राँची,31.01.2026 – राँची में शनिवार को ट्रैफिक एसपी और ग्रामीण एसपी की अगुवाई में शहर में 250 से ज्यादा प्रेशर हॉर्न और करीब 400 साइलेंसर पर बुलडोजर चलाया गया।
ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाकर 700 से ज्यादा साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न जब्त किए थे, बता दें कि हाल के दिनों में राँची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह को कई बुजुर्गों ने यह शिकायत की थी कि खासकर अस्पताल के बाहर और रात के समय मोडिफाइड साइलेंसर की वजह से बाइक काफी तेज आवाज करती है।
जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह की शिकायतें अन्य लोगों के द्वारा भी ट्रैफिक एसपी तक पहुंचाई गई थी। जिसके बाद एक बड़ा अभियान चलाकर यह कार्रवाई की गई।
नई दिल्ली – भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद(आईआईएम अहमदाबाद) ने आज आईआईएम, अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन के साथ एक समझौता ज्ञापन(MoU)पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार के शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली में तथा राजदूत श्री विनय क्वात्रा की वर्चुअल उपस्थिति में (संयुक्त राज्य अमेरिका से) संपन्न हुआ।
यह स्कूल आईआईएम अहमदाबाद के पीजीपी बैच 1975 की पूर्व छात्रा सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए के बड़े दान से स्थापित किया जाएगा।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईएम,अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन(MoU)के आदान–प्रदान पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले यह समझौता ज्ञापन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा वैश्विक एआई महाशक्ति बनने की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों का एक मजबूत उदाहरण है।
श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस लोगों, प्रगति और धरती को सशक्त करने वाला माध्यम बनेगा। भारत का एआई नेतृत्व सिर्फ प्रौद्योगिकी से नहीं, बल्कि हमारे संस्थानों और मानव संसाधन की मजबूती से आकार लेगा। माननीय मंत्री ने आईआईएम, अहमदाबाद की गौरवशाली पूर्व छात्रा चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन जी और उनके पति रंजन टंडन जी द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए से इस एआई स्कूल की स्थापना हेतु किए गए परोपकारी योगदान की सराहना की। यह पहल पूर्व छात्रों द्वारा अपने शिक्षण संस्थान को वापस देने की एक उत्कृष्ट परंपरा को स्थापित और सुदृढ़ करती है।
उन्होंने कहा कि कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस भारत की एआई क्षमताओं को बढ़ाने, एआई को सबके लिए सुलभ बनाने, वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था के लिए भारत में रोजगार सृजित करने तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और सामाजिक कल्याण के लिए वैश्विक प्रभाव उत्पन्न करने में एआई का इस्तेमाल करने की दिशा में कार्य करेगा।
भारत में किसी प्रबंधन संस्थान के अंदर स्थापित एक अग्रणी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस स्कूल के रूप में, कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और सार्वजनिक प्रभाव के साथ कार्य करेगा। वैश्विक दृष्टिकोण के साथ, यह स्कूल एआई के जिम्मेदार और प्रभावी अनुप्रयोग के माध्यम से भारत की विशिष्ट एवं जटिल चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगा।
आईआईएम अहमदाबाद का नेतृत्व, सुशासन और संस्थान निर्माण की पुरानी विरासत से प्रेरित यह स्कूल इस बात को आकार देना चाहता है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को किस प्रकार विकसित किया जाए, लागू किया जाए और शासित किया जाए, ताकि स्थायी व्यावसायिक और सामाजिक मूल्य का सृजन हो सके। यह एआई-संचालित विश्व में प्रबंधन शिक्षा के भविष्य को आगे बढ़ाने के आईआईएम अहमदाबाद के मिशन का स्वाभाविक विस्तार होगा।
बिज़नेस-केंद्रित और ट्रांसलेशनल एआई के एक केंद्र के रूप में परिकल्पित यह स्कूल विश्वस्तरीय संकाय सदस्यों, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, नीति निर्माताओं और वैश्विक भागीदारों को एक साथ लाएगा, ताकि एआई अनुसंधान और अनुप्रयोग की नई सीमाओं को परिभाषित किया जा सके। इसका अनुसंधान एजेंडा अनुप्रयोग-आधारित और केस-आधारित होगा, जो वास्तविक प्रबंधकीय, संस्थागत और सामाजिक चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा। यह स्कूल अत्याधुनिक एआई अनुसंधान का व्यावहारिक समाधान, उपकरण, ढांचे और स्केलेबल प्रणालियों में बदलने पर फोकस करेगा जिन्हें लागू किया जा सके, जो फैसले लेने की क्षमता को बेहतर बनाए, उत्पादकता बढ़ाए और उद्योग, सरकार तथा समाज में जटिल चुनौतियों का समाधान करे।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी; भारतीय प्रबंधन संस्थान,अहमदाबाद के निदेशक प्रो. भारत भास्कर; संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) श्री पूर्णेंदु बनर्जी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नई दिल्ली – संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने हेतु भारतनेट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। भारतनेट के पहले और दूसरे चरण के अंतर्गत कुल 2,22,341 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें से 2,14,904 ग्राम पंचायतें सेवा के लिए तैयार हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की 46,746 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने 04.08.2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके तहत देश की लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों और लगभग 3.8 लाख गैर-ग्राम पंचायत वाले गांवों को मांग के आधार पर ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इनमें उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतें और 44,530 गैर-ग्राम पंचायत वाले गांव शामिल हैं।
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के जरिए देश भर के 39,799 ग्रामीण और दूरदराज वाले गांवों में 4जी मोबाइल कनेक्टिविटी की योजना बनाई गई है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,359 गांव भी शामिल हैं। दिनांक 31.12.2025 तक, इस योजना से संबद्ध गांवों में से 33,044 गांवों को कवर किया जा चुका है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,199 गांव भी शामिल हैं।
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) में, नेटवर्क की संरचना को उन्नत करने और नेटवर्क की विश्वसनीयता में सुधार करने हेतु निम्नलिखित विशेषताओं के साथ एक संशोधित कार्यान्वयन मॉडल तैयार किया गया है:
(i) रिंग संरचना में भारतनेट नेटवर्क का निर्माण और उन्नयन
(ii) सेवा स्तरीय समझौते (एसएलए) के आधार पर संपूर्ण नेटवर्क का संचालन एवं रखरखाव
(iii) प्रत्येक पैकेज में नेटवर्क के निर्माण और संचालन एवं रखरखाव के लिए एकल परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए)
(iv) समर्पित नेटवर्क संचालन केन्द्र
(v) रिमोट फाइबर मॉनिटरिंग सिस्टम
सरकार ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के दृष्टिकोण से डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इसका लक्ष्य डिजिटल पहुंच, डिजिटल समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण सुनिश्चित करना और डिजिटल विभाजन को कम करना है। इसकी विस्तृत जानकारी डिजिटल इंडिया वेबसाइट (https://www.digitalindia.gov.in) पर उपलब्ध है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) जैसी योजनाएं शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य देश भर में 6.39 करोड़ व्यक्तियों को डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण प्रदान करना था। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के जरिए विभिन्न डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
टेलीकॉम – साइबर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (टी-सीएसआईआरटी) दूरसंचार संचार इकोसिस्टम के लिए क्षेत्रीय घटना प्रतिक्रिया और साइबर सुरक्षा समन्वय कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी), आईएसपी और संबंधित महत्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना को प्रभावित करने वाली साइबर घटनाओं और कमजोरियों का समय पर पता लगाना, विश्लेषण करना, समन्वय करना और उनका निवारण करना है।
विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ), जो नीति आयोग का एक संबद्ध कार्यालय है, आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (ओओएमएफ) का रखरखाव करता है, जिसमें डीबीएन द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं सहित डिजिटल कनेक्टिविटी कार्यक्रमों के लिए संकेतक शामिल हैं। विस्तृत विवरण डीएमईओ की वेबसाइट (https://dmeo.gov.in/output-outcome-framework?ministry=55&tid_1=223) पर उपलब्ध हैं।
नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज विशाखापत्तनम स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) के क्षेत्रीय केन्द्र की तटवर्ती प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और इसे “दोहरे इंजन वाली सरकार के प्रभाव”, जहां केन्द्र और राज्य के बीच का निर्बाध समन्वय विकास को गति देता है, का स्पष्ट उदाहरण बताया।
आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री श्रीमती अनीता वंगलपुडी, सांसद श्री एम. श्रीभरत, विधायक श्री जी. श्रीनिवास राव, सीएसआईआर-एनआईओ के निदेशक प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह, डॉ. वी.वी.एस.एस. शर्मा और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. कलैसेल्वी की उपस्थिति में सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भले ही इस परियोजना की नींव वर्षों पहले रखी गई थी, लेकिन केन्द्र और राज्य सरकारों के एकमत होने के बाद पिछले 8-10 महीनों में इसमें काफी प्रगति हुई और यह पूरी हो गई।
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि राज्य सरकार द्वारा 2000 के दशक के आरंभ में नाममात्र की कीमत पर हस्तांतरित की गई थी और इस क्षेत्र में हुए तीव्र विकास के कारण इसका वर्तमान मूल्य कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार, सीएसआईआर और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (जो सीएसआईआर के अध्यक्ष हैं) की ओर से, कुल 32 करोड़ रुपये की इस तटवर्ती परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर रही है।
इस सुविधा के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तटरेखा लगभग 11,000-12,000 किलोमीटर लंबी है। इसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक आंध्र प्रदेश से लगती है, जो इसे समुद्री अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री के ‘नीली अर्थव्यवस्था’ से संबंधित विजन का एक स्वाभाविक केन्द्र बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत का पूर्वी तटीय सीमांत भूवैज्ञानिक रूप से विविधतापूर्ण है और इसमें मुख्य रूप से हिमालयी नदी प्रणालियों द्वारा भारी मात्रा में निक्षेपित हाइड्रोकार्बन, समुद्री खनिजों, तेल और प्राकृतिक गैस की अपार संभावनाएं हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विशाखापत्तनम तट एक बहुमुखी समुद्री संसाधन आधार का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ नीली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है और नव उद्घाटित सीएसआईआर-एनआईओ सुविधा इस प्रयास के एक प्रमुख वैज्ञानिक आधार के रूप में कार्य करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सीएसआईआर-एनआईओ पहले से ही ओएनजीसी, ऑयल इंडिया तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है और फार्मास्यूटिकल्स, बंदरगाहों, तापीय ऊर्जा परियोजनाओं व मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि संभावित मछली पकड़ने वले क्षेत्रों की पहचान, मछुआरों के लिए समुद्री शैवाल की खेती और हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन की भविष्यवाणी करने से संबंधित केन्द्र सरकार के कार्यों से आजीविका और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों को लाभ हो रहा है, क्योंकि समुद्री जैव संसाधनों का उपयोग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
सरकार की समन्वित दृष्टि पर जोर देते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री विकास अब केन्द्र एवं राज्य सरकारों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप को एक साथ ला रहा है। उन्होंने उद्योग जगत और उद्यमियों को सक्रिय साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि समुद्री एवं तटीय क्षेत्र में स्टार्टअप व नवोन्मेषकों के लिए तकनीकी तथा वित्तीय समर्थन का एक मजबूत इकोसिस्टम पहले से ही मौजूद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशाखापत्तनम केन्द्र क्षमता विकास और कौशल प्रशिक्षण के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में भी उभरेगा, जो देश के बढ़ते समुद्री क्षेत्र के लिए युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और भावी उद्यमियों का मार्गदर्शन करेगा।
केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण, लगभग एक दशक से लंबित तटीय और पर्यावरणीय मंज़ूरियां छह महीने के भीतर मिल गईं, जिससे कार्य निष्पादन में एक दिन की भी देरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस परियोजना के लिए कई मंजूरियों की आवश्यकता थी, जिन्हें केन्द्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय के जरिए त्वरित प्रक्रिया से पूरा किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा आंध्र प्रदेश और नई राजधानी अमरावती पर विशेष ध्यान दिए जाने का उल्लेख करते हुए घोषणा की कि वहां जल्द ही एक क्वांटम प्रौद्योगिकी केन्द्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 महीनों में विशाखापत्तनम की यह उनकी तीसरी यात्रा है, जो विज्ञान-आधारित विकास में राज्य सरकार की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
इस तटवर्ती प्रयोगशाला का निर्माण ऋषिकोंडा के येनदादा गांव में स्थित 4 एकड़ के परिसर के 3.25 एकड़ हिस्से पर किया गया है। इसका निर्मित क्षेत्र 4,550 वर्ग मीटर है और यह जी+1 संरचना में बनी है। इस परियोजना का क्रियान्वयन सीपीडब्ल्यूडी द्वारा किया गया, जिसके तहत निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू हुआ और दिसंबर 2025 में पूरा हुआ।
नई दिल्ली – नई दिल्ली के एतिहासिक लाल किले में आयोजित होने वाले ‘भारत पर्व 2026’ में पंजाब की समृद्ध संगीत और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। 31 जनवरी 2026 को पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा एक अनूठा समूह है, जिसे ढोल, ढोलकी, ताल-कोज़े, तंसारी, बांसुरी, नगाड़ा, चिमटा, सप, कड़ा और वंजली जैसे पारंपरिक पंजाबी लोक वाद्ययंत्रों के विस्तृत चयन के साथ तैयार किया गया है। यह ऑर्केस्ट्रा लयबद्ध, सुरीले और तालबद्ध लोक वाद्ययंत्रों को एक एकल, संरचित संगीतमय प्रस्तुति में पिरोता है। पारंपरिक पंजाबी लोक धुनों को ऑर्केस्ट्रा के लिए बहुत ही सोच-समझकर रचा और व्यवस्थित किया गया है, जिससे उनकी मौलिक लोक आत्मा को संरक्षित रखते हुए उन्हें एक सामूहिक और सामंजस्यपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
इस ऑर्केस्ट्रा का प्रदर्शन बारह छात्रों के एक समूह द्वारा किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट वाद्य यंत्र बजाने की भूमिका निभाता है। उनका प्रदर्शन टीमवर्क, समन्वय और पंजाबी लोक संगीत परंपराओं की गहरी समझ को उजागर करता है। यह पहल न केवल पंजाबी लोक संगीत के संरक्षण में योगदान देती है, बल्कि छात्रों को समूहिक प्रदर्शन और लोक वाद्योजन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक आयाम जोड़ते हुए सिंध और पंजाब के पारंपरिक सूफी लोक नृत्य ‘क़लंदरी धमाल’ की भी प्रस्तुति होगी। क़लंदरी धमाल एक भक्तिमय नृत्य है, जो ईश्वर और सूफी संतों के प्रति प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है और विशेष रूप से सेहवान शरीफ स्थित लाल शाहबाज क़लंदर की दरगाह से जुड़ा है।
इस प्रस्तुति में ढोल, घड़ियाल, सोरना, शंख और तुम्बा जैसे वाद्ययंत्रों द्वारा निर्मित ओजपूर्ण संगीत होता है, जिसके साथ तालियों की गडगड़ाहट और “दमदम मस्त क़लंदर” जैसे भक्तिपूर्ण जयकारे गूंजते हैं। ऊर्जावान ताल नृतकों को एक आनंदमय और आध्यात्मिक अवस्था में ले जाती है। इसकी मुद्राएं स्वतंत्र और अभिव्यंजक होती हैं, जिनमें नृतक लय पर घूमते, पैर थपथपाते और झूमते हैं। कई नृतक नंगे पैर और भारी धुंधरू पहनकर नृत्य करते हैं, जो विनम्रता और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है।
क़़लंदरी धमाल आध्यात्मिक स्वतंत्रता, प्रेम, एकता और भक्ति का प्रतीक है, जो जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति की सीमाओं से परे है। संगीत और नृत्य के माध्यम से यह शांति और सांप्रदायिक सद्भाव का एक शक्तिशाली संदेश फैलाता है।
पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की ये संयुक्त प्रस्तुतियां कल आयोजित होने वाले ‘भारत पर्व 2026’ में दर्शकों को पंजाब की जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का एक गहन अनुभव प्रदान करने का वादा करती हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 के समापन समारोह में कहा कि भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत तैयारी दिखाई है और इंटरनेशनल एनर्जी डायलॉग में केंद्र में बना रहेगा। यह कार्यक्रम 27 जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक गोवा में आयोजित किया गया।
समापन फायरसाइड चैट के दौरान बोलते हुए, श्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एनर्जी रणनीति विविधीकरण, सशक्तता और भविष्य के अनुकूल बदलावों पर आधारित है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हमने लगातार भू-राजनीतिक झटकों का बहुत अच्छे से सामना किया है। सप्लाई के सोर्स के विविधीकरण और क्लीनर फ्यूल की ओर तेजी से बदलाव के जरिए हर चुनौती को एक अवसर में बदला गया है।”
भारत के वैश्विक रुख से अवगत कराते हुए, श्री पुरी ने कहा कि आज देश तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष निर्यातकों में से एक है। श्री पुरी ने कहा, “ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भी, भारत एनर्जी की उपलब्धता, किफायती दाम और सततता सुनिश्चित करता रहेगा।”
केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक ईंधनों में लगातार निवेश के साथ-साथ कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), ग्रीन हाइड्रोजन और स्वदेशी क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी पर सरकार द्वारा जोर दिये जाने के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, “पारंपरिक एनर्जी जरूरी रहेगी, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग से लेकर सीबीजी, हाइड्रोजन और बायोफ्यूल तक हम जो कदम उठा रहे हैं, वे हमें विश्वास दिलाते हैं कि ग्रीनर फ्यूल एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।”
वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। उन्होंने कहा, “वैश्विक उथल-पुथल का असर कभी भी उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। आज भारत में एनर्जी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं और संकट के समय भी बिना किसी रुकावट के आपूर्ति बनाए रखी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा समय पर कार्रवाई के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि एलपीजी सहित फ्यूल की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी रहें।”
श्री पुरी के बाद, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने भारत की विकास यात्रा को समर्थन करने के लिए सरकार का ब्लूप्रिंट पेश किया। सचिव ने कहा, “7 प्रतिशत से अधिक की अनुमानित आर्थिक वृद्धि के साथ, ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारा ध्यान दो मुख्य बातों: घरेलू खोज और उत्पादन को मजबूत करने और भारत को दुनिया के लिए रिफाइंड उत्पादों के एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।”
डॉ. मित्तल ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ज्यादा ड्रिलिंग और खोज सहित अपस्ट्रीम गतिविधि को तेज करने की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने मूल्य संवर्धन को ज्यादा से ज्यादा करने और आयात कम करने के लिए रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल के इंटीग्रेशन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं, साथ ही विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बने हुए हैं।”
ऊर्जा परिवर्तन पर, डॉ. मित्तल ने प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “लॉजिस्टिक ऑप्टिमाइजेशन से लेकर एआई-संचालित दक्षता तक, प्रौद्योगिकी की लागत कम करने और संचालनात्मक मजबूती को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।” उन्होंने कहा कि भारत सीबीजी पर अपने लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल करना है, जिसे राज्यों की सक्रिय भागीदारी और किसानों के नेतृत्व वाली बायोमास आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन प्राप्त है।
समापन सत्र ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 की भूमिका को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत किया जो ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता को जोड़ता है, साथ ही भारत को तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक स्थिर, विश्वसनीय और व्यावहारिक तौर पर एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है।
इंडिया एनर्जी वीक के बारे में
इंडिया एनर्जी वीक देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी क्षेत्र की हस्तियों, उद्योग जगत के अधिकारियों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है ताकि एक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की दिशा में प्रगति को तेज किया जा सके। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में, आईईडब्ल्यू निवेश, नीतिगत तालमेल और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देता है।
नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में प्रतिवर्ष 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के लाल किले के सामने स्थित लॉन और ज्ञानपथ पर भारत पर्व का आयोजन करता है।
भारत पर्व 2026 का समापन समारोह 31 जनवरी 2026 को शाम 5:30 बजे होगा। उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे।
भारत पर्व देश की सांस्कृतिक और रचनात्मक विरासत की झलक प्रदर्शित करता है, जिसमें गणतंत्र दिवस की झांकियां, सशस्त्र बलों की बैंड प्रस्तुतियां और उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली स्थित सांस्कृतिक समूहों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस आयोजन में अखिल भारतीय फूड कोर्ट, हस्तशिल्प और हथकरघा बाजार, केंद्रीय मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के पंडालों के साथ-साथ स्टूडियो किचन सत्र, नुक्कड़ नाटक और डू-इट-योरसेल्फ कार्यशालाओं जैसी क्रियात्मक गतिविधियां भी शामिल हैं।
भारत पर्व 31 जनवरी 2026 तक दोपहर 12:00 बजे से रात 9:00 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा।
नई दिल्ली – गणतंत्र दिवस परेड-2026 में संस्कृति मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण दोहरा सम्मान प्राप्त किया, जहां उसकी “वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर” शीर्षक वाली झांकी को केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के बीच सर्वश्रेष्ठ झांकी की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वहीं उसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” को उसकी असाधारण कलात्मक और विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पुरस्कार विजेता झांकी ने वंदे मातरम के 150 वर्षों के सफर को सशक्त रूप से दर्शाया, जिसमें राष्ट्रीय जागरण के गीत के रूप में इसके उद्भव और भारत के स्वतंत्रता संग्राम, एकता और सभ्यतागत चेतना को आकार देने में इसकी स्थायी भूमिका को दिखाया गया है। भावपूर्ण दृश्यों और प्रतीकों के माध्यम से, झांकी ने भारत की सामूहिक राष्ट्रीय पहचान में राष्ट्रगान की शाश्वत प्रासंगिकता को उजागर किया।
विशेष पुरस्कार विजेता सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति, “वंदे मातरम – भारत की शाश्वत गूंज”, का आयोजन संगीत नाटक अकादमी ने पटियाला स्थित उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से किया था। यह प्रस्तुति राष्ट्रऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की स्वर बनी। इस प्रस्तुति में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,500 कलाकारों ने भाग लिया और शास्त्रीय, लोक और आदिवासी कला रूपों के माध्यम से देश की विशाल सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया।
नृत्य प्रस्तुति ने देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों और सशस्त्र बलों के शौर्य और समर्पण तक की शाश्वत यात्रा को जीवंत कर दिया। संस्कृत मंत्रों, भावपूर्ण संगीत और गतिशील नृत्य संरचनाओं से परिपूर्ण इस प्रस्तुति ने वंदे मातरम के संपूर्ण भावनात्मक और दार्शनिक पहलू को समाहित किया, जिसका समापन एकता, भक्ति और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक तिरंगे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ हुआ।
संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने समग्र रचनात्मक निर्देशक के रूप में सांस्कृतिक प्रस्तुति का नेतृत्व किया। ऑस्कर विजेता संगीतकार श्री एम.एम. कीरावानी ने संगीत निर्देशन किया, जबकि गीत श्री सुभाष सहगल ने लिखे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता श्री अनुपम खेर ने पार्श्व स्वर दिया, श्री संतोष नायर ने नृत्य प्रस्तुत किया और सुश्री संध्या रमन ने वेशभूषा डिजाइन की।
नई दिल्ली – पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों का विकास एवं प्रचार-प्रसार, जिसमें धार्मिक एवं तीर्थयात्रा पर्यटन भी शामिल है, मुख्यतः संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। पर्यटन मंत्रालय, संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के परामर्श से, अपनी योजनाओं और पहलों के माध्यम से पर्यटन अवसंरचना के विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग करता है।
पर्यटन मंत्रालय “तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान” (प्रसाद) के अंतर्गत तीर्थ और विरासत स्थलों पर पर्यटन अवसंरचना को समग्र रूप से विकसित करके आध्यात्मिक और तीर्थयात्रा के अनुभव को अविस्मरणीय बनाने लक्ष्य रखता है।
प्रसाद योजना के अंतर्गत मंत्रालय ने 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 1,726.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 54 परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिसमें महाराष्ट्र राज्य में 45.41 करोड़ रुपये की लागत से नासिक स्थित “त्र्यंबकेश्वर का विकास” नामक एक परियोजना भी शामिल है।
प्रसाद योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करना एक सतत प्रक्रिया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार की जाती है, और वित्तीय सहायता निर्धारित शर्तों की पूर्ति और निधि की उपलब्धता के अधीन प्रदान की जाती है।
