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श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने मिजोरम की महिला एवं बाल विकास मंत्री से महिलाओं और बच्चों के कल्याण एवं खुशहाली से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की

नई दिल्ली  – केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने मिजोरम सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लालरिनपुई से मुलाकात की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “आज कार्यालय में मिजोरम सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लालरिनपुई जी से मुलाकात की।

हमने महिलाओं और बच्चों के कल्याण, सशक्तिकरण और खुशहाली से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की।”

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विकसित भारत – जी राम जी अधिनियम का कार्यान्वयन

नई दिल्ली – विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी: विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करता है।

यह बताया गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय एवं मानव संसाधन विकास (एनआरईजीएस) के अंतर्गत 100 दिनों के मजदूरी रोजगार के प्रावधान की तुलना में नए अधिनियम के अंतर्गत अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिनमें किसान भी शामिल हैं, के लिए गारंटीकृत मजदूरी रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि यदि निर्धारित समय के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है, तो श्रमिक अनिवार्य बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा। इस प्रकार, रोजगार और आजीविका सुरक्षा दोनों को कानूनी अधिकारों के रूप में संरक्षित किया गया है।

इसके अलावा, विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (विकसित भारत-जी राम जी) अधिनियम केवल एक रोजगार कार्यक्रम नहीं है। यह एक व्यापक ढांचा है जिसे जल सुरक्षा, मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संबंधी गतिविधियों और चरम मौसम की घटनाओं को कम करने के कार्यों के चार विषयगत कार्य क्षेत्रों के माध्यम से ग्रामीण विकास को गति देने के लिए बनाया गया है। इन क्षेत्रों के अंतर्गत किए जाने वाले कई कार्य कृषि इकोसिस्टम को मजबूत करते हैं और किसानों का समर्थन करते हैं। यह अधिनियम कृषि के चरम मौसमों के दौरान श्रम उपलब्धता को सुगम बनाकर किसानों का समर्थन करता है। यह सर्वविदित है कि बुवाई और कटाई के चरम समयों के दौरान किसानों को अक्सर श्रम की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे फसल का नुकसान हो सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए, राज्यों को कृषि के चरम मौसमों के दौरान एक वर्ष में कुल 60 दिनों की अधिसूचना जारी करने का अधिकार दिया गया है, जब कार्यक्रम के कार्यों को रोका जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कृषि कार्य सुचारू रूप से चलते रहें और किसानों को जरूरत के समय श्रम सहायता प्राप्त हो। यह प्रावधान कृषि समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है।

नए अधिनियम में जल सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है, जो कृषि के लिए मूलभूत है। तालाबों, बांधों, कृषि तालाबों, नहरों, भूजल पुनर्भरण संरचनाओं और सूक्ष्म सिंचाई सहायता प्रणालियों जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। इन उपायों से सिंचाई का दायरा बढ़ेगा, अनियमित वर्षा पर निर्भरता कम होगी और फसलों की मजबूती में सुधार होगा। यह दृष्टिकोण न केवल वर्तमान आवश्यकताओं के लिए है, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के लिए भी है।

इस अधिनियम में यह भी स्वीकार किया गया है कि किसानों की चुनौतियाँ केवल उत्पादन तक ही सीमित नहीं हैं। फसल कटाई के बाद का प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए, अनुमत कार्यों में खेत स्तर पर भंडारण, गोदाम, ग्रामीण हाट और शीत भंडारण अवसंरचना का निर्माण भी शामिल है। ये सुविधाएँ किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रूप से संग्रहित करने, मजबूरी में बिक्री से बचने और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने में सहायता करती हैं, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है।

इसके अतिरिक्त, यह अधिनियम जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ते जोखिमों का सामना करने के लिए भी कार्य करता है। इसमें बाढ़ नियंत्रण, तटबंध, जल संरक्षण, आपदा आश्रय स्थल और आपदा के बाद पुनर्निर्माण से संबंधित कार्य शामिल हैं। इससे गांवों और कृषि भूमि की मजबूती बढ़ती है और साथ ही संकट के समय रोजगार भी उत्पन्न होता है।

नए अधिनियम में कृषि से जुड़े विविध आजीविका के साधनों को बढ़ावा दिया गया है, जिनमें पशुपालन, मत्स्य पालन, वर्मी-कंपोस्टिंग, नर्सरी, बागवानी और मूल्यवर्धन गतिविधियाँ शामिल हैं। इससे किसानों को कई स्रोतों से आय बढ़ाने, स्थानीय अवसर पैदा करने, संकटग्रस्त पलायन को कम करने और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करने में सहायता मिलेगी।

इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए विकसित भारत गारंटी [विकसित भारत-जी राम जी] शुरू होने के बाद, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी योजनाओं को अधिसूचित करेंगे और उनका कार्यान्वयन शुरू करेंगे।

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी

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पूर्वी तटीय क्षेत्र मौजूदा बजट के न्यूक्लियर और मरीन रोडमैप का एक अहम हिस्सा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – ओडिशा राज्य को देश भर में घोषित चार रेयर अर्थ कॉरिडोर में से एक मिलने के साथ, पूर्वी तटीय क्षेत्र मौजूदा बजट के न्यूक्लियर और मरीन रोडमैप का एक अहम हिस्सा है, वहीं गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए जरूरी नियम भी गेम-चेंजर साबित होंगे।

यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधान मंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही, जब उनसे ओडिशा के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने मुलाकात की।

बैठक के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्वी तटीय क्षेत्र, डीप ओशन मिशन, रेयर अर्थ और न्यूक्लियर संसाधन बढ़ाने, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) में फिशरीज सुधार और ओडिशा के लिए प्रस्तावित बायो-ई3 सेल और डीबीटी केंद्र पर केंद्रित एक पूरा रोडमैप बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ओडिशा को पूर्वी तटीय रणनीति में एक प्रमुख जगह मिलेगी, जो समुद्री संसाधन, मिनरल कॉरिडोर्स, न्यूक्लियर और स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर और लाइफ साइंसेज रिसर्च को एक एकीकृत विकास फ्रेमवर्क में मिलाता है। उन्होंने कहा कि पहली बार, समन्वित संस्थागत कोशिशों के ज़रिए ओशन संसाधनों का व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें कंद्रीय संस्थान समुद्र से जुड़े कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए राज्य सरकारके साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

चर्चा में डीप ओशन मिशन को लागू करने और भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नीतिगत समर्थन को सक्षम करने पर बात हुई, जिससे ओडिशा में तटीय समुदायों के लिए नए आर्थिक रास्ते बनेंगे। मछली पालन और नियामकीय सुधारों से जुड़े नियम भी बातचीत का हिस्सा थे।

जरूरी और रेयर अर्थ मिनरल्स पर, दोनों पक्षों ने पूर्वी क्षेत्र में एक रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की क्षमता का रिव्यू किया। इस संदर्भ में, पारंपरिक रूप से केंद्रित दक्षिणी राज्यों से आगे परमाणु खनिज अन्वेषण के विस्तार पर चर्चा हुई, जिससे ओडिशा के लिए नए मौके खुलेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ओडिशा को मौजूदा बजटीय आवंटन और राष्ट्रीय पहलों से काफी फायदा होगा। राज्य में पहले से ही एक अंतरिक्ष केंद्र चालू है और प्रमुख लाइफ साइंसेज संस्थान मौजूद हैं, इसलिए बेहतर सहयोग से शोध और नवाचार के नतीजों में तेजी आने की उम्मीद है।

ओडिशा में बायो-ई3 सेल बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। राज्य में एक नया जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) केंद्र बनाने की योजना पर भी बात हुई, जिसके लिए ओडिशा सरकार ने जमीन देने में मदद की।

दोनों नेता समुद्र विज्ञान, परमाणु खनिज, अंतरिक्ष अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी में परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए करीबी तालमेल बनाए रखने पर सहमत हुए, जिससे ओडिशा भारत की विज्ञान आधारित ग्रोथ की रणनीति में एक अहम स्तंभ बन सके।

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 को लेकर मोरहाबादी स्थित डिस्पैच सेंटर का निरीक्षण

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया ने किया निरीक्षण

राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार ससमय पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश

दिनांक 22.02.2026 को मोरहाबादी अवस्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों को किया जायेगा रवाना

रांची, 11.02.2026 – नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां निरंतर जारी हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार आज दिनांक 11.02.2026 को उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया ने मोरहाबादी स्थित डिस्पैच सेंटर का निरीक्षण कर वहां चल रही तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया ने पोलिंग पार्टियों के डिस्पैच हेतु की जा रही व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने उपनिर्वाचन पदाधिकारी-सह-पंचायती राज पदाधिकारी को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी तैयारियां ससमय एवं त्रुटिरहित सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

22.02.2026 को मोरहाबादी अवस्थित डिस्पैच सेंटर से विभिन्न मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को रवाना किया जाएगा। इस अवसर पर निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया:-

पोलिंग पार्टियों के लिए काउंटरवार सुव्यवस्थित डिस्पैच व्यवस्था।

निर्वाचन सामग्री किट का पूर्ण एवं त्रुटिरहित संकलन।

पोलिंग कर्मियों की उपस्थिति का सत्यापन एवं रैंडमाइजेशन के अनुरूप प्रतिनियुक्ति।

सुरक्षा बलों की पर्याप्त प्रतिनियुक्ति एवं रूट चार्ट के अनुसार वाहन व्यवस्था।

पोलिंग पार्टियों को आवश्यक प्रशिक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पुनः स्मरण।

मेडिकल सहायता, पेयजल, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता।

कंट्रोल रूम एवं हेल्प डेस्क की स्थापना, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित समाधान संभव हो सके।

उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया द्वारा डिस्पैच के दिन भीड़-भाड़ से बचने हेतु समयबद्ध एवं चरणबद्ध व्यवस्था तथा प्रत्येक पोलिंग पार्टी को उनके निर्धारित वाहन एवं रूट की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।

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राँची जिले में प्री SA-2 परीक्षा का शुभारंभ: उत्साह और 90% से अधिक उपस्थिति के साथ शुरू हुआ परीक्षा महोत्सव

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ के दिशा-निर्देश पर गठित प्रोजेक्ट TEAM के तत्वावधान में राँची जिले के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में प्री SA-2 परीक्षा का शुभारंभ हुआ

JAC वार्षिक परीक्षा (SA-2) की तैयारी हेतु एक महत्वपूर्ण कदम

राँची जिले के लगभग 1 लाख 65 हजार छात्र-छात्राएँ परीक्षा में सम्मलित हो रहें है

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन करें

राँची,11.02.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशन में जिला शिक्षा अधीक्षक, राँची के द्वारा गठित प्रोजेक्ट TEAM के तत्वावधान में 11 फरवरी 2026 से राँची जिले के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में प्री SA-2 परीक्षा का शुभारंभ हो गया है।

