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एकीकृत उद्योग क्षमता, कौशल और प्रौद्योगिकी अपनाना रेलवे बुनियादी ढांचे के विस्तार की कुंजी: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली  – रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज बजट वेबिनार श्रृंखला के दूसरे भाग को संबोधित किया, जिसका विषय “आर्थिक विकास को बनाए रखना और मजबूत करना: बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स एवं माल ढुलाई” था।वेबिनार के दौरान, संघ मंत्री ने क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख फोकस क्षेत्रों पर प्रकाश डाला: समन्वित तरीके से क्षमता बढ़ाना, गुणवत्ता और योग्यता मानकों को मजबूत करना, तथा विवादों को कम करने और परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजीकरण और संविदात्मक ढांचे में सुधार।

रेलवे बुनियादी ढांचे का समन्वित विस्तार

श्री वैष्णव ने पिछले एक दशक में भारत के रेल नेटवर्क की अभूतपूर्व वृद्धि पर जोर दिया। लगभग 35,000 किमी नई पटरियां जोड़ी गईं, जो जर्मनी के कुल रेल नेटवर्क से अधिक है। इसके अलावा, 55,000 किमी कवर करने वाले नेटवर्क का लगभग 99% विद्युतीकृत हो चुका है, जो जर्मनी, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क के संयुक्त रेल नेटवर्क से अधिक है।संघ मंत्री ने कहा कि इतनी तेजी से विस्तार एक प्रमुख चुनौती पैदा करता है:

सरकारी विस्तार के साथ उद्योग क्षमता और संसाधनों को तालमेल में बढ़ाना। उन्होंने जोर दिया कि रेलवे विकास मूल रूप से उद्योग और सरकार के बीच साझेदारी है। परियोजना के पैमाने में अचानक वृद्धि या कमी उद्योग की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए, कौशल विकास, पर्यवेक्षण, गुणवत्ता मानक और प्रौद्योगिकी अपनाना बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ तालमेल में बढ़ना चाहिए। उद्योग हितधारकों के इनपुट भविष्य के सुधारों को आकार देने में मदद करेंगे।

हाई-स्पीड रेल दृष्टि और परिवर्तनकारी परियोजनाएं

हाई-स्पीड रेल विकास पर संबोधित करते हुए, श्री वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को एक कठिन सीखने का अनुभव बताया। उन्होंने नोट किया कि 160 किमी प्रति घंटा से अधिक गति पर ट्रेन संचालन डिजाइन और परिचालन जटिलता को घातांकीय रूप से बढ़ा देता है।

आईआईटी, उद्योग साझेदारों और रेलवे इंजीनियरों के सहयोग से, भारत ने इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया। जापानी साझेदारों ने शुरू में प्रति माह दो किमी निर्माण का अनुमान लगाया था, लेकिन भारत ने 15 किमी प्रति माह हासिल किया, जिससे जापान भविष्य के कॉरिडोरों के लिए रुचि लेने लगा।इस सफलता का उल्लेख करते हुए संघ मंत्री ने घोषणा की कि माननीय प्रधानमंत्री ने सात नई हाई-स्पीड पैसेंजर कॉरिडोरों को मंजूरी दी है, जो 4,000 किमी फैले हुए हैं जो 16 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ अगले 10 वर्षों में पूरे होने वाले हैं।इसके लिए प्रति वर्ष लगभग 500 किमी कमीशनिंग की आवश्यकता है, जो मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के पैमाने के बराबर है। अन्य 3,000 किमी को मंजूरी देने की योजनाएं चल रही हैं, जिसका लक्ष्य 2039-40 तक 7,000 किमी नेटवर्क है, जबकि लंबी अवधि की दृष्टि 15,000-21,000 किमी हाई-स्पीड रेल की योजना है।

श्री वैष्णव ने जोर दिया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रेलवे, उद्योग, आपूर्ति श्रृंखलाओं, उपकरण निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं, संचालन और रखरखाव टीमों, सिग्नलिंग विशेषज्ञों, रोलिंग स्टॉक निर्माताओं और विशेष विद्युत चालकों के उत्पादकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी। उन्होंने प्रमुख निर्माण और डिजाइन फर्मों को इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए केंद्रित कार्यशालाओं में आमंत्रित किया।

गुणवत्ता, योग्यता और टेंडर मानकों को मजबूत करना

श्री वैष्णव ने योग्यता मानदंडों को कड़ा करने और अत्यधिक उप-ठेकेदारी को कम करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देखा कि व्यापक टेंडर मानक अक्सर 20-30 बोलीदाताओं की भागीदारी का कारण बनते हैं, जिससे रूढ़िगत लागत अनुमानों से 20-30% नीचे बोली लगती है। ऐसी प्रथाएं अक्सर लागत कटौती, विवाद और मध्यस्थता का कारण बनती हैं।श्री वैष्णव ने कहा कि उप-ठेकेदारी 40% से अधिक नहीं होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में यह जटिल कार्यों के लिए आमतौर पर 20-30% तक सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं को गुणवत्ता और जवाबदेही के और भी सख्त मानकों का पालन करना चाहिए, ताकि सरकारी धन का कुशल उपयोग हो और विवाद न्यूनतम रहें।

बहुआयामी जटिलता और डोमेन विशेषज्ञता की आवश्यकता

रेलवे परियोजनाओं की जटिलता को रेखांकित करते हुए, संघ मंत्री ने समझाया कि राजमार्गों के विपरीत, रेलवे परियोजनाएं छह महत्वपूर्ण घटकों को समेटती हैं:

पटरी संरचना,

  • ओवरहेड विद्युतीकरण प्रणाली (पावर ग्रिड के समकक्ष),
  • सिग्नलिंग और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के समान),
  • स्टेशन विकास (बड़े रियल एस्टेट इकोसिस्टम के समान),
  • रोलिंग स्टॉक संचालन
  • एकीकृत संचालन और रखरखाव

उन्होंने जोर दिया कि अनुबंध प्रदान करते समय डोमेन विशेषज्ञता और क्षेत्र-विशिष्ट अनुभव आवश्यक हैं। सिविल एविएशन और जलमार्गों में भी इसी तरह के दृष्टिकोण की आवश्यकता है, क्योंकि प्रासंगिक विशेषज्ञता न होने वाली एजेंसियां देरी, लागत वृद्धि और मुकदमेबाजी का सामना करती हैं।

उद्योग सहयोग और हितधारक संलग्नता

श्री वैष्णव ने उद्योग पेशेवरों, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिभागियों, कार्यान्वयन एजेंसियों और हितधारकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने बजट-पूर्व वेबिनार के दौरान अपनी अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने कहा कि ये सुझाव क्षेत्र भर में सुधारों की नींव बनेंगे।

संघ मंत्री ने बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग; ऊर्जा; तथा सिविल एविएशन के मंत्रियों श्री मनोहर लाल खट्टर, श्री सरबानंद सोनोवाल और श्री के. राम मोहन नायडू तथा साथ ही उनके सचिवों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने वेबिनार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श और संघ बजट घोषणाओं के अनुरूप नवीन समाधानों के विकास के लिए प्रभावी मंच बताया।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजंत्री ने जिला के वरीय पदाधिकारियों के साथ उत्साहपूर्ण होली समारोह मनाया

सभी पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर रंग लगाकर त्योहार की खुशियां बाँटीं और आपसी सद्भावना को मजबूत किया

प्रशासन हर स्तर पर सतर्क है ताकि जनता पूर्ण सुरक्षा के साथ त्योहार मना सके

हम सबने मिलकर होली खेलकर न केवल त्योहार मनाया, बल्कि कार्यालयीन तनाव से मुक्ति पाकर नई ऊर्जा के साथ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।”:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री

रांची,04.03.2026 – होली के पावन अवसर पर राँची जिला प्रशासन में खुशियों और भाईचारे का रंग छाया रहा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज उपायुक्त आवास में जिला के वरीय पदाधिकारियों के साथ होली खेली। यह आयोजन पारंपरिक होली मिलन के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें सभी पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर रंग लगाकर त्योहार की खुशियां बाँटीं और आपसी सद्भावना को मजबूत किया।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तथा यह त्योहार प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है

इस अवसर पर उपायुक्त, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तथा यह त्योहार प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक कार्यों के बीच ऐसे अवसर हमें एक परिवार की तरह जोड़ते हैं। आज हम सबने मिलकर होली खेलकर न केवल त्योहार मनाया, बल्कि कार्यालयीन तनाव से मुक्ति पाकर नई ऊर्जा के साथ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।” उन्होंने सभी पदाधिकारियों, कर्मचारियों और राँची जिला वासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा अपील की कि सभी लोग त्योहार को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाएं।

