CCPA takes major action against misleading walkie-talkie advertisement; imposes ₹1 lakh fine on Hogar Technologies

वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापन पर CCPA की बड़ी कार्रवाई, होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख जुर्माना

ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी और लाइसेंस संबंधी जानकारी छिपाने का आरोप, 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन उत्पाद प्रविष्टियां मिलीं; 12 कंपनियों पर अब तक ₹58 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापन और नियामक जानकारी के अभाव में उत्पादों की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण ने मेसर्स होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी की वेबसाइट पर वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों और उत्पाद प्रविष्टियों में परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस की आवश्यकता और जरूरी नियामक मंजूरी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी।

यह आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत जारी किया गया है। सीसीपीए की मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में हुई कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाना है।

उत्पाद की जरूरी जानकारी छिपाने पर कार्रवाई

सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज की वेबसाइट पर उपलब्ध विभिन्न वॉकी-टॉकी मॉडल के विज्ञापनों और उत्पाद प्रविष्टियों की जांच की। जांच में पाया गया कि उत्पादों की परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं और नियामक मंजूरियों के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

प्राधिकरण के अनुसार, ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव उपभोक्ताओं को यह गलत धारणा दे सकता है कि विज्ञापित वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल बिना किसी सरकारी अनुमति या नियामक शर्त के किया जा सकता है। इससे उपभोक्ता गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी का निर्णय ले सकते हैं और बाद में कानूनी या आर्थिक नुकसान का सामना कर सकते हैं।

446.0–446.2 मेगाहर्ट्ज आवृत्ति पर विशेष नियम

सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि ‘लो पावर और वेरी लो पावर शॉर्ट रेंज रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस (लाइसेंस की आवश्यकता से छूट) नियम, 2018’ के तहत 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की निर्धारित आवृत्ति सीमा में काम करने वाले व्यक्तिगत मोबाइल रेडियो उपकरणों को कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस से छूट दी गई है।

हालांकि, निर्धारित आवृत्ति सीमा से बाहर काम करने वाले अन्य वायरलेस रेडियो उपकरणों पर संबंधित नियामक नियम लागू होते हैं। ऐसे उपकरणों के विज्ञापन में उनकी आवृत्ति और लाइसेंस संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से देना आवश्यक है।

वेबसाइट पर सीधे बिक्री नहीं होने का तर्क खारिज

कार्रवाई के दौरान कंपनी ने दावा किया कि उसके पास वैध डीलर पजेसिंग लाइसेंस (DPL) है और उसके उपकरण उपकरण प्रकार मंजूरी (ETA) प्रमाणन के दायरे में आते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट का उद्देश्य मुख्य रूप से उत्पादों की जानकारी देना और संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। वेबसाइट पर सीधे ऑनलाइन भुगतान या खरीदारी की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

हालांकि, सीसीपीए ने कंपनी के इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण ने कहा कि नियामक मंजूरी होने से विज्ञापनदाता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। उत्पाद के विज्ञापन में उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले सटीक, पूरी और महत्वपूर्ण जानकारी देना अनिवार्य है।

सीसीपीए ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी वेबसाइट पर शॉपिंग कार्ट या ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं होने के बावजूद वहां किए गए उत्पाद प्रचार को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन माना जा सकता है।

13 ई-कॉमर्स कंपनियों को जारी किए गए नोटिस

वॉकी-टॉकी की ऑनलाइन बिक्री में नियामक जानकारी की कमी को लेकर सीसीपीए ने स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 16,970 से अधिक ऐसी उत्पाद प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें आवश्यक नियामक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

इसके बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), जियोमार्ट, इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया सहित 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए।

प्राधिकरण के अनुसार, अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी किए जा चुके हैं। वॉकी-टॉकी से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए इन कंपनियों पर कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इन कंपनियों पर लगा जुर्माना

सीसीपीए की कार्रवाई में निम्न कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है:

  • अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड — 10 लाख रुपये

  • फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड — 10 लाख रुपये

  • मीशो प्राइवेट लिमिटेड — 10 लाख रुपये

  • मेटा प्लेटफॉर्म्स — 10 लाख रुपये

  • ट्रेडइंडिया (इन्फोकॉम नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड) — 10 लाख रुपये

  • जियोमार्ट (रिलायंस रिटेल लिमिटेड) — 1 लाख रुपये

  • चिमिया — 1 लाख रुपये

  • मास्कमैन टॉयज — 1 लाख रुपये

  • टॉक प्रो (आइकॉनेट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) — 1 लाख रुपये

  • संचार वायरलेस कम्युनिकेशंस लिमिटेड — 1 लाख रुपये

  • अंतरिक्ष टेक्नोसिस प्राइवेट लिमिटेड — 1 लाख रुपये

  • होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी — 1 लाख रुपये

कई कंपनियों ने अदालतों और आयोग में दी चुनौती

सीसीपीए के आदेशों के खिलाफ कुछ कंपनियों ने न्यायिक मंचों का रुख किया है।

अमेजन सेलर सर्विसेज और फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड ने प्राधिकरण के आदेशों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। वहीं, मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया ने 10-10 लाख रुपये के जुर्माने वाले आदेशों के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में अपील की है।

ट्रेडइंडिया के मामले में आयोग ने कंपनी को जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है। इंडियामार्ट इंटरमेश लिमिटेड ने भी सीसीपीए की कार्यवाही को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। उसका मामला अभी प्राधिकरण के पास विचाराधीन है।

उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना अनिवार्य

सीसीपीए ने दोहराया कि वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों और उत्पाद प्रविष्टियों में परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस की आवश्यकता और अन्य महत्वपूर्ण नियामक जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

प्राधिकरण के अनुसार, उपभोक्ताओं को उत्पाद की कानूनी उपयोग संबंधी शर्तों की जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे सही तथ्यों के आधार पर खरीदारी का फैसला कर सकें।

सीसीपीए ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई उसकी प्राथमिकता है। विशेष रूप से ऐसे उत्पादों के मामले में नियामक जानकारी की पारदर्शिता जरूरी है, जिनका इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी नियमों से जुड़ा हो।

सीसीपीए का अंतिम आदेश प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट https://ccpa.doca.gov.in/ पर उपलब्ध है।

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