नई मुसीबत में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन

2000 करोड़ के घोटाले में एसीबी ने दर्ज की एफआईआर

नई दिल्ली ,30 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कथित शराब नीति घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जमानत पर चल रहे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

आम आदमी पार्टी  के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं पर अब सरकारी स्कूलों में नए क्लासरूम के निर्माण से जुड़े कथित घोटाले को लेकर नया केस दर्ज किया गया है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (्रष्टक्च) ने इस मामले में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

एसीबी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान कुल 12,748 कक्षाओं और भवनों के निर्माण में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा घोटाला सामने आया है।

एसीबी का आरोप है कि 75 साल तक चलने वाली आरसीसी कक्षाओं के निर्माण के समान लागत पर केवल 30 साल की अनुमानित उम्र वाली अर्ध-स्थायी संरचना ( – स्क्कस्) वाली कक्षाओं का निर्माण किया गया। एसीबी का दावा है कि स्क्कस् निर्माण अपनाने से स्पष्ट रूप से कोई वित्तीय लाभ नहीं हुआ, बल्कि लागत अनावश्यक रूप से बढ़ाई गई।

भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अनुसार, परियोजना को कथित तौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ खास ठेकेदारों को दिया गया था। परियोजना के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण विचलन और लागत में अत्यधिक वृद्धि देखी गई, जबकि निर्धारित समय अवधि के भीतर एक भी काम पूरा नहीं हो सका।

एसीबी ने यह भी कहा है कि परियोजना के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सलाहकार और आर्किटेक्ट नियुक्त किए गए और उनके माध्यम से निर्माण लागत को बढ़ाया गया।

केंद्रीय सतर्कता आयोग (ष्टङ्कष्ट) की मुख्य तकनीकी परीक्षक रिपोर्ट में भी इस परियोजना में कई विसंगतियों और अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया था, लेकिन आरोप है कि इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को लगभग तीन साल तक दबाए रखा गया। एसीबी ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत मामला दर्ज करने की आवश्यक अनुमति मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

गौरतलब है कि भाजपा नेता हरीश खुराना, कपिल मिश्रा और नीलकंठ बख्शी सहित कई नेताओं ने पहले भी सरकारी स्कूलों में क्लासरूम निर्माण में भ्रष्टाचार के बारे में शिकायतें दर्ज कराई थीं। एसीबी ने अपने बयान में कुछ और विशिष्ट आरोप लगाए हैं।

उनके अनुसार, टेंडर के मुताबिक एक स्कूल कमरे के निर्माण की एकमुश्त लागत लगभग 24.86 लाख रुपये प्रति कमरा थी, जबकि दिल्ली में आमतौर पर ऐसे कमरे लगभग 5 लाख रुपये प्रति कमरे में बनाए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि परियोजना कुल 34 ठेकेदारों को दी गई थी, जिनमें से अधिकांश कथित तौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए बताए जाते हैं।

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पाकिस्तानी अथॉरिटी की शरारत, 2 घंटे तक नहीं खोला इमीग्रेशन गेट

अटारी बॉर्डर पर लगी वाहनों की लंबी कतारें

अमृतसर ,30 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा की गई सख्त कार्रवाई का असर अब भारत-पाकिस्तान की अटारी सीमा पर दिखाई दे रहा है।

भारत द्वारा वीजा रद्द किए जाने के बाद पाकिस्तान लौट रहे पाकिस्तानी नागरिकों को आज अटारी सीमा पर पाकिस्तानी अथॉरिटीज की ‘शरारत’ के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तानी इमीग्रेशन गेट देर से खोले जाने के कारण भारतीय सीमा में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले में 26 भारतीयों की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे।

इन सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़कर अपने वतन लौट जाने का निर्देश दिया गया था। इसी क्रम में ये नागरिक अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान लौट रहे थे।

लेकिन आज अटारी सीमा पर उस समय अप्रत्याशित स्थिति बन गई, जब पाकिस्तान की ओर से इमीग्रेशन गेट समय पर नहीं खोले गए। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी अथॉरिटीज ने गेट खोलने में जानबूझकर देरी की और करीब 2 घंटे की देरी से, दोपहर 12 बजे के आसपास ही गेट खोले गए।

इस देरी के कारण भारतीय सीमा के अंदर, अटारी चेकपोस्ट की ओर पाकिस्तान जाने वाले वाहनों और यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। जम्मू-कश्मीर पुलिस जिन पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर आई थी, उनकी बस भी भारतीय बैरिकेड के अंदर तो आ गई, लेकिन पाकिस्तानी गेट बंद होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। भीषण गर्मी और धूप में लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

भारतीय अधिकारियों ने इस देरी को पाकिस्तानी अथॉरिटीज की ओर से एक तरह की जानबूझकर की गई कार्रवाई माना है, जिसका उद्देश्य वीजा रद्द होने के बाद लौट रहे पाकिस्तानी नागरिकों और भारतीय पक्ष को परेशान करना हो सकता है।

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155वीं जन्म जयंती के अवसर पर याद किये गए भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के

30.04.2025 – गोरेगाँव (मुम्बई) स्थित दादा साहेब फाल्के चित्रनगरी, फिल्म सिटी स्टूडियो में भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की 155वीं जन्म जयंती के अवसर पर फिल्मसिटी स्टूडियो प्रबंधन द्वारा आयोजित समारोह में दादा साहेब फाल्के के ग्रैंडसन चंद्रशेखर पुसलकर, उनकी पत्नी मृदुला पुसलकर और दत्तक पुत्री नेहा बंदोपाध्याय भी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सभी ने दादा साहेब फाल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

इस समारोह में भारतीय फिल्म जगत से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, बॉलीवुड के नामचीन शख्सियतों व महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक पदाधिकारियों के अलावा देश के अन्य राज्यों से आये लोगों ने दादा साहेब फाल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। भारतीय सिनेमा के जन्मदाता दादा साहब ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 19 साल के करियर में दादा साहब ने 121 फिल्में बनाई, जिसमें 26 शॉर्ट फिल्में शामिल हैं। दादा साहेब सिर्फ एक निर्देशक ही नहीं बल्कि एक मशहूर निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे।

उनकी आखिरी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी और आखिरी फीचर फिल्म ‘गंगावतरण’ थी। विदित हो कि दादासाहब फाल्के का असल नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। उनका जन्म 30 अप्रैल, 1870 को महाराष्ट्र के त्रिम्बक (नासिक) में एक मराठी परिवार में हुआ था। दादा साहब फाल्के ने ना सिर्फ हिंदी सिनेमा की नींव रखी बल्कि बॉलीवुड को पहली हिंदी फिल्म भी दी।