सभी ने परंपरा का सम्मान करते हुए रंगों के साथ-साथ गुलाल, अबीर और होलियाना गीतों पर थिरकते हुए उत्साहपूर्ण माहौल बनाया।

श्री भजंत्री ने इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से होली एवं आगामी त्योहारों के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने, अफवाहों पर नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनाती तथा शांति समितियों की सक्रियता सुनिश्चित करने के निर्देशों की पुनः पुष्टि की। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर स्तर पर सतर्क है ताकि जनता पूर्ण सुरक्षा के साथ त्योहार मना सके।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन एवं जिला के सभी वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

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रक्षा मंत्रालय ने एएलएच एमके-II (एमआर) और वीएल-एसएचटीआईएल मिसाइलों के लिए 5,083 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय ने 3 मार्च, 2026 को भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके-II (समुद्री भूमिका) और भारतीय नौसेना के लिए सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइल (एसटीआईएल) की खरीद के लिए कुल 5,083 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।

एएलएच एमके-III (एमआर)

परिचालन भूमिका उपकरण, इंजीनियरिंग सहायता पैकेज और प्रदर्शन-आधारित लॉजिस्टिक सहायता सहित एएलएच एमके-III (एमआर) के लिए 2,901 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु के साथ खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के तहत हस्ताक्षर किए गए हैं।

ये दोहरे इंजन वाले हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और वर्तमान में उपयोग में आने वाले हवाई प्लेटफार्मों से कहीं बेहतर हैं। ये तटवर्ती हवाई अड्डों के साथ-साथ समुद्र में जहाजों से भी समुद्री सुरक्षा संबंधी कई मिशनों को अंजाम देने में सक्षम हैं। इनके शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की कृत्रिम द्वीपों, अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और संरक्षण तथा मछुआरों और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के कर्तव्यों को पूरा करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इस परियोजना में 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से उपकरणों की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है और इससे लोगों के लिए लगभग 65 लाख घंटे का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है, साथ ही देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को और मजबूत बनाता है।

वर्टिकल लॉन्च – एसएचटीआईएल मिसाइलें

सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइलों (एसएचटीआईएल) और उनसे जुड़े मिसाइल होल्डिंग फ्रेम की खरीद के लिए 2,182 करोड़ रुपये का अनुबंध रूसी संघ की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया है। इस खरीद का उद्देश्य हवाई खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ अग्रणी युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाना है।

 

यह प्रणाली भारतीय नौसेना के हवाई अड्डों पर मौजूद बहुस्तरीय वायु रक्षा संरचना को सुदृढ़ करेगी। इससे त्वरित कार्रवाई, हर मौसम में प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता और चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में बेहतर कार्य निष्पादन संभव होगा। यह अनुबंध आपसी विश्वास और रणनीतिक तालमेल पर आधारित भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही और सिद्ध रक्षा साझेदारी को और भी मजबूत करता है।

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विश्व वन्यजीव दिवस पर प्रधानमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने वाली और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को कायम रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। उन्होंने कहा कि यह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने और उनके संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और प्राकृतिक निवास की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है ताकि वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणियों का निवास है और उनका पालन-पोषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में बाघों की विश्व की 70% से अधिक और साथ ही एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी पायी जाती है तथा एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी यहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां जंगल के राजा एशियाई शेरों की संख्या बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल और स्लॉथ बियर के संरक्षण के उद्देश्य से की गई पहल के साथ-साथ चीतों का स्थानांतरण भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने भारत के सांस्कृतिक लोकाचार पर बल देते हुए कहा कि हमारे शास्त्र सभी जीवित प्राणियों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशीलता को प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस अवसर पर संस्कृत का नीतिपरक श्लोक साझा किया जिसमें कहा गया है-

“निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”

उक्त सुभाषितम् का संदेश यह है कि जंगलों के बिना बाघ विलुप्त हो जाते हैं और बाघों के बिना जंगल नष्ट हो जाते हैं। इसलिए, बाघ जंगल की रक्षा करते हैं और जंगल बाघ की रक्षा करते हैं जो प्रकृति में परस्पर गहरी निर्भरता को रेखांकित करता है।

श्री मोदी ने X पर अपने कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा-

विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। यह वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने का दिन है। हम संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और आवासों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं ताकि हमारे वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

हमें इस बात पर गर्व है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणी पाए जाते हैं। विश्व में 70% से अधिक बाघों का निवास हमारे यहां है। हमारे यहां एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी और एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी है। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां वनराज एशियाई शेर फल-फूल रहे हैं।

एनडीए सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कई प्रयास किए हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है जो अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच है। अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल, स्लॉथ बियर की सुरक्षा और चीतों का स्थानांतरण शामिल हैं।

 

 

“आज विश्व वन्यजीव दिवस है। हमारे शास्त्रों में सभी जीवों के कल्याण की कामना की गई है। उनसे हमें प्राणियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशील होने की प्रेरणा भी मिलती है। उसका एक उदाहरण यह है…

निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।

तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”

 

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रंगों और सौहार्द के पावन पर्व होली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ — हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखण्ड

जोहार!

रंगों और सौहार्द के पावन पर्व होली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह शुभ अवसर आपके जीवन में उमंग, भाईचारा और खुशहाली के नए रंग भर दे।

इस होली पर भी झारखण्ड की अबुआ सरकार राज्य की बहनों को मंईयां सम्मान योजना की सम्मान राशि पर्व से पूर्व सीधे उनके खातों में भेज रही है, ताकि हर घर की खुशियाँ दोगुनी हों।

अबुआ सरकार समस्त झारखण्डवासियों की सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है।

— हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री, झारखण्ड

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पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में समुद्री स्थिति की समीक्षा की; भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई गई

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) फारस की खाड़ी में विकसित हो रही समुद्री सुरक्षा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस क्षेत्र में कार्यरत भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपायों को मजबूत किया है।

केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोणोवाल ने आज फारस की खाड़ी में मौजूदा सुरक्षा माहौल का आकलन करने और भारतीय समुद्री संपत्तियों और कर्मियों पर इसके प्रभावों की जांच करने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, नौवहन महानिदेशक ने मंत्री को क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय नाविकों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी।

बैठक के बाद बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “हम बदलती हुई स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और अपने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण तथा अपनी समुद्री संपत्तियों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती, निगरानी और समन्वय तंत्र सक्रिय कर चुके हैं। हम संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और किसी भी नए घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं।”

फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधि, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और अन्य समुद्री सुरक्षा चिंताओं सहित खतरों की रिपोर्ट के जवाब में, मंत्रालय ने नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) के माध्यम से भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों के संबंध में बढ़ी हुई निगरानी और सुरक्षा निरीक्षण को सक्रिय कर दिया है।

मंत्रालय ने डीजीएस के माध्यम से भारतीय ध्वज वाले जहाजों की वास्तविक समय में निगरानी शुरू कर दी है और रिपोर्टिंग की आवृत्ति बढ़ा दी है। साथ ही, एमएमडीएसी डीजीकॉम सेंटर के माध्यम से चौबीसों घंटे सातों दिन निगरानी की व्यवस्था की गई है। जहाजों, उनके मालिकों और प्रबंधकों के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल भी निर्धारित किए गए हैं।

भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय, सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी आईओआर), समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा जा रहा है। नौवहन कंपनियों और भर्ती एवं नियुक्ति सेवा लाइसेंसधारियों को चालक दल की तैनाती में सावधानी बरतने और नाविकों और उनके परिवारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है।

निदेशालय, आईएफसी-आईओआर और अन्य एजेंसियां ​​उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को सभी ज़रूरी मदद और सहायता दी जा रही है।

अधिकारियों के बीच समय पर समन्वय स्थापित करने, उभरती परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने और भारतीय नाविकों और उनके परिवारों को शीघ्र सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्विक रिस्पांस टीम) का गठन किया गया है। हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय कर दिए गए हैं और आरपीएसएल के माध्यम से नाविकों के परिवारों के साथ साझा किए गए हैं।

सभी संबंधित पक्षों को उच्च सतर्कता बरतने और यात्रा-विशिष्ट जोखिम आकलन करने की सलाह दी गई है।

क्षेत्र में चलने वाले जहाजों को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और ब्रिज वॉच बनाए रखने, निरंतर संचार तत्परता सुनिश्चित करने और संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने का निर्देश दिया गया है।

सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “भारत अपने नाविकों और समुद्री क्षेत्र के हितधारकों के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय भारतीय जहाजों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक परिचालन, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है और भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय समन्वय जारी रखेगा।”

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जीपीएस कार निकोबार में मछुआरा समुदाय का जीवन बदल रहा है

