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राजनीति और मीडिया दोनों का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रहित हो : राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला

रांची प्रेस क्लब में विशिष्ट व्यक्तित्वों के साथ संवाद की शृंखला की हुई शुरुआत

रांची, 12.01.2026 । हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने सोमवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाद कार्यक्रम में “राजनीति और मीडिया” विषय पर पत्रकारों से विचार साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीति और मीडिया के बीच परस्पर पूरक संबंध है। दोनों की भूमिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि राजनीति शासन की दिशा तय करती है, जबकि मीडिया शासन के निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है। राजनीति की हर गतिविधि पर मीडिया की पैनी निगाह रहती है और जब राजनीति अपनी दिशा से भटकती है, तब मीडिया उस पर अंकुश लगाने की भूमिका निभाती है। यही कारण है कि मीडिया को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है।

उन्होंने कहा कि मीडिया की आलोचना तथ्यपरक और संतुलित होनी चाहिए। यदि तथ्य मजबूत हों तो उन्हें प्रकाशित-प्रसारित करने से डरना नहीं चाहिए, लेकिन जबरन मसाला डालकर किसी के चरित्र पर हमला करना उचित नहीं है। कभी-कभी पत्रकारिता में त्रुटियां हो जाती हैं, ऐसे में उन्हें स्वीकार कर आत्ममंथन करना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजनीति की तरह मीडिया भी विचारधाराओं में बंटती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता अब मूलतः नौकरी बनकर रह गई है। पत्रकारों पर खबरों के साथ-साथ विज्ञापनों का दबाव रहता है, जिसके कारण उन्हें राजनेताओं और नौकरशाही से संबंध बनाए रखने की मजबूरी होती है। इसका सीधा असर खबरों की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी निजी विचारधारा से बड़ा राष्ट्र और समाज है, इस तथ्य को सदैव ध्यान में रखना चाहिए। पारदर्शिता और परस्पर संवाद से ही लोकतंत्र और समाज का सुदृढ़ निर्माण संभव है।

अध्यक्षीय उद्गार में वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि बाजारवाद के बढ़ते दबाव के कारण मीडिया का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है, जिससे पत्रकारिता की आत्मा को नुकसान पहुंच रहा है।

विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने भारत में ढाई सौ वर्षों के पत्रकारिता इतिहास और उसकी वर्तमान स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि की जीवन यात्रा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान का भी परिचय दिया।

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने संवाद शृंखला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीति, प्रशासन, समाज और मीडिया से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक, निष्पक्ष और वैचारिक विमर्श को बढ़ावा देना है, ताकि पत्रकारों और समाज दोनों को व्यापक दृष्टि और नई समझ मिल सके।

स्वागत भाषण में सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि रांची प्रेस क्लब पत्रकारों के बौद्धिक विकास, पेशेवर मूल्यों के संरक्षण और लोकतांत्रिक संवाद को सशक्त करने के लिए ऐसे विचारोत्तेजक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करता रहेगा। धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय ने किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा, डॉ. रामाज्ञा तिवारी, सुमन श्रीवास्तव, ओमरंजन मालवीय, राजेश कुमार सिन्हा, विनय चतुर्वेदी, क्लब के संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य, कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, कार्यकारिणी सदस्य राजन बॉबी, संतोष कुमार सिन्हा, अशोक गोप, संजय सुमन, प्रतिमा कुमारी, निर्भय कुमार, चंदन वर्मा, अमित कुमार, विजय गोप, सौरभ शुक्ला, आनंद मोहन, भीष्म सिंह, प्रशांत शरण, राजीव मिश्र, अखिलेश सिंह सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।

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विजय त्रिवेदी की नई पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के विचार, व्यक्तित्व और राजनीतिक विरासत का जीवंत व प्रभावशाली चित्रण

नई दिल्ली –  भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बहुआयामी व्यक्तित्व, विचारधारा और राजनीतिक जीवन को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री विजय त्रिवेदी की नवीन पुस्तक का आज औपचारिक विमोचन किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए पुस्तक को उनके जीवन और कार्यों का एक प्रेरक दस्तावेज बताया

समारोह में लेखक विजय त्रिवेदी के लेखन की सराहना करते हुए कहा गया यह पुस्तक नई पीढ़ी को अटल जी के विचारों, मूल्यों और नेतृत्व से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और कार्यों को 12 अध्यायों में रोचक, तथ्यपरक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन से लेकर एक स्वयंसेवक से राष्ट्रीय नेता बनने की यात्रा, कारगिल युद्ध, परमाणु परीक्षण, आर्थिक उदारीकरण, नई टेलीकॉम नीति में उनकी भूमिका, आपातकाल का दौर, पाकिस्तान से मैत्री की पहल, भाषा-प्रेम और कवि मन की अभिव्यक्ति, राजनीति से संन्यास तथा महाप्रयाण तक के सभी प्रमुख पड़ावों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

लेखक ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, विचारधारा और नेतृत्व क्षमता को सरल, सहज और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को गहराई से समझ सकें।

पत्रकारिता के लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ श्री विजय त्रिवेदी टेलीविजन और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित ‘हार नहीं मानूँगा’, ‘यदा यदा ही योगी’, ‘बीजेपी: कल, आज और कल’ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर केंद्रित ‘संघम् शरणं गच्छामि’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रकाशन विभाग की नई संस्कृत- हिन्दी द्विभाषी पत्रिका संगमनीप्रभा के प्रथम अंक का भी लोकार्पण किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली ने पत्रिका का लोकार्पण किया।

‘संगमनीप्रभा’ प्रकाशन विभाग की पहली त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका है। पत्रिका में प्रकाशित मूल सामग्री संस्कृत भाषा में होगी, जबकि हिन्दी भाषी पाठकों के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर संस्कृत सामग्री का हिन्दी अनुवाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अनूठे प्रयास का उद्देश्य संस्कृत वाङ्मय की अमूल्य ज्ञान-परंपरा से नई पीढ़ी के पाठकों को परिचित कराना और उन्हें संस्कृत भाषा से जोड़ना है।

पत्रिका का मूल्य 25 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि इसकी वार्षिक सदस्यता 100 रुपये में उपलब्ध होगी।पत्रिका के प्रथम अंक की सराहना करते हुए प्रो. बिमली ने कहा कि विषय वस्तु और डिज़ाइन के स्तर पर यह पत्रिका प्रकाशन विभाग के उत्कृष्ट प्रकाशनों की शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग विविध विषयों पर श्रेष्ठ पुस्तकों के साथ-साथ योजनाकुरुक्षेत्रबाल भारती और आजकल जैसी प्रतिष्ठित मासिक पत्रिकाओं तथा इम्प्लॉयमेंट न्यूज़ के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। अब त्रैमासिक ‘संगमनीप्रभा’ के प्रकाशन के साथ विभाग की पहचान और सशक्त होगी।