उनके सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ देना शुरू किया। यह भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। सबसे पहले यह पुरस्कार पाने वाली देविका रानी चौधरी थीं। 1971 में भारतीय डाक विभाग ने दादा साहेब फाल्के के सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया। उनका निधन 16 फरवरी 1944 को नासिक में हुआ था।

भारतीय सिनेमा का वार्षिक कारोबार आज लगभग दो अरब का हो चला है और हजारों लोग इस उद्योग में लगे हुए हैं लेकिन दादा साहब फाल्के ने महज 20-25 हजार की लागत से इसकी शुरुआत की थी। आज भले ही दादा साहेब फाल्के हमारे बीच नहीं हैं लेकिन आज भी उनका संदेश व उनके संघर्षों को बयां करते पदचिन्ह, भारतीय फिल्म जगत के फिल्मकारों को कर्मपथ पर धैर्य के साथ अग्रसर रहने के लिए सदैव प्रेरित करता है और युगों युगों तक करता रहेगा।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का नए सिरे से गठन, पूर्व रॉ चीफ बने चेयरमैन

नई दिल्ली ,30 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का नए सिरे से गठन किया है। पूर्व रॉ चीफ आलोक जोशी को इसका चेयरमैन बनाया गया है। पूर्व पश्चिमी वायु सेना कमांडर एयर मार्शल पीएम सिन्हा, पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह और रियर एडमिरल मोंटी खन्ना सैन्य सेवाओं से सेवानिवृत्त अधिकारियों को इस बोर्ड में शामिल किया गया है।

राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त दो सदस्य है।बी वेंकटेश वर्मा सात सदस्यीय बोर्ड में सेवानिवृत्त आईएफएस हैं। जोशी ने 2012 से 2014 तक रॉ के प्रमुख के रूप में काम किया था। खुफिया क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को खूब सराहा जाता है।उनकी अगुवाई में बोर्ड का मुख्य काम सरकार को सलाह देना है। इसके साथ यह बोर्ड आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी राय दे सकता है.

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साउथ स्टार नागा चैतन्य ने राजनीतिक वेब सीरीज ‘मायासभा’ से लिंक होने से किया इनकार ..!

30.04.2025 – निर्माता बीवीएसएन प्रसाद द्वारा सुकुमार के साथ मिलकर एसवीसीसी और सुकुमार राइटिंग्स के बैनर तले बनाई जा रही रहस्यमय थ्रिलर फिल्म ‘एनसी24’ का दिलचस्प पोस्टर साउथ स्टार नागा चैतन्य के जन्मदिन के अवसर पर जारी होते ही अटकलों का बाजार गर्म हुआ कि नागा चैतन्य डायरेक्टर देव कट्टा की राजनीतिक वेब सीरीज ‘मायासभा’ का हिस्सा होंगे, परन्तु नागा चैतन्य ने राजनीतिक वेब सीरीज ‘मायासभा’ से लिंक होने से इनकार कर दिया है।

फिल्म ‘एनसी24’ के मेकर्स ने भी दावा किया है कि नागा चैतन्य और उस प्रोजेक्ट के बीच कोई संबंध नहीं है। मेकर्स द्वारा जारी पोस्टर में पौराणिक कथाओं के साथ एक साहसिक और बीहड़ चरित्र की ओर इशारा किया गया है।

कार्तिक वर्मा दांडू द्वारा निर्देशित और अजनीश लोकनाथ के संगीत से सजी फिल्म ‘एनसी24’ में अभिनेता नागा चैतन्य एक नए अंदाज में और शक्तिशाली अवतार में नजर आएंगे।

नागा चैतन्य की इस 24 वीं फिल्म में उभरते हुए कलाकार स्पर्श श्रीवास्तव भी हैं, जिन्हें लापता लेडीज़ के लिए जाना जाता है और मीनाक्षी चौधरी को मुख्य भूमिका में शामिल किए जाने की भी खबर है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने पहलगाम हमले में मारे गए लोगों को दी श्रद्धांजलि

मृतकों के परिवारों को 50 लाख की सहायता

मुंबई ,29 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके लिए 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। इसके साथ ही इन परिवार के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास करने की बात भी कही।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि शहीद संतोष जगदाले के परिवार की बेटी को सरकारी नौकरी प्रदान करने के लिए उन्होंने पहले ही चर्चा की थी। आज मंत्रिमंडल की बैठक में अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए उन्होंने इस निर्णय को औपचारिक रूप से घोषित किया।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आर्थिक सहायता के तहत प्रत्येक मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, शहीदों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी, जिसमें मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्ति शामिल हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हमारे शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके परिवारों की हर संभव मदद करना हमारा कर्तव्य है।
बीते दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए कौस्तुभ गणबोटे और संतोष जगदाले के परिजनों से मुलाकात की थी।

वहीं शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेताओं के हालिया बयानों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयान सुनकर लगता है कि ये लोग भारत का खाना खाते हैं और गीत किसी और का गाते हैं। ऐसे बयान पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश हैं।

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों के बाद अब कांग्रेस का नाम बदलकर पाकिस्तान नेशनल कांग्रेस रख देना चाहिए। यह बयान पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश है। कांग्रेस का एक भी नेता मृतकों के घर नहीं गया। विजय वडेट्टीवार को तुरंत माफी मांगनी चाहिए। मैं मांग करता हूं कि वडेट्टीवार को पाकिस्तान भेज देना चाहिए।

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लश्कर-ए-पाकिस्तान कांग्रेस की विचारधारा बन गई है सर तन से जुदा – गौरव भाटिया

नई दिल्ली ,29 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर फोटो शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को गायब दिखाए जाने पर राजनीति तेज हो गई है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि देश में एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल है, जो हमारे बीच है, लेकिन अगर हम उन्हें लश्कर-ए-पाकिस्तान कांग्रेस कहें तो गलत नहीं होगा।

मैं यह बात बहुत भारी मन से कह रहा हूं कि यह फोटो कांग्रेस के सत्यापित हैंडल से पोस्ट की गई है और दुश्मन देश पाकिस्तान को बहुत बड़ा संदेश दिया गया है कि भारत में मीर जाफर के समर्थक मौजूद हैं।

सर तन से जुदा आज लश्कर-ए-पाकिस्तान कांग्रेस की विचारधारा बन गई है। राहुल गांधी के निर्देश पर ऐसे पोस्ट किए जाते हैं, जिससे देश शर्मिंदा होता है। ऐसे संवेदनशील समय में भारत को कमजोर करने की लश्कर-ए-पाकिस्तान कांग्रेस की यह कोशिश है।

गौरव भाटिया ने आगे कहा कि वे पाकिस्तान को संकेत दे रहे हैं कि इस आतंकवादी हमले में कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान के साथ खड़ी है, न कि अपने देश के साथ। यह कांग्रेस पार्टी की ओर से किया गया कोई मासूम पोस्ट नहीं है।

यह हमारे देश की अखंडता को कमजोर करने और देश के प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने की एक भयावह और जहरीली साजिश है।

उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय मूल के लोग पाकिस्तान के दूतावास और उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। लंदन में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन के दौरान उनका अधिकारी बालकनी से बाहर आता है और इशारा करता है कि हम भारतीयों का सिर काट देंगे।

यह संकेत कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी के एंटीना में कैद हुआ। उसी तरह की तस्वीर यहां प्रधानमंत्री के लिए पोस्ट की गई है। तो क्या यह कहना गलत है कि कांग्रेस कह रही है कि हम पाकिस्तान के साथ हैं?

