई दरें कैसे होंगी तय?

सरकार ने अब एक पारदर्शी और व्यावहारिक फॉर्मूला तैयार किया है, जिसके तहत दरें चार मुख्य कारकों पर आधारित होंगी:

  1. अस्पताल का एक्रेडिटेशन (NABH/NABL): प्रमाणित अस्पतालों को बेहतर दरें मिलेंगी।
  2. शहर की श्रेणी: X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए अलग-अलग दरें होंगी।
  3. अस्पताल का प्रकार: सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को 15% अधिक रेट मिलेगा।
  4. वार्ड का प्रकार: जनरल वार्ड और प्राइवेट वार्ड की दरों में 5% का अंतर होगा।

अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया कि जो अस्पताल 13 अक्टूबर तक नई दरों को स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें CGHS पैनल की सूची से हटा दिया जाएगा (डि-एम्पैनल)। साथ ही, सभी अस्पतालों को 90 दिनों के भीतर नए समझौते (MoA) पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा।

कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा

इस बड़े सुधार के बाद उम्मीद है कि अब पैनल में शामिल अस्पताल CGHS लाभार्थियों को कैशलेस इलाज देने से मना नहीं कर पाएंगे।

इससे लाखों कर्मचारियों और विशेषकर पेंशनर्स को इलाज के लिए तुरंत मोटी रकम का इंतजाम करने की चिंता से मुक्ति मिलेगी और रिफंड की लंबी प्रक्रिया का झंझट भी खत्म हो जाएगा। यह कदम CGHS प्रणाली को अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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पंजाब समेत सात राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 11 नवंबर को डाले जाएंगे वोट

नई दिल्ली 07 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग ने सात राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर भी उपचुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। उपचुनावों के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को नतीजे जारी होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम और ओडिशा में उपचुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नगरोटा विधानसभा सीट, राजस्थान की अंता, झारखंड की घाटशिला, तेलंगाना की जुबली हिल्स, पंजाब की तरनतारन, मिजोरम की डम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होंगे।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को बडगाम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गांदरबल से ही विधायक रहने का निर्णय लेते हुए, साफ कर दिया है कि वह अपने पुश्तैनी निर्वाचन क्षेत्र से अब बाहर जाकर चुनाव नहीं लड़ेंगे। अदालत द्वारा सजा होने के बाद कंवर लाल मीणा को अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। इसकी वजह से राजस्थान का अंता विधानसभा क्षेत्र रिक्त हो गया।

रामदास सोरेन के निधन से झारखंड के घाटशिला, मगंती गोपीनाथ के निधन से तेलंगाना के जुबली हिल्स क्षेत्र, डॉ. कश्मीर सिंह सोहल के निधन से पंजाब के तरनतारन, लालरिंतलुआंगा सैला के निधन से मिजोरम के डम्पा और राजेंद्र ढोलकिया के निधन से ओडिशा के नुआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र रिक्त हुए।

सात राज्यों के आठ विधानसभा क्षेत्रों में एक चरण में उपचुनाव होंगे, जहां 11 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को मतगणना होगी।

वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार की सभी 243 सीट पर दो चरण में चुनाव होंगे। पहले चरण के लिए 6 नवंबर को और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी। वहीं, चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को जारी होंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव को लेकर आयोग ने तमाम तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही फेक न्यूज पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।

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भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने तबाह कर दिए थे PAK के F-16, अमेरिका ने की थी गुप्त मदद

नई दिल्ली 07 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तबाह हुई पाकिस्तानी वायुसेना को फिर से खड़ा करने के लिए अमेरिका ने गुप्त रूप से मदद का हाथ बढ़ाया है। हालांकि, इस सनसनीखेज दावे को लेकर किसी भी पक्ष से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी, जिसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तानी क्षेत्र में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।

इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना को भारी सैन्य क्षति उठानी पड़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में पाकिस्तान के एक साब ईरी 2000 AWACS (एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान, एक लॉकहीड सी-130 परिवहन विमान और कम से कम चार एफ-16 लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुँचा। इसके अतिरिक्त, कई रडार सिस्टम और एयर डिफेंस यूनिट्स के भी तबाह होने की बात कही गई है।

बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तानी वायुसेना के भोलारी एयरबेस को हुआ, जहाँ हैंगर में खड़ा एक एफ-16 विमान भी हमले की चपेट में आ गया था।

रिपोर्ट में पाकिस्तानी रक्षा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि भोलारी एयरबेस पर क्षतिग्रस्त हुए ईरी विमान की मरम्मत के लिए अमेरिकी वायुसेना के इंजीनियरों की एक टीम तत्काल पाकिस्तान पहुँची थी।

इस मरम्मत और अपग्रेडेशन के काम के लिए पाकिस्तान द्वारा 400 से 470 मिलियन डॉलर की एक बड़ी राशि को गुप्त आपातकालीन फंड से मंजूरी दी गई थी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि अमेरिका ने कथित तौर पर इस मरम्मत कार्य में चीन को शामिल होने से रोक दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद अमेरिका ने दोहा, अबू धाबी और मैरीलैंड में स्थित अपने एयरबेस से विशेषज्ञों की टीमें पाकिस्तान भेजी थीं। फिलहाल यह कहा जा रहा है कि अधिकांश नुकसान की भरपाई की जा चुकी है।

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सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा में बड़ी सेंध! सुनवाई के दौरान CJI पर वकील ने उछाला जूता, मचा हड़कंप

नई दिल्ली 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : देश की सर्वोच्च अदालत की सुरक्षा में एक बड़ी चूक का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान 60 वर्षीय एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की।

जूता बेंच तक पहुंचने से पहले ही गिर गया, जिससे CJI को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस घटना के दौरान हमलावर वकील ‘सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारे लगा रहा था। अदालत में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत दबोच लिया।