इस अवसर पर पुस्तक के लेखक श्री विजय त्रिवेदी, प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैन्थोला सहित अनेक प्रतिष्ठित लेखक, साहित्यकार एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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प्रयागराज में छात्रों के पहले बैच का स्वागत किया गया

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम 4.0 में भाग लेने वाले 200 छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रयागराज पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य एक भारतश्रेष्ठ भारत की भावना के अनुरूप काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना है।

यह प्रतिनिधिमंडल संगम पहुंचा और प्रयागराज जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। प्रत्येक छात्र को भगवद् गीता का तमिल संस्करण भेंट किया गया।

 

संगम के किनारे आयोजित एक सांस्कृतिक संध्या में दोनों क्षेत्रों की कलात्मक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में कजरी, भजन और कथक के साथ-साथ तमिल लोक कला रूपों को भी प्रस्तुत किया गया। यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सद्भाव को दर्शाता है।

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद, छात्रों ने संगम का दर्शन किया और गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के आध्यात्मिक महत्व का अनुभव किया। बाद में उन्होंने श्री बड़े हनुमान जी मंदिर जाकर प्रार्थना की।

इस प्रतिनिधिमंडल ने बाद में स्वामीनारायण मंदिर का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, छात्रों को प्रयागराज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का समृद्ध अनुभव प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए महापौर उमेश चंद्र ने इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के उनके दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि संगम एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान का प्रतीक है।

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विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद का दूसरा दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी

नई दिल्ली – युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद का दूसरा दिन आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक भव्य उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोवाल, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, युवा मामलों के विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल और युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ, जिनके युवा सशक्तिकरण, नेतृत्व एवं राष्ट्रीय सेवा के शाश्वत आदर्श पूरे देश के युवा नेताओं को प्रेरित करते रहते हैं, इसके बाद पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित किया गया।

 

आरंभिक सत्र को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस पहल पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक क्विज़ राउंड में लगभग 50 लाख युवा शामिल हुए, जिनमें से तीन लाख को 10 पहचाने गए थीमेटिक ट्रैक्स में से किसी एक पर निबंध प्रस्तुत करने के लिए चयनित किया गया। इन निबंधों का मूल्यांकन प्रख्यात प्रोफेसरों द्वारा किया गया, जिसके बाद 30,000 युवाओं को राज्य स्तर पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। इस समूह में से, अंततः 3,000 युवा नेताओं का चयन किया गया ताकि वे अपने विचारों को परिष्कृत कर सकें और सीधे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सामने प्रस्तुत कर सकें, जिन्होंने नौजवान भारतीयों पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है जो विकसित भारत की यात्रा का नेतृत्व करेंगे और राष्ट्रीय युवा दिवस पर कई घंटे युवा नेताओं के साथ सीधे संवाद करेंगे और उनके विचार को सुनेंगे।

राष्ट्र की गतिशील शक्ति के रूप में युवाओं की बात करते हुए, डॉ. मंडाविया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ एक ऐसा प्रक्रिया है जो नेतृत्व को जमीनी स्तर से आगे बढ़ने मदद करता है, राजनीतिक समर्थन के बिना और राष्ट्र के भविष्य के नेताओं को पोषित करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयास से प्राप्त नहीं होगा बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से प्राप्त होगा जो राष्ट्र के लिए कल्पित पांच ‘संकल्पों’ द्वारा मार्गदर्शित हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ के मंत्र पर बल देते हुए, उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों को अनुशासन एवं समर्पण के साथ पूरा करें। भारत के अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि देश कोविड महामारी के बाद स्थिर रूप से प्रगति कर रहा है और बेरोजगारी दर में महत्वपूर्ण कमी ला रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल ने अपने मुख्य भाषण में अपने युवावस्था पर बात की और व्यक्तिगत जीवन एवं राष्ट्रों के निर्माण के लिए अपने निर्णय पर लंबी चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी के जीवन की गति एवं दिशा उस रोज़ाना लिए जाने वाले निर्णयों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे इस क्षमता को प्रारंभिक अवस्था से ही विकसित करें। उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति सही निर्णय लेने में निहित है और कहा कि अगर वे भारत को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें निर्णय लेने में दूरदर्शी, अनुशासित और क्रियान्वयन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए बलिदानों को भी याद किया और एक मजबूत एवं आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करने के लिए इतिहास से सीखने के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि कि प्रेरणा क्षणिक होती है लेकिन अनुशासन स्थायी होता है। उन्होंने युवा नेताओं को अनुशासन को दैनिक जीवन में बदलने और बिना देरी किए कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास से भरपूर रहने के लिए प्रोत्साहित किया और उनसे अपने निर्णयों के प्रति पांच साल की प्रतिबद्धता अपनाने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि अटूट इच्छाशक्ति समय के साथ अजेयता का निर्माण करती है। श्री डोभाल ने एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान युवा प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की, जहां उन्होंने दबाव को संभालने और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के बारे में अपने विचार साझा किए।

अपने स्वागत संबोधन में, डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उल्लेख किया कि यह संवाद लगभग 50 लाख युवाओं को शामिल करने वाली पांच महीने लंबी राष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है, जिसके परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उत्कृष्ट युवा नेताओं का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि वीबीवाईएलडी एक ऐसा मंच है जहां युवा आवाजों को सुना जा सके और उनके विचारों को नीति निर्धारण में डिज़ाइन-सोच, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से शामिल किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि 144 शहरों में भारतीय प्रवासी समुदाय की भागीदारी के साथ आयोजित विकसित भारत रन, भारत की सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने वाली एक प्रमुख पहल थी।

उद्घाटन सत्र का समापन युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मंच पर उपस्थित गणमान्य लोगों, वक्ताओं, आयोजकों और युवा प्रतिभागियों के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सतत संवाद एवं विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद जैसे सहभागी मंचों के माध्यम से युवा नेतृत्व को पोषित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया और प्रतिभागियों को आगामी सत्रों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

संपूर्ण सत्र के समापन के बाद, प्रतिभागी अपने-अपने स्थानों पर गहन थीम आधारित सत्रों के लिए गए, जो कि 10 पहचानी गई थीमों के लिए आयोजित किए गए थे। इन सत्रों का संचालन मार्गदर्शकों द्वारा किया गया जिन्होंने प्रत्येक थीम का ढांचा एवं उद्देश्य प्रस्तुत किया, इसके बाद विशिष्ट विषय विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई। इन संवादों ने सहयोगात्मक शिक्षा का एक मंच तैयार किया, जिससे प्रतिभागियों को मुद्दों का गंभीरता से विश्लेषण करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और केंद्रित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिली। थीम इस प्रकार हैं

ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए लोकतंत्र एवं सरकार में युवाओं की भूमिका

इस सत्र का केंद्र युवाओं, लोकतंत्र और शासन पर आधारित था, जिसमें विशेष जूरी में श्री हेमांग जोशी, वडोदरा से सांसद, और सुश्री भक्ति शर्मा, पूर्व सरपंच और जमीनी स्तर की नेता शामिल थीं। प्रतिभागियों ने नवोन्मेषी शासन मॉडल प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य युवाओं को सार्वजनिक प्रशासन में एकीकृत करना था, जिसमें गांव स्तर की कार्य योजना, जिला प्रशासन के साथ समस्या-समाधान इकाइयां, नीति और करियर लैब, और संरचित नागरिक सहभागिता पहल शामिल थीं।

ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व वाला विकास: विकसित भारत की कुंजी

यह सत्र ‘विकसित भारत @2047’ की परिकल्पना के अनुरूप, शासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं को अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित था। इस सत्र में भारत मंडपम में भारत की पहली एमबीए सरपंच सुश्री छवि राजवत, अर्जुन पुरस्कार विजेता और विधानसभा सदस्य सुश्री श्रेयासी सिंह और किश्तवार से विधायक सुश्री शगुन परिहार सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ संवाद हुए।

ट्रैक 3 – फिट भारत, हिट भारत

इस सत्र का मुख्य विषय एक सशक्त और सशक्त भारत के निर्माण में स्वास्थ्य, कल्याण, खेल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर केंद्रित था। सत्र में प्रख्यात खिलाड़ियों श्री लिएंडर पेस और श्री पुलेला गोपीचंद के साथ संवाद हुए, जिन्होंने शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और योग एवं ध्यान जैसी भारत की पारंपरिक प्रथाओं को एकीकृत करके समग्र कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला।

ट्रैक 4 – भारत को विश्व की स्टार्टअप राजधानी बनाना

इस विषय के अंतर्गत, युवा नेताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र में शामिल हुए। इससे प्रतिभागियों को व्यापक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सत्र में आंध्र प्रदेश के सांसद श्री हरीश बालायोगी, ज़ेप्टो के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री कैवल्य वोहरा, आंध्र प्रदेश सरकार में युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री रामप्रसाद रेड्डी और आंध्र प्रदेश खेल प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रवि नायडू भी शामिल हुए।

ट्रैक 5 – भारत की सॉफ्ट पावर: सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव

इस सत्र में भारत के सॉफ्ट पावर एवं सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। विशिष्ट वक्ताओं म श्री रोमालो राम, जमीनी स्तर के शासन एवं सामुदायिक विकास से जुड़े लोक सेवक; श्रीमती पाल्की शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं टेलीविजन एंकर; श्री सतीश शर्मा, कैबिनेट मंत्री जिनके पास जम्मू और कश्मीर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवा एवं खेल, तथा एआरआई और प्रशिक्षण से संबंधित विभाग हैं; और श्री अर्पित तिवारी, उपनिदेशक, नेहरू युवा केंद्र संगठन शामिल थे। इन वक्ताओं ने सत्र का संचालन किया और प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।

ट्रैक 6 – परंपरा के साथ नवाचार: आधुनिक भारत का निर्माण

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य नवाचार एवं युवा सशक्तिकरण के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना था। सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम और एनएएसी के अध्यक्ष श्री अनिल सहस्रबुद्धे, शिक्षाविद, लेखक और पूर्व सांसद श्री विनय सहस्रबुद्धे और वहदम इंडिया के संस्थापक और सीईओ श्री बाला सरदा जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने किया।

ट्रैक 7 – आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड

इस सत्र में नवाचार आधारित विकास और भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक श्री सिबाब्रता दास और एडवर्ब के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन ने सत्र का नेतृत्व किया और प्रतिभागियों के साथ व्यापक संवाद किया।

ट्रैक 8 – स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना

यह सत्र स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित था, जिसमें भारतीय खेती के आधुनिकीकरण में व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई। पांच शॉर्टलिस्ट किए गए टीमों ने अपने उत्कृष्ट विचारों को एक पैनल के सामने प्रस्तुत किया, जिसका नेतृत्व श्री अतुल पाटीदार, जमीनी स्तर पर सुशासन के विशेषज्ञ और श्री राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया।

ट्रैक 9 – एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण

इस सत्र का मुख्य विषय “एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण” था, जिसमें एक लचीले एवं समावेशी भविष्य को आकार देने में वर्तमान कार्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। चर्चा का नेतृत्व बीच प्लीज इंडिया के संस्थापक श्री मल्हार कलांबे, छत्तीसगढ़ के पूर्व सिविल सेवक श्री ओ. पी. चौधरी और इकोसेंस के संस्थापक और सीईओ श्री अभिषेक मंगलिक ने किया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सतत भारत की परिकल्पना को दैनिक जीवन, शासन और तकनीकी नवाचार में स्थिरता को समाहित करके ही प्राप्त किया जा सकता है तथा स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

ट्रैक 10 – विकसित भारत के लिए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को बदलते कार्यक्षेत्र के लिए तैयार करना था। इस सत्र का संचालन प्रख्यात शिक्षाविद और सुपर 30 के संस्थापक श्री आनंद कुमार और लोक नीति विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता श्री अनिकेत देब ने किया। चर्चा में इस बात पर बल दिया गया कि वर्तमान में रोजगार योग्यता केवल डिग्री तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें कौशल, अनुकूलन क्षमता और भविष्य के लिए तत्परता भी शामिल है। इसमें स्व-विकास, अनुशासित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकी चुनौतियों से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।

आधिकारिक कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रतिभागियों ने दो समूहों में प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय का दौरा किया, जहां उन्हें भारत की नेतृत्व विरासत और लोकतांत्रिक विकास की गहरी समझ प्राप्त हुई। इसके बाद प्रतिभागियों को राज्य टीमों में पुनर्गठित किया गया और वे केंद्रीय मंत्रियों और संसद सदस्यों के आवासों पर रात्रिभोज के लिए रवाना हुए, जहाँ साझा चिंतन और राष्ट्रीय सेवा के माहौल में सार्थक संवाद, मार्गदर्शन और अनौपचारिक सलाह-मशविरा का अवसर मिला।

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2026 का दूसरा दिन एक केंद्रित और अग्रसर दृष्टिकोण के साथ संपन्न हुआ, जिससे सरकार की यह प्रतिबद्धता दोहराई गई कि युवाओं को भारत के राष्ट्र निर्माण यात्रा के केंद्र में रखा जाएगा। थीम आधारित ट्रैकों में समृद्ध विचार-विमर्श और युवा नेताओं द्वारा नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ सक्रिय सहभागिता ने डायलॉग को विचारों, नेतृत्व और सहभागी शासन के लिए एक मजबूत मंच के रूप में और भी सशक्त किया। इस कार्यक्रम का समापन 12 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें प्रधानमंत्री देश भर के युवा नेताओं से बातचीत करेंगे। संवाद के तीसरे दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रेरणादायक बातचीत, विषयवार प्रस्तुतियाँ और विकसित भारत की भावना और विविधता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री ने सोमनाथ की अपनी यात्रा की झलकियां साझा की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ यात्रा की कुछ झलकियां साझा की।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:

‘‘सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। यह हमारे सभ्यतागत साहस का गौरवशाली प्रतीक है।

यह यात्रा #सोमनाथस्वाभिमानपर्व के दौरान हो रही है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एकजुट हुआ है।

लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभारी हूं।’’

 

“जय सोमनाथ!

