नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण पर समाचार पत्र में लिखे विचार आधारित अपने लेख की कुछ झलकियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करना एक विधायी प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:
“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण पर एक संपादकीय विचार आधारित लेख लिखा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।”
यह थ्रेड लेख के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालता है।
“समाज की प्रगति तभी होती है जब महिलाओं की प्रगति होती है।”
“आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी का आधार मज़बूत करना है।”
“जब महिलाएं प्रशासन और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं, तो उनके अनुभव और अंतर्दृष्टि से चर्चा समृद्ध होती है और शासन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।”
“अब ज़रूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और साथ ही विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं। ”
“सितंबर 2023 में, संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।”
“महिलाओं के प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने में होने वाली हर देरी, वास्तव में, हमारे लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को मजबूत करने में होने वाली देरी है।”
“महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पारित करने में अधिकतम व्यापक सहमति झलकनी चाहिए और यह व्यापक राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित होना चाहिए।”
आइए हम सब मिलकर आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाएं तथा राष्ट्रीय प्रगति के लिए अपनी नारी शक्ति को सशक्त बनाएं।
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