चुनावी चकल्लस
(व्यंग) दिलीप सिंह – नुक्कड़ पर मिल गए, रामखेलावन भाई हमारे घर से थोड़ी दूर पर इनका भी घर है.…
हर समय हर वक्त सच के साथ
(व्यंग) दिलीप सिंह – नुक्कड़ पर मिल गए, रामखेलावन भाई हमारे घर से थोड़ी दूर पर इनका भी घर है.…
आलोक पुराणिक – कई राज्यों में चुनावी मंडियां सज चुकी हैं, दुकानदार हुंकारे लगा रहे हैं। दुकानदारी की एक तरकीब…
व्यंग – दिलीप सिंह – मैं गाँव जाने के लिए अपने समान बाँध रहा था।शहर में पिताजी सरकारी मुलाजिम है।…
दिलीप सिंह – हमारे एक दोस्त हैं झटपट लाल नामी-गिरामी पत्रकार हैं। अक्सर हमारी बैठकी जमते रहती हैं। नामी-गिरामी इतने…
– दिलीप सिंह – मामला साईकिल चोरी का.जाड़ा का दिन था। हम अपने छत पर बैठ कर दोपहर के धूप…