आज का स्वागत बहुत विशेष था।”

 

“आज शाम सोमनाथ में, मैंने श्री सोमनाथ न्‍यास की एक बैठक की अध्यक्षता की। हमने मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और भी यादगार बनाने के तरीकों की समीक्षा की।”

 

“ॐ हमारे वेदों का, शास्त्रों का, पुराणों का, उपनिषदों और वेदांत का सार है।

ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है।

ॐ ही साधना में साध्य है।

ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है।

ॐ से ही हमारे मंत्र प्रारंभ एवं पूर्ण होते हैं।

आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में 1000 सेकंड्स तक ओंकार नाद के सामूहिक उच्चार का सौभाग्य मिला। उसकी ऊर्जा से अंतर्मन स्पंदित और आनंदित हो रहा है।

ॐ तत् सत्!!”

 

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के सुअवसर पर सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्यता और दिव्यता से भरा ड्रोन शो देखने का सौभाग्य मिला। इस अद्भुत शो में हमारी प्राचीन आस्था के साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।”

 

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केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी, मणिपुर के राज्यपाल, गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा आर्थिक मामलों, व्यय और राजस्व विभागों के सचिवों और केंद्रीय वित्त मंत्रालय तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।

प्रतिभागियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से कई प्रतिभागियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) को अधिक आवंटन के साथ जारी रखा जाना चाहिए क्योंकि यह परिसंपत्ति निर्माण में तेजी लाने में मदद करती है और राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी निवेश का समर्थन करती है।

गौरतलब है कि 2020-21 से केंद्र सरकार ने एसएएससीआई के तहत राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों की विधिवत जांच की जाएगी और बजट 2026-27 तैयार करते समय उन पर उचित रूप से विचार किया जाएगा

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“भारत की भाषाएँ परस्पर विरोधाभासी नहीं हैं; बल्कि वे एक-दूसरे में योगदान देती हैं।”– उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन

नई दिल्ली – तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन–2026 का उद्घाटन सत्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वैश्विक हिन्दी परिवार, और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषाओं और साहित्यिक अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।

इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष और प्रख्यात विद्वान, पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने की। श्री श्याम परांडे, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव, और प्रसिद्ध जापानी भाषाविद् पद्म श्री टोमियो मिसोकामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. सचिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए, और प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी, विभागाध्यक्ष, भारतीय भाषा और साहित्यिक अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, भी इस अवसर पर मौजूद थे। सत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के निदेशक अनिल जोशी ने किया।

तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन में बोलते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भाषाएँ सभ्यता की जीवंत चेतना हैं, क्योंकि वे सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि स्मृति, संस्कृति, परंपरा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले मूल्यों की वाहक भी हैं। भारत की एकता कभी समानता पर आधारित नहीं रही; बल्कि यह कई भाषाओं के आपसी सम्मान से बनी है, जो साझा सभ्यतात्मक दृष्टि और धर्म द्वारा एक-दूसरे से बंधी हुई हैं। भारतीय भाषाएँ विरोधाभासी नहीं हैं; बल्कि ये लगातार एक-दूसरे में योगदान देती हैं, जिससे दर्शन, ज्ञान और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति समृद्ध होती है।

प्राचीन शिलालेखों और ताड़पत्र की पांडुलिपियों से लेकर आज के डिजिटल रूपों तक, भाषाओं ने सोच को आकार दिया है, ज्ञान को सहेजा है और सामूहिक कल्पना को पल्लवित-पोषित किया है। चूंकि भाषाएँ हमेशा सीमाओं से परे यात्रा करती रही हैं, यहाँ तक कि कूटनीति से भी बहुत पहले, इसलिए आज हमारा कर्तव्य सिर्फ भाषाई विविधता की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि लुप्तप्राय भाषाओं को समर्थन देना और उन्हें शिक्षा व तकनीक के माध्यम से आत्मविश्वासके साथ भविष्य में ले जाना भी है। इस तरह, हरेक भाषा का जश्न मनाते हुए हम हर भारतीय की गरिमा को बनाए रखते हैं, क्योंकि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।

इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएँ सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और सामाजिक मूल्यों की वाहक हैं।

डॉ. निशंक ने यह भी बताया कि हमारी भाषाओं ने मानव चेतना और परंपराओं को संरक्षित किया है, साथ ही पूरी दुनिया में भारत की सभ्यता और ज्ञान का प्रचार किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि योग, आयुर्वेद, साहित्य और दर्शन जैसी अमूल्य धरोहरें हमारी भाषाओं के माध्यम से विश्वभर में फैली हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाएँ संघर्ष नहीं सिखातीं, बल्कि सह-अस्तित्व, समानता और सामंजस्य का पाठ भी पढ़ाती हैं। ये सिर्फ संचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज और व्यक्ति के विकास की आधारशिला भी हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएँ एकता और ज्ञान को बढ़ावा देती हैं, न कि विभाजन को, और यही उनकी शक्ति और गौरव का स्रोत है।

अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री राम बहादुर राय ने कहा कि यह सम्मेलन भाषाओं पर विचार करने और उनके विकास के लिए कार्य करने का एक अवसर है। उन्होंने बताया कि कुछ भ्रमित विद्वानों और भाषाविदों ने यह विचार फैलाया कि भारतीय भाषाएँ चार परिवारों में विभाजित हैं। हालांकि, अब यह स्थापित हो चुका है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार से संबंधित हैं। इसे पहचानने से कृत्रिम विभाजन खत्म होता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। जैसे-जैसे संवाद बढ़ेगा, यह एक लहर पैदा करेगा—भाषाओं की लहर, भाषाई एकता की लहर और सांस्कृतिक एकता की लहर। यह लहर वही भावना होगी जो भाषाओं को जोड़ती है और भाषाई समुदायों को एक साथ लाती है। विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए, पद्म श्री टोमियो मिसोकामी ने उपस्थित दर्शकों को हिन्दी में संबोधित करते हुए कहा, “लोग कहते हैं कि मैं भारतीय हूँ, हालाँकि मैं गलती से जापान में पैदा हुआ था।”

तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं के वैश्विक प्रचार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, नीदरलैंड, फ्रांस, मॉरिशस, थाईलैंड और जापान सहित 70 से अधिक देशों के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, भारत के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और बोलियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 से अधिक प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और भाषायी कार्यकर्ताओं ने भी सम्मेलन की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान दिया।

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प्रधानमंत्री ने सोमनाथ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शक्ति के महत्व को रेखांकित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ के ऐतिहासिक महत्व को पुनः रेखांकित करते हुए इसे भारत की आध्यात्मिक शक्ति और अटूट श्रद्धा का शाश्वत स्वरूप बताया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सोमनाथ केवल एक पवित्र तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रकाश स्तंभ भी है, जो अपनी आस्था, अटूट जीवटता और एकता के संदेश से पीढ़ियों को प्रेरित करता आ रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में उल्लेख किया:

“भगवान श्री सोमनाथ सृष्टि के कण-कण में विराजते हैं। उनकी अखंड आस्था अनंत काल से निरंतर प्रवाहित हो रही है। वे सदैव भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक रहेंगे।”

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में युवाओं से विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की यात्रा का नेतृत्व करने का आह्वान किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और युवाओं से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा में पेशेवर उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

विकसित भारत @2047 के विजन के बारे में बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी आजादी की शताब्दी की दिशा में बढ़ते हुए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी लेकिन हासिल किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि यह विजन सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास भी शामिल है। इस विजन की सफलता काफी हद तक युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करती है।

एक बड़ी वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरने की भारत की आकांक्षा को स्पष्ट करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उद्देश्य छोटे देशों पर अपनी शर्तें थोपना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित  करना है कि कोई अन्य देश भारत पर अपनी शर्तें न थोप सके।

तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जो चीज पांच  वर्ष पहले जरूरी थी, वह जल्द ही अपनी प्रासंगिकता खो सकती है। उन्होंने कहा कि बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है और निरंतर सफलता के लिए अनुकूलनशीलता एवं आजीवन सीखते रहने की ललक आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से कभी न करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग जीवन यात्रा और गति होती है। अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, लगन और ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को साधारण शुरुआत से बड़ी जिम्मेदारी वाले पदों तक ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ अपने लिए ही जीने से जीवन का बड़ा उद्देश्य खत्म हो जाता है।

विद्यार्थियों के लिए आवश्यक तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों के बारे में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे समय का प्रभावी प्रबंधन करने, दीर्घकालिक सफलता को नुकसान पहुंचाने वाले शॉर्टकट से बचने तथा कभी हार न मानने का आग्रह किया और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक कथन  – “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – की याद दिलाई।

उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी की जय जवान स्कॉलरशिप की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के जवानों एवं उनके परिवारों के बलिदानों को सार्थक शैक्षिक सहायता देकर सम्मानित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिवर्सिटी के काम का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी पहलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि विश्वविद्यालय सिर्फ सीखने के केन्द्र भर नहीं होते, बल्कि वे ऐसी संस्थाएं हैं जो राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में मदद करती हैं।

विश्वविद्यालय परिसरों में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए, उपराष्ट्रपति ने इसे युवाओं और समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया और विद्यार्थियों से अनुशासन, सार्थक उद्देश्य और स्वास्थ्य जीवनशैली चुनकर मादक पदार्थों को साफ और सीधे तौर पर “ना” कहने की अपील की।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति सदा आभारी रहें, जिनका मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्य उनके चरित्र एवं भविष्य को आकार देते हैं।

दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया; पंजाब सरकार में रक्षा सेवा कल्याण, स्वतंत्रता सेनानी तथा बागवानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत; और सांसद (राज्यसभा) तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन की तैयारी को लेकर बैठक

उपायुक्त ने अधिकारियों को तैयारी से संबंधित दिये आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश

झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन

रांची,10.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह-2026 की तैयारियों को लेकर आज दिनांक 10 जनवरी 2026 को समाहरणालय ब्लॉक ए स्थित सभागार में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक (शहर) रांची एवं ट्रैफ़िक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), रांची, श्री कुमार रजत, निदेशक आइटीडीए, श्री संजय कुमार भगत, निदेशक डी.आर.डी.ए., श्री सुदर्शन मुर्मू, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी राँची, श्रीमती मोनी कुमारी, ज़िला परिवहन पदाधिकारी, श्री अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी राँची, श्री सुरभि सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, एल. आर. डी.सी. रांची, श्री मुकेश कुमार , जिला नजारत उपसमाहर्त्ता रांची, डॉ सुदेश कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 एवं कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची, टाटीसिलवे रांची, समादेष्टा सी.आई.एस.एफ., एच.ई. सी., अग्निश्मन पदाधिकारी रांची, कमांडिंग ऑफिसर एन. सी. सी. रांची, सहित संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी और सफल संचलान को लेकर विचार-विमर्श करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये

मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी पर विचार विमर्श करते हुए उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 को आगन्तुकों के लिए मैदान के दोनों ओर वाटरप्रूफ पण्डाल/गैलरी/कुर्सी की व्यवस्था, मैदान समतलीकरण एवं बैरिकेटिंग, स्टेज एवं साउंड बॉक्स के लिए टॉवर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त रांची द्वारा जिला नजारत उपसमाहर्त्ता को मंच के दोनों तरफ वाटरप्रूफ पंडाल, मंच पर वीवीआईपी के बैठने की व्यवस्था, मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम, परेड में शामिल कैडेटों के लिए अल्पाहार एवं पुष्प सज्जा की व्यवस्था आदि से संबंधित तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची को विद्युत व्यवस्था एवं साउण्ड प्रूफ जेनरेटर की व्यवस्था को लेकर अंतिम रुप से तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यक्रम स्थल में पेयजल आपूर्ति, वीआईपी टॉयलेट की व्यवस्था, परेड पूर्वाभ्यास में भाग लेने वाले कैडेटों के लिए मोरहाबादी मैदान में अस्थायी शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निदेश कार्यपालक अभियंता, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग वितरण प्रमण्डल गोंदा को निर्देश दिया गया।

उपायुक्त रांची, द्वारा मोरहाबादी की ओर जानेवाली सड़कों की मरम्मती एवं साफ-सफाई, चिकित्सा मेडिकल कैंप और अग्निशमन की व्यवस्था को लेकर ससमय पूरी तैयारी करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया गया।

उपायुक्त द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में आयोजित होने वाले झांकी और परेड से संबंधित जानकारी भी संबंधित पदाधिकारी से ली गयी।

उपायुक्त रांची, द्वारा पार्किंग व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक (यातायात) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे मोरहाबादी मैदान में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था, झांकी के लिए ट्रेलर/ बड़े वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

उपायुक्त रांची, द्वारा सिविल सर्जन (सदर) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे चिकत्सा व्यवस्था / मेडिकल कैंप एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराने कहा।

उपायुक्त रांची, द्वारा नगर निगम रांची को निर्देश देते हुए कहा की वे समारोह स्थल की सफाई एवं आस-पास की सफाई एवं समाहरोह स्थल की तरफ आने वाली सभी प्रमुख सड़को की सफाई कराना सुनिश्चित करेंगे।

मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी से संबंधित अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने ससमय तैयारी पूरी करने के निर्देश सभी सम्बंधित पदाधिकारियों को दिया गया।

झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन

उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया इस बार गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में मुख्य आकर्षण यहाँ की झांकियों का प्रदर्शन रहेगा एवं गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया जाएगा। जिससे यहाँ के लोग सरकार के सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं/ नीतियों पर आधारित तथा झारखण्ड की उत्कृष्ट कला, संस्कृति, परम्परा एवं धरोहर का दीदार इन झांकी के माध्यम से करेंगे।