यह परीक्षा कक्षा 1 से कक्षा 7 तक के सभी नामांकित छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित की जा रही है। जो 11 फरवरी से 18 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन एक पाली में एक विषय की परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुचारु रूप से संचालित हो रही है।

राँची जिले के लगभग 1 लाख 65 हजार छात्र-छात्राएँ परीक्षा में सम्मलित हो रहें है

जिले के लगभग 1 लाख 65 हजार छात्र-छात्राएँ इस अभ्यासात्मक परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं। परीक्षा की पहले दिन की औसत उपस्थिति 90% से अधिक दर्ज की गई, जो परीक्षा की प्रासंगिकता तथा जिला प्रशासन, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन के प्रति अभिभावकों व छात्रों के गहरे विश्वास को दर्शाती है। सभी विद्यालयों में शून्य निवेश के साथ अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।

परीक्षा के दौरान विद्यालय परिसरों में उत्सव का माहौल देखने को मिला। अभिभावकों एवं बच्चों में अपार उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

– यह प्री SA-2 परीक्षा 11 मार्च 2026 से शुरू होने वाली *JAC वार्षिक परीक्षा (SA-2)* की तैयारी हेतु एक महत्वपूर्ण कदम है।

– प्री-टेस्ट के परिणामों के आधार पर विषयवार विश्लेषण किया जा रहा है।

– कमजोर छात्रों के लिए *सुधारात्मक कक्षाएँ* (Remedial Classes) तुरंत शुरू की जाएंगी।

– 20 फरवरी 2026 को सभी विद्यालयों में विशेष अभिभावक शिक्षक बैठक (PTM) आयोजित की जाएगी, जिसमें अभिभावकों की उपस्थिति में परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएंगे।

– कक्षा 8 की प्री-बोर्ड परीक्षा के परिणामों के आधार पर भी विशेष प्रैक्टिस सेट एवं सतत सुधारात्मक कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन करें

प्रोजेक्ट TEAM के माध्यम से जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सके। प्री-टेस्ट के माध्यम से कमजोरियों का समय रहते पता लगाकर उन्हें दूर किया जाए ताकि वार्षिक परीक्षा में बेहतर से भी बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें।

जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग सभी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं का हार्दिक आभार व्यक्त करता है जिनके सहयोग से यह परीक्षा उत्साहपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संचालित हो रही है।

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क्षमता विकास आयोग के व्यापक जन सेवा कार्यक्रम राष्ट्रीय कर्मयोगी (चरण-II) का समापन

नई दिल्ली –  क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने 12 सितम्बर, 2024 को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए व्यवहार में सुधार की एक व्यापक राष्ट्रीय पहल, राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम की शुरूआत की। कार्यक्रम का चरण-II आज क्षमता विकास आयोग के सदस्य (एचआर) डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक समापन सत्र के साथ खत्म हुआ। कार्यस्थल के लिए इस व्यवहार कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत देश भर में लगभग 10.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। समापन सत्र में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के लगभग 300 प्रतिभागियों ने वर्चुअली हिस्सा लिया।

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) के सदस्य (एचआर) डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने पूरे कार्यक्रम में जोश के साथ शामिल होने के लिए सभी प्रतिभागी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों (एमडीओ) की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस पहल का मुख्य मकसद अंदरूनी मकसद को बाहरी सेवा के साथ फिर से जोड़ना, “सेवा भाव” को प्रेरक शक्ति के तौर पर रखते हुए, सहानुभूतिपूर्ण, सक्षम और नागरिक-केन्द्रित सेवा डिलीवरी को बढ़ावा देना है।

डॉ. बालासुब्रमण्यम ने ज़ोर देकर कहा कि यह लंबे समय के बदलाव की बस शुरुआत है, और उन्होंने इन कोशिशों को संस्थागत बनाने की अपील की ताकि “विकसित भारत” के लिए एक उत्तरदायी, लचीली और भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक संस्कृति बनाई जा सके। सीबीसी सचिव श्री जगदीप गुप्ता ने एमडीओ का आभार व्यक्त किया, और 500 से ज़्यादा संगठनों इतने बड़े स्तर पर हिस्सा लेने और उसे प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया का जिक्र किया।

कार्यक्रम के लिए सीबीसी के नॉलेज पार्टनर, इल्यूमिन नॉलेज रिसोर्सेज़ के सीईओ श्री श्रीनिवास वी. ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित लगभग 17,000 मास्टर प्रशिक्षकों को बदलाव लाने वाले उत्प्रेरकों के रूप में स्वीकार किया। लीड और मास्टर प्रशिक्षकों समेत प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को एक बदलाव लाने वाला अनुभव बताया, जिसने उनकी और कार्यक्रम के आखिरी प्रतिभागी की अपना ध्यान नियमित कार्य को पूरा करने से हटाकर अपनी ड्यूटीज़ को बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ने में मदद की। प्रशिक्षण ने उन्हें अपने रोज़ाना के काम को कुशलता और सहानुभूति लाने वाली नागरिक-प्रथम सोच अपनाने में मदद की।

राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों में सेवा भाव (सेवा की भावना) और स्वधर्म (निजी मकसद से जुड़े कर्तव्य) की गहरी भावना पर ज़ोर देने के लिए तैयार किया गया, जिसका मकसद नागरिक-केन्द्रित शासन को मज़बूत करना था। इस पहल का मुख्य बिन्दु सेवा देने की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, शासन के ढाँचों में जवाबदेही और सहयोग बढ़ाना, और अधिकारियों के बीच ज़्यादा जुड़ाव और संतुष्टि को बढ़ावा देना था।

इस कार्यक्रम को अलग-अलग चरणों में लागू किया गया था। जनवरी 2025 में शुरू किए गए फ़ेज़-I का मकसद दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में मौजूद केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना था। कार्यक्रम के चरण I के तहत 86 मंत्रालयों, विभागों और संगठनों (एमडीओ) के मुख्यालय में 17,400 से ज़्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

चरण-I में कैस्केड ट्रेन-द-ट्रेनर मॉडल अपनाया गया, जिसमें निदेशक और उप सचिव स्तर के अधिकारियों को मास्टर प्रशिक्षक के तौर पर मनोनीत किया गया। इन अधिकारियों ने क्षमता विकास आयोग द्वारा आयोजित गहन प्रशिक्षण लिया और बाद में अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों के अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षण सत्र दिए।

कार्यक्रम के चरण-II को अप्रैल, 2025 में शुरू किया गया था और देश भर में केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले संगठनों तक इसका दायरस बढ़ाया गया। हालांकि शुरुआती मकसद लगभग 7,00,000 सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था, लेकिन कार्यक्रम ने उम्मीदों से बढ़कर काम किया और देश भर में 10,00,000 से ज़्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया। नौ महीने के समय में, इस कार्यक्रम ने केन्द्र सरकार के 65 से ज़्यादा मंत्रालयों और विभागों के 500 से ज़्यादा संगठनों को कवर किया।

चरण-II कार्यक्रम के खत्म होने से केन्द्र सरकार के संस्थानों में बड़े पैमाने पर भागीदारी के साथ एक बड़े पैमाने पर व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण पूरा हुआ है। कार्यक्रम का एक खास नतीजा यह रहा है कि देश भर में 822 लीड ट्रेनर्स और 16,500 से ज़्यादा मास्टर ट्रेनर्स का एक समूह बनाया गया है, जो वयस्क-अध्ययन सिद्धांत और गतिविधि-आधारित शिक्षण विधियों पर आधारित सरलीकरण कौशल से लैस हैं। इस समूह ने मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के अंदर आंतरिक प्रशिक्षण क्षमता को मज़बूत किया है।

जन सेवा कार्यक्रम ने मंत्रालयों और विभागों में मिनिस्ट्रीज़ और डिपार्टमेंट्स में बातचीत और सहकर्मी शिक्षण को बढ़ावा देकर, और संस्थानों के अंदर तालमेल को मज़बूत करके, मिशन कर्मयोगी के ज़्यादा संगत और मिलकर काम करने की सरकार की कल्पना को भी आगे बढ़ाया है।

 

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सरकार ने पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पद संबंधी पुनर्रोजगार) संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित किया

नई दिल्ली – केन्‍द्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पदों संबंधी पुनर्रोजगार) संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित किया है।

प्रमुख परिवर्तन नियम 2 (सी) (i) को संशोधित करता है, जिसमें भारतीय संघ की नियमित सेना, नौसेना या वायु सेना के साथ-साथ सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) में किसी भी रैंक में, चाहे योद्धा हों या गैर-यौद्धा, सेवा दे चुके कर्मियों को केंद्रीय सिविल सेवाओं में पूर्व सैनिकों के पुनर्रोजगार के लिए परिभाषा के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

इस कदम से उस पहले वाली अस्पष्टता को दूर कर दिया गया है कि क्या एमएनएस अधिकारी, जो कि कमीशन प्राप्त अधिकारी होते हैं, अन्य पूर्व सैनिकों के समान पुनर्रोजगार लाभों के हकदार थे या नहीं।

यह संशोधन पुनर्रोजगार नियमों के तहत एमएनएस कर्मियों को औपचारिक रूप से मान्यता देता है और पूर्व रक्षा कर्मियों के एक व्यापक वर्ग के लिए पुनर्वास और दूसरे करियर के अवसरों को मजबूती प्रदान करता है।

नियम 2, खंड (सी) संशोधन के तहत ‘पूर्व सैनिक’ की परिभाषा में अब नियमित सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ ‘भारतीय संघ की सैन्य नर्सिंग सेवा’ भी स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है।

यह नियम उन सभी पर लागू होता है जिन्‍होंने किसी भी रैंक पर, चाहे योद्धा के रूप के या गैर-योद्धा के रूप में सेवा कीं हों। यह संशोधन 9 फरवरी, 2026 को इसके प्रकाशन के साथ ही तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गया है।

यह संशोधन औपचारिक रूप से एमएनएस कर्मियों को निम्नलिखित लाभों तक पहुंच प्रदान करता है:

आरक्षण कोटा : केंद्र सरकार के समूह ‘सी’ पदों में 10 प्रतिशत और समूह ‘डी’ पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण।
आयु सीमा में छूट : सिविल नौकरियों की पात्रता के लिए अपनी वास्‍तविक आयु में से सैन्य सेवा के वर्षों और अति‍रिक्‍त 3 वर्षों को घटाने की सुविधा।

रोजगार में प्राथमिकता : संघ लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की नजर में अन्य पूर्व सैनिकों के समान दर्जा।

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गुरुग्राम में से ‘लखपति दीदियों के सरस आजीविका मेले’ का महाकुंभ शुरु, ग्रामीण शिल्प व महिला सशक्तिकरण का दिखेगा अद्भुत संगम