गौरव भाटिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादियों का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा और उनके आकाओं और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि वे इसे जीवन भर याद रखेंगे।

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ट्रेन में वेटिंग टिकट पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर

जान लें नहीं तो परेशानी में पड़ जाएंगे

नई दिल्ली ,29 अपै्रल(एजेंसी)। ट्रेन से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। भारतीय रेलवे 1 मई से कंफर्म टिकट वाले यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए वेटिंग टिकट पर स्लीपर और एसी कोच में यात्रा करने वालों पर सख्ती बरतने जा रहा है।

नए नियमों के तहत, यदि किसी यात्री के पास वेटिंग टिकट है, तो उसे केवल जनरल क्लास (अनरिजर्व्ड कोच) में ही यात्रा करने की अनुमति होगी। आईआरसीटीसी से ऑनलाइन बुक की गई वेटिंग टिकट चार्ट बनने के बाद अपने आप रद्द हो जाती है, लेकिन कई यात्री काउंटर से वेटिंग टिकट लेकर आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने का प्रयास करते हैं, जिससे कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को असुविधा होती है।

1 मई से नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। यदि कोई यात्री वेटिंग टिकट के साथ स्लीपर या एसी कोच में पाया जाता है, तो टिकट चेकिंग स्टाफ (टीटीई) उस पर नियमानुसार जुर्माना लगा सकता है या उसे जनरल कोच में भेज सकता है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने पुष्टि की है कि यह कदम कंफर्म टिकट वाले यात्रियों की यात्रा को आरामदायक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के आरक्षित कोच में प्रवेश करने से न केवल सीटों पर कब्जे को लेकर विवाद होता है, बल्कि डिब्बों में अनावश्यक भीड़ भी बढ़ती है, जिससे यात्रियों की आवाजाही बाधित होती है और यात्रा कष्टदायक हो जाती है।

रेलवे का कहना है कि इस सख्ती के बाद केवल उन्हीं यात्रियों को स्लीपर और एसी कोच में यात्रा की अनुमति मिलेगी जिनके पास कंफर्म टिकट होगा, जिससे ट्रेनों में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। ऐसे में, अगर आप अक्सर वेटिंग टिकट पर यात्रा करते हैं, तो अब आपको अपनी यात्रा की योजना अधिक सावधानी से बनानी होगी।

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पहलगाम अटैक पर बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी सेना से जुड़े हैं तार

हमला करने वाला आतंकी पहले था SSG कमांडो

नई दिल्ली 29 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि हमले में शामिल एक पाकिस्तानी आतंकवादी का संबंध पाकिस्तानी सेना से रहा है। पहलगाम नरसंहार में शामिल इस आतंकी की पहचान हाशिम मूसा के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पूर्व पैरा कमांडो था।

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाशिम मूसा को पाकिस्तानी सेना द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया था और उसे अब आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने के लिए जम्मू-कश्मीर भेजा गया। सूत्रों का कहना है कि मूसा का मिशन स्थानीय और विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों पर हमले कर दहशत फैलाना था।

हालांकि, भारतीय सेना या सरकार की ओर से इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि पाकिस्तान की स्पेशल फोर्सेज और आतंकी संगठनों के बीच गठजोड़ के चलते इस हमले को अंजाम दिया गया।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पहले सामने आए तीन संदिग्ध आतंकवादियों के स्केच में से एक हाशिम मूसा का बताया जा रहा है। फिलहाल, सुरक्षाबलों की ओर से मूसा और उसके साथियों की तलाश तेज कर दी गई है।

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प्राइम वीडियो की नवीनतम प्रस्तुति ड्रामा सीरीज़ ‘ग्राम चिकित्सालय’ का प्रीमियर शो 9 मई को…….!

29.04.2025 – टीवीएफ (द वायरल फीवर) के बैनर तले निर्मित दिल को छू लेने वाली ड्रामा सीरीज़ ‘ग्राम चिकित्सालय’ की रिलीज़ डेट की घोषणा भारत के सबसे लोकप्रिय मनोरंजन डेस्टिनेशन, प्राइम वीडियो ने कर दी है।

दीपक कुमार मिश्रा की परिकल्पना पर आधारित पांच भागों वाली यह सीरीज एक महत्वाकांक्षी शहरी डॉक्टर डॉ. प्रभात की यात्रा की दास्तान बयां करती है जो एक दूरदराज के गांव में लगभग बंद पड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र को फिर से शु

रू करने के लिए उसे सरकारी तंत्र की अड़चनों, स्थानीय लोगों की शंकाओं और छोटे कस्बे की अनोखी परेशानियों से जूझना पड़ता है। ग्राम चिकित्सालय में अमोल पाराशर और विनय पाठक मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे, उनके साथ आकांक्षा रंजन कपूर, आनंदेश्वर द्विवेदी, आकाश मखीजा और गरिमा विक्रांत सिंह जैसे शानदार कलाकार भी अहम किरदार निभाते हुए दिखेंगे।

यह सीरीज़ 9 मई से भारत समेत दुनिया भर के 240 से ज्यादा देशों और निकटवर्ती क्षेत्रों में केवल प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होगी। इस ओरिजिनल सीरीज़ की कहानी वैभव सुमन और श्रेया श्रीवास्तव ने लिखी है और निर्देशन राहुल पांडे ने किया है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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नियंत्रण रेखा पर फिर गोलीबारी, सेना ने पाकिस्तान को दिया मुंहतोड़ जवाब

जम्मू 28 April,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): आतंकवाद पर हो रहे प्रहार से घबराया पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करने से बाज नहीं आ रहा है। 27-28 अप्रैल की रात पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर से नियंत्रण रेखा के पार से गोलीबारी की है।

बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान की सेना ने अब नियंत्रण रेखा के उस पार से कुपवाड़ा और पुंछ के सीमावर्ती इलाकों में फायरिंग की है। भारतीय सेना ने जवाबी फायरिंग करते हुए पाकिस्तान को इस गोलीबारी का करारा जवाब दिया है।