नई दिल्ली – कार निकोबार में मछुआरों के लिए शुरू किए गए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरणों ने कुशल और सटीक मछली पकडने की तकनीक को सक्षम बनाया है, जिससे स्‍थानीय लोगों के लिए मछली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।

इससे न केवल उनके ताजे प्रोटीन और महत्‍वपूर्ण पोषक तत्वों के सेवन में वृद्धि हुई है, बल्कि टीटॉप गांव के श्री जुनैद और चुचुचा गांव के श्री अब्दुल सत्तार जैसे कुछ मछुआरों ने बाजारों में अपनी मछली बेचना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।

निकोबारी समुदायों का जीवन और आजीविका पारंपरिक मछली पकडने पर आधारित है। उनकी मछली पकडने की तकनीक अनुभव से परिष्‍कृत तो है, लेकिन समुद्र और मौसम की अप्रत्‍याशित प्रकृति के साथ-साथ सटीक नेविगेशन उपकरणों की कमी के कारण सीमित रही है। अक्सर, मौसम की खराबी के कारण नावें रास्‍ता भटक जाती हैं, जिससे उत्पादकता का नुकसान होता है और कभी-कभी जान का जोखिम भी बन जाता है।

इस चुनौती से निपटने के लिए सेंट्रल आइलैंड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एसईईडी प्रभाग कार्यक्रम के तहत स्थानीय समुद्री वातावरण और मछली पकड़ने की पद्धतियों के अनुकूल जीपीएस उपकरण पेश किए हैं।

मछुआरों को जीपीएस नेविगेशन और आधुनिक मछली पकड़ने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे जीपीएस उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। उनकी जरूरतों और चुनौतियों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण किए गए और जनजातीय परिषद के माध्यम से इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित किया गया।

जीपीएस प्रौद्योगिकी की शुरूआत ने मछुआरों द्वारा मछली पकड़ने के स्थानों को खोजने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे उनके लिए सर्वोत्‍तम स्थानों तक पहुंचना बहुत आसान और तेज़ हो गया है। इन उपकरणों की मदद से मछली पकड़ने की उनकी क्षमता में काफी सुधार हुआ है, जिससे उनके परिवारों और व्यापक समुदाय के लिए भरपूर भोजन उपलब्ध हो पा रहा है।

कार निकोबार द्वीप पर तटीय मत्स्य पालन सूचना केंद्र स्थापित किया गया है। कार निकोबार के जनजाति मछुआरों को कुल 5 जीपीएस उपकरण प्रदान किए गए हैं और अन्य 5 जीपीएस उपकरण मछुआरों के सामान्य उपयोग के लिए रखे गए हैं।

इन प्रयासों से दैनिक मछली पकड़ने की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। सटीक नेविगेशन और उत्पादक क्षेत्रों की पहचान के कारण मछुआरे अब मछली पकड़ने में कम समय बिताते हुए भी अपनी पकड में औसतन लगभग 168 प्रतिशत की वृद्धि का अनुभव कर रहे हैं।

मछलियों की बढती उपलब्धता ने परिवारों और समुदाय में पोषण के स्‍तर को सुधारा है। उच्च आय ने विविध खाद्य स्रोतों तक बेहतर पहुंच प्रदान की है, जो बेहतर स्वास्थ्य और पोषण में योगदान दे रही है।

अधिक जानकारी के लिए डॉ. आर. किरुबा शंकर से rkirubasankar[at]gmail[dot]com पर संपर्क करें।

 

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने डोल जात्रा और डोला पूर्णिमा के अवसर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के लोगों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज डोल जात्रा और डोला पूर्णिमा के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

X पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा, “डोल जात्रा के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मेरी बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं। इस पर्व की भव्यता हमारी संस्कृति और विरासत से हमारी जड़ों को जोड़कर और सुदृढ़ करे तथा सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “डोल पूर्णिमा के अवसर पर ओडिशा के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान कृष्ण के साथ आनंदमय मिलन का यह पर्व सभी के लिए सुख और सौभाग्य लेकर आए।”

श्री अमित शाह ने कहा “डोल जात्रा के पावन अवसर पर असम की मेरी बहनों और भाइयों को शुभकामनाएं। भक्ति और रंगों का यह पर्व सभी के जीवन को उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण करे।”

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इस्पात मंत्रालय ने ‘भारत स्टील 2026’ से पहले वैश्विक राजनयिकों के साथ उच्च-स्तरीय संवाद सत्र आयोजित किया

नई दिल्ली – भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने इस्पात क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने तथा अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम ‘भारत स्टील 2026’ की रूपरेखा प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विश्व भर के वरिष्ठ राजनयिकों के साथ एक उच्च-स्तरीय संवाद सत्र आयोजित किया।

राजनयिक समुदाय को संबोधित करते हुए इस्पात मंत्रालय के सचिव ने भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक रूपांतरण को गति देने में इस्पात उद्योग की केन्द्रीय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने इस क्षेत्र की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन(एमटी) और वर्ष 2035 तक 400-मिलियन टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे भारत को वैश्विक इस्पात उत्पादन में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

जा क्षेत्र के तीव्र आधुनिकीकरण पर बल देते हुए श्री पौंड्रिक ने वैश्विक साझेदारों को भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित किया, क्योंकि देश का घरेलू इस्पात उद्योग निम्न-कार्बन उत्पादन प्रक्रियाओं और उन्नत प्रौद्योगिकीय विधियों की ओर अग्रसर है। उन्होंने नवाचार, दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व पर आधारित सुदृढ़ एवं सतत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

 

16-17 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी ‘भारत स्टील 2026’ की झलक प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने दीर्घकालिक एवं सतत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। भारत की रणनीति कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने, हरित एवं सतत इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने तथा सार्थक वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर केन्द्रित है।

इस सत्र में राजनयिक समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिसमें प्रतिनिधियों ने भारत की दूरदर्शी सोच की सराहना की और ‘भारत स्टील 2026’ में भागीदारी के प्रति उत्साह व्यक्त किया। आगामी शिखर सम्मेलन इस्पात क्षेत्र में संवाद, नवाचार के आदान-प्रदान और रणनीतिक साझेदारियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के राजा से बात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के राजा, महामहिम किंग अब्दुल्ला II से बात की।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बदलते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जॉर्डन के लोगों की शांति, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपने समर्थन की पुनः दोहराया।

प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में जॉर्डन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों का ख्याल रखने के लिए महामहिम का आभार भी व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने एक्स (X) पर साझा करते हुए लिखा;

“मैंने जॉर्डन के राजा, महामहिम किंग अब्दुल्ला II, से बात की। क्षेत्र में बदलते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। हम जॉर्डन के लोगों की शांति, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपने समर्थन को पुनः दोहराते हैं। इस कठिन समय में जॉर्डन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों का ख्याल रखने के लिए मैंने उनका आभार व्यक्त किया।”

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उपराष्ट्रपति जी ने तमिल विद्वानों, विरासत और संस्कृति को समर्पित 16 प्रकाशनों का विमोचन किया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग की ओर से प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें तमिल के विख्यात विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित हैं। विमोचित पुस्तकों में से 13 तमिल भाषा पर आधारित हैं।

 

तमिल शीर्षकों में रामेश्वरम्, रामानुजार, नादुकल, अरिकाइमेडु, बक्थी इलक्कियाम, इयारकई वेलनमई, पजंथामिजान इसई करुविगल, तमिझागा नत्तार देवंगल, पुधिया अरिवियाल थोझिलनुतपंगल, बंकिम चंद्र चटर्जी, मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तंजावुर पेरुवुदयार कोइल, मणिमेगलाई और महाविद्वान मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई शामिल हैं।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विमोचित पुस्तकें मंदिर परंपराओं, दर्शन, साहित्य, संगीत और विज्ञान के साथ तमिल धरोहर की गहराई, विविधता और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं। तमिल को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, लेकिन साथ ही साथ उसकी आत्मा एक है। उन्होंने वैश्विक मंच पर तमिल को हमेशा सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की और युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पढ़ने का आग्रह करते हुए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक शक्ति पर भी बल दिया।

पुस्तकों के विमोचन के मौके पर अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त समृद्ध और प्राचीन संस्कृति वाली शास्त्रीय भाषा के तौर पर तमिल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग की पुस्तकें इस गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाती हैं।