फिलहाल, रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों में स्थित बल्लालेश्वर मंदिर (पाली), वरद विनायक मंदिर (महाड) और गणपतिपुले मंदिर को जोड़ने वाले सांस्कृतिक गलियारे के विकास का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में यह जानकारी लिखित प्रश्न के उत्तर में दी
महापौर के लिए 05 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य
सभी 53 वार्ड के लिए वार्ड पार्षद हेतु 111 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, दो अभ्यार्थियों ने दाखिल किया नामांकन
बुण्डू नगर पंचायत अंतर्गत अध्यक्ष के लिए 04 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य
वार्ड पार्षद के लिए 13 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य
रांची,30.01.2026 – नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 अंतर्गत 30.01.2026 को रांची समाहरणालय एवं बुण्डू अनुमंडल कार्यालय में बनाये गये निर्वाची पदाधिकारियों के कक्ष से अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किये। महापौर के लिए आज 05 एवं सभी 53 वार्ड के लिए कुल 111 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई। वार्ड-2 से सरिता देवी एवं वार्ड-37 से राहुल कुमार ने नामांकन दाखिल किया।
महापौर पद के लिए रमा खलखो, विनोद कुमार बड़ाइक, तनुत तुलियो तिग्गा, बीरू तिर्की और देवी दयाल मुंडा ने नाम निर्देशन पत्र खरीदे। महापौर के लिए अब तक 11 अभ्यर्थी नाम निर्देशन पत्र खरीद चुके हैं, नामांकन शून्य है।
बुण्डू नगर पंचायत अंतर्गत अध्यक्ष हेतु 04 नाम निर्देशन पत्र की बिक्री हुई जबकि नामांकन शून्य रहा, वार्ड पार्षद के लिए 13 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई।
सभी 53 वार्डों में नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री निम्न प्रकार है :-
बुण्डू नगर पंचायत में नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री निम्न है:-
अध्यक्ष पद के लिए 04 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई। रितेश कुमार पातर, घासीराम उरांव, राजेश उरांव एवं श्री कृष्ण मुण्डा ने नाम निर्देशन पत्र खरीदे, नामांकन अब तक शून्य है।
रांची,30.01.2026 – राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस) के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर जिला प्रशासन द्वारा (बापू वाटिका, मोरहाबादी, राँची में) माल्यापर्ण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।
उपायुक्त ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ‘बापू’ को शत्-शत् नमन किया एवं उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
इस दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी झारखण्ड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, श्रीमती सुमन पाठक,राज्य सभा सांसद Mahua Maji, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राँची, श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक शहर राँची, श्री पारस राणा, पुलिस अधीक्षक यातायात राँची, श्री राकेश सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ‘बापू’ की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं पुष्पांजलि अर्पित की ।
नई दिल्ली – केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपालश्री कविंदर गुप्ता ने पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ एयर स्टाफ ऑफिसर एयर मार्शल जेएस मान की उपस्थिति में 28 जनवरी 2026 को एयर फ़ोर्स स्टेशन लेह में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य से एक परियोजना का उद्घाटन किया।
यह उद्घाटन लद्दाख में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सिविल प्रशासन एवं क्षेत्र के विकास में शामिल सभी एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग की भावना को परिपुष्ट बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बेहद चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाले क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद बुनियादी ढांचे का रिकॉर्ड समय में उन्नयन किया गया है।
विकसित किया गया बुनियादी ढांचा विमानों की जमीनी आवाजाही को आसान बनाने के साथ-साथ नागरिक उड़ानों के प्रस्थान को तेज करेगा। इन सुधारों से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और समय की बचत होगी।
बेहतर वायु संपर्क लेह क्षेत्र में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक अवसरों का सृजन करेगा और स्थानीय आजीविका का समर्थन करेगा। साथ ही, बेहतर सुविधाएं निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए अधिक विश्वसनीय हवाई सेवाएं सुनिश्चित करेंगी, जबकि मानवीय सहायता और आपदा राहत आवश्यकताओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षेत्र की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
यह विकास लद्दाख के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देगा।
नई दिल्ली – भारतीय दिवालियापन एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने इनसोल इंडिया के सहयोग से तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया । इस कार्यक्रम में विभिन्न न्यायक्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, नीति निर्माता, विधि विशेषज्ञ और पेशेवर एक साथ आए और आईबीसी के परिवर्तनकारी दशक पर विचार-विमर्श किया तथा भारत में दिवालियापन समाधान के लिए आगे की राह पर चर्चा की।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रामलिंगम सुधाकर ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में उन्होंने दिवालियापन और दिवालिया संहिता की उल्लेखनीय यात्रा का वर्णन किया और भारत में दिवालियापन समाधान के क्षेत्र पर इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने संहिता के कार्यान्वयन में राष्ट्रीय दिवालियापन न्यायालय (एनसीएलटी) के बेहतर प्रदर्शन पर प्रकाश डाला और इस बात पर बल दिया कि दिवालियापन के लिए एक समर्पित न्यायिक ढांचा स्थापित करना, आईबीसी से पहले की व्यवस्था की तुलना में संहिता की सफलता में योगदान देने वाला एक प्रमुख पहलू रहा है। उन्होंने कहा कि आईबीसी ने चूक को प्रभावी ढंग से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए ऋण अनुशासन को बढ़ाया है। सभी हितधारकों के सहयोगात्मक प्रयासों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय दिवालियापन ढांचा वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू ने अपने विशेष संबोधन में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में आईबीसी के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया, जिसमें गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी और मुनाफे में वृद्धि शामिल है। उन्होंने देनदार-लेनदार व्यवस्था में आईबीसी द्वारा लाए गए व्यवहारिक परिवर्तनों और हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ चुनौतियों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ढांचे में प्रस्तावित संशोधन इन मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने आचार संहिता के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डाला।
आईबीबीआई के अध्यक्ष श्री रवि मित्तल ने एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने पिछले एक दशक में दिवालियापन और दिवालिया संहिता के विकास का विवरण दिया। इसकी प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस अवधि में आईबीसी काफी परिपक्व हो गया है और आज भारत के पास वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत दिवालियापन समाधान ढांचों में से एक है। उन्होंने बताया कि संहिता ने कई मोर्चों पर सकारात्मक परिणाम दिए हैं, जिनमें बेहतर ऋण अनुशासन, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी, समय पर समाधान को बढ़ावा देना और कंपनियों के समाधान के बाद के प्रदर्शन में सुधार शामिल हैं। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद और आईआईएम बैंगलोर द्वारा किए गए अध्ययनों का भी उल्लेख किया, जो क्रमशः उधारकर्ताओं के बीच बेहतर ऋण अनुशासन और आईबीसी के तहत हल की गई कंपनियों के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार को रेखांकित करते हैं।
इनसोल इंडिया की अध्यक्ष सुश्री पूजा महाजन ने अपने स्वागत भाषण में दिवालियापन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में इनसोल इंडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला और दिवालियापन समाधान में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संगठन की हालिया पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उद्घाटन सत्र के समापन पर आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य डॉ. भूषण कुमार सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। सभी गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था पर आईबीसी के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया।