यह हैरान करने वाली घटना तब हुई जब चीफ जस्टिस बीआर गवई अपनी बेंच पर एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान राकेश किशोर नामक 60 वर्षीय वकील ने अपनी जगह से उठकर नारे लगाना शुरू कर दिया और बेंच की तरफ जूता उछाल दिया।

इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, कोर्टरूम में तैनात सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और हमलावर वकील को तुरंत पकड़कर हिरासत में ले लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है कि उसने यह कदम क्यों उठाया।

इस अप्रत्याशित घटना के बावजूद चीफ जस्टिस बीआर गवई बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने बेपरवाही से अपना काम जारी रखा और मामले की सुनवाई करते रहे।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “मुझे ऐसी चीजों से फर्क नहीं पड़ता।” मौके पर मौजूद अन्य वकीलों ने भी बताया कि चीफ जस्टिस इस वाकये से बिलकुल परेशान नहीं हुए और सामान्य रूप से कामकाज जारी रखा।

पुलिस ने बताया कि आरोपी वकील राकेश किशोर के पास से वकीलों और क्लर्कों को जारी किया जाने वाला एक एंट्री कार्ड भी बरामद हुआ है। इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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छह और ग्यारह, एनडीए नौ दो ग्यारह’ बिहार चुनाव की घोषणा के बाद लालू प्रसाद यादव ने कसा तंज

पटना 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में डबल इंजन सरकार की विदाई तय है।

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

एनडीए और इंडिया ब्लॉक के दल अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। इसी बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से डबल इंजन सरकार की विदाई तय है।

लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “छह और ग्यारह, एनडीए नौ दो ग्यारह।”

इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि बिहार से एनडीए की विदाई तय है। यह पहली बार नहीं है जब लालू प्रसाद यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधा है। वह अक्सर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार पर कटाक्ष करते रहते हैं।

एक अन्य पोस्ट में पूर्व सीएम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार की डबल इंजन की सरकार का मतलब भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।

उन्होंने कहा कि इस भ्रष्ट व्यवस्था को बदलना है। इस बार बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री को बदलना है और सरकार भी बदलेंगे।

जहां एक ओर लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर हमलावर रहे हैं और सरकार बदलने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार का नेतृत्व वह अपने बेटे और राजद नेता तेजस्वी यादव में देखते हैं।

उन्होंने कई मंचों से तेजस्वी को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए जनता से अपील भी की है। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “तेजस्वी के नेतृत्व में, नया बिहार बनाएंगे।”

बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को जारी होंगे। इलेक्शन को लेकर चुनाव आयोग ने तमाम तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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झारखंड में तीन कफ सिरप पर लगा प्रतिबंध, बच्चों की मौत के बाद सरकार सतर्क

रांची 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। झारखंड सरकार ने राज्य में तीन कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। ये कार्रवाई उन रिपोर्ट्स के बाद की गई है, जिनमें बताया गया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कुछ बच्चों की मौत संदिग्ध कफ सिरप के इस्तेमाल से हुई।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय, नामकुम (रांची) की ओर से जारी आदेश के अनुसार, तीन कफ सिरप (कोल्ड्रेफ, रेपीफ्रेश टीआर और रिलाइफ सिरप) में डायइथाइलीन ग्लाइकॉल की मात्रा ज्यादा पाई गई है।

निदेशालय ने सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र में इन सिरप की बिक्री और उपयोग पर सख्त निगरानी रखें। साथ ही दुकानों और अस्पतालों में निरीक्षण कर सैंपलिंग की जाए और नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।

डायइथाइलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक रसायन है। इसका अधिक मात्रा में सेवन जानलेवा हो सकता है। यही कारण है कि सरकार ने इन सिरप को ‘मानक के विपरीत’ बताते हुए तुरंत प्रतिबंधित कर दिया है।

सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे इन तीनों कफ सिरप का इस्तेमाल न करें और यदि घर में मौजूद हो तो तुरंत नष्ट कर दें या नजदीकी औषधि नियंत्रण अधिकारी को सूचना दें।

यह प्रतिबंध झारखंड सरकार की ओर से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सावधानीपूर्ण और सख्त कदम माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप के इस्तेमाल से बच्चों की मौत के बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर संदिग्ध कफ सिरप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

इससे पहले 5 अक्टूबर को कफ सिरप की गुणवत्ता और उनके अनुचित उपयोग से जुड़ी हालिया चिंताओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी।
बैठक में औषधि गुणवत्ता मानकों के अनुपालन की समीक्षा की गई और विशेष रूप से बच्चों में कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग पर जोर दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के निर्देश पर आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान तीन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई थी। पहला, औषधि निर्माण इकाइयों में गुणवत्ता मानकों के लिए अनुसूची ‘एम’ और अन्य जीएसआर प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना।

दूसरा, बच्चों में कफ सिरप का तर्कसंगत उपयोग बढ़ाना और अतार्किक संयोजनों से बचना। तीसरा, खुदरा फार्मेसियों के विनियमन को मजबूत कर ऐसे फार्मूलेशन की अनुचित बिक्री रोकना शामिल था।

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ग्रेटर नोएडा में प्लास्टिक की फैक्ट्री में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर जुटी

ग्रेटर नोएडा 07 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । ग्रेटर नोएडा के उद्योग विहार, ईकोटेक थर्ड थाना क्षेत्र स्थित एक बड़ी औद्योगिक इकाई में सोमवार की देर रात भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि यह कंपनी फ्रूटी पेय पदार्थ के लिए इस्तेमाल होने वाले पाइप और पैकेजिंग सामग्री का निर्माण करती है।

अचानक लगी इस आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। फैक्ट्री के अंदर बड़ी मात्रा में ज्वलनशील प्लास्टिक और पैकिंग मटेरियल मौजूद था, जिसके कारण आग तेजी से फैलती चली गई। देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं और लपटों से घिर गई।

घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड विभाग की लगभग 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास में जुट गईं। फायर विभाग के अधिकारी और सीएफओ सहित कई टीमें भी तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया।

फायर कर्मियों को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि आग फैक्ट्री के भीतर गहराई तक पहुंच चुकी है। बहुमंजिला इमारत पूरी तरीके से जलकर राख हो चुकी है।

फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण पाने में अभी समय लगेगा क्योंकि फैक्ट्री परिसर में रासायनिक पदार्थों और पैकिंग सामग्री के ढेर मौजूद हैं, जो लगातार जल रहे हैं।

हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच चुकी हैं और आसपास के इलाके को खाली कराया गया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके।

आग लगने के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। दमकल विभाग ने आग बुझाने के लिए ग्रेटर नोएडा, सूरजपुर, दादरी और नोएडा से अतिरिक्त फायर टेंडर मंगवाए हैं। मौके पर हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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पंजाब में आम आदमी पार्टी में बगावत, जनता पार्टी अध्यक्ष नवनीत चतुर्वेदी ने भरा राज्यसभा नामांकन

चंडीगढ़, 06 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना क्रम के तहत आज पंजाब विधानसभा स्थित सेक्रेटरी पंजाब असेंबली के दफ्तर में जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवनीत चतुर्वेदी पहुंचे।  जहाँ उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अपना नामांकन राज्यसभा चुनाव हेतु दाखिल किया।

जिसको रिटर्निंग अधिकारी ने स्वीकार किया।  आम आदमी पार्टी के दस विधायकों ने नवनीत चतुर्वेदी को अपना समर्थन देते हुए उनके पक्ष में नामांकन पत्र उन्हें सौंपा। और फॉर्म2C के साथ चतुर्वेदी ने अपना नामांकन दाखिल किया।

इस घटना से इतना स्पष्ट है कि आम आदमी पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार राजिंदर गुप्ता की जीत आसान नहीं है। इस संबंध में कल सुबह ग्यारह बजे विस्तार से चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीडिया ब्रीफिंग हेतु नवनीत चतुर्वेदी प्रेस से रूबरू होंगे और नए पॉलिटिकल घटनाक्रम पर अपना ऑफिसियल बयान देंगे।

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बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे पर गए सांसद खगेन मुर्मू और विधायक शंकर घोष पर खूनी हमला

घटना को लेकर तृणमूल व भाजपा में जुबानी जंग शुरु

कोलकाता 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । उत्तर बंगाल में बाढ़ की तबाही का जायजा लेने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद खगेन मुर्मू और विधायक शंकर घोष पर सोमवार को हमला हुआ। भीड़ के बीच हुई इस घटना में सांसद खगेन मुर्मू घायल हो गए, जबकि शंकर घोष की गाड़ी पर पथराव किया गया, जिससे उसके शीशे टूट गए। खगेन मुर्मू का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खून से लथपथ नजर आ रहे हैं।

भाजपा के अनुसार, यह घटना नागराकाटा के बामनडांगा क्षेत्र में तब हुई जब मालदा उत्तर के सांसद खगेन मुर्मू और सिलिगुड़ी के विधायक शंकर घोष राहत कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। दोनों नेता सुरक्षा कर्मियों के घेरे में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की ओर पैदल जा रहे थे, तभी भीड़ में से कुछ लोगों ने अचानक धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इसी दौरान एक व्यक्ति ने पीछे से शंकर घोष को धक्का दे दिया।

हालात बिगड़ते देख सुरक्षा कर्मियों ने नेताओं को सुरक्षित निकालने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भगदड़ के बीच सांसद खगेन मुर्मू को पीछे से मारा गया, जिससे उनके चेहरे और नाक पर चोट आई और खून बहने लगा। घबराए नेता किसी तरह अपनी गाड़ी तक पहुंचे, लेकिन तब तक भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी पर ईंटें फेंकीं, जिससे गाड़ी के शीशे टूट गए।

घटना के बाद भाजपा नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, ” आज नागराकाटा में तृणमूल के गुंडों ने सांसद खगेन मुर्मू पर हमला किया। इस राज्य में अब कानून नहीं, बल्कि दुष्कर्मियों का शासन चल रहा है।

उत्तर बंगाल में भारी तबाही के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्निवल में व्यस्त थीं और आज उनकी पार्टी के लोग इस तरह का तांडव मचा रहे हैं।”

वहीं, उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने मीडिया से बात करते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि घटना स्थल पर विरोध करने वालों के हाथ में किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं था। इसलिए तृणमूल कांग्रेस का नाम इस घटना में घसीटना गलत है। बहरहाल, घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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संयत रहें और किसी के बहकावे में नहीं आएंः ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री का आपदा प्रभावित इलाकों में दौरा, आर्थिक मदद दी व नौकरी का ऐलान

जलपाईगुड़ी/दार्जिलिंग/सिलीगुड़ी 06 Oct,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सीएम ममता बनर्जी उत्तर बंगाल के आपदा प्रभावित इलाकों के दौरे पर हैं। उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले 23 लोगों के परिवारों को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ ही मृतक परिवार के एक सदस्य को होमगार्ड की नौकरी देने का ऐलान किया।

वहीं सीएम ममता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद खगेन मुर्मू और विधायक शंकर घोष जैसे नेताओं पर हुए हमले के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने आज दोपहर उत्तर बंगाल पहुंचकर नागराकाटा और जलपाईगुड़ी ज़िलों में स्थिति का जायजा लिया और संयम व एकता का संदेश दिया।