इस कार्यक्रम में डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित रहे। उन्होंने तमिल संगम साहित्य के महत्त्व के बारे में बात की और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को उजागर किया।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्री एस. के. बोस की ओर से लिखित बंकिम चंद्र चटर्जी की पुस्तक का अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में विमोचन था। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित इस समृद्ध संस्करण में इस प्रख्यात साहित्यकार के जीवन और काल तथा भारतीय साहित्यिक आंदोलन में उनके योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है। अंग्रेजी संस्करण में एक नया आवरण, अतिरिक्त अभिलेखीय तस्वीरें और चित्र शामिल हैं। इस आवरण को विशेष रूप से आईआईटी दिल्ली के सहयोग से एक स्टार्टअप की मदद से डिजाइन किया गया है, जिसमें समकालीन सौंदर्यशास्त्र और शास्त्रीय भावना का अद्भुत मिश्रण है। हिंदी और तमिल अनुवादों के एक साथ विमोचन से वंदे मातरम के पूजनीय रचयिता की विरासत व्यापक पाठकों तक पहुंच गई है।

रामेश्वरम्‌ पर आधारित यह पुस्तक पुराणों और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजी संदर्भों को प्रस्तुत करती है, जिसमें रामेश्वरम मंदिर परिसर के पवित्र स्थलों, स्थापत्य कला की भव्यता, मूर्तियों और देवी-देवताओं का विशेष वर्णन किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मंदिर के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व की व्यापक समझ प्रदान करना है।

 

पुस्तक के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कृपया यहां क्लिक करें

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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित जीपीओए में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के नए कार्यालय का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज नई दिल्ली में नेताजी नगर के सामान्य पूल कार्यालय आवास (जीपीओए) में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के नए कार्यालय का उद्घाटन किया, जो मंत्रालय के नए परिसर में स्थानांतरित होने का प्रतीक है।

इस मौके पर, डॉ. मांडविया ने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और भरोसा जताया कि सुव्यवस्थित और कार्यात्मक कार्यक्षेत्र खेल विकास और युवा मामलों से जुड़ी प्रमुख पहलों के कार्यान्वयन में दक्षता, समन्वय और तालमेल को बेहतर करेगा।

युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भी नए कार्यालय में कार्यभार ग्रहण किया और सुव्यवस्थित एवं आधुनिक कार्य वातावरण की सराहना की। उन्होंने नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए और समर्पण भाव से मंत्रालय के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

उद्घाटन समारोह में सचिव (खेल), श्री हरि रंजन राव; सचिव (युवा कार्यक्रम), डॉ. पल्लवी जैन गोविल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों ने सेवा संकल्प शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली – भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री कामरान रिजवी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री के नए कार्यालय, सेवा तीर्थ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।

सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक भारत के शासन सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह इस सामूहिक संकल्प को मजबूत करती है कि सुदृढ़ नीति, ईमानदार इरादे और निर्णायक नेतृत्व के साथ, विकसित भारत के निर्माण का मार्ग दृढ़ और प्रकाशमय बना रहेगा। सेवा तीर्थ की भावना से प्रेरित कार्य संस्कृति भारत को एक सक्षम, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में मजबूत बनाने में मार्गदर्शक आधार का काम करेगी।

इस अवसर पर, इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया गया। सेवा तीर्थ की स्थापना ब्रिटिश काल की अस्थायी बैरकों के स्थान पर की गई है। इस स्थल का राष्ट्रीय शासन के एक गतिशील संस्थान में परिवर्तन नए भारत की प्रगति और नवीनीकरण का एक सशक्त प्रतीक है।

सेवा तीर्थ में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया कि लिए गए प्रत्येक निर्णय 1.4 अरब नागरिकों की सेवा की अटूट भावना से प्रेरित होंगे और राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के व्यापक उद्देश्य के साथ दृढ़ता से जुड़े होंगे।

प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेवा तीर्थ को संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक प्रतीक में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। भारत के 2047 तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ, यह नया परिसर राष्ट्रीय आकांक्षा, सेवा और परिवर्तनकारी कार्यों के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में खड़ा होगा।
इस राष्ट्रीय परिकल्पना के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, सचिव ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके, उन्नत प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर, सतत औद्योगिक विकास का समर्थन करके और स्वच्छ एवं हरित परिवहन की ओर संक्रमण को गति देकर विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। नीतिगत हस्तक्षेपों और उद्योग जगत के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से, एमएचआई आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक आधार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित किया। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भारत की शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव का उल्लेख किया और कहा कि भारत शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति और गुणवत्ता, नवाचार तथा सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

 

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगी। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सीखने, अनुसंधान, नवाचार और उसे लागू करने के अपार अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। श्री प्रधान ने कहा कि भारत नई शिक्षा नीति 2020 और ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर से लेकर सतत ऊर्जा तक, भारत एक विश्वसनीय नवाचार भागीदार के रूप में उभर रहा है और सहयोग, क्षमता निर्माण तथा साझा ज्ञान पर आधारित वैश्विक दक्षिण मॉडल को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनिश्चितता और तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा ही समाजों के बीच सबसे मजबूत सेतु है और भारत सहयोगी देशों के साथ ज्ञान के मजबूत सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने राजनयिकों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-प्रेरित, बहुविषयक और सुलभ शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पिछले छह वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा सुधारों, विशेष रूप से बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास को शिक्षा के साथ एकीकृत करने और अंतर्राष्ट्रीयकरण को मजबूत करने के संदर्भ में स्पष्ट दिशा प्रदान की है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय संस्थान संयुक्त, द्विभाषी और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव को गहरा कर रहे हैं, जबकि प्रमुख विश्वविद्यालय अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में सुविधा हो रही है, और ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल भारत के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी वैश्विक शिक्षा साझेदारी का खुला निमंत्रण है।

इस सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए:

  • भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में
  • एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
  • भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लिए यूजीसी विनियम 2023
  • अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर और सहायक ढांचे
  • भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
  • भारत इनोवेट्स 2026

 

सम्मेलन के दौरान भारत के विकसित हो रहे उच्च शिक्षा तंत्र पर प्रकाश डाला गया जिनमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग छात्र गतिशीलता, संयुक्त कार्यक्रम, अनुसंधान साझेदारी और परिसरों की स्थापना शामिल हैं।

स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में राजनयिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भागीदार देशों के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा और अल्पकालिक कार्यक्रमों में भाग लेने, संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने और विश्व स्तरीय दर्जा प्राप्त विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया।

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राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और एलबीएसएनएए में 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों ने राष्ट्रपति से भेंट की

नई दिल्ली – राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज (2 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे समावेशी विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित राष्ट्र के रूप में भारत का रूपांतरण तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। उन्होंने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करने का आग्रह किया कि कोई भी समुदाय भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे न छूटे। उन्होंने स्थिरता और जलवायु लचीलापन को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में, उन्हें हरित प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहिए, जलवायु-अनुकूल शासन को प्रोत्साहित करना चाहिए और सतत विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।

 

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राष्ट्रपति ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में शामिल हुईं

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 मार्च, 2026) नई दिल्ली में आयोजित ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार द्वारा किया गया था।

 

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सैनिक के रूप में वे देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं। वैज्ञानिक के रूप में वे प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं। खेल-प्रतियोगिताओं में वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं। राजनीति, सामाजिक सेवा, प्रशासन और व्यापार जैसे सभी क्षेत्रों में आज महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की बढ़ती संख्या एक प्रेरणादायक तस्वीर प्रस्तुत करती है। हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि महिलाओं को आज भी हिंसा, आर्थिक असमानता, सामाजिक रूढ़िवादिता और स्वास्थ्य संबंधी उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य इन बाधाओं को दूर करके ही प्राप्त किया जा सकता है। एक महिला सशक्त तभी होगी जब वह स्वतंत्र निर्णय ले सके, आत्मसम्मान से जी सके और उसे समान अवसर व सुरक्षा मिले। एक सशक्त महिला न केवल अपना जीवन बदल सकती है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी बदल सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शिक्षा और लड़कियों की सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना लाखों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करा रही है। लखपति दीदी योजना जैसी पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी पहल महिलाओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि इन सभी प्रयासों से महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि हमें यह याद रखना चाहिए कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज के प्रत्येक सदस्य और संस्था की जिम्मेदारी है।  महिलाओं को शिक्षित करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें प्रोत्साहन एवं सहायता प्रदान करना हमारा कर्तव्य है। हमें महिलाओं को आश्वस्त करना चाहिए कि वे सपने देख सकती हैं और उन्हें साकार कर सकती हैं और हम उनके सपनों को साकार करने में उनके साथ खड़े हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहां हर राज्य और क्षेत्र के लोग रहते हैं। यदि दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों और समाज के हर क्षेत्र में आत्मविश्वासपूर्ण नेतृत्व प्रदान करें, तो इससे पूरे देश को सकारात्मक संदेश मिलेगा। दिल्ली को पूरे देश के लिए महिला नेतृत्व वाले विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली की महिलाओं को समृद्ध दिल्ली और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अहम भूमिका निभाने के लिए सरकार और समाज को उन्हें फलने-फूलने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करना होगा। उन्हें ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वे बिना किसी दबाव या भय के अपने से जुड़े निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकें।