गौरतलब है कि आतंकवादियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई से घबराए पाकिस्तान ने शुक्रवार से नियंत्रण रेखा पर फायरिंग शुरू की है। इससे पहले 26-27 अप्रैल की रात को पाकिस्तान की सैन्य चौकियों से तुतमारी गली और रामपुर सेक्टर के सामने के इलाकों में गोलीबारी की गई थी, जिसका सेना ने माकूल जवाब दिया था।

सेना के मुताबिक 27-28 अप्रैल की रात को, पाकिस्तानी सेना की चौकियों ने कुपवाड़ा और पुंछ जिलों के अपोजिट क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा के पार से बिना उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी शुरू कर दी।

भारतीय सैनिकों ने तुरंत और प्रभावी ढंग से इसका जवाब दिया। पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा के पार से बिना किसी उकसावे के यह फायरिंग की जा रही है। अब तक की गई फायरिंग में छोटे हथियारों से गोलीबारी की गई है। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने भी उचित छोटे हथियारों से गोलीबारी का प्रभावी ढंग से जवाब दिया है।

पाकिस्तान की सेना पिछले चार दिनों से नियंत्रण रेखा के उस ओर से गोलीबारी कर रही है। भारतीय सेना ने हर बार इसका त्वरित व कड़ा जवाब दिया है। गोलीबारी का यह सिलसिला पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुआ है।

इस माहौल में रविवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। रक्षा मंत्री व जनरल अनिल चौहान की यह मुलाकात करीब 40 मिनट तक चली।

माना जा रहा है कि इस दौरान आतंकवाद के खात्मे को लेकर जनरल अनिल चौहान ने रक्षा मंत्री को सैन्य रणनीति व तैयारियों से अवगत कराया है। यह मुलाकात दिल्ली में रक्षा मंत्री के आवास पर हुई।

वहीं रविवार को ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डायरेक्टर जनरल दलजीत सिंह चौधरी भी गृह मंत्रालय पहुंचे थे। गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान पर चर्चा की है। माना जा रहा है कि बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल ने यहां गृह मंत्रालय में सीमावर्ती क्षेत्रों के मौजूदा हालात की जानकारी साझा की है।

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निकालकर न फेंको…भारत छोड़कर नहीं जाना चाहते पाकिस्तानी

अब तक 627 सीमा पार

अमृतसर 28 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने के निर्देश जारी किए जाने के बाद, बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन वापस लौट गए हैं। पिछले पांच दिनों में कम से कम 627 पाकिस्तानी भारत छोड़कर जा चुके हैं, जिनमें 9 राजनयिक और अधिकारी भी शामिल हैं। भारत सरकार ने शॉर्ट टर्म वीजा की 12 श्रेणियों के धारकों को तत्काल पाकिस्तान लौटने का आदेश दिया था, जिसकी समय सीमा रविवार को समाप्त हो गई।

भारत छोड़ते समय कई पाकिस्तानियों को भावुक होते देखा गया। बालासोर जिले में चार साल की उम्र से रह रही 72 वर्षीय रजिया सुल्ताना ने दर्द भरी गुहार लगाते हुए कहा, “अगर हमने कुछ गलत किया है तो गोली मार दो लेकिन देश से निकालकर ना फेंको।” किडनी की समस्या से जूझ रहीं रजिया सुल्ताना को भी देश छोड़ने का नोटिस मिला है और 10 मई को भुवनेश्वर में उनका मेडिकल अपॉइंटमेंट है। उनके परिवार ने सरकार से उन्हें राहत देने की अपील की है।

गुजरावालां के सोनी मसीह से शादी करने वाली मारिया को भी भारत छोड़ने का आदेश मिला है। पिछले साल ही उनकी शादी हुई है और मारिया गर्भवती हैं। उन्हें अब तक लॉन्ग टर्म वीजा नहीं मिला था। मारिया ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने पति को छोड़ना नहीं चाहतीं।

पाकिस्तान से भी 756 लोग अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत वापस आए हैं, जिनमें 14 राजनयिक और अधिकारी शामिल हैं। पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए ‘भारत छोड़ो’ नोटिस जारी किया था, जिसके बाद अटारी-वाघा सीमा से पाकिस्तान लौटने वालों की संख्या काफी बढ़ गई। रविवार को भी कम से कम 237 लोगों ने सीमा पार की, जिनमें 115 पाकिस्तान से भारत वापस आने वाले थे।

गुरुवार को 115 भारतीयों ने पाकिस्तान छोड़ा था, जबकि 28 पाकिस्तानी अपने देश लौटे थे। 25 अप्रैल को 287 पाकिस्तानी और 191 भारतीय अपने घरों को वापस गए। शनिवार को 75 पाकिस्तानियों ने सीमा पार की। सार्क वीजा पर भारत में रह रहे लोगों को वापस जाने के लिए 26 अप्रैल तक का समय दिया गया था, जबकि मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक का समय मिला।

रविवार को वीजा ऑन अराइवल, बिजनेस, फिल्म, जर्नलिस्ट, ट्रांजिट, कॉन्फ्रेंस, माउंटेनियरिंग, स्टूडेंट, विजिटर, ग्रुप टूरिस्ट और तीर्थयात्री श्रेणी के वीजा धारकों के लिए भी देश छोड़ने की समय सीमा खत्म हो गई। पाकिस्तानी उच्चायोग में सेना, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को देश छोड़ने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।

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अपनों की गद्दारी से हुआ पहलगाम हमला!

15 कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर संदिग्ध, आतंकियों की मदद का शक

श्रीनगर 28 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिये 15 स्थानीय कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) की पहचान हुई है, जिनपर पाकिस्तानी आतंकियों की मदद करने का शक है। इन पर संसाधन जुटाने, हथियार मंगवाने और जंगलों में आतंकियों का मार्गदर्शन करने का आरोप है।

 सूत्रों के मुताबिक, पांच मुख्य संदिग्धों पर फोकस किया गया है, जिनमें से तीन को पकड़ लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है। हमले के वक्त सभी पांच संदिग्ध इलाके में मौजूद थे और उनके फोन की लोकेशन भी सामने आई है। हिरासत में लिए गए तीनों आरोपियों के बीच की एक चैट भी बरामद हुई है, जिसमें हमले में उनकी भूमिका का जिक्र है।

एनआईए, जम्मू-कश्मीर पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ की संयुक्त टीम 10 अन्य OGW से पूछताछ कर रही है। 200 से ज्यादा ओवरग्राउंड वर्कर्स को हिरासत में लेकर पूछताछ हो चुकी है। इनमें 20-25 ऐसे OGW हैं जो पाकिस्तान के आतंकियों के संपर्क में रहने और उन्हें शरण देने के लिए पहले से कुख्यात हैं।