झांकियों का प्रदर्शन विभागवार

गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में इस बार कुल-12 विभागों की झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। जो निम्नवत है-

1. वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग

2. ग्रामीण विकास विभाग

3. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग

4. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

5. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग

6.सूचना एवं जन संपर्क विभाग

7. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग

8. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग

9. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड

10. परिवहन विभाग

11. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग

12.उच्च तकनिकी शिक्षा विभाग

लगभग 15 प्लाटून के द्वारा परेड

उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया की गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में हो रहा है, इस बार लगभग 15 प्लाटून और 03 बैन्ड़ के द्वारा किया जाएगा।

18 जनवरी 2026 से दिनांक 23 जनवरी 2026 तक, दिनांक 24 जनवरी 2026 तक अंतिम रिहार्सल पूरा लिया जाएगा।

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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ की समीक्षा बैठक

नई दिल्ली, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में गुजरात एवं पंजाब के कृषि मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY), कृषोन्नति योजना (KY) सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं के तहत राज्यों में हो रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान योजनाओं के राज्यवार क्रियान्वयन, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों तथा बजट उपयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जारी की  गई धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों द्वारा धनराशि का प्रभावी एवं समय पर उपयोग किया जाएगा, उन्हें आगामी बजट में पर्याप्त एवं निर्बाध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रांश के ब्याज की निर्धारित राशि समय पर जमा करना अनिवार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की देरी से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है और इसका प्रतिकूल प्रभाव अगली किस्त की स्वीकृति पर भी पड़ सकता है।

बैठक के दौरान श्री चौहान ने गुजरात में दलहन एवं तिलहन की उत्पादन क्षमता, किसानों की भागीदारी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उड़द की खरीद को और अधिक गति देने तथा किसानों तक खरीद प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा, आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवंटित बजट का प्रभावी, योजनाबद्ध एवं परिणामोन्मुखी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। समय पर एवं उचित वित्तीय उपयोग से ही योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का सही आकलन किया जा सकता है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार द्वारा अगली किस्त समय पर जारी की जा सकेगी।

बैठक में पंजाब के कृषि मंत्री श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, गुजरात के कृषि राज्य मंत्री श्री रमेशभाई कटारा, कृषि मंत्रालय के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान आज काशी में सम्‍पन्‍न

नई दिल्ली – चौथे काशी तमिल संगमम के अंतर्गत आयोजित ऐतिहासिक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान (एसएवीई)  दल नौ दिवसीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर आज काशी पहुंचा। वाराणसी के आयुक्त श्री एस. राजलिंगम ने नमो घाट पर प्रतिभागियों का स्वागत किया।

अभियान यात्रा के दौरान ऋषि अगस्त्य से संबंधित मार्ग का अनुसरण कर लगभग 100 प्रतिभागियों ने तेनकासी से काशी तक 2,460 किलोमीटर की दूरी तय की।

गांवों, कस्बों और शहरों से गुज़रते हुए अभियान दल का विभिन्न समुदायों के लोगों ने गर्मजोशी और उत्साह से स्वागत किया। इस अभियान से सिद्ध चिकित्सा के प्रति जागरूकता भी बढ़ी, जिसमें इसके निवारक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली को बल मिला।

आईएनएस चिल्का में प्रशिक्षुओं के बैच 02/25 की पासिंग आउट परेड

नई दिल्ली – आईएनएस चिल्का में प्रशिक्षुओं के बैच 02/25 की पासिंग आउट परेड 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण की सफल समाप्ति का प्रतीक है। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य समारोह में प्रशिक्षुओं ने परेड में हिस्सा लिया जो उनके अनुशासित, दृढ़ और युद्ध के लिए तैयार नौसैनिक पेशेवर बनने की प्रक्रिया का प्रतीक था। इस पासिंग आउट बैच में 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे। इनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (चिकित्सा सहायक), भारतीय नौसेना के 44 खेल प्रवेश कर्मी और भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।

दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना परेड के मुख्य अतिथि और निरीक्षण अधिकारी थे। आईएनएस चिल्का के कमान अधिकारी, कमोडोर बी दीपक अनील, संचालन अधिकारी थे। समारोह में विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रसिद्ध खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य व्यक्ति और उत्तीर्ण होने वाले प्रशिक्षुओं के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

परेड में प्रशिक्षुओं ने अपने अभ्यास, अनुशासन और पेशेवर कौशल के उत्कृष्ट मानकों का शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष साथियों के साथ महिला अग्निवीरों की भागीदारी ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशिता और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दर्शाया है।

दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने परेड को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने पेशेवर कौशल को निखारने और तकनीकी रूप से जागरूक होने के साथ-साथ कर्तव्य, सम्मान और साहस जैसे नौसेना के मूल मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने रास्ते को चुनते हुए देश की शान बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने अग्निवीरों के अभिभावकों के राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना की। मुख्य अतिथि ने नौसेना और राष्ट्र के परिवर्तन को आकार देने में टीम चिल्का के अथक प्रयासों और महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

मुख्य अतिथि ने मेधावी अग्निवीरों को पदक और ट्राफियां प्रदान कीं। शशि बी. केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनीता यादव को समग्र योग्यता क्रम में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। केशव सूर्यवंशी और सोनेंद्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) चुना गया।

समापन समारोह के पहले, खारवेला डिवीजन को समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन को उपविजेता के तौर पर चुना गया। इसी अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के दूसरे संस्करण का भी विमोचन हुआ। इस पत्रिका में अग्निवीरों के अनुभवों और उनके प्रेरणादायक बदलाव के सफर को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

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उत्तर पूर्वी क्षेत्र सम्मेलन: वस्त्र मंत्रालय ने प्रगति की समीक्षा की और उत्तर पूर्वी राज्यों में वस्त्र उद्योग की वृद्धि को गति देने के लिए कार्यसूची तैयार की

नई दिल्ली – भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने आज गुवाहाटी में “भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ और सशक्त बनाना” विषय पर एक उच्च स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन ने नीतिगत समन्वय, निवेश प्रोत्साहन, कौशल विकास, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से उत्तर-पूर्वी राज्यों में वस्त्र क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान किया।

इस सम्मेलन में माननीय केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह, माननीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र एवं उद्योग मंत्री, संसद सदस्य और पूर्वोत्तर राज्यों तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा वस्त्र क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के वस्त्र क्षेत्र का अभिन्न अंग है और केंद्र सरकार इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

विचार-विमर्श के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनूठी खूबियों-इसकी समृद्ध हथकरघा विरासत, जीआई-टैग वाले उत्पाद, रेशम की विविध किस्में, बांस शिल्प और महिला कारीगरों और बुनकरों की सशक्त भागीदारी पर प्रकाश डाला गया।

सम्मेलन में मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजाइन नवाचार और बाजार संबंधों के साथ संयोजित करने के लिए एक समन्वित और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

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पारादीप पत्तन पर 25वां अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन शुरू

