परिशोधन पोर्टल में पंजी-2 सुधार संबंधी शिकायतों के त्वरित निष्पादन के लिए जिला प्रशासन की एक और पहल

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने हल्कावार शिविर आयोजित कर आवेदन प्राप्त करने के दिए निर्देश

विशेषकर जिला के ग्रामीण अंचलों में किया जाएगा हल्कावार शिविर का आयोजन

शिविर में पंजी-2 सुधार से संबंधित आवेदन प्राप्त कर किया जाएगा निष्पादन

दिनांक 01-10 अगस्त 2025 तक हल्कावार शिविर आयोजित कर प्राप्त किया जाएगा आवेदन

दिनांक 11-20 अगस्त 2025 तक प्राप्त आवेदनों का होगा भौतिक सत्यापन

दिनांक 21-25 अगस्त 2025 तक भौतिक सत्यापन के उपरांत वांछित सुधार कर आवेदन का होगा निष्पादन

शिविर में दिनांक 26-30 अगस्त 2025 को होगा प्रमाण पत्र वितरण

रांची,01.08.2025 – परिशोधन पोर्टल में पंजी-2 सुधार संबंधी शिकायतों के त्वरित निष्पादन के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक और पहल की गई है। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा परिशोधन पोर्टल से प्राप्त आवेदनों के त्वरित निष्पादन हेतु अंचलवार (विशेषकर ग्रामीण अंचलों में) शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार द्वारा आम जनता की भूमि से संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से परिशोधन पोर्टल प्रारंभ किया गया है। रांची जिला में इस पोर्टल पर पंजी-2 सुधार से संबंधित कई ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध और प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित करने हेतु उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार रांची जिले में अंचलवार विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसकी समय सारणी निम्न प्रकार है :-

दिनांक 01-10 अगस्त 2025 तक हल्कावार शिविर आयोजित कर प्राप्त किया जाएगा आवेदन

दिनांक 11-20 अगस्त 2025 तक प्राप्त आवेदनों का होगा भौतिक सत्यापन

दिनांक 21-25 अगस्त 2025 तक भौतिक सत्यापन के उपरांत वांछित सुधार कर आवेदन का होगा निष्पादन

शिविर में दिनांक 26-30 अगस्त 2025 को होगा प्रमाण-पत्र का वितरण

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को उपरोक्त तिथि-सारणी अनुसार अपने-अपने हल्कों में शिविर आयोजित कर आवेदनों का निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही शिविर की व्यापक जानकारी आम जनता तक पहुंचे इस हेतु व्यापक प्रचार प्रसार का भी निर्देश दिया गया है।

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वज्रपात से बचाव हेतु ‘सचेत’ और ‘दामिनी’ ऐप को डाउनलोड करें

अपने तथा अपने परिवार की इन आपदा से बचाव करें।

यह ऐप भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी Yellow, Orange और Red Alert को मोबाइल नोटिफिकेशन और SMS के माध्यम से उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाता है

दामिनी’ ऐप 20 से 40 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की संभावना होने पर उपयोगकर्ताओं को तुरंत सचेत करता है।

रांची,01.08.2025 – झारखण्ड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा वज्रपात से होने वाली जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से आम जनता से ‘सचेत’ और ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की गई है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा विकसित सचेत’ ऐप एक CAP आधारित एकीकृत चेतावनी प्रणाली है, जो वज्रपात से बचाव, सावधानी और सुरक्षा संबंधी भू-लक्षित चेतावनी प्रदान करता है। यह ऐप भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी Yellow, Orange और Red Alert को मोबाइल नोटिफिकेशन और SMS के माध्यम से उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाता है।

वहीं, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित दामिनी’ ऐप 20 से 40 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की संभावना होने पर उपयोगकर्ताओं को तुरंत सचेत करता है।

राज्य में इन दोनों ऐप्स के उपयोगकर्ताओं की संख्या कम है, जिसके कारण वज्रपात से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियाँ जन-जन तक नहीं पहुंच पा रही है।

आम जनता से अनुरोध है कि वे Google Play Store या iOS App Store से ‘सचेत’ और ‘दामिनी’ ऐप डाउनलोड करें* ताकि समय पर प्राप्त चेतावनियों के माध्यम से वज्रपात से होने वाले खतरों से बचा जा सके। इस पहल से राज्य में जानमाल की हानि को न्यूनतम करने में सहायता मिलेगी।