नई दिल्ली – हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम एक बार फिर देश की ग्रामीण परंपराओं, लोक कलाओं और महिला उद्यमिता के रंगों से सराबोर होने जा रही है। आज से सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली पार्क ग्राउंड में ‘सरस आजीविका मेला-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर के इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। 10 फरवरी से 26 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में ‘मिनी भारत’ की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।

इस वर्ष का सरस मेले में देश के  28 राज्यों से आईं लगभग 900 से अधिक महिला उद्यमी भाग ले रही हैं, जो विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। मेला परिसर में 450 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ उत्तर में कश्मीर के पश्मीना से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के सिल्क तक और पश्चिम में राजस्थान की कढ़ाई से लेकर पूर्व में असम के बांस शिल्प तक, सब एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगें।

मेले के दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा ने स्वयं सहायता समूहों की प्रगति पर महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत वर्तमान में देश की 10 करोड़ महिलाएं संगठित हैं।

साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जी द्वारा 3 करोड़ लखपति दीदी बनने का लक्ष्य दिया गया था जिसमें से दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ दीदी लखपति दीदी बन चुकी है,और आने वाले कुछ ही समय में इससे पूरा कर लिया जाएगा।

स्वाति शर्मा ने एक महत्वपूर्ण वित्तीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ईमानदारी और आर्थिक उन्नति के कारण बैंकिंग सेक्टर में उनका विश्वास बढ़ा है। उन्होंने साझा किया कि विभिन्न राज्यों में स्वयं सहायता समूहों का एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाएं अपने ऋण का भुगतान समय पर कर रही हैं और वित्तीय प्रबंधन में कुशल हो रही हैं।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान कई सफल महिला उद्यमियों ने अपनी आपबीती और सफलता की गाथा साझा की। कई महिलाओं ने बताया कि कैसे एक समय उनके पास आय का कोई साधन नहीं था, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बाद आज वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। मेले में लगा ‘लखपति दीदी पवेलियन’ ऐसी ही सशक्त महिलाओं की कहानियों को प्रदर्शित कर रहा है।

संवादताता सम्मेलन में स्वाति शर्मा, ग्रामीण विकास मंत्रालय की निदेशक डॉ. मौलिश्री समेत राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के सहायक निदेशक चिरंजी लाल कटारिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। इन्होंने बताया कि सरस आजीविका मेला गुरुग्राम के लेजरवैली ग्राउंड (निकट इफको चौक मेट्रो स्टेशन) में 26 फरवरी तक चलेगा। मेले में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है। आम नागरिक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से लेकर रात्रि 9:30 बजे तक मेले का भ्रमण कर सकते हैं।

 

सरस मेले के मुख्य आकर्षण

इस बार सरस मेले का एक मुख्य आकर्षण ‘नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन’ है। यहाँ केवल उत्पादों की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि महिला उद्यमियों के लिए प्रतिदिन विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सत्रों में महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिजनेस प्रपोजल तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग के गुर भी सिखाए जाएगें।

मेले में विशेष रूप से इस बार ‘लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट’ पर सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को यह सिखाना है कि वे अपने उत्पादों को कम लागत में और बिना नुकसान के देश-विदेश के बाजारों तक कैसे पहुँचा सकती हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ टाइअप के माध्यम से ‘ई-सरस’ पोर्टल के प्रति भी जागरूकता बढ़ाई जा रही है, ताकि मेले के बाद भी इन महिलाओं की बिक्री जारी रह सके।

मेले में आने वाले दर्शकों के लिए ‘डेमो एवं लाइव लर्निंग एरिया’ एक विशेष अनुभव साबित होगा। यहाँ लोग केवल सामान खरीद ही नहीं रहे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख सकेगें। मिट्टी के बर्तनों को चाक पर आकार देते कुशल शिल्पकार बच्चों और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करेगें,  वहीं पारंपरिक सुई-धागे और शीशों के काम से कपड़े पर उकेरी जाने वाली कला का सीधा प्रदर्शन भी किया जाएगा। प्राकृतिक रेशों और बांस से बनाई जाने वाली ईको-फ्रेंडली टोकरियों और घरेलू सामानों का लाइव डेमो भी होगा।

खाने-पीने के शौकीनों के लिए सरस मेला किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मेले में एक विशाल फूड कोर्ट स्थापित किया गया है, जहाँ विभिन्न राज्यों की महिलाओं ने अपने क्षेत्रीय स्वादों के साथ ‘लाइव फूड स्टॉल’ लगाए हैं। यहाँ राजस्थान के दाल-बाटी-चूरमा, पंजाब के मक्के की रोटी और सरसों का साग, दक्षिण भारत के डोसा-इ़डली और बंगाल के संदेश जैसे व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है। खास बात यह है कि ये सभी व्यंजन पारंपरिक तरीके से शुद्ध मसालों का उपयोग करके बनाए जा रहे हैं।

मेला प्रशासन ने दर्शकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है। छोटे बच्चों के लिए एक भव्य ‘किड्स ज़ोन’ बनाया गया है, जहां कला गतिविधियों और कहानी सुनाने के सत्रों के माध्यम से उन्हें भारत की ग्रामीण संस्कृति से परिचित कराया जा रहा है। बुजुर्गों और महिलाओं के विश्राम के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल बनाए गए हैं। मनोरंजन के लिए प्रतिदिन शाम को विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों द्वारा लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जो मेले के माहौल को और भी उत्सवपूर्ण बना देती हैं।

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सुषमा स्वराज भवन में आज से पांच दिवसीय भारत-श्रीलंका एचटीए कार्यशाला का शुभारंभ

नई दिल्ली –  श्रीलंका सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल के लिए स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) के संबंध में पांच दिवसीय ज्ञान आदान-प्रदान कार्यशाला का आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में औपचारिक रूप से शुभारंभ हुआ।
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) की ओर से विदेश मंत्रालय के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य श्रीलंका में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) को बढ़ावा और संस्थागत रूप देने के लिए रणनीतिक मार्ग विकसित करना है।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

उन्होंने इस पहल को द्विपक्षीय स्वास्थ्य कूटनीति और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और क्षेत्रीय स्वास्थ्य पहलों को समर्थन देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अनु नागर ने भी भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) के प्रभावशाली योगदान पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि इस सिलसिले में ज्ञान का आदान-प्रदान श्रीलंका में एचटीए को संस्थागत रूप देने में लाभकारी होगा।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) से संबद्ध संस्था एचटीएआईएन (हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इंडिया) संपूर्ण भारत में स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों के मूल्यांकन और कम खर्च पर साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस पांच दिवसीय कार्यशाला में एचटीए के संस्थागत ढांचे, शासन, कार्यप्रणाली, मूल्य निर्धारण और क्रय संबंधी निर्णयों सहित कई विषयों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) की क्षमताओं और प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संभावित सहयोगी पहलों की पहचान करना है।

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राष्ट्रपति ने सेशेल्स के राष्ट्रपति की मेजबानी की

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (9 फरवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन में सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी का स्वागत किया। उन्होंने उनके सम्मान में एक भोज का भी आयोजन किया।

सेशेल्स के राष्ट्रपति हर्मिनी के भारत के पहले राजकीय दौरे पर उनका स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित हैं तथा लोकतंत्र और बहुलवाद में साझा आस्था से जुड़े हैं। हिंद महासागर की लहरें और हमारे लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष सेशेल्स अपनी स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है और साथ ही हम भारत–सेशेल्स राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं। इसलिए यह यात्रा एक अत्यंत विशेष समय पर हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेशेल्स भारत के महासागर (MAHASAGAR) विजन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिसका उद्देश्य विकास के लिए व्यापार, सतत विकास हेतु क्षमता निर्माण और साझा भविष्य के लिए परस्पर सुरक्षा के स्तंभों के आधार पर सहयोग को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि इस विजन के तहत, भारत सेशेल्स की विकास और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमेशा तैयार है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा के दौरान घोषित विशेष आर्थिक पैकेज से सेशेल्स के स्वास्थ्य, अवसंरचना, शिक्षा, रक्षा तथा क्षमता निर्माण जैसे कई प्राथमिक क्षेत्रों में भारत–सेशेल्स सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि “भारत–सेशेल्स संयुक्त विजन: सुदृढ़ संपर्कों के माध्यम से स्थिरता, आर्थिक वृद्धि और सुरक्षा” आने वाले वर्षों में हमारे सहयोग के लिए एक मजबूत मज़बूत नींव रखेगा।

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत–सेशेल्स द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश अपने लोगों के पारस्परिक हितों तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए और अधिक करीब आएंगे।

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साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत “पुलिस” और “लोक व्यवस्था” राज्य विषय हैं। अतः कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा, अपराध एवं अपराधियों की जांच, अभियोजन तथा उनसे संबंधित फॉरेंसिक विज्ञान सुविधाओं की जिम्मेदारी संबंधित राज्य की होती है।

हालांकि, केंद्र सरकार राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं(एफएसएल) को अपग्रेड करने के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करती है। निर्भया निधि से वित्तपोषित “राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के एफएसएल में डीएनए विश्लेषण एवं साइबर फॉरेंसिक क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण” योजना के तहत 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ₹244.89 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार उपलब्ध/स्थापनााधीन साइबर फॉरेंसिक प्रभागों की सूची अनुलग्नक में दी गई है।

भारत सरकार ने केन्द्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला(सीएफएसएल), हैदराबाद में राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (साक्ष्यात्मक) [एनसीएफएल(ई)] की स्थापना ₹37.34 करोड़ के कुल वित्तीय व्यय से की है। इसके अलावा, “महिलाओं की सुरक्षा” नामक योजना के अंतर्गत दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता (पश्चिम बंगाल), कामरूप (असम), भोपाल (मध्य प्रदेश) तथा पुणे (महाराष्ट्र) स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में 06 एनसीएफएल(ई) की स्थापना हेतु ₹126.84 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। जिसमें से, अब तक ₹22.51 करोड़ की राशि का उपयोग किया जा चुका है।

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की मौजूदा साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच हेतु लंबित मामलों की कुल संख्या, स्वीकृत पदों एवं रिक्तियों का विवरण केंद्र स्तर पर नहीं रखा जाता है। वर्तमान में एनसीएफएल(ई), हैदराबाद में 181 मामले परीक्षण हेतु लंबित हैं। एनसीएफएल(ई), हैदराबाद में 04-इन-हाउस विशेषज्ञ कार्यरत हैं, जिनके साथ 05-संविदा कर्मी भी कार्य कर रहे हैं।