नई दिल्ली – 25वें अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 2025-26 का उद्घाटन गुरुवार को पारादीप पत्तन के जयदेव सदन में किया गया। इस चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पारादीप पत्तन प्राधिकरण द्वारा मेजर पोर्ट्स स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के तत्वाधान में किया जा रहा है।

पारादीप पत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पी. एल. हरनाध ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति मानवीय भावना की आंतरिक सुंदरता को दर्शाती है और एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा में सांस्कृतिक सम्मेलन के 25वें संस्करण की मेज़बानी करना पारादीप पत्तन के लिए गर्व की बात है, ओडिशा एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शास्त्रीय ओडिसी नृत्य और कलात्मक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।

उन्होंने देश भर के प्रमुख पत्तनों की टीमों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और कहा कि रंगारंग उद्घाटन परेड, इस सम्मेलन के लिए प्लान किए गए शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दर्शाती है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि भागीदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रतिस्पर्धा से अधिक महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि भारत में पत्तन कर्मचारियों में पेशेवर भूमिकाओं के अलावा भी ज़बरदस्त सांस्कृतिक प्रतिभा है।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भरोसा दिलाया कि उनके आराम के लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम किए गए हैं और सभी को एक यादगार व अच्छा अनुभव मिले, इसकी शुभकामनाएं दीं। इन बातों के साथ, उन्होंने सम्मलेन के शुभारंभ की घोषणा की।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री हिमांशु शेखर राउत ने की। इस अवसर पर एफए एवं सीएओ श्री अशोक कुमार साहू; मुख्य यांत्रिक अभियंता श्री सुशील चंद्र नाहक; और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विभूति भूषण दास भी उपस्थित थे। आयोजन समिति के सचिव डॉ. डी. पी. सेठी ने स्वागत भाषण दिया।

इस सम्मेलन में चेन्नई, कोचीन, दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण, कोलकाता, मुंबई, विशाखापत्तनम, वी.ओ. चिदंबरनार और मेजबान पारादीप पत्तन सहित नौ प्रमुख पत्तनों के 200 से ज़्यादा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। क्लासिकल वोकल, लाइट वोकल, इंस्ट्रूमेंटल म्यूज़िक, डांस और ड्रामा कैटेगरी में प्रतियोगिताएं हो रही हैं।

मुंबई पत्तन प्राधिकरण द्वारा उद्घाटन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद विशाखापत्तनम पत्तन प्राधिकरण ने अगले कुछ दिनों में होने वाले शानदार कार्यक्रमों के लिए माहौल तैयार किया।

25वां अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 11 जनवरी, 2026 को एक समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ संपन्न होगा।

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के लिए कल्याण और पुनर्वास के उपायों पर समीक्षा बैठक की

नई दिल्ली – सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के कल्याण और पुनर्वास’ पर एक बैठक कल नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई।

बैठक में चर्चा छह महानगरों- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूरू और हैदराबाद को भिखारी मुक्त बनाने पर केंद्रित रही। इस उद्देश्य के लिए अभियान नगर निगमों, शहरी स्थानीय निकायों, राज्य समाज कल्याण विभागों, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच नजदीकी तालमेल से चलाया जाएगा।

हाइब्रिड तरीके से आयोजित इस बैठक में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और बेंगलूरू के नगर निगमों और संबंधित राज्य समाज कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।

 

बैठक में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव ने सूचित किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 के लागू होने के बावजूद, प्रमुख महानगरों में ट्रैफिक सिग्नलों पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के भिक्षावृत्ति में निरंतर संलिप्त रहने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में पहले भी चिंता जताई गई थी। सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखते हुए, यह तय किया गया कि शुरुआत में छह पहचान किये गए मेट्रो शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि वहां भिक्षावृति समाप्त की जा सके।

सरकार की मुख्य पहलों पर भी ज़ोर दिया गया, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति (2024), नेशनल ट्रांसजेंडर पोर्टल, ट्रांसजेंडर पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड जारी करना, गरिमा गृहों की स्थापना और स्माइल योजना (आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता योजना) का कार्यान्वयन शामिल है। इसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति दोनों उप-योजनाएं शामिल हैं। बैठक में देशव्यापी अभियान “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” की भी समीक्षा की गई जिसके पहले चरण में 181 शहर शामिल हैं।

कल्याणकारी उपायों को लागू करने की स्थिति, भीख मांगने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास में आने वाली चुनौतियों और ‘स्माइल’ (भिक्षावृत्ति) योजना के तहत हुई प्रगति पर बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन दिए गए। यह योजना अभी दिल्ली और हैदराबाद में लागू है और इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने का प्रस्ताव है।

मंत्री महोदय ने राज्यों को गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से एक महीने का गहन अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसमें ट्रैफिक सिग्नलों पर भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा समन्वित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में भिक्षावृत्ति-मुक्त दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों को पुरस्कृत करने का भी संकेत दिया गया।

बैठक का समापन सभी हितधारकों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता के दोहराव के साथ हुआ, जिसमें शहरों को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों एवं भिक्षुओं के सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया.

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में सोमनाथ धाम की शाश्वत भूमिका को एक सुभाषित के माध्यम से रेखांकित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज पावन सोमनाथ धाम में श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में इसकी शाश्वत भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पावन सोमनाथ धाम ने सदियों से अपनी दिव्य ऊर्जा के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह ऊर्जा आज भी आस्था, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग को आलोकित करती हुई युगों से सभी भारतवासियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य कर रही है।

एक संस्कृत श्लोक को एक्स पर उद्धृत करते हुए श्री मोदी ने लिखा:

“पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।

आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।

प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

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झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से रांची प्रेस क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की

रांची,08.01.2026 –   अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. मुलाकात के दौरान राज्यपाल महोदय का निम्नांकित बिंदुओं की तरफ ध्यान आकर्षित कराते हुए ज्ञापन सौंपा गया.

1.सेवानिवृत पत्रकारों के लिए पेंशन स्कीम के कार्यान्वयन का प्रस्ताव.

2.पत्रकारों के लिए रांची और राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में आवासीय कॉलोनी के विकास संबंधित प्रस्ताव.

3.पत्रकारों के स्वास्थ्य बीमा और पत्रकार सुरक्षा कानून शीघ्र लाने संबंधी प्रस्ताव.

4. रांची प्रेस क्लब में राज्यपाल महोदय के साथ ’संवाद’ कार्यक्रम के तहत पत्रकारों के साथ बातचीत का प्रस्ताव जिसपर उन्होंने निकट भविष्य में आयोजन पर सहमति जताई.

प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय, सचिव अभिषेक सिन्हा, संयुक्त सचिव चन्दन भट्टाचार्य एवं कार्यकारिणी सदस्य प्रतिमा कुमारी शामिल थे.

उक्त जानकारी रांची प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने दी.