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भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने को लेकर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित विवेकानंद हॉल में 27 फरवरी 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) की ओर से ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना : नीतियां, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अनुसंधान एवं विकास संस्थान, सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक मंच पर साथ लाया गया ताकि भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतियों, चुनौतियों और रणनीतिक अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में वैश्विक सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण’ पर हाल ही में किए गए अध्ययन को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का आयोजन भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के वर्तमान परिदृश्य का आकलन करने, चुनौतियों की पहचान करने, सहयोग के अवसरों का पता लगाने, वैश्विक पद्धतियों और नीतिगत जानकारियों की पहचान करने, नीतिगत पहल पर संवाद को सुगम बनाने और भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता के लिए व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया गया था।

 

इस कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, बीआईटीएस पिलानी; नीति आयोग; सीएसआईआर-सीईआरआई पिलानी; सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (एसएसपीएल), डीआरडीओ, एनआईईएलआईटी, नई दिल्ली; सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़; सीएसआईआर-एनपीएल, नई दिल्ली; आईआईटी जोधपुर; आईआईटी दिल्ली; विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस); दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय; सीएसआईआर-एनएएल, बेंगलुरु; अमृता विश्वविद्यालय; इंटेल इंडिया; लैम रिसर्च, एप्लाइड मैटेरियल्स, सेमीवर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड; सहस्रा सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली; और वेरसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (पी) लिमिटेड, नोएडा के प्रतिभागियों ने भाग लिया और भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अपने विचार साझा किए।

उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद के महत्व पर जोर दिया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी विरोधाभासी स्थिति, मजबूत वैश्विक डिजाइन नेतृत्व के बावजूद 95% आयात पर निर्भरता और साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत को 2030 तक एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों, आईएसएम 2.0 नवाचार प्रोत्साहन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

बीआईटीएस पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर और ईएस मैन्युफैक्चरिंग कमेटी के पदेन सदस्य प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टरों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत फाउंड्री की मेजबानी करने के बजाय स्वदेशी प्रौद्योगिकी, मिशन-मोड कार्यक्रमों और डीप-टेक स्टार्टअप पर केंद्रित रणनीति को अपनाने पर बल दिया। प्रो. राव ने नवाचारों को निम्न से उच्च टीआरएल में प्रगति करने और ‘वैली ऑफ डेथ’ से उबरने में मदद करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं के विस्तार की सिफारिश की।

तकनीकी चर्चा को तीन विषयगत सत्रों में संरचित किया गया था। पहला सत्र ‘अनुसंधान एवं विकास और नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र’ पर केंद्रित था। इस सत्र के वक्ताओं ने आईएसएम 2.0 से आग्रह किया कि वह पायलट फैब्स, विशिष्ट रक्षा सेमीकंडक्टर, स्वदेशी सामग्रियों/उपकरणों, डिजाइन-आधारित अनुसंधान एवं विकास, फोटोनिक्स/एआई फोकस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन, उत्पादन, उपयोग और निपटान को उनके पूरे जीवनचक्र में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन-कुशल तरीके से करने, विविध विनिर्माण, मजबूत आईपी, कौशल, बुनियादी ढांचे, वैश्विक साझेदारी और अनुकूल रणनीतियों के माध्यम से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की खाई को कम करने का प्रयास करे। “कुशल कार्यबल और प्रतिभा विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र” पर द्वितीय सत्र की अध्यक्षता भारत सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक (प्रौद्योगिकी) डॉ. मनीष के हुडा ने की। इस सत्र के वक्ताओं ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए संतुलित डिजाइन-विनिर्माण विकास, सीएमओएस-केंद्रित शैक्षणिक कार्यक्रमों, संरचित कौशल विकास पहल, उद्योग जगत से सहयोग और कार्यबल विकास पर जोर दिया।

तृतीय सत्र का मुख्य विषय ‘नीति, शासन और संस्थागत ढांचा’ रहा। इस सत्र में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया।  इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की। वक्ताओं ने वैश्विक नीति मॉडलों की तुलना की, एकीकृत शासन और एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की आवश्यकता पर बल दिया। एआई-चिप स्टार्टअप के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही सेमीकंडक्टर कूटनीति, दुर्लभ खनिजों तक पहुंच, आपूर्ति शृंखला में अनुकूलन और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। तृतीय सत्र: नीति, शासन और संस्थागत ढांचा में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की।

‘रणनीतिक मार्ग : भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक रोडमैप’ पर एक पैनल चर्चा और समापन सत्र के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। सत्र की अध्यक्षता भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी, बेंगलुरु) के अंतःविषय विज्ञान प्रभाग के डीन और नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र के प्रोफेसर नवकांत भट ने की। विशेषज्ञों ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम 1.0 और 2.0) के माध्यम से भारत सरकार की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि अगले चरण में बेहतर क्रियान्वयन, नवाचार और विस्तार की आवश्यकता है। उद्योग जगत के दृष्टिकोण ने भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ साझेदारी सहित शिक्षा-उद्योग सहयोग के माध्यम से उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और संरचित कार्यबल के विकास पर जोर दिया।

वक्ताओं ने स्वदेशी एनालॉग (अनुरूप), सेंसर और एप्लीकेशन-विशिष्ट उत्पादों में भारत की ताकत पर जोर दिया, साथ ही विशिष्ट सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में उच्च विशिष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। चिप-टु-चिप-लेस आर्किटेक्चर और क्वांटम-इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों को अभूतपूर्व प्रगति के अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला के समापन पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चारू वर्मा ने अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं ने सामूहिक रूप से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास, डिजाइन, विनिर्माण, कौशल और नीतिगत समर्थन में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और रणनीतिक एसएंडटी डोमेन पर बहु-हितधारक संवाद को सुविधाजनक बनाने में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की भूमिका को भी रेखांकित किया।

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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष-2026’ ने उभरते एवं टिकाऊ स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों से संबंधित अगली पीढ़ी के दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया

नई दिल्ली – अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष2026’ (एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह सम्मेलन एक ऐसे ऐतिहासिक वैश्विक मंच के रूप में उभरा, जिसने संपूर्ण खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को एकजुट किया। ‘अन्वेष-2026’ महज एक अकादमिक सम्मेलन से कहीं बढ़कर था। यह सरकारी एजेंसियों, स्टार्टअप, उद्योग जगत की अग्रणी हस्तियों, प्रदर्शकों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, प्रसिद्ध शेफों और टिकाऊ एवं  स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध उत्साही प्रतिभागियों का एक गतिशील संगम साबित हुआ।
इसके समापन समारोह में भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने विशेष संबोधन में, श्री प्रभु ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने में एनआईएफटीईएम-कुंडली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस संस्थान के 13 वर्षों के उल्लेखनीय सफर का  उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए एनआईएफटीईएम-कुंडली अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक एवं टिकाऊ खाद्य पदार्थों के लिए खाद्य पिरामिड को नए सिरे से परिभाषित करने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री असित गोपाल भी उपस्थित थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत का सपना केवल नवाचार, ज्ञान और उद्यमिता के जरिए ही साकार हो सकता है। एक अन्य विशिष्ट अतिथि, हल्दीराम समूह के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंघानिया ने एनआईएफटीईएम-कुंडली की युवा प्रतिभाओं को खाद्य मूल्य श्रृंखला के हर चरण में मूल्य सृजित करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस संस्थान में “कचरे को खजाने में बदलने” की क्षमता है। इस अवसर पर, एनआईएफटीईएम-के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों, परिणामों और वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक व्यापक सारांश पेश किया।

सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1.4 बिलियन लोगों वाले एक देश के लिए प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास बेहद जरूरी है। गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने हेतु नवाचारों, अनुसंधानों एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों तथा किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25 देशों की भागीदारी हुई। इसमें 3 पैनल चर्चाएं113 मौखिक प्रस्तुतियां115 आमंत्रित वार्ताएं और 226 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो खाद्य क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की गहराई एवं विविधता को दर्शाती हैं। इसमें अकादमिक और उद्योग जगत की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली। विचार-विमर्श में खाद्य संबंधी नवाचार, सुरक्षा, पता लगाने की क्षमता एवं नियामक अनुपालन; पौष्टिक-औषधीय पदार्थों (न्यूट्रास्यूटिकल्स) एवं विशिष्ट खाद्य पदार्थों; वैयक्तिकृत पोषण एवं कार्यात्मक तत्व; टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण, अपशिष्ट का मूल्यवर्धन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था; अपशिष्ट को कम करने हेतु कटाई से इतर की प्रौद्योगिकियां; अगली पीढ़ी की स्मार्ट एवं स्वच्छ लेबल वाली प्रौद्योगिकियों के साथ वैकल्पिक प्रोटीन तथा पादप-आधारित खाद्य पदार्थ; खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में डिजिटल बदलाव; और नीतिगत सुधारों, अनुसंधान नवाचार तथा  उद्योग जगत के सहयोग के जरिए भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम की पुनर्कल्पना जैसे महत्वपूर्ण व भविष्योन्मुखी विषयों को शामिल किया गया। देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों व  अनुसंधान संगठनों के 40 से अधिक कुलपतियों और निदेशकों की भागीदारी वाली एक गोलमेज बैठक में कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच के सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया।

‘अन्वेष-2026’ में एक जीवंत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस प्रदर्शनी में कॉरपोरेट, स्टार्ट-अप, एमएसएमई और सरकारी विभागों सहित 61 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इन प्रदर्शकों ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवीन उत्पादों और प्रसंस्करण संबंधी टिकाऊ उपायों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी ने शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सहयोग के अवसरों एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने की चाहत रखने वाले उद्यमियों का ध्यान आकर्षित किया।

एक अनूठा अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, इस सम्मेलन में 22 लाइव कुकरी शो आयोजित किए गए। इनमें उभरती हुई सामग्रियों, पौधों पर आधारित विकल्पों और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों के वैसे नवीन अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया गया, जो स्थिरता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी प्रवृत्तियों के अनुरूप थे।

नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों की भागीदारी के साथ, ‘अन्वेष -2026’ को उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली। इसमें 500 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी और 2000 से अधिक आगंतुक शामिल हुए, जो एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। इस सम्मेलन ने टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक खाद्य नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्थक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझेदारी को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया, जिससे वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण एवं  पोषण परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिली।

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उप-राष्ट्रपति ने केरल के कोल्लम में सेंट स्टीफंस हायर सेकेंडरी स्कूल के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज कोल्लम के पथानापुरम में स्थित सेंट स्टीफंस हायर सेकेंडरी स्कूल के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने 100 वर्ष पूरे होने को एक “उल्लेखनीय उपलब्धि” बताया, जो बहुत कम संस्थानों को प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ने एक सदी तक छात्रों के मस्तिष्क को आकार दिया है, उनके चरित्र का पोषण किया है और उनके भविष्य का निर्माण किया है, जिससे कई पीढ़ियां जिम्मेदार नागरिक, नेता, पेशेवर और दयालु इंसान बनकर उभरी हैं।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संस्थान की असली ताकत उसके ढांचे में नहीं, बल्कि उसके मूल्यों में निहित होती है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह उत्सव केवल अतीत के बारे में नहीं, बल्कि भविष्य के बारे में भी है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित तेजी से बदलती दुनिया में, शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति, लचीलापन और ईमानदारी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने, विनम्र रहने और अपने विद्यालय द्वारा दिए गए मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से आग्रह किया कि नशीली दवाओं को ना कहें। उन्होंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग को समाज को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े अभिशापों में से एक बताया और इस बात पर जोर दिया कि नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान एक जन आंदोलन बनना चाहिए जो धर्मों, भाषाओं और राजनीतिक दलों से परे हो।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सेवा के लिए राजनीतिक दलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है।

संस्था की विरासत को राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 का भारत आज के छात्रों के विचारों और पहलों से आकार लेगा। उन्होंने छात्रों से न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करने बल्कि समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का भी आह्वान किया।

शताब्दी वर्ष को नवीनीकरण का समय बताते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यालय अपने दूसरे शताब्दी वर्ष में प्रवेश करते हुए आधुनिक शैक्षिक प्रगति को अपनाएगा और साथ ही अपनी नैतिक और सांस्कृतिक नींव से भी जुड़ा रहेगा। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट छात्रों का उत्पादन करे बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित जिम्मेदार नागरिकों का भी उत्पादन करे।

केरल में शिक्षा और सामाजिक विकास पर दिए जाने वाले विशेष महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेंट स्टीफंस हाई स्कूल जैसे संस्थानों ने राज्य की शैक्षिक प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि शताब्दी वर्ष को ऐसे सार्थक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाना चाहिए जो अतीत का सम्मान करें, वर्तमान का जश्न मनाएं और भविष्य की तैयारी करें।

उपराष्ट्रपति ने पठानपुरम के माउंट तबोर दयारा में स्थित चार महानगरों की पवित्र समाधि पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

शताब्दी समारोह में केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, भारत सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, केरल सरकार में परिवहन मंत्री श्री केबी गणेश कुमार, केरल के वित्त मंत्री श्री केएन बालागोपाल, लोकसभा सांसद श्री कोडिकुन्निल सुरेश, पूर्वी क्षेत्र के कैथोलिकोस श्री कोडिकुन्निल सुरेश, कोल्लम धर्मप्रांत के मेट्रोपॉलिटन बेसेलियोस मार्थोमा मैथ्यूज तृतीय, माउंट टैबोर दियारा के सुपीरियर डॉ. जोसेफ मार डायोनिसियस, माउंट टैबोर दियारा के सचिव यूनन सैमुअल रामबन, फिलिप मैथ्यू और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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राँची जिला प्रशासन द्वारा शिक्षकों के सम्मान में आयोजित विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने पेंशन दरबार सह विदाई सम्मान समारोह में 18 शिक्षकों एवं सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले 02 कर्मीयों को सम्मानित किया, रिटायरमेंट के दिन ही सभी लाभ वितरित

सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करने की अनूठी पहल

राँची जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल: उपायुक्त ने खुद पहुंचकर दी सेवानिवृत्त शिक्षक को सम्मान

“उपायुक्त महोदय का खुद आना और हाथों से सम्मान करना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल है।” :- सेवानिवृत्त शिक्षक शिवेश्वर महतो (स.शि., राजकीय उत्क्रमित म.वि., डड़िया, बुढ़मू

रांची,02.03.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक भावुक एवं प्रेरणादायक पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबे समय तक चले समर्पित योगदान को सम्मान देना और रिटायरमेंट की तिथि पर ही उन्हें सभी पेंशनरी लाभ उपलब्ध कराना था।

सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम निम्नलिखित है

1. श्री सेवक कुमार साधु, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. लोयो, माण्डर

2. श्रीमती क्लौदिया विलुंग, स.शि. रा.प्रा.वि. सोसई माण्डर

3. श्रीमती उर्सुला कोनगाड़ी, स.शि. रा.म.वि. न्यू टूपूदाना, राँची-2

4.श्री कुमार कनिष्क, स.शि. रा.म.वि. हिन्दपीढ़ी हिन्दी राँची-2

5. मो. नुमानुल्लाह, स.शि. रा.प्रा.वि. मांगुबांध, नामकुम

6. श्रीमती टोप्पो निर्मला, स.शि. रा.म.वि. विजुलिया, रातू

7. श्रीमती नीलमणी हेरेंज, स.शि. रा.म.वि. महेशपुर

8. श्रीमती ममता तिग्गा, स.शि. रा.प्रा.वि. खरदेवरी, बेड़ो-1

9. श्री सुभाष कुमार माँझी, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. हरवागढ़, तमाड़

10. श्री शिवेश्वर महतो, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. डड़िया, बुढ़मू

11. श्री राकेश रंजन, स.शि. रा.म.वि. फतेहपुर, लापुंग

12. श्रीमती सुषमा गोरेती धान, स.शि. रा.म.वि. सरसा लापुंग

13. श्री राम विलाप नाग, स.शि. रा.प्रा.वि. पतराचौली, नगड़ी

14. श्रीमती आशा कुमारी, स.शि. रा.म.वि. चकला, ओरमाँझी

15. श्री अक्षय कुमार स्वाँसी, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. असुरकोड़ा, सिल्ली

16. श्री रामपद नायक, स.शि. रा.प्रा.वि. जोबला, सिल्ली

17. प्रहलाद लोहरा, स.शि. रा.प्रा.वि. डुंगरूडीह, सिल्ली

18. श्रीमती बिबियाना तोपनो, स.शि. संत तेरेशा बालिका मध्य विद्यालय माण्डर

सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले कर्मी के नाम

1. श्रीमती प्रमिला देवी, कार्यालय अधीक्षक, सदर अनुमंडल राँची।

2. मो. जुबेर आलम, उच्च वर्गीय लिपिक, जिला राजस्व शाखा राँची।

राँची जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल: उपायुक्त ने खुद पहुंचकर दी सेवानिवृत्त शिक्षक को सम्मान