लिंक में जा कर डाउनलोड करें

https://play.google.com/store/apps/details?id=de.wetteronline.wetterapp

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cdotindia.capsache

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अरगोड़ा स्थित निजी अस्पताल में नवजात की मृत्यु प्रकरण पर जिला प्रशासन गंभीर

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने दिए जांच के आदेश

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री के आदेश पर जांच समिति का गठन

समिति में कार्यपालक दंडाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम शामिल

जांच के उपरांत अस्पताल प्रबंधन या संबंधित किसी भी व्यक्ति की लापरवाही या दोष सिद्ध होने पर होगी नियमसंगत कठोर कार्रवाई

रांची,01.08.2025 – रांची के अरगोड़ा स्थित निजी अस्पताल में नवजात की मृत्यु के बाद भी वेंटिलेटर पर रखने के परिजनों के आरोप को जिला प्रशासन द्वारा गंभीरता से लिया गया है।

समाचार माध्यमों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवजात को कथित रूप से उसकी मृत्यु के बाद भी वेंटिलेटर पर रखा गया था।

इस मामले को संज्ञान में लेते हुए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

उनके आदेश पर एक जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें कार्यपालक दंडाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम शामिल है।

यह जांच समिति विभिन्न बिंदुओं पर जांच करेगी। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच के उपरांत अस्पताल प्रबंधन या संबंधित किसी भी व्यक्ति की लापरवाही या दोष सिद्ध होता है, तो उनके विरुद्ध नियमसंगत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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पत्नी को है पति को नपुंसक बोलने का अधिकार; बॉम्बे हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

मुंबई ,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अगर कोई पत्नी वैवाहिक विवाद के दौरान अपने आरोपों को साबित करने के लिए पति को ‘नपुंसक कहती है, तो इसे मानहानि का अपराध नहीं माना जाएगा।

अदालत ने कहा कि पत्नी को यह अधिकार कानून के तहत मिला है और यह भारतीय दंड संहिता (ढ्ढक्कष्ट) की धारा 499 (मानहानि) के नौवें अपवाद के अंतर्गत संरक्षित है। न्यायमूर्ति एस.एम. मोडक की पीठ ने यह फैसला एक पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत को खारिज करते हुए सुनाया।

यह मामला एक पति-पत्नी के बीच चल रहे तलाक और भरण-पोषण के विवाद से जुड़ा है। पति ने अपनी पत्नी, ससुर और साले के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

उसका आरोप था कि पत्नी ने तलाक, भरण-पोषण की याचिका और एक स्नढ्ढक्र में उसकी यौन अक्षमता (नपुंसकता) को लेकर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

अप्रैल 2023 में, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पति की शिकायत यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि ये आरोप वैवाहिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लेकिन बाद में, अप्रैल 2024 में सत्र न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया और मामले में आगे की जांच का आदेश दिया।

सत्र न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ पत्नी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पत्नी की ओर से दलील दी गई कि ये आरोप न्यायिक कार्यवाही में लगाए गए थे और मानसिक उत्पीडऩ व उपेक्षा को साबित करने के लिए प्रासंगिक थे, इसलिए यह कानून के तहत संरक्षित हैं।

हाईकोर्ट ने पत्नी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट के फैसले को बहाल रखा। न्यायमूर्ति मोडक ने कहा, जब कोई मुकदमा पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद से संबंधित होता है, तो पत्नी को अपने पक्ष में ऐसे आरोप लगाने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जब कोई पत्नी मानसिक उत्पीडऩ साबित करना चाहती है, तब नपुंसकता जैसे आरोप प्रासंगिक और आवश्यक माने जाते हैं।

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उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख घोषित, 9 सितंबर को होगा मतदान

नई दिल्ली ,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान आगामी 9 सितंबर को कराया जाएगा।

चुनाव आयोग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, 7 अगस्त को चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी की जाएगी। इसके बाद इच्छुक उम्मीदवार 21 अगस्त तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 22 अगस्त को की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि यदि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा जाता है, तो सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवार का निर्विरोध चुना जाना तय माना जाएगा। हालांकि, उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान गुप्त होता है, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बनी रहती है।

ऐसे में राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हैं। इसके साथ ही, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल की सूची तैयार कर ली है।