इस सम्मेलन में पाँच ज्ञानवर्धक पैनल चर्चाएँ हुईं। पहली पैनल चर्चा “दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 के 10 वर्ष” विषय पर थी। प्रतिष्ठित पैनलिस्टों में आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य श्री जयंती प्रसाद, एजेडबी एंड पार्टनर्स के संस्थापक और वरिष्ठ भागीदार श्री बहराम वकील, विश्व बैंक की सुश्री एंटोनिया मेनेजेस और नियोस्ट्रेट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक श्री अबीजर दीवानजी शामिल थे। सत्र का संचालन एजेडबी एंड पार्टनर्स के भागीदार श्री सुहर्ष सिन्हा ने किया। पैनल ने आईबीसी के परिवर्तनकारी प्रभाव पर विचार-विमर्श किया, प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा की और भारत में दिवालियापन समाधान के लिए आगे के रास्ते पर विचार-विमर्श किया।
दूसरी पैनल चर्चा “संपत्ति का पता लगाना, प्रवर्तन और वसूली” पर केंद्रित थी। पैनल में आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य, श्री संदीप गर्ग, , सिंगापुर कैरी ओल्सेन के पार्टनर श्री जेम्स नोबल, बीवीआई के पार्टनर श्री मार्क जे. फोर्टे, ऊन एंड बाजुल, सिंगापुर के पार्टनर श्री कीथ हान, और भारत की दिवालियापन विशेषज्ञ, सुश्री पूजा बाहरी, शामिल थीं। सत्र का संचालन शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर श्री सौरभ पांडा ने किया। पैनल ने विभिन्न न्यायक्षेत्रों में संपत्ति का पता लगाने और वसूली में समकालीन चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की।
तीसरी पैनल चर्चा “अदालती कार्यवाही के बाहर समाधान और पूर्व-पैकेज्ड दिवालियापन समाधान” पर थी। पैनल में शामिल प्रख्यात वक्ताओं में आईबीबीआई के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य श्री सुधाकर शुक्ला, क्रोल सिंगापुर के एमडी श्री जेम्स एलेक्सियो, हिल्को ग्लोबल, संयुक्त राज्य अमेरिका के उपाध्यक्ष श्री जेमी एचएम स्प्रेरेगन, बैंक ऑफ इंग्लैंड के वरिष्ठ प्रबंधक श्री रॉब डाउनी और स्वामीह फंड के प्रधान निवेश अधिकारी श्री रजत गोयल शामिल थे। सत्र का संचालन ईवाई के पार्टनर श्री पुलकित गुप्ता ने किया। पैनल ने आईबीसी के तहत समय पर समाधान सुनिश्चित करने में अदालती कार्यवाही के बाहर पुनर्गठन तंत्र और पूर्व-पैकेज्ड दिवालियापन ढांचे की प्रभावकारिता पर विचार-विमर्श किया।
चौथी पैनल चर्चा का विषय “संकटग्रस्त अधिग्रहण और विशेष परिस्थितियों का वित्तपोषण” था। पैनल में कार्गमैन एसोसिएट्स, यूएसए के संस्थापक एवं अध्यक्ष, श्री स्टीवन टी. कार्गमै, बर्ड एंड बर्ड, सिंगापुर के लीगल हेड श्री अशोक कुमार, ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के ग्रुप सीईओ श्री आकाश सूरी, श्री अपूर्व मधुप, इंडिया फाइनेंसिंग, ड्यूश बैंक के एमडी एवं हेड, श्री अपूर्व मधुप, और स्वामीह फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर, श्री अब्दुल कादर सूरिया शामिल थे। सत्र का संचालन डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव, पार्टनर, खैतान एंड कंपनीज ने किया। पैनल ने संकटग्रस्त परिसंपत्ति वित्तपोषण के बदलते परिदृश्य और आवास क्षेत्र के विशेष संदर्भ में समाधान तंत्र में वैकल्पिक निवेश फंडों की भूमिका पर चर्चा की।
पांचवीं पैनल चर्चा “यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून और सीमा पार दिवालियापन” विषय पर थी। पैनल में शामिल विशिष्ट वक्ताओं में यूएनसीआईटीआरएएल की वरिष्ठ कानूनी अधिकारी सुश्री समीरा मुसायेवा; नॉर्टन रोज़ फुलब्राइट, ऑस्ट्रेलिया के पुनर्गठन विभाग के वैश्विक प्रमुख श्री स्कॉट एटकिंस; नॉटिंघम लॉ स्कूल की प्रोफेसर सुश्री रेबेका पैरी; इंसॉल्वेंसी लॉ अकादमी, भारत के अध्यक्ष श्री सुमंत बत्रा; और स्काइरीन एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स, मलेशिया की पार्टनर सुश्री शेरोन चोंग शामिल थीं। सत्र का संचालन बीडीओ इंडिया की ग्रुप जनरल काउंसल सुश्री सलोनी कोठारी ने किया। पैनल ने सीमा पार दिवालियापन के लिए यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून को अपनाने के महत्व और इसके कार्यान्वयन के लिए भारत की तैयारियों पर विचार-विमर्श किया।
इस सम्मेलन में दिवालियापन विशेषज्ञों, कानूनी विशेषज्ञों, परामर्श फर्मों, वित्तीय लेनदारों, समाधान आवेदकों, सेवा प्रदाताओं, नियामकों, शिक्षाविदों और सरकारी अधिकारियों सहित आईबीसी पारिस्थितिकी तंत्र के बड़ी संख्या में हितधारकों ने भाग लिया।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के समापन की झलकियां साझा कीं। श्री मोदी ने कहा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और मैं ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के समापन की घोषणा करते हुए बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “आज भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का समापन हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मैं इस समझौते को संभव बनाने में वर्षों से यूरोप के सभी नेताओं के रचनात्मक दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। यह समझौता आर्थिक संबंधों को परिपुष्ट करेगा, हमारे लोगों के लिए अवसरों का सृजन करेगा और एक समृद्ध भविष्य के लिए भारत-यूरोप साझेदारी को मजबूत करेगा।”
एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में, श्री मोदी ने कहा:
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
@eucopresident
@vonderleyen
@EUCouncil
@EU_Commission
यूरोपीय संघ के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है, भारत की 1.4 अरब जनता के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आया है। इससे:
हमारे किसानों और लघु उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन होगा।
हमारे सेवा क्षेत्रों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। #IndiaEUTradeDeal
विश्व की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता अभूतपूर्व अवसरों का सृजन करने और विकास तथा सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त करने का वादा करता है। इस समझौते से संपूर्ण वैश्विक समुदाय को लाभ मिलेगा।
इससे प्रमुख क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने में सहायता मिलेगी, हमारे युवाओं, पेशेवर प्रतिभाओं, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए गतिशीलता बढ़ेगी और डिजिटल युग की क्षमता का अधिकतम लाभ उठाया जा सकेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और पारस्परिक विकास के लिए आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।
भारत और यूरोपीय संघ मिलकर विश्वास और महत्वाकांक्षा के साथ एक समृद्ध और स्थायी भविष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं! #IndiaEUTradeDeal
“आज का दिन हमेशा याद रखा जाएगा, जो हमारे साझा इतिहास में अमिट छाप छोड़ेगा।”
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और मैं ऐतिहासिक भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के संपन्न होने की घोषणा करते हुए बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।
यह हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो:
हमारे आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी
हमारे युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगी
हमारे व्यवसायों के लिए अवसरों का सृजन होगा
साझा समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा,
मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण होगा। #IndiaEUTradeDeal
@eucopresident
@vonderleyen
@EUCouncil
@EU_Commission
“भारत और यूरोप ने आज एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता विकास, निवेश और रणनीतिक सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त करता है।”
#IndiaEUTradeDeal
@eucopresident
“यह समझौता व्यापार, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देगा और साथ ही हमारे रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।”
यह एक स्थिर, समृद्ध और भविष्य के लिए तैयार आर्थिक संबंध बनाने के हमारे साझा संकल्प को दर्शाता है।”
#IndiaEUTradeDeal
@EU_Commission
@vonderleyen
भारत-ईयू व्यापार मंच के दौरान के अपने विचार साझा कर रहा हूं।
“आज भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते का संपन्न होना हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मैं इस समझौते को संभव बनाने में वर्षों से योगदान देने वाले सभी यूरोपीय नेताओं के रचनात्मक दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। यह समझौता आर्थिक संबंधों को और पुष्ट करेगा, हमारे लोगों के लिए अवसरो का सृजन करेगा और समृद्ध भविष्य के लिए भारत-यूरोप साझेदारी को मजबूत करेगा।”
“ये परिणाम भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं।”
“भारत-ईयू व्यापार मंच भारत और यूरोप के बीच व्यापक आर्थिक संबंधों पर चर्चा करने के लिए एक बेहतरीन मंच था। आज हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता व्यवसायों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और नवप्रवर्तकों के लिए अनगिनत लाभ लेकर आएगा। यह साझा समृद्धि का एक नया प्रारूप है।”
नई दिल्ली, UGC के विवादित इक्विटी रेगुलेशन 2026 नियमों पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन नए नियमों के पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.जब तक इस मामले में सुनवाई नहीं होती है तब तक 2012 के पुराने नियम प्रभावी रहेंगे. मुख्य न्यायाधीश ने इन नियमों को ‘अस्पष्ट’ और ‘दुरुपयोग के लायक’ बताया है.इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी.