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक बार फिर मानवीय संवेदना का जीता-जागता उदाहरण पेश किया। ज़ब उन्हें पता चला की शिक्षक पैर की समस्या से जूझ रहे जिसपर सेवानिवृत्त शिक्षक श्री शिवेश्वर महतो (स.शि., राजकीय उत्क्रमित म.वि., डड़िया, बुढ़मू) को सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए वे स्वयं समाहरणालय सभागार से मुख्य द्वार तक पहुंचे। और व्यक्तिगत रूप से लाभ सौंपा और उनकी लंबी सेवा के लिए आभार जताया।

भावुक होकर श्री शिवेश्वर महतो ने कहा:

“उपायुक्त महोदय का खुद आना और हाथों से सम्मान करना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल है।”

श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा
“शिक्षक समाज के स्तंभ हैं। जरूरत पड़ने पर प्रशासन उनके पास पहुंचे, यही सच्ची सेवा है।”
यह छोटी-सी लेकिन हृदयस्पर्शी घटना राँची प्रशासन की जन-केंद्रित छवि को और मजबूत करती है।

शिक्षकों का योगदान समाज की नींव

कार्यक्रम में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कुल 18 सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले 2 कर्मियों को व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया। उन्होंने शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर और प्रशस्ति पत्र भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उपायुक्त ने कहा, “शिक्षक समाज के निर्माण की मूल नींव हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण से ही नई पीढ़ियां मजबूत होती हैं। हमारा कर्तव्य है कि उनकी सेवानिवृत्ति को सम्मानजनक बनाया जाए।”

रिटायरमेंट दिवस पर ही पूर्ण लाभ – प्रशासन की प्रतिबद्धता

इस अवसर पर उपायुक्त ने विशेष रूप से जोर दिया कि सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट एवं अन्य सभी रिटायरमेंट लाभ प्रदान करना राँची जिला प्रशासन की कर्मचारी-हितैषी नीति का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा, “यह पहल सुनिश्चित करती है कि हमारे शिक्षक किसी भी चिंता के बिना अपनी नई जीवन-यात्रा की शुरुआत कर सकें। पिछले जनवरी 2025 से जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा हर माह इस तरह का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है।”

नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा, “जीवन की इस नई अध्याय में आप नई ऊर्जा से भरपूर रहें। समाज सेवा में सक्रिय रहें, नई रुचियां विकसित करें, परिवार के साथ समय बिताएं और स्वस्थ जीवन जिएं। ईश्वर आपको लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और सदा सुख-समृद्धि प्रदान करे।”

अन्य विभागों के लिए आदर्श मॉडल

उपायुक्त श्री भजंत्री ने अन्य विभागाध्यक्षों से अपील की कि वे भी इसी तरह के आयोजन शुरू करें। उन्होंने कहा, “यह मॉडल न केवल शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक आदर्श है। हर विभाग को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान और समयबद्ध लाभ वितरण सुनिश्चित करना चाहिए।”

कार्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज एवं उनकी पूरी टीम और जिला स्थापना उप समाहर्ता राँची, श्री बिवेक कुमार सुमन को विशेष धन्यवाद दिया गया। इस अवसर पर अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

राँची जिला प्रशासन की यह पहल कर्मचारियों—खासकर शिक्षकों—के सम्मान, कल्याण और पारदर्शी लाभ वितरण की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो पूरे जिले में विश्वास और संतुष्टि की भावना को मजबूत कर रही है।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में जिलास्तरीय वरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक

नगरपालिका निर्वाचन शांतिपूर्ण संपन्न कराने पर पदाधिकारियों को दी बधाई

विधानसभा सत्र व पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दिये निर्देश

पर्व-त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु तय मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

मार्च क्लोजिंग के मद्देनज़र सभी विभागों को फर्जी निकासी पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश

रांची,02.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज दिनांक 02.03.2026 को जिलास्तरीय वरीय पदाधिकारियों के साथ समाहरणालय स्थित एनआईसी सभागार में बैठक की। बैठक में सौरभ कुमार भुवनिया (उपविकास आयुक्त), संजय भगत (परियोजना निदेशक, आईटीडीए), राजेश्वरनाथ आलोक (अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि-व्यवस्था), कुमार रजत (अनुमण्डल पदाधिकारी, रांची सदर) सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जिला प्रशासन की विभिन्न प्राथमिकताओं पर विस्तार से समीक्षा करते हुए समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी ने नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 को शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को बधाई दी।

मार्च क्लोजिंग के मद्देनज़र उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी विभागों को फर्जी निकासी पर विशेष सतर्कता बरतने तथा अंतिम समय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

विधानसभा सत्र व पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था को लेकर निर्देश

विधानसभा सत्र एवं आगामी पर्व-त्योहारों होली, ईद, सरहुल एवं रामनवमी के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होली को लेकर थाना स्तर पर शांति समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया।

ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के निर्देश

पर्व-त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु तय मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

सीसीटीवी संचालन व सभागार जीर्णाेद्धार की समीक्षा

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समाहरणालय परिसर में सीसीटीवी कैमरों के 24 घंटे संचालन की जानकारी ली। साथ ही समाहरणालय सभागार के जीर्णाेद्धार कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया।

शपथ ग्रहण की तैयारी

नगरपालिका (आम) निर्वाचन में चुने गए जनप्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों को लेकर भी उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही उपायुक्त द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क के सौंदर्यीकरण हेतु टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने का निर्देश दिया गया।

जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश

रांची के प्रमुख जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।

जन्म प्रमाण पत्र व फर्जीवाड़ा रोकथाम

जिला में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े पर सख्त रोक लगाने के निर्देश उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा दिए गए।

आईडी कार्ड वितरण की समीक्षा

अंचल एवं प्रखंड कार्यालयों में बीडीओ/सीओ सहित सभी कर्मियों को आईडी कार्ड उपलब्ध कराने की स्थिति की समीक्षा की गई। संबंधित पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

योजनाओं की प्रगति की समीक्षा

छात्रवृत्ति, धान अधिप्राप्ति, मंईया सम्मान से स्वावलंबन सहित अन्य योजनाओं की कार्य प्रगति की जानकारी लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक एवं उचित दिशा-निर्देश दिए।

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एयर कमोडोर बी एस विजय राव, वीएसएम ने एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में नई दिल्ली के पालम में बेस रिपेयर डिपो की कमान संभाली

कमान में बदलाव: बेस रिपेयर डिपो, पालम

एयर कमोडोर बी एस विजय राव, वीएसएम ने 1 मार्च, 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में नई दिल्ली के पालम में बेस रिपेयर डिपो की कमान संभाली।

नई दिल्ली – एयर कमोडोर विजय राव ने 27 नवंबर, 1995 को भारतीय वायु सेना की वैमानिकी अभियांत्रिकी (इलेक्ट्रॉनिक्स) शाखा में कमीशन प्राप्त किया था। उनको तीन दशकों से अधिक समय की विशिष्ट और गौरवपूर्ण सेवा का व्यापक अनुभव है। वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तथा कार्यकारी एमबीए उपाधिधारी हैं और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय एवं सेना युद्ध महाविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं।

विजय राव ने अपने गौरवपूर्ण करियर के दौरान, प्रमुख सैन्य अड्डों पर मुख्य अभियंता अधिकारी सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय, कार्मिक और परियोजना प्रबंधन दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वायु मुख्यालय में संचालन, अनुरक्षण एवं योजना शाखाओं में प्रमुख पदों पर कार्य करते हुए भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण, अधिग्रहण तथा अनुरक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

एयर कमोडोर विजय राव ने विदेशों में पेशेवर कार्यों में भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व किया है और वे वैश्विक एयरोस्पेस संगठनों के साथ प्रमुख उन्नयन एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं।

एयर कमोडोर विजय राव को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

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महानियंत्रक संचार लेखा श्रीमती वंदना गुप्ता ने उत्तर क्षेत्रीय समीक्षा बैठक का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – महानियंत्रक संचार लेखा (सीजीसीए), श्रीमती वंदना गुप्ता ने उत्तरी क्षेत्र में फील्ड इकाइयों की परिचालन दक्षता का मूल्यांकन और उसे सुव्यवस्थित करने के लिए उत्तरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया।

28 फ़रवरी 2026 से 01 मार्च 2026 तक आयोजित इस समीक्षा बैठक में संचार लेखा नियंत्रक (सीसीए) के आठ कार्यालय शामिल थे— जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (पूर्व), उत्तर प्रदेश (पश्चिम) तथा दिल्ली।