ईसीआई के मुताबिक, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के नियम 40 के अनुपालन में, आयोग ने निर्वाचक मंडल की सूची तैयार की है, जिसमें सभी सदस्यों के नवीनतम पते भी शामिल हैं। यह सूची राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आधार पर वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित की गई है।

भारत निर्वाचन आयोग में सहायक निदेशक अपूर्व कुमार सिंह ने बताया कि यह सूची अधिसूचना की तारीख से भारत निर्वाचन आयोग में स्थापित एक काउंटर पर खरीद के लिए उपलब्ध होगी।

बता दें कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की तैयारी शुरू की। हाल ही में आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति की थी।

ईसीआई ने बयान में बताया था कि पिछले उपराष्ट्रपति निर्वाचन के दौरान लोकसभा के महासचिव को रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया गया था।

इसलिए, निर्वाचन आयोग ने विधि और न्याय मंत्रालय से परामर्श करके तथा राज्यसभा के उपसभापति की सहमति से राज्यसभा के महासचिव को आगामी उपराष्ट्रपति निर्वाचन के लिए रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया है।

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मोदी सरकार के पांच झटकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया, कांग्रेस का बड़ा आरोप

नई दिल्ली,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के पांच बड़े झटकों से पूरी तरह से प्रभावित और बर्बाद हो चुकी है.

पार्टी ने कहा कि सरकार और उसके समर्थक अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को छुपा रहे हैं और जनता से सच्चाई छिपा रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि पिछले दशक में भारत की अर्थव्यवस्था को मोदी सरकार के पांच झटकों ने पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन झटकों के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है. रमेश ने सबसे पहले नोटबंदी का जिक्र किया, जो देश की विकास गति को बाधित करने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की रोजग़ार और आजीविका को नुकसान पहुंचाने वाला था.

रमेश ने कहा कि जीएसटी एक ऐसा टैक्स है जो न तो अच्छा है और न ही सरल, जिससे देश के हजारों छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि केवल बड़ी कंपनियां ही जीएसटी के खर्च और अनुपालन को बर्दाश्त कर सकती हैं, जबकि छोटे और मध्यम उद्यम इस बोझ के कारण तबाह हो रहे हैं.

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि चीन से बढ़ते हुए आयात ने देश भर में लाखों एमएसएमई को बंद कर दिया है. गुजरात में स्टेनलेस स्टील उद्योग के करीब एक तिहाई एमएसएमई बंद हो चुके हैं.

साथ ही, भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों की कच्ची सामग्री और औद्योगिक घटकों की निर्भरता चीन पर बनी हुई है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हुआ है.

रमेश ने कहा कि निजी निवेश अब पहले जैसी तेजी नहीं दिखा रहा है. राजनीतिक दबाव और लगातार हो रहे छापों (रेड राज) ने उद्योग जगत का आत्मविश्वास तोड़ दिया है. इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय उद्योगपति दूसरे देशों की नागरिकता लेने लगे हैं.

कांग्रेस ने यह भी कहा कि पिछले दस वर्षों में अधिकांश भारतीयों की मजदूरी स्थिर रही है, खासकर ग्रामीण इलाकों में. घरेलू बचत घटती जा रही है, जबकि परिवारों का कर्ज बढ़ रहा है.

निजी उपभोग में गिरावट के कारण आर्थिक विकास में रुकावट आ रही है, जबकि लक्जरी खर्च जारी है, जो बढ़ती आर्थिक असमानता को दर्शाता है.

राहुल गांधी ने भी इस मामले में मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा और विदेश नीति को तबाह कर दिया है.

गांधी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय अर्थव्यवस्था को “मृत” कहकर एक सच्चाई को स्वीकार किया है, जिसे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भी मान लेना चाहिए.

कांग्रेस का मानना है कि मोदी सरकार और उसके समर्थक एक काल्पनिक दुनिया में जी रहे हैं और वे अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को जनता से छुपा रहे हैं.