UGC के विवादित इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर देश भर में सामान्य वर्ग, साधू -संत, अधिवक्ता, इसका जम कर विरोध कर रहें हैं.
नई दिल्ली – केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मंगलवार शाम नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में एक भव्य समारोह में दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रंगमंच समारोह, भारत रंग महोत्सव (बीआरएम) 2026 के 25वें संस्करण का उद्घाटन किया।
समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, मंत्री ने भारत रंग महोत्सव की भूमिका पर ज़ोर दिया, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, कहानियों और कलात्मक अभिव्यक्तियों को दुनिया भर के दर्शकों से जोड़ने वाला एक शक्तिशाली मंच है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे उत्सव अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ को बढ़ावा देकर भारत की कला और संस्कृति के बारे में वैश्विक धारणाओं को बदलने में मदद करते हैं।
इस शानदार उद्घाटन समारोह में कला, संस्कृति, सिनेमा और थिएटर के क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं।
मुख्य अतिथि: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री, भारत सरकार। विशिष्ट अतिथि: श्री विवेक अग्रवाल, आईएएस, सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार। विशेष अतिथि: सुश्री के. नंदिनी सिंगला, महानिदेशक, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और रंग दूत: सुश्री मीता वशिष्ठ, जानी-मानी अभिनेत्री और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की पूर्व छात्रा।
समारोह की अध्यक्षता एनएसडी सोसाइटी के वाइस चेयरपर्सन और पद्म श्री पुरस्कार विजेता प्रो. भरत गुप्त ने की। स्वागत भाषण एनएसडी के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन एनएसडी के रजिस्ट्रार श्री प्रदीप के. मोहंती ने किया। कार्यक्रम का संचालन जाने-माने अभिनेता और एनएसडी के पूर्व छात्र श्री श्रीवर्धन त्रिवेदी ने किया।
शाम का एक मुख्य आकर्षण एनएसडी के ऐप-आधारित रेडियो स्टेशन “रंग आकाश” और एनएसडी ओटीटी प्लेटफॉर्म “नाट्यम” की शुरूआत था, जिसका उद्घाटन माननीय केन्द्रीय मंत्री ने किया। यह एनएसडी की डिजिटल और वैश्विक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
थिएटर में 25 साल की शानदार यात्रा का जश्न मनाते हुए, भारत रंग महोत्सव 2026 अब तक के सबसे बड़े फॉर्मेट में आयोजित किया जा रहा है, जो पूरे भारत में 40 से ज़्यादा जगहों और हर महाद्वीप के एक देश में फैला हुआ है। इस महोत्सव में 277 भारतीय और 12 अंतर्राष्ट्रीय प्रोडक्शन शामिल हैं, जिन्हें 288 भाषाओं और बोलियों में पेश किया जा रहा है, जो पारंपरिक थिएटर रूपों, समकालीन प्रयोगों और क्रॉस-कल्चरल बातचीत का एक जीवंत मिश्रण दिखाते हैं।
25वां भारत रंग महोत्सव भारत की स्थायी सांस्कृतिक भावना और रचनात्मक आदान-प्रदान, कलात्मक नवाचार और वैश्विक सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
नई दिल्ली – नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी) ने स्वास्थ्य जागरूकता और निवारक देखभाल संबंधी कई आकर्षक पहलों के माध्यम से भारत पर्व-2026 में जीवंत और प्रभावशाली योगदान दिया, जिसमें सभी आयु वर्ग के आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। भारत पर्व, गणतंत्र दिवस समारोह के अंतर्गत 26 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक लाल किले के मैदान और ज्ञान पथ पर आयोजित होने वाला छह दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक और पर्यटन उत्सव है।
आरएचटीसी नजफगढ़ की भागीदारी का एक प्रमुख आकर्षण कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का लाइव प्रदर्शन था, जहां आगंतुकों ने न केवल सीपीआर तकनीक को देखा बल्कि विशेषज्ञ मार्गदर्शन में इसका अभ्यास भी किया। इस पहल का उद्देश्य जनता को जीवन बचाने के आवश्यक कौशल से लैस करना और चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान समुदाय की तैयारी को बढ़ाना था।
इस केंद्र में अपने चिकित्सक के माध्यम से आयुर्वेदिक परामर्श भी उपलब्ध कराया गया, जिसमें आगंतुकों को स्वास्थ्य और कल्याण के पारंपरिक और समग्र दृष्टिकोणों पर मार्गदर्शन दिया गया। इसके अतिरिक्त, पोषण और आहार, मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण पर स्वास्थ्य परामर्श भी आयोजित किए गए, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल और संतुलित जीवनशैली के महत्व को बढ़ावा देते हैं।
सीखने को संवादात्मक और मनोरंजक बनाने के लिए, आरएचटीसी नजफगढ़ ने दैनिक स्वास्थ्य प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया, जिसमें आगंतुकों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में अपने ज्ञान का परीक्षण करने और आकर्षक पुरस्कार जीतने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विशेष रूप से तैयार किया गया “अपनी आशा कार्यकर्ताओं को जानें” कॉर्नर ने काफी ध्यान आकर्षित किया, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा कार्यकर्ताओं) द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूकता फैली।
आगंतुकों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया, जिससे छह दिवसीय उत्सव के दौरान आरएचटीसी के स्टॉल पर एक ऊर्जावान और सकारात्मक वातावरण नजर आया।
अपने शैक्षणिक और जनसंपर्क प्रयासों के अंतर्गत, आरएचटीसी नजफगढ़ ने एएनएम प्रशिक्षण विद्यालय के छात्रों के लिए एक शैक्षिक यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा का उद्देश्य छात्रों को सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य पहलों और जन कल्याण कार्यक्रमों से परिचित कराना था, साथ ही उन्हें भारत पर्व में प्रदर्शित भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने का अवसर प्रदान करना था। इस अनुभव ने कक्षा में सीखी गई शिक्षा को वास्तविक दुनिया में जन स्वास्थ्य संचार और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने में सहायता की।
इस आयोजन के सभी छह दिनों में आयोजित इन पहलों के माध्यम से, आरएचटीसी नजफगढ़ ने सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा, निवारक देखभाल और जन जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया, जो भारत पर्व की व्यापक भावना के अनुरूप है, जिसमें भारत के जन-केंद्रित विकास और समावेशी प्रगति का जश्न मनाया जाता है।
नई दिल्ली – गृह मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी, जिसे 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान प्रदर्शित किया गया था, को गणतंत्र दिवस समारोहों के तहत 26 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक लाल किले के लॉन और ज्ञान पथ पर आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव भारत पर्व में प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया गया है।
इस महोत्सव का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा किया जा रहा है।
इस समारोह स्थल पर, गृह मंत्रालय ने अपनी झांकी के सामने एक समर्पित जन-संपर्क पवेलियन स्थापित किया है। इस पवेलियन में तीन परिवर्तनकारी आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम— के मुख्य प्रावधानों और नागरिक-केंद्रित प्रभाव को दर्शाने वाली एक इंटरएक्टिव प्रदर्शनी लगाई गई है।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य समय पर न्याय देने, पीड़ित-केंद्रित प्रक्रियाओं, वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के अधिक उपयोग, जांच और ट्रायल प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, तथा नागरिकों के अधिकारों के मजबूत संरक्षण जैसे प्रमुख सुधारों के बारे में आम-लोगों की समझ को बढ़ाना है। पवेलियन का औपचारिक उद्घाटन माननीय मंत्री जी ने किया। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने भी पवेलियन का दौरा किया और नागरिकों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।
पवेलियन में देश भर से बड़ी संख्या में लोग आए हैं, जो प्रदर्शनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं और अधिकारियों से बात-चीतकर रहे हैं। एक प्रमुख आकर्षण पैंटोमाइम शो (लाइव स्किट परफॉर्मेंस) रहा, जो नए आपराधिक कानूनों के उद्देश्यों और उनके व्यावहारिक महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है, जिससे नागरिक अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को सरल और सहज तरीके से समझ पा रहे हैं।
गृह मंत्रालय भारत पर्व में इस पहल के माध्यम से देश की पुनर्गठित आपराधिक न्याय प्रणाली के बारे में आम-नागरिकों तक पहुंच और जन-जागरूकता को लगातार मजबूत कर रहा है। झांकी और पवेलियन मिलकर एक आधुनिक, नागरिक-केंद्रित और प्रौद्योगिकी- आधारित न्याय प्रणाली के राष्ट्रीय विजन को दिखाते हैं।
नई दिल्ली – महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज शाम (27 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथियों—यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष महामहिम एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया। राष्ट्रपति ने उनके सम्मान में भोज का भी आयोजन किया।