साइबर पेशेवरों का री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग एक अंतर्निहित और सतत प्रक्रिया है तथा यह उनकी कार्यात्मक जिम्मेदारियों का हिस्सा है, जिसे मुख्यतः कार्य-स्थल पर सीखने(ऑन-द-जॉब लर्निंग) के माध्यम से किया जाता है। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय(एनएफएसयू) भी साइबर फोरेंसिक्स के क्षेत्र में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। पिछले 05 वर्षों में, एनएफएसयू द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों/कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के लिए 66 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें 1852 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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अनुलग्नक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार सूची: राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSLs) में उपलब्ध अथवा स्थापनााधीन साइबर फॉरेंसिक प्रभाग

 

क्रम संख्या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश साइबर फोरेंसिक सुविधा की स्थिति
1. हिमाचल प्रदेश उपलब्ध
2. मिजोरम उपलब्ध
3. राजस्थान उपलब्ध
4. झारखंड उपलब्ध
5. केरल उपलब्ध
6. त्रिपुरा उपलब्ध
7. उत्तर प्रदेश उपलब्ध
8. कर्नाटक उपलब्ध
9. छत्तीसगढ़ उपलब्ध
10. गुजरात उपलब्ध
11. ओडिशा उपलब्ध
12. पुड्डुचेरी उपलब्ध
13. तेलंगाना उपलब्ध
14. उत्तराखंड उपलब्ध
15. असम उपलब्ध
16. मणिपुर उपलब्ध
17. दिल्ली उपलब्ध
18. महाराष्ट्र उपलब्ध
19. पश्चिम बंगाल उपलब्ध
20. हरियाणा उपलब्ध
21. आंध्र प्रदेश उपलब्ध
22. तमिलनाडु उपलब्ध
23. बिहार उपलब्ध
24. जम्मू-कश्मीर उपलब्ध
25. सिक्किम उपलब्ध नहीं
26. पंजाब स्थापनााधीन है
27. मेघालय उपलब्ध
28. मध्य प्रदेश उपलब्ध नहीं
29. गोवा उपलब्ध
30. नागालैंड स्थापनााधीन है
31. अंडमान और निकोबार द्वीप स्थापनााधीन है
32. अरूणाचल प्रदेश उपलब्ध

*बाकी 04 केंद्र शासित प्रदेश — चंडीगढ़, दमन एवं दीव, दादरा एवं नगर हवेली, लक्षद्वीप तथा लद्दाख — अपने पड़ोसी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध फॉरेंसिक विज्ञान सुविधाओं के साथ-साथ केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं(सीएफएसएल) की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। (स्रोत – फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय)

यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया।

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पीएम दक्ष योजना के अंतर्गत कौशल विकास

नई दिल्ली – सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विमुक्‍त जनजातियों और कचरा बीनने वालों सहित सफाई कर्मचारियों को कौशल विकास से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही योजना (पीएम दक्ष) को केंद्रीय क्षेत्र की एक योजना के रूप में लागू कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत रोजगार हासिल करने की योग्यता, उद्यमिता और निरंतर आजीविका सुनिश्चित करने पर ध्‍यान केंद्रित किया गया है।

पीएम दक्ष योजना के अंतर्गत, कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण – राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पाठ्यक्रमों के तहत संचालित किए जाते हैं, जो नामांकित प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर तय किए जाते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का चयन करते समय बाज़ार की मांग, उपयुक्त बैच आकार, भौगोलिक परिस्थितियों और क्षेत्र-विशेष से संबंधित कौशल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है, ताकि वे कार्यक्रम स्थानीय श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप और उपयुक्‍त हों।

मंत्रालय ने पीएम दक्ष योजना के अंतर्गत रोजगार-संबंधी परिणामों अनिवार्य बनाया है। इसके तहत प्रशिक्षण संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होता है कि अल्‍पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को वेतनभोगी रोजगार और/या स्वरोजगार मिले। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो प्रशिक्षण लागत की तीसरी किश्त, जो 30 प्रतिशत होती है, रद्द कर दी जाती है। प्रशिक्षण संस्थानों के लिए प्रशिक्षित उम्मीदवारों हेतु रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में संबंधित उद्योगों के साथ सहयोग बनाए रखना भी अनिवार्य है।

विभाग के अधीन तीन निगम – राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) – लक्षित समूहों के पात्र युवाओं को ऋण सुविधाएँ और सहायता प्रदान करते हैं। यह समर्थन व्यवसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करने के बाद रोजगार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए परियोजना तैयारी, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के माध्यम से प्रदान किया जाता है।

पीएम दक्ष योजना के एक मूल्यांकन अध्ययन से पता चला है कि यह योजना अत्यंत प्रासंगिक और सीखने की दृष्टि से प्रभावी है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने प्रशिक्षण को अपने करियर लक्ष्यों, स्थानीय श्रम बाजार की जरूरतों और अपेक्षित सीखने के परिणामों के अनुरूप बताया। प्रभाव मूल्यांकन में विशेष रूप से महिलाओं और वंचित समूहों में आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और सामाजिक मान्यता में सुधार जैसे महत्वपूर्ण अप्रत्‍यक्ष लाभ भी सामने आए। स्थिरता के परिणाम काफी सकारात्मक रहे, क्योंकि अधिकांश लाभार्थी अर्जित कौशलों का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं, आय में दीर्घकालिक वृद्धि की उम्मीद रखते हैं, विकास में पुनर्निवेश कर रहे हैं और सुधारों को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने की क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं।

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा द्वारा आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।

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उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनिया ने नव-नियुक्त प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी एवं प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित

नव-नियुक्त पदाधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों और अपेक्षित प्रदर्शन के बारे में विस्तृत रूप से मार्गदर्शन प्रदान किया गया

कर्तव्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ करें:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,09.02.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार 09 जनवरी 2026 को समाहरणालय सभागार, राँची में उप विकास आयुक्त, राँची, श्री सौरभ भुवनिया की अध्यक्षता में राँची जिले में हाल ही में प्रतिनियुक्त / नव-नियुक्त प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (Block Supply Officer) एवं प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (Block Welfare Officer) के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य नव-नियुक्त पदाधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों और अपेक्षित प्रदर्शन के बारे में विस्तृत रूप से मार्गदर्शन प्रदान करना था।

उप विकास आयुक्त श्री सौरभ भुवनिया ने बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों से व्यक्तिगत परिचय प्राप्त किया और फिर उन्हें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए:

1. निष्ठा एवं समयबद्धता के साथ दायित्वों का निर्वहन।

2. सामान्य जनता की शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष एवं संतोषजनक निस्तारण।

3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राशन वितरण, खाद्यान्न आपूर्ति में पूर्ण पारदर्शिता एवं नियमित निगरानी।

4. सामाजिक कल्याण योजनाओं (पेंशन, छात्रवृत्ति, विधवा/विकलांग/वृद्धावस्था पेंशन, आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आदि) के लाभार्थियों तक समय पर एवं निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करना।

5. प्रखंड स्तर पर नियमित निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन, e-PoS मशीनों का प्रभावी संचालन, आधार सीडिंग की स्थिति की समीक्षा।

6. डिजिटल प्लेटफॉर्म (DBT, Aadhaar आधारित सत्यापन, PFMS, समन्वित प्रणाली) का अनिवार्य उपयोग।

7. भ्रष्टाचार, गड़बड़ी या अनियमितता की किसी भी सूचना/शिकायत पर तत्काल कार्रवाई एवं उच्चाधिकारियों को सूचित करना।

8. अनुमंडल पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं जिला कल्याण पदाधिकारी के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखना।

कर्तव्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ करें

उप विकास आयुक्त ने विशेष रूप से कहा “आपको जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह केवल सरकारी पद नहीं, बल्कि लाखों आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। आपका कार्य निष्पादन सीधे जनता के विश्वास को प्रभावित करता है। इसलिए कर्तव्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ करें ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को उसका हक मिल सके और किसी भी शिकायत का समाधान जल्द से जल्द हो सके।”

राँची जिले को एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण

उप विकास आयुक्त ने सभी नव-नियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे अपने प्रखंडों में आपूर्ति व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में राँची जिले को एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

बैठक में ITDA राँची, श्री संजय भगत, विशिष्ट अनुमंडल पदाधिकारी , राँची श्रीमती मोनी कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, राँची, श्री रामगोपाल पाण्डेय, जिला कल्याण पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। साथ ही, गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ में विभिन्न विकास कार्यों पर भी एक समीक्षा बैठक की। इन बैठकों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप-मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक तथा छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक उपस्थित थे।

 

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि केन्द्र और छत्तीसगढ़ सरकार की सुरक्षा केन्द्रित रणनीति (Security Centric Strategy), इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार व आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम आए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन सरकार में यह अब विकास का पर्याय बन चुका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा खेल, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा को गति देते हुए अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि डबल इंजन सरकार देश से माओवाद की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में नक्सलवाद अंत के कगार पर पहुँच चुका है और 31 मार्च 2026 से पहले देश पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि कई पीढ़ियों को गरीबी और अशिक्षा के अंधकार में धकेलने वाले नक्सलवाद से देश जल्द ही निजात पाने वाला है। श्री शाह ने कहा कि माओवादियों के खिलाफ चल रही लड़ाई बिखरी हुई (scattered) नहीं होनी चाहिए। विभिन्न राज्यों और केन्द्रीय एजेंसियों के बीच सुचारू समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शेष बचे माओवादियों को अन्य राज्यों में भागने नहीं दिया जाना चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर प्राप्त हों.