15 संदिग्ध OGW दक्षिण कश्मीर के रहने वाले हैं और पहले भी कई आतंकी घटनाओं में पाकिस्तानी आतंकियों की मदद कर चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि 4-5 आतंकियों की टीम ने हमला किया था, जिसमें दो पाकिस्तानी और दो स्थानीय कश्मीरी शामिल थे। फिलहाल सुरक्षाबलों ने बैसरन घाटी के जंगलों में आतंकियों की तलाश तेज कर दी है। माना जा रहा है कि हमलावर अभी भी घने जंगलों में छिपे हो सकते हैं। पूरे इलाके में तलाशी अभियान लगातार जारी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए 15 OGW से मिली जानकारियों के आधार पर हमले की साजिश के सभी पहलुओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हो सके।

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पहलगाम आतंकी हमले को लेकर दिए बयान पर रॉबर्ट वाड्रा की सफाई

मैं भारत के साथ खड़ा हूं और हमेशा खड़ा रहूंगा’

नई दिल्ली 28 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुई आतंकी घटना पर अपने पुराने बयान को लेकर विवादों में आए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मैं भारत के साथ खड़ा हूं और हमेशा खड़ा रहूंगा।

सोमवार को उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि मैं ये शब्द पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ लिख रहा हूं। इसलिए मैं चाहता हूं कि इसे उसी भावना से लिया जाए। वाड्रा ने कहा कि मैंने पहले जो कहा उसे उसके संपूर्ण संदर्भ में पूरी तरह से नहीं समझा गया है क्योंकि मेरे इरादों की गलत व्याख्या की गई है।

उन्होंने आगे लिखा, “चलिए मैं मानता हूं कि उन्हें स्पष्ट करना मेरी जिम्मेदारी है। मैं ईमानदारी, पारदर्शिता और सम्मान के साथ खुद को स्पष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैंने कुछ दिनों तक मौन रहने का विकल्प चुना है।

लेकिन, इसे निष्क्रियता, उदासीनता या देशभक्ति की कमी के रूप में न समझा जाए। वास्तव में, यह मेरे देश के प्रति मेरे गहरे प्रेम, सत्य के प्रति मेरे अगाध सम्मान और ईमानदारी के प्रति मेरी प्रतिबद्धता के कारण ही है कि मैंने बोलने से पहले चिंतन करने के लिए समय निकाला है।”

वाड्रा ने कहा, “मैं इस बारे में स्पष्ट कर दूं कि मैं कहां खड़ा हूं और हमेशा से कहां खड़ा रहा हूं, मैं उस भयानक आतंकवादी हमले की पूरी तरह निंदा करता हूं जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई और परिवार बिखर गए।

मैं हमेशा भारत के साथ खड़ा हूं और खड़ा रहूंगा। उन्होंने आगे लिखा कि कोई भी औचित्य नहीं है- राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक- जो कभी भी असहाय लोगों के खिलाफ हिंसा के इस्तेमाल को माफ कर सके।”

वाड्रा ने अंत में महात्मा गांधी के अहिंसक मंत्र की याद दिलाई। आगे लिखा, “मेरा मानना है कि किसी भी रूप में आतंक, न केवल व्यक्तियों पर बल्कि मानवता की आत्मा पर हमला है। यह हर इंसान के बिना डरे जीने के मूल अधिकार को खत्म कर देता है।

कोई भी कारण इतना उचित नहीं है कि निर्दोष लोगों के खून बहाने को सही ठहराया जा सके। मैं हम सभी से यह याद रखने का आह्वान करता हूं कि गांधी जी ने हमें क्या सिखाया, अहिंसा निष्क्रिय नहीं है। यह सबसे साहसी विकल्प है जो हम चुन सकते हैं।”

बता दें कि वाड्रा ने पहलगाम घटना पर कहा था कि देश के मुसलमान कमजोर महसूस कर रहे हैं और यह घटना पीएम मोदी के लिए एक संदेश है।

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इस घटना पर माफी मांगने के लिए शब्द नहीं हैं – उमर अब्दुल्ला

जम्मू ,28 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को एक दिवसीय विशेष सत्र में पहलगाम में पर्यटकों पर 22 अप्रैल को हुए बर्बर आतंकवादी हमले पर गहरा सदमा और पीड़ा व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके पास इस घटना पर माफी मांगने के लिए शब्द नहीं हैं।

सीएम अब्दुल्ला ने कहा, हम बंदूक के जरिए आतंकवाद को नियंत्रित कर सकते हैं उसे खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की सिक्योरिटी जम्मू कश्मीर की निर्वाचित सरकार की जिम्मेदारी नहीं, लेकिन मैं इस मौका का इस्तेमाल स्टेटहुड के लिए नहीं करूंगा।

इस मौके पर कोई सियासत नहीं, कोई स्टेटमेंट नहीं, सिर्फ हमले की कड़ी निंदा होनी चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा, ‘इस मौके पर मैं जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग नहीं करूंगा।

मैं किस मुंह से जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग कर सकता हूं। हम हमेशा राज्य के दर्जे की डिमांड करेंगे, लेकिन आज यदि ऐसी मांग करूं तो मुझ पर लानत है।

उन्होंने कहा कि राज्य का मुख्यमंत्री और टूरिज्म मिनिस्टर होने के नाते मैंने उन टूरिस्टों को कश्मीर आने की दावत दी थी, लेकिन मैं उनको सही सलामत वापस नहीं भेज सका। उमर ने कहा कि इस हमले ने हमें अंदर तक खोखला कर दिया है।

विधानसभा में उमर ने हमले में मारे गए सभी 26 टूरिस्टों के नाम पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उमर ने कहा कि उन लोगों के दुख दर्द को इस विधानसभा से ज्यादा कोई दूसरी विधानसभा या संसद नहीं समझ सकती।

इस विधानसभा में मौजूद कई लोगों ने आतंकी हमलों में अपनों को खोया है। मेरे पास, क्या कहता उनको, उन छोटे बच्चों को, जिन्होंने अपने वालिद को खून में लिपटा हुआ देखा। उस नेवी अफसर की विधवा को जिनको शादी हुए ही चंद दिन हुए थे।

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भारत के एक्शन का असर, पाकिस्तान में दवा से लेकर खाद की भारी किल्लत

3800 करोड़ से ज्यादा का कारोबार ठप

नई दिल्ली ,28 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए नृशंस आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग अटारी बॉर्डर को बंद कर दिया है। इस हमले में आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष सैलानियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसमें सीधे तौर पर पाकिस्तान का हाथ माना जा रहा है।