यूरोपीय संघ के नेताओं का स्वागत करते हुए महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति, जो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की पहली सहभागिता है, विशेष महत्व रखती है। यह हमारी पारस्परिक सहभागिता की गहराई और परस्पर विश्वास को दर्शाती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और यूरोप केवल समकालीन हितों से ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र, बहुलवाद और खुली बाज़ार अर्थव्यवस्था जैसे साझा मूल्यों से भी जुड़े हुए हैं। ये सिद्धांत तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने यह बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि पिछले दो दशकों में भारत–यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी उल्लेखनीय रूप से और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिर, संतुलित और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने की हमारी सामूहिक आकांक्षा को प्रतिबिंबित करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अनिश्चितता और संघर्ष के इस दौर में भारत और यूरोपीय संघ पर वैश्विक स्थिरता बनाए रखने की साझा जिम्मेदारी है। हमारा सहयोग कूटनीति, बहुपक्षवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के समर्थन में एक स्पष्ट संदेश देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक सहयोग भारत–यूरोपीय संघ संबंधों का प्रमुख स्तंभ है। हम व्यापार और निवेश को साझा समृद्धि और सामाजिक प्रगति के साधन के रूप में देखते हैं। उन्होंने भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संबंध में ऐतिहासिक वार्ताओं के सफल समापन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इससे हमारे लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव आएंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज समाज पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव, अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव जितना ही गहरा है। भारत और यूरोपीय संघ “जिम्मेदार नवाचार” को आगे बढ़ाने की दिशा में मिलकर कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान संपन्न हुआ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौता हमारे रक्षा उद्योगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु वित्त और सतत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में यूरोपीय संघ के साथ सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने का इच्छुक है।
तीनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा के दौरान संपन्न हुए महत्वपूर्ण समझौते भारत–यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त बनाएंगे। उन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और यूरोपीय संघ संतुलन, स्थिरता और आशा की शक्ति के रूप में उभर रहे हैं और साथ मिलकर हम एक ऐसा भविष्य गढ़ सकते हैं जो सतत, समावेशी और मानवीय हो।
नई दिल्ली – रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार ने 27 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में डीपीएसयू और अन्य हितधारकों के साथ आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों/डीन के साथ वर्चुअल मोड में संवाद किया। चर्चा का मुख्य विषय अकादमिक अनुसंधान को रक्षा उत्पादन की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना और सतत सहभागिता के लिए संरचित व्यवस्था विकसित करना था।
विचार-विमर्श के प्रमुख क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों में दीर्घकालिक छात्र-संचालित अनुसंधान को बढ़ावा देना, अल्पकालिक परियोजना-आधारित सहयोग से आगे बढ़कर अकादमिक जगत और डीपीएसयू के बीच सहयोग को मजबूत करना और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में गहराई से जानकारी प्रदान करने के लिए संरचित प्रयासों को संस्थागत रूप देना शामिल था। इससे अकादमिक अनुसंधान को तैनाती योग्य रक्षा क्षमताओं में प्रभावी ढंग से परिवर्तित करने में सहायता मिलेगी।
प्रतिभागियों द्वारा दिए गए बहुमूल्य सुझावों के लिए आभार व्यक्त करते हुए रक्षा उत्पादन सचिव ने कहा कि इस तरह की बातचीत से मंत्रालय को अकादमिक अनुसंधान क्षमताओं और दृष्टिकोणों के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलेगी। उन्होंने शिक्षाविदों से दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता विकास को सक्षम बनाने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग के साथ एक परामर्श प्रारूप को अपनाने का आग्रह किया।
इस संवाद में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी; आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. एम. अग्रवाल; आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. एस. केदारे; आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी.एस. मूर्ति; आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रो. आर. मूना; आईआईटी तिरुपति के निदेशक प्रो. के.एन. सत्यनारायण; आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रो. डी. जलिहाल और देश के 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के अन्य वरिष्ठ प्रोफेसर उपस्थित थे।
इस वार्ता ने उद्योग जगत के भागीदारों के सहयोग से एक अनुकूल, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की ताकत का लाभ उठाने के लिए रक्षा मंत्रालय की प्रतिबद्धता जताई।
यहां उन्हें लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के प्रमुख उपक्रमों के बारे में जानकारी दी गई
नई दिल्ली – 18 देशों के विदेश प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली स्थित आईएनए के दिल्ली हाट में आयोजित पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का विशेष दौरा किया। आने वाले गणमान्य व्यक्तियों में विभिन्न देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। इन सभी ने भारत की समृद्ध पारंपरिक शिल्प कौशल और कारीगरी की उत्कृष्टता की विरासत का जायजा लिया।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की ओर से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों के लिए विशेष प्रदर्शनी पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का आयोजन आईएनए स्थित दिल्ली हाट में 18 से 31 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 10:00 बजे तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।
इस अवसर पर मंत्रालय की ओर से अल्जीरिया, बेलारूस, कैमरून, क्यूबा, इक्वाडोर, इथियोपिया, गुयाना, इंडोनेशिया, इराक, केन्या, मलेशिया, नाइजीरिया, पेरू, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, तिमोर-लेस्ते, उज्बेकिस्तान और वेनेजुएला के विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के विकास आयुक्त कार्यालय के संयुक्त विकास आयुक्त श्री दानिश अशरफ ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक स्वागत किया और पीएम विश्वकर्मा योजना के उद्देश्यों और महत्व पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में विकास आयुक्त कार्यालय और एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने विदेशी अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कीं। उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के प्रमुख उपक्रमों के बारे में उन्हें जानकारी दी। साथ ही रोजगार सृजन और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रालय की विभिन्न प्रमुख योजनाओं के माध्यम से प्राप्त उपलब्धियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने हाट की विशेष यात्रा के लिए गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम में असम, राजस्थान, पंजाब और लद्दाख की जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं। उन्होंने एक जीवंत और आकर्षक वातावरण का निर्माण किया और भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया।
विकास आयुक्त कार्यालय (एमएसएमई) की उप महानिदेशक श्रीमती अनुजा बापट ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया।
पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का उद्देश्य कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, हितधारकों और आम जनता के सामने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित करने और उनका विपणन करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करके भारत की पारंपरिक शिल्पकला का उत्सव मनाना और उसे बढ़ावा देना है। इस आयोजन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 117 से अधिक कारीगर भाग ले रहे हैं, जिससे यह विविध पारंपरिक कौशल और शिल्पकला का एक सच्चा अखिल भारतीय प्रतिनिधित्व बन गया है।
नई दिल्ली – विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू और कश्मीर की झांकी टीम के लिए एक चाय भोज का आयोजन किया। इसने कल कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में प्रस्तुति दी थी।
