Wife has the right to call her husband impotent;Bombay High Court's big comment

मुंबई ,01 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अगर कोई पत्नी वैवाहिक विवाद के दौरान अपने आरोपों को साबित करने के लिए पति को ‘नपुंसक कहती है, तो इसे मानहानि का अपराध नहीं माना जाएगा।

अदालत ने कहा कि पत्नी को यह अधिकार कानून के तहत मिला है और यह भारतीय दंड संहिता (ढ्ढक्कष्ट) की धारा 499 (मानहानि) के नौवें अपवाद के अंतर्गत संरक्षित है। न्यायमूर्ति एस.एम. मोडक की पीठ ने यह फैसला एक पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत को खारिज करते हुए सुनाया।

यह मामला एक पति-पत्नी के बीच चल रहे तलाक और भरण-पोषण के विवाद से जुड़ा है। पति ने अपनी पत्नी, ससुर और साले के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

उसका आरोप था कि पत्नी ने तलाक, भरण-पोषण की याचिका और एक स्नढ्ढक्र में उसकी यौन अक्षमता (नपुंसकता) को लेकर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

अप्रैल 2023 में, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पति की शिकायत यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि ये आरोप वैवाहिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लेकिन बाद में, अप्रैल 2024 में सत्र न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया और मामले में आगे की जांच का आदेश दिया।

सत्र न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ पत्नी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पत्नी की ओर से दलील दी गई कि ये आरोप न्यायिक कार्यवाही में लगाए गए थे और मानसिक उत्पीडऩ व उपेक्षा को साबित करने के लिए प्रासंगिक थे, इसलिए यह कानून के तहत संरक्षित हैं।

हाईकोर्ट ने पत्नी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट के फैसले को बहाल रखा। न्यायमूर्ति मोडक ने कहा, जब कोई मुकदमा पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद से संबंधित होता है, तो पत्नी को अपने पक्ष में ऐसे आरोप लगाने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जब कोई पत्नी मानसिक उत्पीडऩ साबित करना चाहती है, तब नपुंसकता जैसे आरोप प्रासंगिक और आवश्यक माने जाते हैं।

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