भारत के इस फैसले से दोनों देशों के बीच होने वाला 3886.53 करोड़ रुपये का सीमा पार व्यापार तत्काल प्रभाव से रुक गया है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (त्रञ्जक्रढ्ढ) के एक अनुमान के मुताबिक, भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच सीधा व्यापार सीमित हो, लेकिन अप्रत्यक्ष तरीकों से हर साल भारत का लगभग 10 अरब डॉलर का सामान पाकिस्तान पहुंचता है।

यह व्यापार मुख्य रूप से दुबई, सिंगापुर और कोलंबो जैसे तीसरे देशों के रास्ते होता है, जहां सामान के लेबल और दस्तावेज बदलकर उन्हें किसी और देश का बताकर पाकिस्तान भेजा जाता है।

पंजाब के अमृतसर स्थित अटारी बॉर्डर भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी रास्ते से व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। भारत द्वारा इस बॉर्डर को बंद किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत के साथ व्यापार रोक दिया है।

गौरतलब है कि साल 2024 में भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 127 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जो 2023 में 0.53 बिलियन डॉलर था। हालांकि, यह आंकड़ा 2019 में पुलवामा आतंकी हमले से पहले के 3 बिलियन डॉलर के व्यापार स्तर से काफी कम है।

भारत पाकिस्तान को मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स (दवाएं और उनकी सामग्री), चीनी, चाय, कॉफी, कपास, लोहा, स्टील, टमाटर, नमक, ऑटोमोटिव कॉम्पोनेंट्स और उर्वरक जैसी वस्तुएं निर्यात करता रहा है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान से भारत में मसाले, खजूर, बादाम, अंजीर, बेसिल और रोजमेरी जैसी जड़ी-बूटियां आयात की जाती हैं।

दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार बंद होने से पाकिस्तान को भारतीय सामानों के लिए तीसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे सामानों की ढुलाई लागत में वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर पाकिस्तान में इन वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा और मूलभूत चीजें महंगी हो जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान का फार्मा सेक्टर विशेष रूप से प्रभावित हो सकता है। इसकी तुलना में, भारत पर इस व्यापार निलंबन का प्रभाव काफी कम होने की उम्मीद है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच हुई अहम मुलाकात

करीब 40 मिनट तक हुई बात

नई दिल्ली ,28 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई। प्रधानमंत्री मोदी और रक्षामंत्री के बीच यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली।

पीएम मोदी के पास जाने से पहले रक्षामंत्री ने सोमवार को ही आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी से रक्षा मंत्रालय में मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख से सेना की तैयारी, पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद उठाए गए कदम और सीमाओं की स्थिति की जानकारी ली।

वहीं सोमवार को भारत और फ्रांस के बीच नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों का सौदा भी होना है। इस डील से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है। हाल ही में मिली इस मंजूरी के बाद अब यह डील होने जा रही है। इसके तहत नौसेना के लिए मरीन (एम) श्रेणी के राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जा रहे हैं।

सोमवार को इससे जुड़े समझौतों पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए जाएंगे। फ्रांस के रक्षा मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत में शामिल होंगे। इस सब घटनाक्रम के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री से मिलने प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे। यहां दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक गंभीर वार्ता हुई है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की सेना पिछले चार दिनों से नियंत्रण रेखा के उस ओर से गोलीबारी कर रही है। भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया है। गोलीबारी का यह सिलसिला पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुआ है। इस बीच रविवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

रक्षा मंत्री और जनरल अनिल चौहान की यह मुलाकात भी करीब 40 मिनट तक चली। माना जा रहा है कि इस दौरान आतंकवाद के खात्मे को लेकर जनरल अनिल चौहान ने रक्षा मंत्री को सैन्य रणनीति और तैयारियों से अवगत कराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की यह मुलाकात दिल्ली में रक्षा मंत्री के आवास पर हुई थी।

माना जा रहा है कि रक्षा मंत्री के आवास पर पहुंचे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारतीय सैन्य बलों की तैयारियों पर रक्षा मंत्री को जानकारी दी थी। रक्षा तैयारियों को लेकर रविवार को दिल्ली में बीएसएफ के अधिकारी भी मौजूद रहे। रविवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डायरेक्टर जनरल दलजीत सिंह चौधरी गृह मंत्रालय गए थे।

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एसोसिएशन ऑफ सिने एंड टीवी/ एड प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव्स का स्वर्ण जयंती समारोह 1 मई को….!

228.04.2025 – एसोसिएशन ऑफ सिने एंड टीवी/ एड प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव्स द्वारा जुहू, मुंबई स्थित इस्कॉन प्रेक्षागृह में 1 मई को स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर साल के सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव को सम्मानित करने के लिए 12वें पुरस्कार समारोह (2025) आयोजित करने का ऐलान किया गया है। इस समारोह के अवॉर्ड कैटेगरी में फिल्म, टीवी धारावाहिक(फिक्शन /नॉन फिक्शन), वेब सीरीज,म्यूजिक एल्बम, रीजनल मूवीज और टेलीविजन शोज (मराठी, भोजपुरी, पंजाबी और गुजराती ) शामिल हैं।

इस समारोह के मुख्य अतिथि श्री रामदास आठवले राज्य मंत्री,सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय (भारत सरकार) होंगे। फिल्म और मनोरंजन उद्योग से कई अन्य मशहूर हस्तियों को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। एसोसिएशन ऑफ सिने टीवी एड प्रोडक्शन एक्जीक्यूटिव एक संगठन है जो फिल्म और टीवी उद्योग में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विदित हो कि फिल्म उद्योग के उत्पादन क्षेत्र में कार्यरत उत्पादन नियंत्रकों और उत्पादन प्रबंधकों के व्यावसायिक हितों की रक्षा करने के उद्वेश्य से 1975 में स्वर्गीय श्री आर.के. हांडा, श्री राममिलन वर्मा, श्री माणिक गुप्ता, श्री वी.के. माथुर, श्री गंगाधरम, श्री हरिंगटन बर्नार्ड ने ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 के अंतर्गत एसोसिएशन ऑफ सिने प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव्स के नाम से इस एसोसिएशन की स्थापना और पंजीकरण कराया था।

स्वर्गीय श्री माणिक गुप्ता, श्री मोहम्मद शफी, श्री भूषण बर्मा और स्वर्गीय श्री ज्ञान सचदेव के कुशल और निपुण योगदान ने एसोसिएशन को मजबूती से स्थापित करने में काफी मदद की । बाद में, कवरेज का विस्तार करने और सदस्यों की संख्या में वृद्धि करने के लिए, टेलीविजन और विज्ञापन फिल्म क्षेत्र को इस एसोसिएशन में शामिल किया गया और एसोसिएशन का नाम बदलकर ‘एसोसिएशन ऑफ सिने एंड टीवी/ एड प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव्स’ कर दिया गया। एसोसिएशन के उपरोक्त सदस्यों की कड़ी मेहनत और प्रयासों के कारण, इस एसोसिएशन को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज द्वारा मान्यता दी जा चुकी है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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अनुराग ठाकुर का पाकिस्तान पर जुबानी हमला, गीदड़ भभकियों से कुछ नहीं होगा