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान जम्मू-कश्मीर की झांकी को क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता के भावपूर्ण और प्रभावशाली चित्रण के लिए व्यापक सराहना मिली। इस झांकी के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री जी ने कलाकारों के साथ व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से विस्तृत बातचीत की। झांकी ने जम्मू-कश्मीर को एक निर्बाध सांस्कृतिक निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया। यहां विरासत, सामुदायिक जीवन और कलात्मक अभिव्यक्ति एक सुसंगत और आकर्षक दृश्य कथा में विलीन हो गईं।
झांकी से जुड़े कलाकारों, प्रस्तुतकर्ताओं, डिजाइनरों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कर्तव्य पथ पर उनकी अनुशासित प्रस्तुति और सामूहिक प्रयास के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि झांकी जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक गहराई को देश भर के दर्शकों तक पहुंचाने में सफल रही। इससे दूर बैठे लोग भी इस क्षेत्र की परंपराओं, रंगों और लय से जुड़ सके।
केंद्रीय मंत्री जी ने कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप हैं। इसमें भारत की विकास यात्रा उसकी सभ्यतागत विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय परंपराओं, शिल्पकलाओं और सामुदायिक जीवन का प्रदर्शन इस विचार को दर्शाता है कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।
झांकी का जिक्र करते हुए मंत्री जी ने बैंगनी रंग के लैवेंडर के खेतों, बशोली की जटिल लघु चित्रकला और जीवंत लोक नृत्य परंपराओं के चित्रण के बारे में बात की। यह जम्मू और कश्मीर की कलात्मक समृद्धि और सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि ये इस बात को उजागर करते हैं कि क्षेत्रीय पहचानें किस प्रकार व्यापक राष्ट्रीय ताने-बाने में योगदान देती हैं।
झांकी की दृश्य प्रस्तुति की शुरुआत कश्मीरी आतिथ्य का प्रतीक भव्य नक्काशीदार समोवर से हुई। इसके बाद पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला और हाउसबोट की छवियां प्रदर्शित की गईं। केंद्र में एक ग्रामीण थड्डा पर प्रस्तुत डोगरा छज्जा प्रदर्शन ने जम्मू क्षेत्र के सामुदायिक जीवन और परंपराओं की निरंतरता को दर्शाया। रौफ, कुड, जगर्ना, पहाड़ी, गोजरी और दुमहाल जैसे जोशीले लोक नृत्यों ने इसमें गति और ऊर्जा का संचार किया, जबकि विलो की टोकरी में सजाई गई रंगीन पेपर-माशे कलाकृतियों की अंतिम प्रदर्शनी ने जम्मू और कश्मीर को रचनात्मकता और शिल्प कौशल के जीवंत कैनवास के रूप में प्रस्तुत किया।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधिमंडलों को पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण और संवर्धन को जारी रखने के साथ-साथ उन्हें समकालीन मंचों के अनुरूप ढालने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा न केवल आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति से, बल्कि इसकी सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती और सामुदायिक भागीदारी से भी आकार लेगी।
बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हुई। केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गणतंत्र दिवस परेड जैसे मंच देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा में भारत की सांस्कृतिक विविधता को शक्ति, एकता और प्रेरणा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
नई दिल्ली – लाल किला मैदान में 25वें भारत पर्व के चलते भारतीय संस्कृति की जीवंत छटा दिखाई दे रही है। 1941 से अपना योगदान दे रहा भारत सरकार का प्रमुख प्रकाशन विभाग (डीपीडी) आगंतुकों को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के मंडप में साहित्यिक यात्रा शुरू करने के लिए आमंत्रित करता है।
भारत पर्व की भावना के अनुरूप – जो भारत की सर्वश्रेष्ठता का जश्न मनाता है—डीपीडी का मंडप प्रामाणिक ज्ञान की आधारशिला के रूप में कार्य करता है। यह भारतीय इतिहास, संस्कृति, साहित्य और राष्ट्र के विकासात्मक कार्यों के साथ-साथ भारत के माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चयनित भाषणों का एक सुविचारित संग्रह प्रस्तुत करता है।
प्रामाणिकता की विरासत
आठ दशक से भी अधिक समय पहले स्थापित प्रकाशन विभाग (डीपीडी) ने अपनी सटीक और प्रामाणिक सामग्री के लिए अद्वितीय विश्वसनीयता अर्जित की है। मंडप में आने वाले आगंतुक कई भारतीय भाषाओं में विविध प्रकार की पुस्तकों का अवलोकन कर सकते हैं। इनमें निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
गांधीवादी साहित्य: महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर आधारित पुस्तकें।
राष्ट्रीय धरोहर एवं संस्कृति : भारतीय परंपराओं की उच्च गुणवत्ता वाली कला पुस्तकें और इतिहास ग्रंथ
जीवनियां : राष्ट्रीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और आधुनिक भारत के निर्माताओं की प्रेरक जीवन कहानियां।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: भारत की आधुनिक उपलब्धियों और पर्यावरण संरक्षण पर सुलभ साहित्य।
प्रमुख प्रकाशनों पर विशेष ध्यान
इस स्टॉल में विभाग की व्यापक रूप से प्रशंसित पत्रिकाएं प्रदर्शित की गई हैं, जो दशकों से छात्रों और बुद्धिजीवियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत रही हैं:
मासिक विचारकों का संग्रह: योजना (सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित), कुरुक्षेत्र (ग्रामीण विकास को समर्पित), आजकाल (भारतीय साहित्य और संस्कृति का उत्सव) और बाल भारती (बच्चों की लोकप्रिय मासिक पत्रिका) के नवीनतम संस्करण।
करियर और विकास: रोजगार समाचार / रोजगार समाचार की नवीनतम प्रतियां, जो देशभर में नौकरी चाहने वालों के लिए सर्वोत्कृष्ट स्रोत हैं।
सर्वश्रेष्ठ संदर्भ: राष्ट्र की प्रगति का व्यापक सारांश प्रदान करने वाली सरकार की प्रतिष्ठित वार्षिक संदर्भ पुस्तिका ‘भारत वर्ष पुस्तिका’ का विशेष प्रदर्शन।
लाल किले में प्रकाशन विभाग का स्टॉल छात्रों और पुस्तक प्रेमियों को प्रामाणिक भारतीय साहित्य पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष छूट प्रदान कर रहा है।
डीपीडी का स्टॉल 31 जनवरी, 2026 तक दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा। आगंतुकों को लिखित शब्द की शक्ति के माध्यम से भारत को फिर से जानने के लिए आमंत्रित किया जाता है – यहां प्रत्येक पुस्तक राष्ट्र की चिरस्थायी विरासत का प्रमाण है।
नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रायपुर में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझौता केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और आर्थिक सामर्थ्य का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जो भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। भारत के लिए महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद—जैसे चाय, कॉफी, मसाले, टेबल अंगूर, खीरा और अचार वाली खीरा, सूखे प्याज, मीठा मक्का, चुनिंदा फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड—को इस समझौते से बड़ा लाभ होगा। प्रमुख क्षेत्रों में आपसी संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए यह समझौता निर्यात वृद्धि को घरेलू प्राथमिकताओं के साथ संतुलित करता है और दोनों पक्षों के किसान समुदायों के लिए लाभ सुनिश्चित करता है। भारतीय कृषि के लिए यह एक बड़ा कदम है और देश के किसान समुदाय को बधाई है।
उन्होंने कहा कि आज भारत सिर्फ स्वयं आगे नहीं बढ़ रहा है, बल्कि पूरी दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। यह समझौता भारतीय किसानों, कृषि उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। भारत की कृषि शक्ति आज विश्व के सामने है—भारत चावल उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंच चुका है और हमारी कृषि विकास दर ने हरित क्रांति के दौर को भी पीछे छोड़ दिया है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर विस्तार से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ यह समझौता कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। इससे भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम है।
श्री चौहान ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं। घटिया पेस्टिसाइड और नकली बीज किसानों की कमर तोड़ देते हैं, इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी दिशा में सरकार एक सख्त पेस्टिसाइड अधिनियम और नया बीज अधिनियम लाने जा रही है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजगारयुक्त, गरीबी मुक्त और स्वावलंबी गांवों का निर्माण आवश्यक है। इसी संकल्प के तहत ‘विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम’ देश में लागू किया जा रहा है, जिससे गांव संपूर्ण विकसित ग्राम के रूप में उभर सकेंगे और ग्रामीण भारत विकास की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा होगा।