उनके शब्दों में, ‘इस समय कोई अप्रिय घटना वांछनीय नहीं है।’ सीएम ममता ने कहा कि, संयत रहें और किसी के बहकावें में नहीं आएं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि, उपरोक्त तत्काल आर्थिक सहायता का उद्देश्य परिवारों को अचानक और दुखद क्षति से उबरने और आपदा के कारण उत्पन्न तत्काल वित्तीय कठिनाइयों से निपटने में मदद करना है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए तेज़ी से संसाधन जुटा रही है कि ये धनराशि बिना किसी देरी के लाभार्थियों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में 23 लोगों की जान चले जाने की बात कही है। सीएम ने कहा कि, धैर्य रखेंऔर शांत रहें। आपदा के समय सभी को मिलकर संकट का सामना करना पड़ता है। यही हमारी मानवता और इंसानियत है।” उधर, स्थानीय लोगों को आगाह करते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “अगले दो-एक दिन में फिर से ज्वार आ सकता है। वह समय बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार ने यहां सड़क के किनारे एक राहत शिविर खोला है। जो लोग आ गए हैं, उन्होंने अच्छा किया है। जो लोग अभी भी अपने घरों से चिपके हुए हैं, वे जल्दी से यहां आ जाएं। आप सुरक्षित रहेंगे। आपको खाने-पीने की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।”

उधर, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिनके घर नष्ट हो गए हैं, उनके लिए सरकार घर बनाएगी। सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि, “मुझे पता है कि पैसे से किसी की जान की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी है कि वह संकट में लोगों के साथ खड़ी रहे। इसलिए मुआवजा और नौकरी की यह मदद दी जा रही है, ताकि पीड़ित परिवारों को भविष्य में दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।”

मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि उत्तर बंगाल की स्थिति और भी खराब इसलिए हुई, क्योंकि पड़ोसी देश भूटान से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया। उन्होंने इस आपदा को “मानव-निर्मित” बताया। ममता बनर्जी के अनुसार, जैसे दक्षिण बंगाल में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बांधों से पानी छोड़ने से बाढ़ की स्थिति बनी, वैसे ही भूटान की ओर से पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर बंगाल में यह संकट पैदा हुआ।

हालांकि, भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के इस बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा आपदा के समय जिम्मेदारी से बचने के लिए दोषारोपण का खेल शुरू कर देती हैं। दक्षिण बंगाल में वह डीवीसी को दोष देती हैं और उत्तर बंगाल में भूटान को। उन्हें यह समझना चाहिए कि इस समय प्राथमिकता लोगों की मदद करना है, न कि आरोप-प्रत्यारोप में उलझना।

राज्य सरकार के अनुसार, अब तक उत्तर बंगाल के पहाड़ी, तराई और डुआर्स (भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में हिमालय की तलहटी में स्थित जलोढ़ बाढ़ के मैदान) क्षेत्रों में बारिश और भूस्खलन के कारण कम से कम 23 लोगों की मौत दर्ज की गई है।

उत्तर बंगाल में बाढ़ की स्थिति पर ममता ने कहा कि नागराकाटा-मिरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से उत्तर बंगाल में 12 घंटे तक लगातार 300 मिमी बारिश हुई है, भूटान और सिक्किम से पानी आकर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है।’ सीएम ने सवाल किया कि बंगाल कितने राज्यों का पानी संभाल सकता है? उन्होंने कहा, ‘जब बिहार में बारिश होती है, तो पानी फरक्का से आता है, जब उत्तर प्रदेश में बारिश होती है, तो पानी फरक्का से आता है।’ इसके बाद उन्होंने इसी दिन फिर से डीवीसी पर निशाना साधा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज फिर डीवीसी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘डीवीसी अपनी मर्ज़ी से पानी छोड़ रहा है, खुद को खाली कर रहा है। वह खुद को बचा रहा है, झारखंड को बचा रहा है। मैं चाहती हूं कि झारखंड बचे।’ इसके बाद उन्होंने कहा, ’20 साल से यह कहते-कहते थक गए हैं कि मैथन, डीवीसी, पंचेत – पानी भरने की क्षमता नहीं है, तो इसे रखने की क्या ज़रूरत है? अगर बांध न होते तो अच्छा होता। पानी अपने आप आता, अपने आप जाता। सब बराबर बाँट सकते थे।’

उन्होंने एक बार फिर डीवीसी के कारण दक्षिण बंगाल की भारी पीड़ा का ज़िक्र किया। मुख्यमंत्री ने आज उत्तर बंगाल के पर्यटकों को लेकर भी एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने सभी पर्यटकों को बचा लिया है। डायमंड हार्बर का एक भी व्यक्ति नहीं मिला है। इसके अलावा, आज 500 पर्यटकों को नीचे लाया जा रहा है और 45 वोल्वो बसों में फंसे पर्यटकों को नीचे लाया गया है। 250 लोगों को सिलीगुड़ी में रखा गया है।’

होटलों को निर्देश दिया गया है कि जो पर्यटक अभी तक नहीं आए हैं, उनसे अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए। ज़रूरत पड़ने पर सरकार इसका ध्यान रखेगी। जब तक पुलिस उन्हें सुरक्षित नहीं बचा लेती, तब तक उन्हें होटल नहीं छोड़ना चाहिए। उन्हें वापस लाना हमारी ज़िम्मेदारी है।

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भाजपा सरकार में किसान ठगा और उपेक्षित: अखिलेश यादव

लखनऊ 06 Oct, : (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) –  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार में किसान पूरी तरह उपेक्षा और शोषण का शिकार है।

भाजपा के सत्ता में आने के बाद से न तो किसानों को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, और न ही उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल पा रहा है। बढ़ती महंगाई के कारण खेती की लागत दोगुनी हो गई है, लेकिन किसानों की फसलों का दाम लगातार घट रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को धान और अन्य फसलों के लिए डीएपी, यूरिया जैसी जरूरी खाद समय पर उपलब्ध नहीं करा पाई।

किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ा, कई स्थानों पर लाठीचार्ज हुए, किसानों की तबीयत बिगड़ी और कुछ की तो जान तक चली गई, परंतु संवेदनहीन भाजपा सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने कहा कि अब जब किसानों को गेहूं, आलू, चना, मटर जैसी रबी फसलों के लिए खाद की आवश्यकता है, तब भी सरकार की कोई तैयारी नहीं है।पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में कालाबाजारी और मुनाफाखोरी चरम पर है। खाद की किल्लत और कालाबाजारी के चलते किसान परेशान है जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत से फसल पैदा करता है लेकिन भाजपा सरकार में उसका लागत मूल्य भी वसूल नहीं हो पाता। आलू, गन्ना, धान और गेहूं के किसानों को न तो समर्थन मूल्य मिल रहा है, न बकाया भुगतान।अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों से झूठे वादे किए और “आय दोगुनी” करने का दावा सिर्फ जुमला साबित हुआ। गन्ना मूल्य को लेकर सरकार लगातार चुप्पी साधे हुए है और आलू किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस सरकार में बिचौलियों का राज चल रहा है — बिचौलिए मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि किसान अपनी ही जमीन पर ठगा और असहाय महसूस कर रहा है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जब-जब भाजपा सत्ता में आती है, किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाता है। पूरे प्रदेश में किसानों की जमीनें और फसलें लूटी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के रवैये से किसान निराश, दुखी और अपमानित है, लेकिन आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश का किसान भाजपा को सत्ता से हटाकर अपने साथ हुए धोखे और अपमान का बदला जरूर लेगा।

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दुर्गा पूजा के बाद जनता दरबार में उमड़ी फरियादियों की भीड़

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सुनीं जिलावासियों की समस्याएं

प्राथमिकता से सुनी गई सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों की समस्याएं

भू-राजस्व से संबंधित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश

खतियानी रैयतों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश

जनता दरबार में कई शिकायतों का हुआ ऑन द स्पॉट निष्पादन

रांची,06.10.2025 – दुर्गा पूजा के बाद आयोजित जनता दरबार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री के समक्ष सोमवार को बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे।

जनता दरबार में ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों की संख्या अधिक रही। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को प्राथमिकता देते हुए उनकी समस्याएं पहले सुनी गईं।

महिला की वृद्धा पेंशन समस्या का हुआ तत्काल समाधान

सामाजिक सुरक्षा के तहत वृद्धा पेंशन नहीं मिलने की शिकायत लेकर पहुंची एक महिला की समस्या का मौके पर ही निष्पादन किया गया।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा को जांच करने के निर्देश दिये, जिसमें पता चला कि महिला की पेंशन स्वीकृत है और बैंक खाते में राशि भी आ रही है परंतु KYC अपडेट न होने के कारण राशि निकासी में बाधा आ रही थी।

उपायुक्त ने संबंधित बैंक को तुरंत DBT चालू करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

परिवार से बेदखल बुजुर्ग अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे जनता दरबार

रांची के डोरंडा निवासी एक बुजुर्ग अपने बेटों द्वारा जमीन से बेदखल किए जाने की शिकायत लेकर जनता दरबार पहुंचे।
बुजुर्ग ने भावुक होकर अपनी आपबीती उपायुक्त के समक्ष रखी। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सिटी एसपी और संबंधित अंचल अधिकारी को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिये।

भू-राजस्व मामलों में त्वरित निष्पादन पर विशेष ध्यान

जनता दरबार में लंबित दाखिल-खारिज, सीमांकन, दोहरी जमाबंदी, भूमि पर अवैध कब्जा, पंजी-2 में सुधार जैसे कई राजस्व संबंधी मामले आए।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने प्रत्येक मामले के दस्तावेजों की स्वयं जांच की और संबंधित अंचल अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

राहे अंचल के धनंजय महतो की शिकायत का तुरंत समाधान

राहे अंचल के निवासी धनंजय महतो ने अपनी खरीदी गई जमीन के प्लॉट नंबर में सुधार हेतु आवेदन दिया। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने संबंधित अंचल अधिकारी से बातचीत कर शिकायत का तत्काल निष्पादन कराया।

खतियानी रैयतों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश

जनता दरबार में जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित कई शिकायतें सामने आईं।

बुंडू अंचल के एक खतियानी रैयत ने बताया कि उनके पूर्वजों की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने इस संबंध में संबंधित अंचल अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी खतियानी रैयत को परेशानी न हो, यह सभी अंचल अधिकारी सुनिश्चित करें।

हर मंगलवार अंचल स्तर पर भी जनता दरबार का आयोजन

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुविधा देने हेतु उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर हर मंगलवार को जिले के सभी अंचल कार्यालयों में भी जनता दरबार आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं राजस्व कर्मचारी उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने जिले वासियों से जनता दरबार में पहुंचकर लाभ उठाने की अपील की है।

जनता दरबार में झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से संबंधित शिकायतें भी आई, जिसके समाधान हेतु सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, रांची को उपायुक्त द्वारा निर्देशित किया गया।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा ने कहा है कि जनता दरबार का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है। प्रत्येक शिकायत का निष्पादन प्राथमिकता से किया जा रहा है, ताकि लोगों को प्रशासनिक सेवाओं का सीधा लाभ मिल सके।

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बिहार चुनाव: क्या बेकार हो जाएगा आपका पुराना वोटर कार्ड? चुनाव आयोग ने दिया हर सवाल का जवाब

पटना 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के मन में वोटर कार्ड को लेकर चल रही आशंकाओं पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विराम लगा दिया है।

पटना में अपने दो दिवसीय दौरे के समापन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मतदाताओं को नया वोटर कार्ड जारी नहीं किया जाएगा और पुराने कार्ड पूरी तरह से वैध रहेंगे।

मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “जिन मतदाताओं के डाटा में विशेष पुनरीक्षण के दौरान कोई बदलाव या अपडेट (जैसे फोटो, पता आदि) हुआ है, केवल उन्हें ही 15 दिनों के भीतर नया वोटर कार्ड (EPIC) जारी किया जाएगा।

जिनके पास पुराने वोटर कार्ड हैं और उनके डाटा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, उनका वही कार्ड मतदान के लिए पूरी तरह मान्य रहेगा।” उन्होंने यह भी साफ किया कि मतदान के लिए पहले से स्वीकृत अन्य पहचान पत्र भी पहले की तरह ही मान्य रहेंगे।

आधार कार्ड की अनिवार्यता पर चल रहे विवाद पर भी चुनाव आयोग ने स्थिति साफ की। ज्ञानेश कुमार ने कहा, “मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आधार कार्ड देना अनिवार्य न था और न है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, आधार न तो जन्मतिथि का प्रमाण है और न ही नागरिकता का।” उन्होंने बताया कि मतदाता बनने के लिए भारत का नागरिक होना ही एकमात्र शर्त है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान को संतोषजनक बताते हुए कहा कि अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि आयोग 22 नवंबर से पहले नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी करने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है।

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दुश्मन की पनडुब्बियों की अब खैर नहीं, भारतीय नौसेना को कल मिलेगा साइलेंट किलर

नई दिल्ली 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): भारतीय नौसेना अपने स्वदेशी निर्माण कार्यक्रम के तहत आईएनएस ‘एंड्रोथ’ को कमीशन करने जा रही है। यह भारतीय नौसेना का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है।

इसे सोमवार को नेवल डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में एक भव्य समारोह में नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर उपस्थित रहेंगे।

आईएनएस एंड्रोथ का कमीशन होना भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि और स्वदेशीकरण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

हाल के महीनों में नौसेना के बेड़े में कई अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हुए हैं। नौसेना के बेड़े में इस मजबूती से भारत की समुद्री शक्ति और तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

आईएनएस एंड्रोथ, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा निर्मित है। यह भारत की बढ़ती समुद्री आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों के अनुरूप है। यह पोत भारतीय नौसेना की उस सोच को मजबूत करता है, जो स्वदेशी तकनीक, नवाचार और घरेलू उद्योगों के सहयोग से उन्नत सैन्य क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस एंद्रोथ के कमीशन से नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं में उल्लेखनीय मजबूती आएगी। विशेष रूप से तटीय या उथले जलक्षेत्रों में पनडुब्बी खतरों से निपटने की दिशा में यह पोत काफी महत्वपूर्ण है।

हाल ही में नौसेना में शामिल हुए अर्नाला, निस्तार, उदयगिरी, निलगिरी और अब आईएनएस एंड्रोथ जैसे युद्धपोत भारतीय नौसेना के संतुलित और व्यापक विकास के प्रतीक हैं। ये सभी पोत भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ की भावना को मूर्त रूप देते हैं।

नौसेना के इन जहाजों में डिजाइन, निर्माण और तकनीकी विशेषज्ञता का अधिकांश हिस्सा भारतीय शिपयार्डों और उद्योगों से आता है।

आईएनएस एंड्रोथ का कमीशन भारतीय नौसेना के उस विजन को भी साकार करता है, जो भारत को एक आत्मनिर्भर, सक्षम और आधुनिक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

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भगवान परशुराम का जीवन ज्ञान, साहस और मर्यादा का अद्भुत संगम है : मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

नई दिल्ली ,06 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा है कि भगवान परशुराम जी का जीवन ज्ञान, साहस और मर्यादा का अद्भुत संगम है। उनके आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि धर्म का सार केवल आचरण में नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने यह विचार आज अंतरराज्यीय ब्राह्मण सम्मेलन में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम पीतमपुरा स्थित वेस्ट एन्क्लेव में श्री मैथिली ब्राह्मण सभा, दिल्ली प्रदेश द्वारा आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार ब्राह्मण समाज ने सदैव ज्ञान, संस्कृति और धर्म के माध्यम से समाज को दिशा दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य हर वर्ग के लोगों को समान अवसर और सभी समुदायों के योगदान को सम्मान के साथ स्वीकार करना है।

इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के समाज कल्याा मंत्री श्री रविन्द्र इन्द्रराज सिंह, हरियाणा सरकार के मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, विधायक श्रीमती पूनम भारद्वाज सहित अनेक गणमान्यजन, सामाजिक प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए ब्राह्मण समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिनिधियों को भगवान परशुराम जी के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने समाज की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि संगठित समाज ही वास्तविक प्रगति कर सकता है।

मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि ब्राह्मण समाज केवल शास्त्रों के उपासक नहीं बल्कि शस्त्र के भी रक्षक रहे हैं, जिन्होंने धर्म, शिक्षा और सद्भावना की लौ को जलाए रखा है।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली के विकास की दिशा में सभी वर्गों से सहयोग की अपील की और कहा कि अब समय आ गया है कि दिल्ली अपने विकास की गति तेज करे और विकसित राजधानी के रूप में उदाहरण बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि हर वर्ग के लोगों को समान अवसर मिले और सभी समुदायों के योगदान को सम्मान के साथ स्वीकार किया जाए।

उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सबका सहयोग दिल्ली के सर्वांगीण विकास और हर वर्ग की प्रगति के लिए हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और समरसता के भाव को भी मजबूत करते हैं।

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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला : 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी प्रकार की सिरप नहीं दी जाएगी, एडवाइजरी जारी

रायपुर 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए।

साथ ही, यह दवाएं सामान्यतः पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी अनुशंसित नहीं हैं। यह कदम शिशुओं को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एडवाइजरी जारी होते ही छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) तथा सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि भारत सरकार की इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