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक है और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां और गति देने वाली है- श्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली – केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल स्थित निवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुई हालिया ट्रेड डील को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति और नई ऊंचाइयां देने वाला साबित होगा। ट्रेड डील केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है। यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ उसे नई दिशा प्रदान करेगी। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समझौता पूरी दुनिया के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। यह डील दुनिया को संदेश देती है कि भारत की नीति कमिटमेंट की है, कॉम्प्रोमाइज की नहीं। हम आत्मविश्वास के साथ देश के हित में निर्णय लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित और सकारात्मक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। हम सौदेबाजी की राजनीति नहीं करते, बल्कि संतुलित रणनीति अपनाकर सकारात्मक संवाद में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि आज भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है।

 

डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी

केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, यह ट्रेड डील डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का एक उत्तम उदाहरण है। डिप्लोमेसी का अर्थ है राष्ट्र प्रथम, और इस समझौते में भारत के राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रखे गए हैं। डेवलपमेंट यानी विकसित भारत की दिशा में बढ़ते कदम यह डील उसके लिए भी एक मजबूत आधार प्रदान करती है। डिग्निटी का मतलब है किसान की गरिमा, और मुझे गर्व है कि इस समझौते में किसान की गरिमा का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और किसानों को लेकर देश के मन में जो भी चिंताएं थीं, उनका इस ट्रेड डील में समाधान किया गया है। यह समझौता हमारे किसानों को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह डील केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नए अवसरों का द्वार भी खोलती है। यह ट्रेड डील हमारे कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नए अवसर प्रदान करेगी और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। यही आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव है।

अमेरिका में भारतीय कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क

केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा। लेकिन अमेरिकी किसानों के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में यह छूट नहीं मिली है। भारत के कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कृषि क्षेत्र के कई उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की है। कई कृषि उत्पादों पर जो टैरिफ पहले 50 प्रतिशत तक था, उसे अमेरिका ने घटाकर शून्य कर दिया है। इसमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति वैक्स, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और कुछ अनाज भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात 4.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। मसाला निर्यात में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब इस ट्रेड डील के बाद हमारे मसालों को अमेरिका में भी नया और बड़ा बाजार मिलेगा। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत पहले से ही मसालों के वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति रखता है। दुनिया भर के करीब 200 स्थानों पर भारत मसाले और मसालों के उत्पाद निर्यात करता है। इस समझौते से मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को और गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ है। अगर विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय कृषि बाजार में आते हैं, तो उन्हें टैरिफ देना होगा। हमारे किसानों को पूरी छूट और पूरा संरक्षण प्राप्त है। यही इस ट्रेड डील की सबसे बड़ी ताकत है।

सभी संवेदनशील वस्तुएं समझौते से बाहर

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि और कृषि उत्पादों के मामले में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है और ऐसा कोई भी उत्पाद समझौते में शामिल नहीं है, जिससे किसानों को नुकसान हो। सभी संवेदनशील वस्तुओं को समझौते के बाहर रखा गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता देश के प्रमुख अनाजों को लेकर थी। सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की थी कि हमारे प्रमुख अनाज सुरक्षित रहने चाहिए और मैं गर्व से कह सकता हूं कि वो सभी पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। प्रमुख अनाज, प्रमुख फल और डेयरी उत्पादों के लिए अमेरिका के लिए कोई द्वार नहीं खोला गया है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कई अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। छिलका रहित अनाज, आटा, गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, दलहनी उत्पाद, फ्रोजन सब्जियां, संतरे, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी और मिक्स्ड डिब्बाबंद सब्जियां भारत नहीं आएंगी। डेयरी उत्पादों को लेकर भी उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादों में लिक्विड मिल्क, पाउडर, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर और चीज़, इनमें से किसी को भी भारत में एंट्री नहीं मिलेगी। कृषि और डेयरी के अलावा भारत, अमेरिका से काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, केसिया, सरसों, राई, भूसी और अन्य पाउडर मसाले नहीं मंगवाएगा। मतलब साफ है हमारे मसाले और हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।

किसान, महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसान, महिलाएं और खासकर युवा वर्ग को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। हमारे कई सेक्टर जैसे टेक्सटाइल में अब प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में हमारा टैरिफ काफी कम होकर करीब 18 प्रतिशत रह गया है। इससे टेक्सटाइल निर्यात को नई गति और नई दिशा मिलेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल निर्यात का सीधा लाभ किसानों को भी मिलेगा। टेक्सटाइल का मतलब है किसानों को फायदा, खासकर कपास उत्पादक किसानों को। इसके साथ ही जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग गुड्स और एमएसएमई सेक्टर के लिए भी ढेर सारे नए व्यापारिक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे सेल्फ हेल्प ग्रुप की बहनों का जीवन भी इस समझौते से समृद्ध होगा, क्योंकि कई उत्पादों के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह डील उनके परिश्रम और हुनर को वैश्विक पहचान दिलाएगी। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अब तक नौ एफटीए हो चुके हैं। अमेरिका के अलावा यूएई के 27 देशों, ओमान, न्यूजीलैंड और यूके के साथ एफटीए किया जा चुका है और अन्य देशों से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इन सभी समझौतों का व्यापक लाभ देश को मिलेगा। इन डील्स का फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को, किसानों को, मजदूरों को, गरीबों को, निर्यातकों और निर्माताओं को होने वाला है। इसी के माध्यम से हम 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करेंगे। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में यह समझौता और ऐसे सभी समझौते मील के पत्थर साबित होंगे। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को हृदय से धन्य

प्रधानमंत्री ने मलेशिया में प्रवासी भारतीयों के प्रमुख सदस्यों के साथ संवाद किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री ने आज मलेशिया में भारतीय प्रवासियों के प्रमुख सदस्यों और नेताओं के साथ संवाद किया। इन गणमान्य व्यक्तियों में मंत्री, सीनेटर, सांसद और आजाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी-आईएनए) के वेटरन शामिल थे। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे: मिनिस्टर ऑफ डिजिटल तुआन गोबिंद सिंह देव, मानव संसाधन मंत्री दातो श्री रमणन रामकृष्णन, डिप्टी मिनिस्टर इन प्राइम मिनिस्टर डिपार्टमेंट एम. कुलसेगरन, डिप्टी मिनिस्टर ऑफ नेशनल यूनिटी आर. युनेस्वरन एवं अन्य।

प्रधानमंत्री ने मलेशिया की प्रगति और विकास में तथा भारत-मलेशिया संबंधों को सुदृढ़ करने में भारतीय प्रवासियों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। भारतीय मूल के नेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के निर्माण में प्रधानमंत्री के नेतृत्व और भारत-मलेशिया संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में की गई पहलों के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने भारत के परिवर्तनकारी बदलाव के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और विभिन्न योजनाओं की भी सराहना की।

भारतीय मूल के नेताओं ने मलेशिया में भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों हेतु प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया, जिनमें शामिल हैं: (i) मलेशिया में भारत का पहला वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय; (ii) यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर सेंटर स्थापित करने की घोषणा; (iii) तिरुवल्लुवर स्कॉलरशिप की शुरुआत; (iv) मलेशिया में रहने वाले छठी (6वीं) पीढ़ी के भारतीय मूल के लोगों के लिए ओसीआई कार्ड का विस्तार; और (v) मलेशियाई भारतीय छात्रों के लाभ के लिए इंडियन स्कॉलरशिप ट्रस्ट फंड (आईएसटीएफ) में 3 मिलियन मलेशियाई रिंगिट (आरएम) की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान करना।

प्रधानमंत्री ने आजाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी-आईएनए) की बालक सेना के वयोवृद्ध सदस्य दातो जयराज राजा राव और नेताजी वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री राधाकृष्णन से भी मुलाकात की। उन्होंने आईएनए और उसके सैनिकों के अविस्मरणीय साहस और बलिदान की गहरी सराहना की। उन्होंने एक सशक्त और आधुनिक भारत के निर्माण के नेताजी के विजन के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

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भारत का क्वांटम भविष्य अमरावती से शुरू हो रहा है क्योंकि ‘‘नेशनल क्वांटम मिशन’’ राज्य को एक रणनीतिक स्प्रिंगबोर्ड के रूप में स्थापित कर रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आंध्र प्रदेश के अमरावती में अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि ‘‘यह केवल एक इमारत की आधारशिला नहीं है, बल्कि भारत के क्वांटम भविष्य की आधारशिला है।’’

क्वांटम प्रौद्योगिकी को एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक आवश्यकता बताते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि यदि भारत आने वाले दशकों में अपनी संचार प्रणालियों, रक्षा वास्तुकला, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और वैश्विक तकनीकी स्थिति को सुरक्षित करना चाहता है तो उसके पास इस क्षेत्र में नेतृत्व करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा राज्य मंत्री श्री नारा लोकेश, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी, डॉ. अमित सिंघी (आईबीएम रिसर्च इंडिया), डॉ. हैरिक विन (टीसीएस), श्री एम.वी. सतीश (एल एंड टी) सहित वरिष्ठ उद्योग जगत के नेता, वरिष्ठ राज्य अधिकारी, संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, अमरावती क्वांटम वैली लोगो का अनावरण, आईबीएम और टीसीएस क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ, आईबीएम-टीसीएस क्वांटम इनोवेशन सेंटर की स्थापना, क्वांटम टैलेंट हब की घोषणा, एसआरएम विश्वविद्यालय द्वारा क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी, क्वांटम-सेफ एप्लीकेशन्स पहल और नौ उद्योग भागीदारों के साथ कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान शामिल था, जो एक समन्वित उद्योग-अकादमिक-सरकारी साझेदारी का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो ‘‘भविष्य में विश्वास रखता है और आने वाले कल के सपने देखता है।’’ हैदराबाद के हाई-टेक सिटी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री के प्रौद्योगिकी-आधारित शासन से परिचित होने के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में आंध्र प्रदेश में हुई तीव्र प्रगति सहकारी संघवाद की सच्ची भावना और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा वर्णित ‘‘डबल इंजन’’ दृष्टिकोण – केंद्र और राज्य के बीच समन्वय – को दर्शाती है।

पिछले सप्ताह विशाखापत्तनम की यात्रा का जिक्र करते हुए मंत्री ने राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र परियोजना का उल्लेख किया, जो 2006 में शुरू हुई थी और लगभग दो दशकों तक रुकी रही, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर पूरी हो गई। यह केंद्र भारत के गहन महासागर मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से घोषित नीली अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को और मजबूती मिलेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक समर्पित राष्ट्रीय क्वांटम मिशन है। लगभग 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, यह मिशन 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों तक फैला हुआ है, जिसे क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरणों पर केंद्रित चार विषयगत केंद्रों के माध्यम से संगठित किया गया है। राष्ट्रीय उद्देश्यों में आठ वर्षों के भीतर 1,000 भौतिक क्यूबिट तक के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, सुरक्षित ग्राउंड-टू-ग्राउंड क्वांटम संचार नेटवर्क स्थापित करना, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाना और 2,000 किलोमीटर तक अंतर-शहर क्वांटम कुंजी वितरण प्राप्त करना शामिल है।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने समझाया कि क्वांटम प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं से लैस शत्रुओं की दुनिया में पारंपरिक कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा प्रणालियां असुरक्षित बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि क्वांटम एन्क्रिप्शन से डेटा को भेदना लगभग असंभव हो जाएगा और इसे डिकोड करने में खगोलीय समय लग सकता है। रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, यह अभूतपूर्व रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी अनुप्रयोगों के बारे में भी बात की, जिनमें ट्यूमर को बिना किसी दुष्प्रभाव के लक्षित करने में सक्षम सटीक विकिरण चिकित्सा, अंगों की गति के अनुसार गतिशील रूप से अनुकूलन और रोगी की तेजी से रिकवरी को सक्षम बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी भी इसी तरह उपग्रह संचार, सुरक्षित संचार अवसंरचना और उन्नत संवेदन क्षमताओं को नया रूप देगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने भले ही कुछ देशों की तुलना में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में देर से प्रवेश किया हो, लेकिन उभरती प्रौद्योगिकियों में वह यह देरी नहीं दोहराएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र की खोज जैसे क्षेत्रों में समानांतर अभियानों के साथ, भारत खुद को अगली वैश्विक तकनीकी के समय में सबसे आगे अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने हाल ही में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार जैव प्रौद्योगिकी, पुनर्योजी चक्र, आनुवंशिक विज्ञान, सॉफ्टवेयर-आधारित प्रणालियों और क्वांटम कंप्यूटिंग की ओर अग्रसर हो रही है।