पार्टी ने सरकार से अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति को स्वीकार करने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर भाषण के लिए लोगों से मांगा सुझाव

नईदिल्ली,01 अगस्त नईदिल्ली,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आजादी की 79वीं वर्षगांठ पर लाल किले से ऐतिहासिक भाषण देने के लिए लोगों से सुझाव मांगा है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, जैसे-जैसे हम इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस के करीब पहुंच रहे हैं, मैं अपने साथी भारतीयों से सुनने के लिए उत्सुक हूं! इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस भाषण में आप किन विषयों या विचारों को प्रतिबिंबित होते देखना चाहेंगे? मायजिओ और नमो ऐप पर ओपन फोरम पर अपने विचार साझा करें।

नमो ऐप पर लोगों ने शुक्रवार से अपने विचार साझा करना शुरू कर दिए हैं। इसमें लिखा है, आपके विचार प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण का हिस्सा हो सकते हैं, इन्हें अभी साझा करें! दोनों वेबसाइट में देखने पर पता चलता है कि लोग कई मुद्दों पर अपने विचार दे रहे हैं और उस पर प्रधानमंत्री मोदी से भाषण में कुछ सुनना चाहते हैं।

अभी तक सैकड़ों लोगों ने अपने विचार साझा कर दिए हैं।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आजादी की 79वीं वर्षगांठ पर लाल किले से ऐतिहासिक भाषण देने के लिए लोगों से सुझाव मांगा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, जैसे-जैसे हम इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस के करीब पहुंच रहे हैं, मैं अपने साथी भारतीयों से सुनने के लिए उत्सुक हूं!

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस भाषण में आप किन विषयों या विचारों को प्रतिबिंबित होते देखना चाहेंगे? मायजिओ और नमो ऐप पर ओपन फोरम पर अपने विचार साझा करें।

नमो ऐप पर लोगों ने शुक्रवार से अपने विचार साझा करना शुरू कर दिए हैं। इसमें लिखा है, आपके विचार प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण का हिस्सा हो सकते हैं, इन्हें अभी साझा करें! दोनों वेबसाइट में देखने पर पता चलता है कि लोग कई मुद्दों पर अपने विचार दे रहे हैं और उस पर प्रधानमंत्री मोदी से भाषण में कुछ सुनना चाहते हैं। अभी तक सैकड़ों लोगों ने अपने विचार साझा कर दिए हैं।

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रेप कांड में प्रज्वल रेवन्ना दोषी करार, फैसला सुन कोर्ट में रो पड़े जेडीएस पूर्व सांसद

बेंगलुरु,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जन प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के निष्कासित नेता और पूर्व लोकसभा सांसद प्रज्वल रेवन्ना को हासन जिले के होलेनरसीपुरा स्थित एक फार्महाउस में डोमेस्टिक वर्कर से रेप के मामले में दोषी ठहराया है.

सुनवाई के दौरान दोषी ठहराए जाने के बाद रेवन्ना कोर्ट में रो पड़े। उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय रोते देखा गया।

इससे पहले 30 जुलाई को एक विशेष अदालत ने हासन के पूर्व सांसद के खिलाफ दर्ज चार यौन शोषण और बलात्कार के मामलों में से एक में फैसला 1 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया था. ताजा जानकारी के मुताबिक कोर्ट कल शनिवार को सजा का ऐलान करेगा.

वर्तमान और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत के जज संतोष गजानन भट ने गूगल मैप्स डेटा, तकनीकी साक्ष्य और फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण मांगा था.

बता दें कि प्रज्वल पर अपने फार्महाउस में पूर्व डोमेस्टिक वर्कर के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने का आरोप था. पीडि़ता ने 28 अप्रैल, 2024 को हसन के होलेनरसीपुरा टाउन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.

जानकारी के मुताबिक फैसला सुनाने से पहले अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों से मोबाइल लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के बारे में स्पष्टीकरण भी मांगा था.

न्यायाधीश ने कहा था कि चूंकि स्पष्टीकरण आवश्यक है, इसलिए फैसला 30 जुलाई को नहीं सुनाया जा सका और इसे 1 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया.

गौरतलब है कि जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को अदालत में पेश किया गया और कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें वापस बेंगलुरु केंद्रीय कारागार ले जाया गया था.

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राहुल गांधी का बड़ा दावा,हमारे पास एटम बम है, फटेगा तो हिंदुस्तान में चुनाव आयोग कहीं नहीं दिखेगा

नई दिल्ली ,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग वोट चोरी करवा रहा है और मैं 100 प्रतिशत सबूतों के साथ ये बोल रहा हूं।

राहुल गांधी ने कहा कि हमारे पास एटम बम है और ये फटेगा तो हिंदुस्तान में चुनाव आयोग कहीं नहीं दिखेगा। उन्होंने ये भी कहा कि अधिकारी रिटायर भी हो जाएंगे तो छोड़ेंगे नहीं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि हमारे पास सबूत है कि चुनाव आयोग वोट चोरी करवा रहा है, और मैं ये हल्के में नहीं बोल रहा हूं।