साथ ही आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि खांसी या सर्दी की दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर आधारित होना चाहिए, तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में बच्चों में खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं और इसके लिए दवा देना आवश्यक नहीं होता। इसलिए आम जनता को भी डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवाएं न देने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

कड़ी निगरानी में है औषधि आपूर्ति प्रणाली

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई की गई है, उनकी राज्य में किसी भी प्रकार की सरकारी आपूर्ति नहीं रही है। ये कंपनियां सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत भी नहीं हैं। यह तथ्य राज्य में सरकारी स्तर पर आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता और सतर्कता की पुष्टि करता है।

निर्माण इकाइयों और निजी औषधालयों का निरीक्षण तेज

भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव द्वारा 5 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के पश्चात, छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। राज्यभर में औषध निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection) करने के लिए औषधि निरीक्षकों के दल गठित किए गए हैं।

प्रदेश के सभी सहायक औषधि नियंत्रकों और औषधि निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे सभी औषधि विक्रय संस्थानों का तत्काल निरीक्षण करें, ताकि एडवाइजरी के उल्लंघन की कोई संभावना न रहे। इसके साथ ही निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जा रहा है।

इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की दवाओं का अनुचित या असावधानीपूर्वक उपयोग पूर्णतः बंद हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपने बच्चों को कोई भी दवा न दें।

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नौसेना के नए पोतों का नामकरण होगा छत्तीसगढ़ की नदियों के नाम पर, बस्तर में होगी भर्ती रैली

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके निवास पर सौजन्य मुलाक़ात की। बैठक में छत्तीसगढ़ में रक्षा उद्योगों के विस्तार, बस्तर में सेना भर्ती रैली के आयोजन, और नौसैनिक पोतों को छत्तीसगढ़ की नदियों के नाम पर रखने जैसे कई अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक के दौरान रक्षा मंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि बिलासपुर के निकट राज्य सरकार ने वर्ष 2012 में भारतीय सेना को लगभग 1000 एकड़ भूमि सौंपी थी। यह भूमि वर्तमान में सेना के पास है, परंतु किसी सक्रिय परियोजना में उपयोग नहीं हो रही।

मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि यदि इस भूमि का उपयोग रक्षा उत्पादन से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों, अनुसंधान केंद्रों या उपकरण निर्माण पार्कों की स्थापना में किया जाए, तो यह न केवल क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि देश के रक्षा उद्योग नेटवर्क को भी सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि बिलासपुर का यह क्षेत्र रेल और हवाई मार्ग से भली-भाँति जुड़ा हुआ है, जिससे किसी भी रक्षा संबंधित उद्योग या अनुसंधान इकाई की स्थापना के लिए यह एक उपयुक्त स्थान बनता है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार इस क्षेत्र को रक्षा पार्क के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर कार्य करने को तैयार है। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में भारतीय सेना या वायुसेना का कोई स्थायी कैंप नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति, सामरिक स्थिरता और युवाओं में देश सेवा की भावना इसे एक रक्षा प्रशिक्षण केंद्र या भर्ती क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए आदर्श बनाती है। उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि यदि बिलासपुर या बस्तर क्षेत्र में सेना का प्रशिक्षण या भर्ती केंद्र स्थापित किया जाए, तो इससे स्थानीय युवाओं को राष्ट्र सेवा में सीधे योगदान देने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में सेना में भर्ती होने का गहरा उत्साह है, विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के युवाओं में। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा शारीरिक रूप से सक्षम, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं। इसलिए, मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से अनुरोध किया कि बस्तर क्षेत्र में एक विशेष “सेना भर्ती रैली” आयोजित की जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में सेना में भर्ती होने का अवसर मिल सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि केंद्र सरकार देश के हर कोने से योग्य युवाओं को सेना में जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बस्तर में शीघ्र ही सेना भर्ती रैली आयोजित करने का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य की नदियाँ — इंद्रावती, महानदी — केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा हैं। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि रक्षा मंत्रालय जब भी नए नौसैनिक पोतों या जहाजों को लॉन्च करे, तो उनमें से कुछ का नाम छत्तीसगढ़ की नदियों और क्षेत्रों के नाम पर रखा जा सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि INS इंद्रावती, INS महानदी या INS बस्तर जैसे नाम देश के लिए गर्व का विषय होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री के इस सुझाव की सराहना करते हुए कहा कि यह विचार न केवल प्रतीकात्मक रूप से सुंदर है, बल्कि इससे भारत की विविधता और एकता की भावना भी प्रतिबिंबित होती है।

उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगा और उपयुक्त अवसर पर इस दिशा में कदम उठाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर रक्षा मंत्री को राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए एक विशेष औद्योगिक नीति पर कार्य कर रही है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के विज़न के अनुरूप है। इस नीति के तहत राज्य में रक्षा उपकरण निर्माण, अनुसंधान, उच्च तकनीकी प्रशिक्षण और निजी निवेश के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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हिमाचल में समय से 20 दिन पहले बर्फबारी, पहाड़ों ने ओढ़ी सफेद चादर; सैलानियों के चेहरे खिले

शिमला ,06 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। मानसून की विदाई के तुरंत बाद हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से रविवार (5 अक्टूबर) को प्रदेश के कई हिस्सों में इस सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई, जो आमतौर पर होने वाले समय से करीब 20 दिन पहले है।

इस बर्फबारी से जहां तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है, वहीं पर्यटन स्थलों पर सैलानियों के चेहरे खिल उठे हैं। मौसम विभाग ने आज (सोमवार, 6 अक्टूबर) के लिए भी कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

रविवार को चंबा, लाहौल-स्पीति, सोलंग वैली और धौलाधार की पहाडिय़ों पर सीजन का पहला हिमपात हुआ। मनाली स्थित अटल टनल के प्रवेश द्वार पर हुई बर्फबारी का वहां मौजूद पर्यटकों ने जमकर आनंद लिया।