मंत्री जी ने बताया कि भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी में बी.टेक माइनर कोर्स शुरू हो चुके हैं और एम.टेक प्रोग्रामों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षित शिक्षकों और संस्थागत सहयोग से संरचित क्वांटम अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि उन्नत निर्माण सुविधाएं और केंद्रीय अनुसंधान अवसंरचना स्थापित की जा रही हैं, जो स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुलभ होंगी। उन्होंने आईआईटी मद्रास द्वारा शुरू किए गए अग्रणी अनुसंधान पार्क मॉडल की भी सराहना की, जिसे अब पूरे देश में अपनाया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि अलग-थलग रहकर काम करने का समय समाप्त हो गया है। अमरावती क्वांटम वैली की सफलता सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास में शामिल करने में निहित है। पांच साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का विस्तार करना सहयोगात्मक विकास में वर्तमान सरकार के विश्वास को दर्शाता है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पहले ही एक छोटे से हिस्से से बढ़कर 8 अरब डॉलर का क्षेत्र बन चुकी है, और इस एकीकृत दृष्टिकोण के कारण आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

मंत्री जी ने समापन भाषण में घोषणा की कि भारत की क्वांटम यात्रा पवित्र नगर अमरावती से शुरू होती है और आंध्र प्रदेश विकसित भारत की दिशा में भारत की प्रगति में एक आधारशिला के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप अपने नवाचार इकोसिस्‍टम को स्थापित करने वाले राज्यों को भारत सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और इस बात की पुष्टि की कि केंद्र और आंध्र प्रदेश के बीच सहयोग भारत को वैश्विक क्वांटम नेता के रूप में उभरने में गति प्रदान करेगा।

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आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 के पहले पोर्ट कॉल को पूरा किया, भारत–ओमान समुद्री संबंधों को मजबूत किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को सलालाह, ओमान में अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह यात्रा जहाज की महत्वाकांक्षी दस महीने की महासागरीय यात्रा लोकायन 26 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।
इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और विश्व परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम) के सिद्धांत को दुनिया भर में प्रदर्शित करना है।

भ्रमण के दौरान आईएनएस सुदर्शनिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी और रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के जहाज अल मोज़ेर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी के साथ बातचीत की।

इन संवादों में भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों को रेखांकित किया गया और दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता को और मजबूत किया गया।

पेशेवर सहयोग को जारी रखते हुए जहाज ने रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के अधिकारियों के लिए भी एक यात्रा का आयोजन किया।

लोगों के बीच संपर्क के प्रदर्शन में सेैल ट्रेनिंग जहाज आगंतुकों के लिए खुला था। स्कूल के बच्चो सहित 600 से अधिक आगंतुकों को तीन मास्टेड बार्क का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया और उन्हें महासागर में नौकायन की बारीकियों से परिचित कराया गया।

आईएनएस सुदर्शिनी अब लोकायन 26 के अपने अगले चरण पर आगे बढ़ रही है और भारत की शाश्वत समुद्री विरासत को महासागरों में ले जा रही है।

पाल फहराए और उत्साह बनाये रखते हुए, वह समुद्री उत्कृष्टता, मित्रता और सद्भावना का प्रतीक बनकर सेवा जारी  रखती है।

 

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मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान प्रधानमंत्री का प्रेस स्टेटमेंट

Your Excellency, Prime Minister अनवर इब्राहीम

दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार!
सलामत पागी!

सबसे पहले, मैं अपने करीबी मित्र प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहीम का गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। पिछले वर्ष, मैं आसियान समिट के लिए मलेशिया की यात्रा नहीं कर पाया। लेकिन मैने मेरे प्रिय मित्र को वादा किया था, कि मैं जल्द-से-जल्द मलेशिया आऊँगा। और आज वर्ष 2026 की पहली विदेश यात्रा में, मैं मलेशिया आया हूँ।

Friends,

भारत और मलेशिया के संबंध विशेष हैं। हम मैरीटाइम neighbours हैं। सदियों से हमारे लोगों के बीच गहरे और आत्मीय रिश्ते रहे हैं। आज मलेशिया, भारतीय मूल की आबादी वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारी सभ्यताएँ, साझा सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी हुई हैं।

Friends,

पिछले कुछ वर्षों में हमारे संबंधों ने नई रफ्तार पकड़ी है। और इसमें मेरे मित्र प्रधान मंत्री अनवर इब्राहीम का विशेष योगदान रहा है।

हमारे बीच एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनुफैक्चरिंग में सहयोग बहुत मजबूत हुआ है। डिजिटल economy, bio-tech, और IT में आपसी इनवेस्टमेंट बढ़ा है। टुरिज़म, और people-to-people ties भी गहरे हुए हैं। इन्हीं उपलब्धियों से प्रेरित होकर, आज हमने हमारी साझेदारी में अभूतपूर्व गति और गहराई लाने का निर्णय लिया है।

Friends,

सिक्युरिटी के क्षेत्र में, हम काउन्टर टेररिज़म, इन्टेलिजेन्स शेरिंग, और मैरीटाइम सिक्युरिटी में सहयोग मजबूत करेंगे। हम रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाएंगे।

AI और डिजिटल technologies के साथ-साथ, हम सेमीकन्डक्टर, हेल्थ और फूड सिक्युरिटी में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे। आज आयोजित CEO Forum ने trade और investment के नए अवसर खोले हैं। हम Strategic trust से economic transformation का रास्ता बनाएंगे।

Friends,

कल मुझे मलेशिया के भारतीय प्रवासियों से मिलने का मौका मिला। अपनी उपस्थिति से, प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहीम ने भी इस सम्मेलन का गौरव बढ़ाया। 30 लाख प्रवासियों का यह living bridge हमारी बड़ी शक्ति है। उनके welfare के लिए उठाए गए कदम हमारे रिश्तों को मानवीय आधार देते हैं।

मलेशिया में भारत के workers के संरक्षण के लिए सोशल सिक्युरिटी अग्रीमन्ट, टुरिज़म के लिए ग्रैटिस e-visa, और डिजिटल पेमेंट इंटरफेस UPI का मलेशिया में लागू होना, ये सभी कदम, दोनों देशों के नागरिकों के जीवन को सरल बनाएंगे। क्यूंकि कोई भी Partnership तभी ताकत से सफल होती है, जब लाभ सीधे लोगों तक पहुँचे।

Friends,

भारत और मलेशिया को तमिल भाषा के प्रति साझा प्रेम भी जोड़ता है। मलेशिया में तमिल की मजबूत और जीवंत उपस्थिति शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में दिखाई देती है। मुझे भरोसा है कि आज के ऑडियो-विज़ुअल एग्रीमेंन्ट से फ़िल्म और संगीत, विशेष रूप से तमिल फ़िल्में, हमारे दिलों को और पास लाएंगी।

हम अपने युवाओं के बीच university exchange, start-up connect और skill डेवलपमेंट के अवसर भी बढ़ा रहे है। हमारे बढ़ते संबंधों को सपोर्ट करने के लिए, हम मलेशिया में नया consulate भी खोलने जा रहें हैं।

Friends,

Indo-pacific क्षेत्र विश्व की ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। हम आसियान के साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत आसियान centrality को प्राथमिकता देता है। मलेशिया की सफल आसियान अध्यक्षता के लिए मैं एक बार फिर आपको बहुत बहुत बधाई देता हूँ।

मलेशिया जैसे मित्र देशों के सहयोग से भारत, आसियान के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाएगा। हम इस बात पर सहमत हैं कि आसियान–भारत व्यापार समझौते, आयटिगा की समीक्षा शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।

Friends,

आज हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी सार्थक चर्चा की। वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में भारत और मलेशिया की बढ़ती मित्रता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हमारा साझा मत है कि आज के challenges का समाधान करने के लिए, Global institutions का रिफॉर्म जरूरी है। हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है:

No double standards. No compromise.

Excellency,

भारत-मलेशिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता की हम सराहना करते हैं। आइए हम साथ मिलकर prosperous मलेशिया का आपका सपना, और विकसित भारत के हमारे संकल्प को साकार करें।

एक बार फिर, आपकी मित्रता, आपके गर्मजोशी भरे स्वागत, और आतिथ्य के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। हम आपको भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

बहुत बहुत धन्यवाद।
जुम्पा लागी!

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10 फरवरी 2026 को जिले के 619 बूथों पर Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की विशेष अपील

10 फरवरी को बूथ पर दवा न ले पाने वाले व्यक्तियों को 25 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर दवा उपलब्ध कराई जाएगी

राहे, सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड में 10 फरवरी 2026 को विशेष कैंप का आयोजन

उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों को उपायुक्त द्वारा प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा

फाइलेरिया मुक्त राँची के लिए हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,08.02.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी जिलेवासियों से विशेष कर (राहे, सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड ) अपील करते हुए कहा की राष्ट्रीय लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत हमारे जिले को फाइलेरिया (हाथीपाँव) से पूर्णतः मुक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हमारे सामने है। यह बीमारी रोकथाम योग्य है और इसे जड़ से समाप्त किया जा सकता है—बशर्ते हम सभी मिलकर इस अभियान में पूर्ण सहयोग दें।

10 फरवरी 2026 को जिले के 619 बूथों पर Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

– प्रभावित प्रखंड: राहे, तमाड़, सोनाहातु, कांके (कांके, सोनाहातु एवं तमाड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र)

– लक्षित आबादी: *लगभग 4,91,014* व्यक्ति (गर्भवती महिलाएँ, 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे एवं अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर)

– दी जाने वाली दवाएँ: *DEC + Albendazole* — पूरी तरह निःशुल्क एवं सुरक्षित
– 10 फरवरी को बूथ पर दवा न ले पाने वाले व्यक्तियों को 25 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची,द्वारा सभी से अपील हुए कहा 10 फरवरी 2026 को अपने नजदीकी बूथ पर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा अवश्य लें। अपने परिवार, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और मित्रों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

चिकित्सक (डॉक्टर) द्वारा दी जाने वाली मुख्य सलाह और जानकारी:

दवा (Dose): फाइलेरिया को रोकने के लिए वर्ष में एक बार DEC (डाईथाइलकार्बामाज़ीन) और अल्बेंडाज़ोल की गोलियाँ लेनी चाहिए। तीव्र सूजन होने पर एंटीबायोटिक्स भी दी जा सकती हैं।