मंडी ,27 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गीदड़ भभकियों से कुछ नहीं होगा।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी के भारत द्वारा सिंधु जल समझौता स्थगित करने पर आए भड़काऊ बयान पर कहा कि पाकिस्तान की गीदड़ भभकियों से कुछ होने वाला नहीं है। भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है।

अनुराग ठाकुर ने कहा, पहलगाम में हुए हमले के खिलाफ भारत सरकार ने कड़ा निर्णय लिया है। इस मामले में और भी कड़े निर्णय लिए जाएंगे। भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देकर निर्दोष लोगों की जान लेने के बाद इस बेशर्मी से बयान देने से पाकिस्तान की जमीन से ही आतंकवाद को बढ़ावा देना प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा, आतंकवाद को पनपने और पालने-पोसने का काम पाकिस्तान द्वारा किया जाना आज किसी से छुपा नहीं है। पाकिस्तानी की धरती नापाक इरादे रखने वालों के लिए, बेगुनाहों का जीवन छीनने के लिए और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए होता रहा हैं। वे आतंकवादियों को संरक्षण देती है। पाकिस्तान की गंदी हरकतें आज एक बार फिर दुनिया के सामने आ गई हैं। इस बार पाकिस्तान को माफी नहीं मिलेगी।

पहलगाम हमले की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, पहलगाम की कायरतापूर्ण हमला बहुत ही निंदनीय है। निर्देशों की जान जो गई, उनका बलिदान और शहादत व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। पीएम मोदी ने इसे स्पष्ट किया है और एक के बाद एक ऐसे निर्णय लिए हैं। अच्छी बात है कि देश के सभी राजनीतिक दलों ने एक साथ एक सुर में कहा है कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश जाना चाहिए और उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे समय पर एकजुटता के साथ एक संदेश जाना जरूरी था।

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देश और सैनिकों की सुरक्षा से कोई भी समझौता माफी के योग्य नहीं : अखिलेश यादव

लखनऊ ,27 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि देश और सैनिकों की सुरक्षा से कोई भी समझौता माफ़ी के योग्य नहीं है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्पेशल ऑपरेशन्स की लाइव कवरेज की अनुमति क्या एक रणनीतिक लापरवाही थी या फिर ये राजनीतिक प्रचार से प्रेरित थी, ये बात सरकार तत्काल स्पष्ट करे। कल को फिर से सरकार ये कहेगी कि ‘एक चूक के बाद ये दूसरी चूक हो गई।

उन्होंने आगे लिखा कि इसका मतलब साफ है कि सुरक्षा जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में मीडिया का अवांछित अतिक्रमण है। लाइव कवरेज तो दुश्मन भी देखेंगे जिससे हमारे सुरक्षा बलों की लोकेशन उनको पता चल जाएगी और रणनीति भी, इससे देश की सुरक्षा और हमारे जवानों की जान भी खतरे में डाल दी जाएगी। इस तरह की लाइव कवरेज के लिए सख़्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। देश और सैनिकों की सुरक्षा से कोई भी समझौता माफ़ी के योग्य नहीं है।

इसके पहले उन्होंने एक जनसभा में कहा था कि इतनी बहादुर फौज दुनिया में किसी के पास नहीं जितनी भारत के पास है। इतनी कठिन परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करते हैं, शायद दुनिया में ऐसे बॉर्डर नहीं होंगे। टेररिस्ट जो हैं, उनको बख्शा नहीं जाना चाहिए और जो टेररिस्ट का साथ दे रहे हैं, उनके खिलाफ और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।

सपा मुखिया ने कहा कि हमें उम्मीद है ठोस कार्रवाई होगी, जिससे जो भारत के दुश्मन हैं, जो मानवता के दुश्मन हैं, जो हमारे देश के भाईचारे को खराब करना चाहते हैं, ऐसी ताकतों का हमेशा के लिए सफाया किया जाए।

ज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बीते दिनों आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की मौत के घाट उतार दिया। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर गोली मार दी।

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जम्मू-कश्मीर : फारूक अब्दुल्ला से मिले आनंद दुबे

कहा- आतंकवाद के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) सरकार के साथ

श्रीनगर ,27 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता एवं प्रवक्ता आनंद दुबे रविवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे और नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे रविवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की। उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए कायराना आतंकी हमले के बारे में बात की। साथ ही आनंद दुबे ने फारूक अब्दुल्ला को आश्वासन दिया कि शिवसेना (यूबीटी) उनके साथ खड़ी है।

इससे पहले उन्होंने श्रीनगर के प्राचीन शंकराचार्य मंदिर में दर्शन पूजन किया था। उन्होंने मंदिर में दर्शन करने की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, सुबह श्रीनगर के प्राचीन शंकराचार्य मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना व आरती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मंदिर पहाड़ पर स्थित है। आज दिन भर श्रीनगर और पहलगाम की यात्रा पर हूं साथ में जम्मू कश्मीर के शिवसेना अध्यक्ष मनीष साहनी, गुलाबचंद मौर्य आदि मित्र हैं।

इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) के प्रतिनिधि ने अन्य लोकल लोगों से मुलाकात की और आतंकवाद के खिलाफ एक साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने एक्स पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, शिवसेना (यूबीटी) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और युवासेना प्रमुख व आमदार आदित्य ठाकरे के मार्गदर्शन में, हम कश्मीर (श्रीनगर)वासियों से मिले और उनका हौसला बढ़ाया। हमने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के खात्मे के लिए हमारी पार्टी पूरी तरह सरकार के साथ खड़ी है। मीडिया के माध्यम से पर्यटकों से भी अपील की कि घबराएं नहीं, हम सब एकजुट हैं। हम सब मिलकर आतंकवाद का अंत करेंगे।

उल्लेखनीय है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में रोष देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार इस हमले का जिम्मेदार आतंकवादियों के पनाहगार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को मान रही है। इस दिशा में केंद्र सरकार ने कई कड़े और बड़े फैसले लिए हैं। वहीं, इस कायराना हमले के बाद भारत सरकार को देश के अंदर और बाहर भरपूर समर्थन मिल रहा है।

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आतंकवाद और उसके मूल के खिलाफ होनी चाहिए निर्णायक लड़ाई : उमर अब्दुल्ला