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ठंड के बढ़ते प्रभाव एवं शीतलहर को देखते हुए सभी कोटि के विद्यालयों में कक्षाएं बंद रखने का आदेश

मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के बाद उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जारी किया गया आदेश

वर्ग KG से वर्ग 12वीं तक की कक्षाएं स्थगित

रांची,08.01.2026 – रांची जिला अंतर्गत संचालित सभी सरकारी, गैर सरकारी सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) एवं सभी निजी विद्यालयों में कक्षाएं 09 से 10 जनवरी तक बंद

सभी कोटि के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी उक्त अवधि में विद्यालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए गैर-शैक्षणिक कार्यों का करेंगे निष्पादन

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दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्म दिवस पर “गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना” संवाद कार्यक्रम का होगा आयोजन

11 जनवरी 2026 को टाना भगत स्टेडियम खेलगांव में आयोजित होगा कार्यक्रम

कार्यक्रम की तैयारी को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने की संबंधित पदाधिकारियों के साथ बैठक

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा तैयारी को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश

रांची,08.01.2026 – दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्म दिवस के अवसर पर दिनांक 11 जनवरी 2026 को टाना भगत स्टेडियम, खेलगांव, रांची में गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना” संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड श्री हेमंत सोरेन राज्य के 10वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। इसमें कार्यक्रम के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के 10वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाएगा। यह योजना विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, मंच एवं पंडाल निर्माण, बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, विद्युत आपूर्ति, अग्नि सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा तथा आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के आगमन एवं निकासी की व्यवस्था सुव्यवस्थित हो, पंजीकरण प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित की जाए तथा योजना से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं जानकारी की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। उपायुक्त द्वारा सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन और समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। करें।

बैठक में उप विकास आयुक्त, रांची, पुलिस अधीक्षक नगर/ यातायात, राँची, परियोजना निदेशक, समेकित जनजाति विकास अभिकरण, राँची, अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि-व्यवस्था, राँची, अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर, राँची, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, उप प्रशासक, नगर निगम, राँची, विशेष विनियमन पदाधिकारी, जिला नजारत उपसमाहर्ता, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, राँची, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला खेल पदाधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री ने विशाख रिफाइनरी में अवशिष्ट उन्नयन इकाई के सफल संचालन की सराहना की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाख रिफाइनरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अवशिष्ट उन्नयन इकाई (आरयूएफ) के सफल संचालन की सराहना की। उन्होंने इसे ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक इकाई आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के राष्ट्र के प्रयासों में अहम भूमिका निभाएगी।

केंद्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी के ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मोदी ने लिखा:

“यह अत्याधुनिक इकाई ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों को नई दिशा प्रदान करेगी जिससे हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। @HardeepSPuri”

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श्री अमित शाह ने तमिलनाडु के श्रीरंगम के पवित्र अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी मंदिर और तिरुचिरापल्ली में तिरुवनई कोविल के अरुलमिगु जंबुकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की

नई दिल्ली –  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने तमिलनाडु के श्रीरंगम के पवित्र अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी मंदिर और तिरुचिरापल्ली में तिरुवनई कोविल के अरुलमिगु जंबुकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में पोंगल उत्सव समारोह में भी हिस्सा लिया।

X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट्स की श्रृंखला में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि तमिलनाडु के श्रीरंगम में पवित्र अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी मंदिर में पूजा करने का सौभाग्य मिला। हमारे देश के सभी नागरिकों की भलाई के लिए आशीर्वाद मांगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के थिरुवनई कोविल में अरुलमिगु जंबुकेश्वरार मंदिर में प्रार्थना करने का सौभाग्य मिला।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में पोंगल समारोह में शामिल होकर बहुत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि यह एक पवित्र त्योहार है जो कृतज्ञता और सद्भाव के ज़रिए प्रकृति और हमारे समुदायों के साथ हमारे गहरे संबंध को फिर से जागृत करता है। यह सभी के लिए समृद्धि, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद लाए।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर समीक्षा बैठक की

नई दिल्ली  – केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मण्डपम में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में करोड़ों की लागत से चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने मध्य में 29,278 करोड़ रुपए की लागत से चल रही कुल 1,832 किमी लंबाई वाली 45 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अटल प्रोग्रेस-वे (चंबल एक्सप्रेस-वे) के एलाइनमेंट पर सकारात्मक चर्चा हुई।

इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव जी, केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री अजय टम्टा जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा जी, मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी, मध्य प्रदेश के लोकनिर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह जी तथा केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए।

 

साथ ही, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने उत्तराखंड में 13,783 करोड़ रुपए की लागत से चल रही कुल 656 किमी लंबाई वाली 25 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री अजय टम्टा जी, श्री हर्ष मल्होत्रा जी तथा केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा की।

बैठक में उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थस्थलों – केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को सड़कों से जोड़ने वाली चारधाम परियोजना की समीक्षा की गई। साथ ही भूस्खलन से बचाव के कार्य और राष्ट्रीय राजमार्ग स्ट्रेच के रखरखाव के स्थिति की समीक्षा की गई।

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने की शिष्टाचार भेंट, सभी ने मुख्यमंत्री को दी नव वर्ष 2026 की बधाई एवं शुभकामनाएं

रांची,06.01.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को सभी ने नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सभी का हार्दिक स्वागत एवं नववर्ष शुभकामनाओं के लिए उनके प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि नव वर्ष नया संकल्प, नई ऊर्जा तथा नए अवसरों को लेकर आता है।

हम सभी लोग इस नव वर्ष में सकारात्मक ऊर्जा एवं प्रतिबद्धता के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपनी महत्ती भूमिका निभाने को लेकर दृढ़ संकल्पित रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 झारखंड की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित हो, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन और जनता के सहयोग से झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शुमार करने की दिशा में यह वर्ष एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से एकजुट होकर सरकार की विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से समस्त राज्यवासियों के सुख, समृद्धि, उन्नति और खुशहाली की कामना की तथा नववर्ष की शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों में अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, सीईओ जेएसएलपीएस श्री अनन्य मित्तल, अपर सचिव उद्योग श्रीमती प्रीति रानी, अपर सचिव वित्त श्री धनंजय सिंह, अपर सचिव स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता श्रीमती सीता पुष्पा, निदेशक सामाजिक सुरक्षा श्री विजय कुमार सिंह, उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम श्री कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त सरायकेला-खरसावां श्री नीतीश कुमार सिंह, उपायुक्त कोडरमा श्री ऋतुराज वहीं पुलिस अधिकारियों में डीजी होमगार्ड श्री एम० एस० भाटिया, डीआईजी दुमका श्री अमर लकड़ा, एसपी लोहरदगा श्री सादिक अनवर रिज़वी, एसपी सरायकेला-खरसावां श्री मुकेश कुमार लुनायत, एसपी गोड्डा श्री मुकेश कुमार, एसपी गुमला श्री हारिश बिन जमां, एसपी खूंटी श्री मनीष टोप्पो, एसपी ट्रेनिंग सेंटर मुसाबनी श्री विजय आशीष कुजूर सहित अन्य अधिकारी सम्मिलित थे।

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