मैं 100 प्रतिशत सबूतों के साथ ये बात कह रहा हूं। हम जैसे ही ये सबूत सबके सामने रखेंगे, पूरे देश को पता चल जाएगा कि चुनाव आयोग वोट चोरी करा रहा है। किसके लिए करा रहा है—भाजपा के लिए करा रहा है। ये ओपन एंड शट है; इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

उन्होंने कहा कि हमें मध्य प्रदेश में संदेह था, लोकसभा चुनाव में संदेह था, और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में संदेह था। हमें स्टेट लेवल पर लगा कि चोरी हुई है। एक करोड़ वोटर ऐड हुए थे, फिर हम थोड़ा डिटेल में गए। चुनाव आयोग हमारी मदद नहीं कर रहा था, इसलिए हमने अपनी तरफ से जांच करवाई।

इस जांच में 6 महीने लगे और जो हमें मिला है, वो एटम बॉम्ब है, और ये फटेगा तो आप हिंदुस्तान में इलेक्शन कमीशन कहीं नहीं देखेंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं सिरियसली बोल रहा हूं, चुनाव आयोग में जो भी वोट चुराने का काम कर रहे हैं, उन्हें हम छोड़ेंगे नहीं। क्योंकि आप हिंदुस्तान के खिलाफ काम कर रहे हैं, जो देशद्रोह है। आप कहीं भी हों, चाहे आप रिटायर ही क्यों न हो जाएं, हम आपको ढूंढ निकालेंगे।

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने का था आदेश,मालेगांव ब्लास्ट केस में पूर्व एटीएस अफसर का सनसनीखेज खुलासा

मुंबई ,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  साल 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपियों के बरी होने के ठीक एक दिन बाद, महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (्रञ्जस्) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासा किया है।

धमाके की शुरुआती जांच करने वाली टीम का हिस्सा रहे रिटायर्ड इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने दावा किया है कि उन पर तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (क्रस्स्) के प्रमुख मोहन भागवत को इस केस में फंसाने का दबाव बनाया गया था, ताकि “भगवा आतंकवाद” की थ्योरी को गढ़ा जा सके।

गुरुवार को हृढ्ढ्र की स्पेशल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद महबूब मुजावर ने एक के बाद एक कई चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा, “भगवा आतंकवाद की पूरी संकल्पना एक झूठ थी।

मुझे इस केस में इसलिए शामिल किया गया था ताकि इसे साबित किया जा सके। मुझे सीधे तौर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने के निर्देश दिए गए थे।”

मुजावर ने आरोप लगाया कि ये आदेश तत्कालीन मालेगांव धमाके के प्रमुख जांच अधिकारी परमबीर सिंह और उनके ऊपर के अधिकारियों ने दिए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार और एजेंसियों का मकसद मोहन भागवत और अन्य निर्दोष लोगों को इस मामले में फंसाना था।

पूर्व अधिकारी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिन संदिग्धों, संदीप डांगे और रामजी कलसंगरा, की मौत हो चुकी थी, उन्हें चार्जशीट में जानबूझकर जिंदा दिखाया गया। मुजावर ने कहा, “मुझे आदेश दिया गया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करो, जबकि वो मर चुके थे।”

महबूब मुजावर ने बताया कि जब उन्होंने इन “भयावह” और गैर-कानूनी आदेशों को मानने से इनकार कर दिया, तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

उन्होंने कहा, “मैंने आदेशों का पालन नहीं किया, इसलिए मेरे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया और इसने मेरे 40 साल के बेदाग करियर को बर्बाद कर दिया।

हालांकि, बाद में मैं उन झूठे मुकदमों से निर्दोष साबित हुआ।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास अपने दावों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।

मुजावर ने सभी आरोपियों के बरी होने पर खुशी जताते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि सभी निर्दोष बरी हुए और इसमें मेरा भी छोटा सा योगदान है। अदालत के फैसले ने एटीएस के किए गए फर्जी कामों को रद्द कर दिया है।”

गौरतलब है कि 29 सितंबर, 2008 को हुए मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। मामले की जांच पहले ्रञ्जस् ने की थी, जिसके बाद इसे हृढ्ढ्र को सौंप दिया गया था। 17 साल बाद आए इस फैसले ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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