बर्फबारी की खबर लगते ही निचले इलाकों से भी लोग पहाड़ों का रुख करने लगे हैं। आमतौर पर हिमाचल में बर्फबारी अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में होती है, लेकिन इस बार मौसम ने पहले ही करवट बदल ली है।

बर्फबारी के बाद रोहतांग दर्रे पर फिसलन काफी बढ़ गई है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जो वाहनों को आगे जाने से रोक रहे हैं।

मौसम विभाग ने 6 और 7 अक्टूबर को प्रदेश में बर्फबारी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। आज के लिए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में ऑरेंज अलर्ट है।

इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। प्रदेश का अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, 11 अक्टूबर तक प्रदेश में बादल छाए रहेंगे, हालांकि आगे के लिए फिलहाल कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

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जल्द दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, भारत का पहला हाइड्रोजन प्लांट तैयार; इस रूट पर चलेगी यह रेलगाड़ी

जींद 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : हरियाणा के जींद से देश में स्वच्छ ऊर्जा के नए युग की शुरुआत होने जा रही है। भारत का पहला हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट लगभग तैयार है और अगले 10-15 दिनों में इसका काम पूरी तरह पूरा हो जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय सहित कुछ विभागों से अंतिम स्वीकृति (एनओसी) मिलना बाकी है, जो जल्द मिलने की उम्मीद है।

 प्लांट की जांच के दौरान फायर फाइटिंग सिस्टम में मिली कमियों को दुरुस्त किया जा रहा है। फिलहाल प्लांट में हाइड्रोजन गैस का उत्पादन शुरू हो गया है और इसकी टेस्टिंग जारी है। यह प्लांट प्रतिदिन 430 किलोग्राम हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये की लागत आई है।

इस पायलट परियोजना के तहत एक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) रैक को हाइड्रोजन ईंधन में अपग्रेड किया जा रहा है। सबसे पहले जींद-गोहाना-सोनीपत रेल मार्ग (करीब 89 किमी) पर हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन दौड़ेगी। ट्रेन की गति 110 से 140 किमी प्रति घंटे तक होगी और इसमें एक बार में 2638 यात्री यात्रा कर सकेंगे। हाइड्रोजन की आपूर्ति इसी जींद प्लांट से की जाएगी। प्लांट में तीन हजार किलोग्राम भंडारण क्षमता वाला ईंधन स्टेशन, कंप्रेसर और तेज रिफ्यूलिंग के लिए प्री-कूलर इंटीग्रेशन वाले दो डिस्पेंसर लगाए गए हैं।

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी, जो पारंपरिक डीजल ट्रेनों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प साबित होगी। ट्रेन का इंजन धुएं की बजाय पानी और भाप छोड़ेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहेगा और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। भारत की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन देश में हरित ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

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माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित, अब इस दिन से फिर होगी शुरू

मां के दर्शन के लिए कटड़ा में रुके हजारों श्रद्धालु

कटरा 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी जारी किए जाने के बाद श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 5 से 7 अक्टूबर तक मां वैष्णो देवी की यात्रा स्थगित कर दी है। इसके चलते रविवार को मां वैष्णो देवी भवन, यात्रा मार्ग, आद्कुंवारी मंदिर परिसर और दर्शनी ड्योढ़ी क्षेत्र पूरी तरह वीरान नजर आए।

हालांकि, देशभर से कटरा पहुंचे करीब तीन से चार हजार श्रद्धालु अभी भी कटरा में रुके हुए हैं और यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार रात श्राइन बोर्ड ने पंजीकरण केंद्रों को सामान्य समय से दो घंटे पहले, यानी रात आठ बजे ही बंद कर दिया, जिससे देर रात यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।

कई श्रद्धालु दर्शनी ड्योढ़ी तक पहुंचे और भवन की ओर जाने की अनुमति मांगते रहे, लेकिन सुरक्षा कारणों से श्राइन बोर्ड ने आगे जाने की इजाजत नहीं दी। अंततः उन्हें वापस कटरा लौटना पड़ा।

शनिवार देर शाम मौसम ने फिर करवट बदली थी। आसमान पर घने बादल छा गए और रविवार सुबह तक हल्की बारिश जारी रही। हालांकि उसके बाद मौसम साफ हो गया और दिनभर धूप खिली रही।

श्रद्धालु अब श्राइन बोर्ड से लगातार अपील कर रहे हैं कि चूंकि मौसम सुधर गया है, उन्हें भवन की ओर जाने की अनुमति दी जाए। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यात्रा बहाल करने का निर्णय मौसम की स्थिति और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

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सोनम वांगचुक को क्यों न रिहा किया जाए?’…SC का केंद्र से सीधा सवाल, गिरफ्तारी पर नोटिस जारी

नई दिल्ली 06 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): लद्दाख के प्रसिद्ध क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तारी और रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाया और केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन व जोधपुर जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि सोनम वांगचुक को आखिर क्यों रिहा नहीं किया जाना चाहिए।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के समक्ष वांगचुक की पत्नी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन आज तक परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई है कि उन्हें किस आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

सिब्बल ने कहा, “यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि एक एक्टिविस्ट को चुप कराने की कोशिश है। मेरे मुवक्किल (वांगचुक) गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, जो उनका संवैधानिक अधिकार है। यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।”

इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति (वांगचुक) को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी गई है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इन कारणों की एक विस्तृत कॉपी उनकी पत्नी को भी उपलब्ध कराई जाए।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने का आरोप है और उन्हें रासुका के तहत जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है। याचिका में गीतांजलि ने मांग की है कि उनके पति को टेलीफोन पर बात करने और उनसे मुलाकात करने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा जेल में उचित दवा, भोजन और कपड़ों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

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