जम्मू ,27 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के खिलाफ देशभर में विरोध देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भी एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। इसी बीच रविवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आतंकवाद के खिलाफ समर्थन को और आगे बढ़ाने और आतंकवाद एवं उसके मूल के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की बात कही।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) शासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की बात कही। उन्होंने लिखा, पहलगाम आतंकी हमले के बाद, आतंकवाद और उसके मूल के खिलाफ निर्णायक लड़ाई होनी चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ जनसमर्थन को आगे बढ़ाने की बात करते हुए उन्होंने कहा, कश्मीर के लोग आतंकवाद और निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं, उन्होंने यह स्वतंत्र और सहज रूप से किया। अब समय आ गया है कि इस समर्थन को और बढ़ाया जाए और लोगों को अलग-थलग करने वाली किसी भी गलत कार्रवाई से बचा जाए।

आतंकी हमले के दोषियों के खिलाफ बिना दया दिखाए कठोर सजा की बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, दोषियों को सजा दी जाए, उन पर कोई दया न दिखाई जाए लेकिन निर्दोष लोगों को नुकसान न होने दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने निहत्थे पर्यटकों पर गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। हमले के पीडि़तों ने बताया कि आतंकवादियों ने लोगों को मारने से पहले उनसे उनका धर्म पूछा। इस हमले के बाद देशभर में रोष देखने को मिल रहा है। लोग केंद्र सरकार से सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भी एकजुट होकर आतंकवादी हमले के खिलाफ आवाज उठाई।

सरकार ने हमले के पीछे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हाथ होने की बात कही है। पहलगाम घटना के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में केंद्र सरकार ने कई कड़े और बड़े फैसले लिए, जिनमें सिंधु जल समझौते को निरस्त करना, पाकिस्तान से अपने राजनयिकों को वापस बुलाना और भारत स्थित पाकिस्तानी दूतावास में कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 करना महत्वपूर्ण रहा।

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नीतीश कुमार और संजय झा शामिल हुए जदयू के अधिवक्ता समागम कार्यक्रम में

पटना , 26 अप्रैल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जदयू कार्यालय में अधिवक्ता समागम’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्राम में मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार  के साथ जद(यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  संजय कुमार झा मौजूद रहे।

इस दौरान मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार  ने अधिवक्तागण के साथ संवाद कर बिहार में न्याय के साथ विकास को धरातल पर उतारने में अधिवक्ताओं की भूमिका की जमकर प्रशंसा की।

साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव होना है और इसको लेकर एनडीए के सभी दल और खासकर जदयू ने कमर कस ली है और और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि बिहार में दोबारा डबल इंजन की सरकार पूरी मजबूती के साथ वापस आएगी और बिहार के विकास कार्यों में जो तेजी है वह लगातार बने रहेगी।

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राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना है और वो अपना कर्तव्य निभाएगा – मोहन भागवत

नई दिल्ली ,26 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत शनिवार को नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के वरिष्ठ सदस्य स्वामी विज्ञानानंद लिखित द हिंदू मेनिफेस्टो नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पुस्तक में बताई गई बातों को आज के समय के लिए जरूरी बताया।

द हिंदू मेनिफेस्टो धर्म-केंद्रित दृष्टिकोण से राष्ट्रीय और वैश्विक परिवर्तन के लिए एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो वेद, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र और शुक्रनीतिसार जैसे प्राचीन हिंदू ग्रंथों के ज्ञान पर आधारित है।

मोहन भागवत ने पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा, हमारे यहां स्पष्ट उल्लेख है कि अहिंसा ही हमारा स्वभाव है, लेकिन हमारी अहिंसा लोगों को बदलने और उन्हें अहिंसक बनाने के लिए है। कुछ लोग हमारा उदाहरण लेकर अहिंसक बन जाएंगे, लेकिन कुछ लोग नहीं बनेंगे। वे इतने बिगड़ैल हैं कि कुछ भी करो, वो नहीं बदलेंगे।

रावण का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा, हम किसी के दुश्मन नहीं हैं और हमारे स्वभाव में द्वेष नहीं है। रावण का वध भी उसके कल्याण के लिए हुआ। जब यह सिद्ध हुआ कि शिवभक्त, वेदों का ज्ञाता, उत्तम गर्वनेंस करने वाला रावण है। अच्छा आदमी बनने के लिए जो चाहिए, उसके पास सभी चीजें थी, लेकिन उसने जिस शरीर, मन-बुद्धि को स्वीकार्य किया, वो उसके अंदर अच्छाई को आने नहीं देगा।

कुछ भी करने से उसके अंदर अच्छाई नहीं आ सकती। उसके पास अच्छा बनने के लिए एक ही उपाय है कि उसे उस शरीर, मन, बुद्धि को समाप्त करके, दूसरे मन, बुद्धि और शरीर को लाना पड़े। इसलिए भगवान ने उसका संहार किया, इस संहार को हिंसा नहीं बल्कि अहिंसा ही कहेंगे।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संदेश देते हुए कहा, अहिंसा हमारा धर्म है, लेकिन आततायियों से मार न खाना और गुंडागर्दी वालों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म है। कुछ लोगों को थोड़ा दंड, कुछ को बहुत दंड और कुछ को बिना दंड दिए, सुधार कर हम अपनाते हैं।

लेकिन, जिसका कोई दूसरा इलाज ही नहीं है, उनके कल्याण के लिए, दूसरा बेसिक मैटेरियल (शरीर) पाने के लिए वहां भेज देते हैं, जहां पर वो मिलता है। इससे बैलेंस बना रहता है।

हम कभी भी अपने पड़ोसियों का कोई अपमान या हानि नहीं करते। लेकिन, इसके बावजूद अगर कोई बुराई पर उतर आए, तो हमारे पास कोई दूसरा इलाज क्या है? राजा का कर्तव्य है प्रजा की रक्षा करना और वो अपना कर्तव्य निभाएगा।

उन्होंने कहा, दोनों धर्म (हिंसा और अहिंसा) हैं। इसलिए, गीता में अहिंसा का भी उपदेश है। अहिंसा का उपदेश इसलिए है कि अर्जुन लड़े और मारे। उस समय ऐसे लोग सामने थे, जिनके विकास का कोई दूसरा इलाज नहीं था। सब बदलकर (मन, बुद्धि और शरीर) ही उन्हें दोबारा आना पड़ेगा। अपने यहां ऐसा संतुलन रखने वाली भूमिका है, वो संतुलन हम भी भूल गए।

सभ्यता के पुनरुत्थान के लिए एक खाका के रूप में तैयार की गई द हिंदू मेनिफेस्टो पुस्तक में आठ आधारभूत सूत्र या मार्गदर्शक सिद्धांतों की रूपरेखा दी गई है, सभी के लिए समृद्धि, राष्ट्रीय सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जिम्मेदार लोकतंत्र, महिलाओं के प्रति सम्मान, सामाजिक सद्भाव, अपनी विरासत के प्रति सम्मान और प्रकृति की पवित्रता।

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