Silent people are not problems that can be brushed aside

लावारिस कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राहुल गांधी का सवाल

नई दिल्ली,12 अगस्त (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से आठ हफ़्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है. राहुल गांधी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की आलोचना की. कहा, कि हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जन सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ चलें. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कई पशु अधिकार संगठनों ने भी आलोचना की थी.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश दशकों से चली आ रही मानवीय और विज्ञान-समर्थित नीति से एक कदम पीछे है.

ये बेज़ुबान आत्माएं कोई समस्या नहीं हैं जिन्हें मिटाया जा सके. आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल सड़कों को बिना किसी क्रूरता के सुरक्षित रख सकते हैं. हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जन सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ चलें.

सोमवार को, सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को तुरंत उठाकर कुत्ता आश्रय स्थलों में पहुंचाएं.

ये निर्देश नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद पर भी लागू होंगे. शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है कि कुत्तों को सड़कों से उठाकर संबंधित अधिकारियों द्वारा बनाए जाने वाले आश्रय स्थलों में रखा जाए.

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा, दिल्ली के बाहरी इलाकों सहित सभी इलाकों से सभी आवारा कुत्तों को इकट्ठा करें और उन्हें किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करें… चाहे उनकी नसबंदी हो या न हो, समाज को स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस करना चाहिए. आपके आस-पास कोई भी आवारा कुत्ता नहीं घूमना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की पशु अधिकार संगठनों ने आलोचना की. सोमवार को दिल्ली में इंडिया गेट के सामने इस आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट, शौर्य अग्रवाल ने कहा कि यह आदेश अव्यावहारिक और अतार्किक है.

शौर्य अग्रवाल कहते हैं, यह विशेष आदेश अव्यावहारिक, अतार्किक है और पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुसार अवैध भी है.

दिल्ली सरकार के पास इन नसबंदी कार्यक्रमों को लागू करने और एबीसी नियमों को लागू करने के लिए 24 साल थे. दिल्ली में 10 लाख कुत्ते हैं और उनमें से केवल आधे की ही नसबंदी की गई है. उन्हें आश्रय स्थलों में रखना अव्यावहारिक है. यह बहुत मुश्किल है. इससे अराजकता और अधिक समस्याएं पैदा होंगी.

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