 

 

उत्तरी क्षेत्र का रणनीतिक महत्व

उत्तरी क्षेत्र, सीजीसीए के अंतर्गत आने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों में से एक है। वर्तमान में यह 850 से अधिक लाइसेंसधारियों के विशाल पोर्टफोलियो का प्रबंधन करता है, जो देश के दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक, इस क्षेत्र ने लाइसेंस शुल्क के रूप में ₹6,500 करोड़ से अधिक और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) के रूप में लगभग ₹750 करोड़ एकत्र किए हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र दूरसंचार विभाग (डीओटी), बीएसएनएल और एमटीएनएल के 1.10 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के कल्याण का प्रबंधन करके एक महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाता है।

परिचालन उत्कृष्टता और रणनीतिक लक्ष्य

कार्यवाही के दौरान, श्रीमती वंदना गुप्ता ने कार्यात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें सार्वजनिक सेवा वितरण और प्रशासनिक दक्षता में उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए विभाग की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। सत्रों में सीजीसीए के जनादेश के कई मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • पेंशन संबंधी लाभ: पेंशनभोगियों को उनके सभी लाभ समय पर प्राप्त हों, यह सुनिश्चित करने के लिए वितरण प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र को सुव्यवस्थित करना।
  • राजस्व एवं बजट: इस मंच पर वित्तीय प्रवाह की सटीक निगरानी के लिए तंत्रों पर चर्चा की गई ताकि सख्त राजकोषीय अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इन चर्चाओं का मुख्य बिंदु इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन प्रदान करने की रणनीति थी। स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करके और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके, विभाग का उद्देश्य लाइसेंसधारियों के लिए समय पर अनुपालन को सुगम बनाना और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना है, जिससे एक मजबूत व्यावसायिक वातावरण को बढ़ावा मिल सके।
  • आंतरिक लेखापरीक्षा: संस्थागत अखंडता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए निगरानी को मजबूत करना।

अनुभव साझा करने के लिए आयोजित एक विशेष सत्र में क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों (सीसीए) को सफल संस्थागत मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस आपसी आदान-प्रदान का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली सेवा प्रदान करने के मानकीकरण हेतु सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।

श्री संजीव सिन्हा द्वारा डिजिटल भारत निधि और संशोधित भारत नेट कार्यक्रम पर दी गई प्रस्तुति एक महत्वपूर्ण आकर्षण रही। चर्चा में सरकार के इस इरादे पर ज़ोर दिया गया कि वह “आखिरी गांव” और “आखिरी नागरिक” तक तेज़, भरोसेमंद फाइबर कनेक्टिविटी पहुंचाकर डिजिटल डिवाइड को कम करेगी, जिससे नेशनल डिजिटल हाईवे पर पूरी तरह शामिल होना पक्का होगा।

बैठक का समापन स्थानीय प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित सामूहिक विचार-विमर्श सत्र के साथ हुआ। क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों को प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान करते हुए, सीजीसीए ने इस बात पर बल दिया कि प्रभावी शासन विभागीय संचालन का आधार बना रहना चाहिए। श्रीमती वंदना गुप्ता ने इस बात की पुष्टि की कि पेंशनभोगियों के लिए जीवन की सुगमता और दूरसंचार हितधारकों के लिए व्यापार करने की सुगमता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उन्होंने कार्यालयों को आगामी महीनों में पारदर्शिता और दक्षता के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया

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उपराष्ट्रपति ने केरल के त्रिशूर में चेतना गणाश्रम की नींव रखी

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज केरल के त्रिशूर में चेतना गणाश्रम की नींव रखी। यह सभी धर्मों के लोगों के लिए आध्यात्मिक जागृति का एक सांस्कृतिक और संगीत परिसर होगा।

 

चेतना गणाश्रम, कुरियाकोस एलियास सर्विस सोसाइटी (केईएसएस) की एक परियोजना और त्रिशूर स्थित सीएमआई देवमाता पब्लिक स्कूल की एक पहल है।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों पुरानी समृद्ध संगीत परंपरा है। “भारत का संगीत मात्र ध्वनि नहीं है, यह एक आध्यात्मिक यात्रा है, एक ध्यान है, एक प्रार्थना है और जीवन का उत्सव है।” उन्होंने संगीत को भारत की प्राचीन सभ्यतागत आत्मा की शुद्धतम अभिव्यक्ति बताया और कहा कि यह एक शक्तिशाली धागा है जो लाखों दिलों को एक साझा लय में पिरोता है।

भारतीय संगीत की सभ्यतागत गहराई के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वेदों की स्‍तुतियों से लेकर संतों की भक्तिमय अभिव्यक्तियों तक, संगीत पवित्र गंगा की तरह पूरे देश में बहता रहा है।

उपराष्ट्रपति ने प्राचीन दक्षिण भारत की जीवंत संगीत संस्कृति के ऐतिहासिक प्रमाण भी प्रस्तुत किए, जिनमें चोल राजाओं द्वारा निर्मित बृहदीश्वर मंदिर के शिलालेख शामिल हैं, जिनमें सैकड़ों संगीतकारों और नर्तकों की नियुक्ति और समर्थन का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि थेवरम जैसे पवित्र स्‍तुतियां नियमित रूप से मंदिरों में की जाती थी। यह भारत की संगीत विरासत की शाश्वतता को दर्शाती हैं।

भारत की विविध संगीत परंपराओं के बारे में बात करते हुए, उपराष्ट्रपति ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत को ध्वनि का गहन विज्ञान बताया। उन्होंने त्यागराज की अमर रचनाओं, तानसेन की प्रतिभा और एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की पवित्र आवाज और रवि शंकर के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संगीत ने सभी को प्रेरित किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी या भारतीय, सभी संगीत सात स्वरों पर आधारित है और सप्त स्वर मानवीय भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हैं, श्वास को नियंत्रित करते हैं, हृदय गति को स्थिर करते हैं, तनाव कम करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब भोर में कोई सुंदर राग बहता है या कोई भक्तिमय भजन किसी पवित्र स्थान को भर देता है, तो संगीत औषधि बन जाता है।’’

उपराष्ट्रपति ने चेतना गणाश्रम के पर्यावरण-अनुकूल संगीत परिसर के रूप में संगीत ध्यान और चिकित्सा के प्रति समर्पित दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि सात स्वर विविधता में एकता का प्रतीक हैं – प्रत्येक अलग होते हुए भी सामंजस्यपूर्ण है, जो मानवता के लिए एक गहरा पाठ सि‍खाते हैं।

उन्होंने गणाश्रम के समावेशी प्रबंधन की प्रशंसा की। इसमें विभिन्न धर्मों के लोग शामिल हैं, जिनमें गायक श्री के.जे. येसुदास जैसी प्रख्यात हस्तियां भी शामिल हैं। उन्‍होंने संगीत और ध्यान की आध्यात्मिक छत्रछाया में लोगों को एक साथ लाने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने पांच प्रस्तावित आलयमों – ध्यान-आलयम (संगीत ध्यान), संगीत-आलयम (स्‍नायु विज्ञान  संगीत चिकित्सा), शब्द-आलयम (ध्‍वनि चिकित्‍सा), कला-आलयम (भारतीय संगीत एवं नृत्‍य), और योग-आलयम (योग चिकित्सा) के बारे में जानकारी देते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान कई आत्माओं को जागृत और स्वस्थ करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग के प्राचीन ज्ञान को अभूतपूर्व वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है और यह भारत की सॉफ्ट पावर के प्रतीक के रूप में उभरा है, जो वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को प्रतिबिंबित करता है, यानी विश्व एक परिवार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संगीत परंपराओं के आदान-प्रदान के लिए जीवंत मंच तैयार किए हैं, जिससे विविधता में एकता मजबूत हुई है और भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक सराहना हो रही है।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि आज की तेज रफ्तार और अक्सर तनावपूर्ण दुनिया में संगीत की उपचार शक्ति पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने चेतना गणश्रम की अपार सफलता की कामना की और आशा व्यक्त की कि सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी की शाश्वत तरंगें हृदयों को सुकून देती रहेंगी और मानवता को सद्भाव की ओर ले जाएंगी।

इस समारोह में केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर; केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी; केरल सरकार में उच्च शिक्षा एवं सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. आर. बिंदू; त्रिशूर नगर निगम की महापौर डॉ. निजी जस्टिन; त्रिशूर के आर्कबिशप, मार एंड्रयूज थजाथ; प्रांतीय, सीएमआई देवमाता प्रांत, त्रिशूर की डॉ. जोस नन्दिक्कारा; और चेतना गणाश्रम के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पॉल पूवथिंगल, अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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