सफाई (Hygiene): प्रभावित अंग (हाथ या पैर) को प्रतिदिन साबुन और साफ पानी से धोना, फिर मुलायम कपड़े से सुखाना बेहद आवश्यक है।

सूजन कम करना: प्रभावित अंग को दिन में कई बार ऊपर (हृदय के स्तर से ऊपर) उठाएं ताकि तरल पदार्थ का बहाव हो सके।

व्यायाम: अंगों में तरल पदार्थों के प्रवाह को बढ़ाने के लिए विशिष्ट व्यायाम करें।

त्वचा की देखभाल: घावों को फंगस या बैक्टीरिया से बचाने के लिए एंटीफंगल/एंटीबैक्टीरियल क्रीम का प्रयोग करें।

बचाव: मच्छरों के काटने से बचें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और शरीर को ढक कर रखें।
डायग्नोसिस: रात के समय रक्त परीक्षण के द्वारा फाइलेरियल कृमि की जांच की जाती है, क्योंकि ये रात में ही सक्रिय होते हैं।

बच्चों के लिए: बच्चों की उम्र, लंबाई और वजन के आधार पर दवाओं की खुराक निर्धारित की जाती है।

सावधानी: 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाती है। 1 से 02 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाज़ोल की आधी गोली खिलाई जानी है।

सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग सक्रिय रूप से भाग लें — यह हमारा सामूहिक अभियान है।
JSLPS (जीविका) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) इस अभियान की रीढ़ हैं। आप सभी दीदियों से अनुरोध है कि ग्राम स्तर पर जागरूकता फैलाएँ और दवा सेवन सुनिश्चित करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों को प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

*फाइलेरिया से मुक्ति संभव है— लेकिन इसके लिए शत-प्रतिशत कवरे अनिवार्य है। यदि एक भी व्यक्ति दवा से वंचित रह गया, तो यह बीमारी समुदाय में फैल सकती है। इसलिए यह मेरा आप सभी से व्यक्तिगत अनुरोध है:
आइए, हम सब मिलकर 2026 को राँची जिले के लिए फाइलेरिया-मुक्त वर्ष बनाएँ।

आने वाली पीढ़ियों को इस विकलांगता से मुक्त रखने की जिम्मेदारी आज हमारी है। सभी आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी, जीविका दीदियाँ, शिक्षक, मुखिया, ग्राम प्रधान, सामुदायिक नेता, कर्मचारीगण एवं आम नागरिकों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।

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गंगा और भैरवी का दमदार प्रदर्शन, जीत के साथ दोनों टीमें क्वार्टरफाइनल में

आर पी सी मीडिया कप 2026

रांची,08.02.2026 – रांची स्थित जे के क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर खेले जा रहे आरपीसी मीडिया कप 2026 में प्रतियोगिता ने अब रोमांचक मोड़ ले लिया है। टूर्नामेंट के मुकाबले दिन-ब-दिन और अधिक प्रतिस्पर्धी होते जा रहे हैं। इसी क्रम में खेले गए पहले और दूसरे मैच में गंगा और भैरवी की टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली।

पहला मैच: अजय बनाम गंगा

दिन का पहला मुकाबला अजय और गंगा के बीच खेला गया। टॉस के बाद अजय की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 16 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 112 रन बनाए। अजय की ओर से राकेश सिंह ने 31 रनों की उपयोगी पारी खेली, जबकि सूरज प्रकाश ने 22 और तारकेश्वर महतो ने 21 रन का योगदान दिया। हालांकि मध्यक्रम से अपेक्षित बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी, जिससे टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में असफल रही।

गंगा की ओर से गेंदबाजी में समीर सृजन ने किफायती प्रदर्शन करते हुए 1 विकेट के बदले 17 रन दिए, जबकि संतोष सिंह ने 1/20 का आंकड़ा दर्ज किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी गंगा की टीम ने शानदार और आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। गंगा ने 12.5 ओवर में मात्र 2 विकेट खोकर 116 रन बनाते हुए मुकाबला 8 विकेट से अपने नाम कर लिया। ओम प्रकाश झा ने 34 रन बनाए, वहीं संतोष कुमार सिंह ने 29 रनों की सधी हुई पारी खेली। संतोष कुमार सिंह को उनके हरफनमौला योगदान के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

दूसरा मैच: कोनार बनाम भैरवी

दिन का दूसरा मुकाबला कोनार और भैरवी के बीच खेला गया, जिसमें दर्शकों को बल्लेबाजों का शानदार खेल देखने को मिला। पहले बल्लेबाजी करते हुए कोनार की टीम ने 16 ओवर में 141 रन बनाए, लेकिन पूरी टीम ऑलआउट हो गई।

कोनार की ओर से सुशील सिंह ने 48 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जबकि राकेश कुमार ने 17 रन जोड़े। भैरवी की गेंदबाजी में विक्की कुमार पासवान ने घातक प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट 23 रन देकर झटके, वहीं संजय सिंह ने 2/34 विकेट हासिल किए।

जवाब में भैरवी की टीम ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। भैरवी ने 15.3 ओवर में सिर्फ 1 विकेट खोकर 142 रन बनाते हुए मुकाबला 9 विकेट से जीत लिया। नवल किशोर ने नाबाद 67 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि विक्की पासवान ने 51 रन बनाकर जीत को आसान बना दिया।

इस मैच में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए विक्की पासवान को प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब दिया गया।

इन जीतों के साथ ही गंगा और भैरवी की टीमें क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी हैं, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच अब और भी बढ़ गया है। दर्शकों को आने वाले मुकाबलों में कड़े संघर्ष और रोमांचक क्रिकेट की पूरी उम्मीद है।

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भारत की राष्ट्रपति ने जगदलपुर में बस्तर पैंडम 2026 का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (7 फरवरी, 2026) जगदलपुर, छत्तीसगढ़ में बस्तर पैंडम 2026 का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि जब किसान इस उपजाऊ भूमि में बीज बोते हैं, जब आम का मौसम आता है, तो यह पैंडम का मौसम होता है। बस्तर के लोग जीवन के हर पहलू का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य लोग बस्तर के लोगों से जीवन जीने का यह तरीका सीख सकते हैं।

      राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की परंपराओं और संस्कृति ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है, लेकिन दुर्भाग्य से, यह क्षेत्र चार दशकों तक माओवाद से ग्रस्त रहा। परिणामस्वरूप, यहां के लोगों को भारी कष्ट सहना पड़ा। युवा, आदिवासी और दलित भाई-बहन सबसे अधिक प्रभावित हुए। लेकिन, भारत सरकार द्वारा माओवादी आतंक के खिलाफ उठाए गए निर्णायक कदमों के कारण, वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास का माहौल अब समाप्त हो रहा है। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का मार्ग त्याग रहे हैं, जिससे नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो पहले माओवादी गतिविधियों में शामिल थे और अब उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हथियार डालकर लोग सामान्य जीवन जी सकें और मुख्य धारा में लौट सकें। उनके लिए कई विकास और कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लानार योजना’ ग्रामीणों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह देखकर खुशी जताई कि बस्तर में विकास के एक नये समय की शुरूआत हो रही है। हर गांव में बिजली, सड़कें और पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद उत्साहजनक तस्वीर है जो सभी नागरिकों के लिए खुशी का स्रोत है।

राष्ट्रपति ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटने वाले सभी लोगों की प्रशंसा की और उनसे संविधान और देश के लोकतंत्र में पूर्ण विश्वास रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए और कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों का कल्याण सरकार की विशेष प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री-जनमान योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विकास के लाभ सबसे वंचित आदिवासी गांवों तक पहुंच रहे हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं ताकि इन क्षेत्रों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। उन्होंने सभी अभिभावकों और संरक्षकों से अपने बच्चों को शिक्षित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसी तरह छत्तीसगढ़ और भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराएं आज भी गहरी जड़ों से जुड़ी हुई और जीवंत हैं। देवी दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा आदिवासी संस्कृति और भाईचारे का एक अनूठा उदाहरण है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए विकास को अपनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां के लोग समर्पित और मेहनती हैं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों, विशेषकर युवाओं से, राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा कार्यान्वित कल्याण और विकास योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रगति और समृद्धि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विकसित भारत के लिए बेहद जरूरी है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राजस्थान के अलवर में ‘बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन’ की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अब तक हुई 28 बैठकों में लिए गए सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा के लिए सम्‍मेलन बुलाया ताकि उन निर्णयों की पहचान की जा सके जो अप्रचलित हो चुके हैं, जिन्हें लागू नहीं किया जा सका है और जिन्हें पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस पहल से बाघ संरक्षण नीति को वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप ढालने और जमीनी स्तर पर संरक्षण उपायों के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

राजस्थान के अलवर में आयोजित ‘बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि भारत ने बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह व्यापक नीति समीक्षा का उपयुक्त समय है। दो दिवसीय सम्मेलन की दिशा तय करते हुए श्री यादव ने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों में लिए गए नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीतिगत वक्तव्य में संकलित किया जाना चाहिए और इस मुद्दे को एनटीसीए की अगली बैठक के पहले एजेंडा आइटम के रूप में रखा जाना चाहिए।

इस सम्मेलन में राजस्थान सरकार के वन मंत्री श्री संजय शर्मा के अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनटीसीए के वरिष्ठ अधिकारी, बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और देश भर के बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों ने भाग लिया।

श्री यादव ने कहा कि बाघों की संख्या का आकलन, बचाव एवं पुनर्वास संबंधी बुनियादी ढांचा, मानव-वन्यजीव संघर्ष, बाघ अभ्यारण्य निधि का उपयोग और बाघ संरक्षण की नींव को मजबूत करने की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श आवश्यक है। सम्मेलन में देश में बाघ संरक्षण की समग्र स्थिति की समीक्षा की जाएगी और प्रमुख नीतिगत, प्रबंधन और परिचालन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

श्री यादव ने बाघों की संख्या में बदलाव सहित क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों की समीक्षा करने और देश के बाघ अभ्यारण्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए चार कार्य समूहों के गठन का भी आह्वान किया। इसके अलावा, मंत्री ने प्रतिभागियों से एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद जैसे संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने को भी कहा ताकि इन शीर्ष संगठनों से प्राप्त शोध सुझावों को शामिल किया जा सके और बाघ संरक्षण में व्यावहारिक लाभ प्राप्त किए जा सकें।

 

चीता पुनर्वास कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मंत्री जी ने कहा कि भारत ने सफलतापूर्वक एक ऐसी जंगली प्रजाति का अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण किया है जो देश में विलुप्त हो चुकी थी, और यह परियोजना अब चीतों की तीसरी भारतीय पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से चीतों का एक नया समूह फरवरी के अंत तक आने की उम्मीद है।

