(व्यंग)
दिलीप सिंह –
नुक्कड़ पर मिल गए, रामखेलावन भाई हमारे घर से थोड़ी दूर पर इनका भी घर है. अक्सर हम लोगों की मुलाकात नुक्कड़ पर ही हो जाती है क्योंकि उनका ड्यूटी से लौटना और मेरा ड्यूटी पर जाने का वक़्त एक ही है, रास्ते में ही दुआ सलाम हो जाता है. आज भी वही मुलाकात हुई, हमने पूछा रामखेलावन भाई चलो चाय पी लेते हैं. बगल में चाय की टपरी है हम लोग अक्सर वही चाय पीते हैं.
बात दो दिन पहले की है, रामखेलावन भाई की पत्नी(मेरी भाभी) एक दिन मिल गई, बोली– भैया थोड़ा इनको समझाते काहे नहीं है? , आजकल चुनाव लड़ने की बात करते हैं, साथ में रात में सोते – सोते बड़बडाते हैं कि हमरा कट मनी काहे नहीं दिया,अगला बार तेरा टेंडर बंद.
हमने सोचा कि आज रामखेलावन भाई को समझाते हैं.
ए रामखेलावन भाई सुन रहे हैं कि आप चुनाव लड़ रहे हैं. तो तपाक से रामखेलावन भाई बोले – हां भैया सच तो सुन रहे हैं ।
हम बोले – रामखेलावन भाई अपना अच्छा खासा जिंदगी काहे बर्बाद करने पर तुले हुए हैं इतना अच्छा खासा नौकरी है यहां कम से कम आपका घर द्वार है अगर मैनेजमेंट को पता चल गया तो आपका प्रमोशन करके बहुत दूर भेज देगा.तब आपको समझ में आएगा.
आपको (पाठकों को) एक राज की बात बताता हूँ हमारे यहाँ प्रोमोशन का मतलब सजा है. इतना दूर आपका ट्रान्सफर कर देगा कि या तो नौकरी से इस्तीफा दीजिये या सब कुछ छोड़ कर दूर प्रान्त में नौकरी कीजिये.
रामखेलावन भाई थोड़ा सोच में पड़ गए. अक्सर ऐसा होता है कि मैनेजमेंट या संपादक/ मैनेजमेंट का दरबारी के आंखों में अगर हम खटक गए तो हमारा बड़ी जल्दी प्रमोशन कर देगा और यहां से इतना दूर भेज देता है कि आपके पास इस्तीफा देने के अलावा और कोई रास्ता बचता नही है ।(कोई यूनियन काम नहीं आता है काहे कि उसका नेता ही मैनेजमेंट या संपादक का दरबारी होता है..)
खैर रामखेलावन भाई से हम पूछे– अचानक चुनाव लड़ने का बात मन में कैसे आया?
तो रामखेलावन भाई ठहरे सीधे साधे तपाक से बोले– भैया देख नहीं रहे हैं चुनाव में जीत जाने के बाद सब अपना वोटिंग सेटिंग करते रहता है कभी मंत्री के साथ तो कभी गवर्नर के साथ तो कभी मुख्यमंत्री के साथ बड़का बड़का फोटो खिंचवा के सोशल मीडिया में डालते रहता है, हमारा पत्नी बोलती है देखिए आप ही लोग का दोस्त है कितना बड़ा-बड़ा से जान पहचान है देखो आपसे तो रोड पर एगो कुत्ता भी नहीं डरता है. यही बात हमारे दिल में लगा तो हम भी चुनाव लड़ने के लिए सोच रहे हैं साथ में बहुतों के मुंह से सुन रहे हैं कि कट मनी करके भी कुछ होता है जो टेंडर लेने वालों से लिया जाता है तो इससे दो काम ना हो जाएगा भाई.. ।
हम रामखेलावन भाई को बोले– रामखेलावन भाई कि बताइए चुनाव तो ऐसे लड़ा नहीं जाता है चुनाव में मुर्गा दारू पार्टी दिया जाता है कहां से पैसा आएगा? सबसे बढ़कर बात कि आपको हर जगह जाकर हाथ जोड़कर वोट मांगना पड़ेगा।
थोड़ी देर मेरा मुंह ताकते रहे रामखेलावन भाई और बोले – भैया ई तो हमसे ना होगा काहे कि ना तो दारू का पैसा है और ना हीं हाउस – हाउस जाकर हाथ जोड़ने का कला हमारे पास है..।
हम बोले– रामखेलावन भाई मेरा एक बात मानिए जहां चुनाव हो रहा है ना वहां आप एक वोटर की हैसियत से जाइए और दिन भर बैठे रहिए देखिएगा सब लोग आपके पास हाथ जोड़कर वोट मांगने आ जाएंगे जो आपको पीठ पीछे गरियाता रहता है..वह भी ऐसा दिखाएगा जैसे वो आपका सगा भाई है..।
यह बात रामखेलावन भाई को दिल में लग गया अब वह चुनावी दरबार में जाकर एक वोटर की हैसियत से बैठ गए हैं और अब हर प्रत्याशी उनको हाथ जोड़कर वोट मांग रहा है .
एक दिन हम सोचे कि आजकल रामखेलावन भाई कहां है दिख नहीं रहे हैं तो सोचा कि फोन लगा लिया जाए जब फोन लगाए कि कहां है….
रामखेलावन भाई बोले उनको बहुत मजा आ रहा है सारे प्रत्याशी हाथ जोड़कर मिल रहे हैं।
फोन रखने के बाद हम मन ही मन ही सोचने लगे कि आज सभी प्रत्याशी हाथ जोड़ रहा है…. चुनाव जीत जाने के बाद आप दो साल तक उनके पास हाथ जोड़ते व मिमयाते रहिएगा वह कान में तेल डालकर सोते रहेंगे..ना तो आपके चिट्टी पत्री का कभी जबाब मिलेगा और ना ही आपके मुसीबत में खड़ा मिलेंगे….हमलोग अपने आप को कोसते हुए अगले दो साल इंतजार करते रहेंगे…जो उनका राग दरबारी होगा उसके लिए….बाकि आप खुद समझदार हैं……!!!
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