श्री यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना की है, जिसमें अब तक 24 सदस्य देश हैं, जबकि कई अन्य देशों ने पर्यवेक्षक का दर्जा मांगा है। उन्होंने कहा कि यूएनडीपी, आईयूसीएन, एफएओ, सीसीएफ, जीटीएफ और जीएसएलईपी जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भी आईबीसीए के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषणा की गई है कि पहला वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईबीसीए के माध्यम से तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों – बढ़ती गर्मी, भूमि का मरुस्थलीकरण और जैव विविधता का नुकसान – का समाधान किया जा सकता है।

मंत्री जी ने कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों के निर्धारित क्षेत्रों से बाहर निकलने के कारण मजबूत प्रतिक्रिया प्रणालियों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि घायल जानवरों, संघर्ष से संबंधित मामलों, अनाथ शावकों और तनावग्रस्त अन्य जानवरों को समय पर और पेशेवर सहायता की आवश्यकता होती है, इसलिए बाघ अभ्यारण्यों के आसपास बचाव, पुनर्वास और उपचार केंद्रों के लिए एक स्पष्ट और मानकीकृत ढांचा विकसित करना आवश्यक है। इस अवसर पर मंत्री जी ने एनटीसीए की प्रचार पत्रिका – स्ट्राइप्स का विमोचन भी किया और राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच) द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के छात्रों को पुरस्कार वितरित किए।

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में राज्य स्तरीय अधिकारी और क्षेत्रीय प्रबंधक संरक्षण प्राथमिकताओं, कार्यान्वयन की चुनौतियों और उभरती आवश्यकताओं पर एकीकृत रूप से चर्चा करेंगे। चर्चाओं में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 की समीक्षा, संरक्षण और गश्त तंत्र, बाघों की आबादी का सक्रिय प्रबंधन, बचाव और पुनर्वास अवसंरचना, मानव-वन्यजीव अंतर्संबंधों का प्रबंधन, प्रोजेक्ट टाइगर के तहत निधियों का उपयोग और बाघ संरक्षण फाउंडेशन को मजबूत करना शामिल है।

बाघों की मृत्यु से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर ढंग से ढाला जा सके। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नीति, प्रबंधन और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाना, सूचित निर्णय लेने में सहयोग करना, राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और बाघ संरक्षण के राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में समन्वित कार्रवाई करना होगा।

 

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में म.प्र. के सीहोर जिले के अमलाहा से देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ 

नई दिल्ली –  मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से आज देश की दलहन नीति और किसान–केंद्रित कृषि विमर्श का नया अध्याय जुड़ा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ हुआ। यहाँ आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में एक ही मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कई राज्यों के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक, ICAR–ICARDA के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, FPO, बीज और दाल मिल प्रतिनिधि जुटे– और संदेश साफ़ था: दलहन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप अब खेतों के बीच से तय होगा, दिल्ली के फाइलों के कमरों से नहीं।

भारत की दलहन नीति और किसान हितों के मोर्चे पर एक साथ दो बड़ी घोषणाएँ

एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप तय हुआ, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को ख़ारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है, अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर ज़रा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी।

किसानों की ओर से प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद, विपक्ष पर करारा प्रहार

केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष का “देश बेच दिया, किसान बेच दिए, किसान बर्बाद हो जाएंगे” वाला नैरेटिव आज के तथ्य सामने आने के बाद टिक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक ऐतिहासिक और अद्भुत समझौता है जिसमें भारत की प्रगति और विकास के नए द्वार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसान की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि हमारे मसाले निर्यात होंगे, चावल हमारा इन देशों में कितना जाता है, उसका निर्यात बढ़ेगा, हमारे डेयरी के उत्पाद सुरक्षित रहे हैं और इसलिए भारत के किसानों को इससे बहुत फायदा है। उन्होंने मंच से कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते के लिए मैं प्रधानमंत्री जी का, भारत के किसानों की तरफ से– हम सब कृषि मंत्री यहाँ खड़े हैं– हम हृदय से अभिनंदन करते हैं, उनका स्वागत करते हैं, उनको धन्यवाद देते हैं कि उनके नेतृत्व में हमारे किसानों के हित सर्वथा सुरक्षित रहे हैं। प्रत्येक किसान भारत का आज नरेंद्र मोदी जी को बधाई दे रहा है, धन्यवाद दे रहा है और हम सभी उनके आभारी हैं कि किसानों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत–बहुत धन्यवाद प्रधानमंत्री जी।

अमलाहा से दलहन आत्मनिर्भर भारत की हुंकार

‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की राष्ट्रीय बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आप समझ सकते हैं कि पूरा हिंदुस्तान आज अमलाहा में इकट्ठा हो गया है। शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का संकल्प है कि विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना आवश्यक है और उसी कड़ी में दलहन में आत्मनिर्भरता एक बड़ा लक्ष्य है। प्रधानमंत्री जी का संकल्प है, दलहन में भी भारत आत्मनिर्भर बने, दालें बाहर से नहीं मंगाएँगे, बल्कि कल ऐसी स्थिति आए कि हम दालों का निर्यात करेंगे। इसके लिए उन्होंने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ बनाया है। आज उसी मिशन की राष्ट्रीय बैठक यहाँ की गई है।

केंद्र–राज्य साझेदारी का भरोसा

श्री चौहान ने म.प्र. के मुख्यमंत्री को इस वर्ष को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय में पूरी तरह से कदम से कदम, कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेगी, ताकि प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाई जा सके, फसलों का उत्पादन बढ़े और वैल्यू एडिशन के नए अवसर तैयार हों। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने–अपने राज्यों में भी हम सब मिलकर अलग–अलग रोडमैप बनाएंगे, ताकि प्रत्येक राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप दलहन मिशन को आगे बढ़ाया जा सके।

विपक्ष पर वार: “किसान बर्बाद हो जाएगा” की अफ़वाहें झूठी साबित

भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा, बर्बाद हो जाएगा ।
उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने कहा था “देश नहीं झुकने दूँगा” और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, किसानों के हितों की रक्षा करेंगे। अभी जो समझौता हुआ है USA के साथ, इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के, और उसके पहले जो FTA हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं।

कृषि और डेयरी पर स्पष्ट सुरक्षा: “ये उत्पाद अमेरिका से नहीं आएँगे”

किसानों की मुख्य चिंता पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वह केवल किसानों के पक्ष की चर्चा करेंगे। हमारे प्रमुख अनाज मक्का, बड़ा हल्ला मचाया जा रहा था कि आ जाएगा– बिल्कुल नहीं आएगा। मक्का, गेहूँ, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू, कई सब्जियाँ और उसके अलावा कृषि और डेयरी उत्पाद कई तरह के पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है; अमेरिका से न तो मक्का आएगा, न गेहूँ, न चावल, न सोया, न पोल्ट्री उत्पाद, न दूध, न पनीर, न इथेनॉल, न तंबाकू और न ही कई संवेदनशील सब्जियाँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से नहीं आएँगे, भारत के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है।

निर्यात के नए अवसर: बासमती, मसाले और टेक्सटाइल को बढ़त

श्री चौहान ने कहा कि इस समझौते से देश के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा, विशेष रूप से हमारे निर्यातकों, MSME और युवाओं को। उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था, वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों, विमान के पुर्जों और कई तरह के सामान पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘Make in India’ को मजबूती मिलेगी।

कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बासमती चावल और मसालों को विशेष लाभ होगा; हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब में बासमती उगाने वाले किसानों के लिए 18% टैरिफ वाले बाजार में नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि पहले लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो इस समझौते से और बढ़ने की संभावना है, और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा।

दलहन के संदर्भ में सख्त संदेश: “दालें विदेश से मंगाना आनंद नहीं, शर्म की बात”

दलहन की स्थिति पर बोलते हुए श्री चौहान ने साफ कहा कि दालों का आयात भारत के लिए सम्मान की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने तय किया है कि “दलहन का उत्पादन बढ़ना चाहिए। अभी दालें हमको मंगानी पड़ती हैं बाहर से… दाल हमें विदेशों से मंगानी पड़े तो ये हमारे लिए आनंद का विषय नहीं है, शर्म की बात है। उन्होंने म.प्र. के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज भी दलहन के उत्पादन में म.प्र. नंबर वन है देश में, लेकिन साथ ही चेताया कि दलहन का क्षेत्र घट रहा है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने माना कि किसान वही फसल बोता है, जिसमें अधिक फायदा हो– गेहूँ में होगा तो गेहूँ बोएँगे और चना में होने लगे तो चना बोएँगे, इसलिए दलहन फसलों की उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाज़ार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है। अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार ₹25 लाख तक की सब्सिडी देगी, ताकि जहाँ दाल का उत्पादन होगा, वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिल सके। श्री चौहान ने कहा कि इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएँगी, जिनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएँगी, जिससे प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा

बीज सुधार और वितरण की नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक फैसला कर रहे हैं– कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा, अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज़ करेंगे। उन्होंने बताया कि क्लस्टर मॉडल के ज़रिए खेती को मजबूती दी जाएगी, किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढ़ाया जाएगा और हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा। क्लस्टर में आने वाले किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी, ताकि अच्छे बीज, बेहतर तकनीक और पर्याप्त वित्तीय सहयोग के साथ दलहन उत्पादन को नई ऊँचाई तक पहुँचाया जा सके।

उन्होंने अमलाहा स्थित संस्थान, ICARDA और ICAR के शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मसूर, चना, उड़द, बटरा, मूंग आदि की उत्पादकता बढ़ाने, जल्दी पकने वाली किस्में विकसित करने, उन्नत बीज तैयार करने और रोग–मुक्त फसलें उगाने पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि किसान को दलहन बोने पर ज़्यादा फायदा हो।

अमलाहा से निकला संदेश– किसान हित सुरक्षित, दलहन में आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त

अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक के माध्यम से शिवराज सिंह चौहान ने दो स्पष्ट राजनीतिक–नीतिगत संदेश दिए– पहला, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसानों के हितों पर आंच नहीं आने दी जाएगी, और दूसरा, दलहन में आत्मनिर्भरता को केवल नारा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध, नीति, MSP, बीज सुधार और बाजार के माध्यम से ज़मीन पर उतारा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का डर फैलाने वाला अभियान आज तथ्यों के सामने कमजोर पड़ गया है और देश के किसान देख रहे हैं कि उनके हितों की रक्षा करते हुए ही भारत आगे बढ़ रहा है। अमलाहा से निकले इस संदेश के साथ, अब दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और तेज़ी से आगे बढ़ेगा और भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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