नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एनडीएमसी पालिका पार्क में ‘खादी दिवाली उत्सव-2026’ का आयोजन किया। 31 अक्टूबर से शुरू हुए इस उत्सव में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों पर विशेष छूट दी जा रही है।

कार्यक्रम में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज गोयल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के साथ विशेष बातचीत और दिवाली मिलन समारोह का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मनोज गोयल ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक माना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी और स्वदेशी आंदोलन को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना केवल खरीदारी नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने युवाओं और विशेष रूप से जेन-जी से स्वदेशी आंदोलन से जुड़ने की अपील की। गोयल ने कहा कि आधुनिक डिजाइन, फैशन, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के माध्यम से खादी उत्पादों को नई पहचान दी जा सकती है। युवा खादी के उपभोक्ता होने के साथ-साथ इसके ब्रांड एंबेसडर, डिजाइनर और उद्यमी भी बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि युवाओं को खादी की विरासत, आधुनिक फैशन और उद्यमिता से जोड़ने के लिए केवीआईसी ने ‘बात खादी की’ नाम से पॉडकास्ट भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @ 2047’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
मनोज गोयल के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है और इस क्षेत्र ने 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह क्षेत्र 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य हासिल करेगा।
उत्सव में मिल रही विशेष छूट
खादी दिवाली उत्सव-2026 में खादी उत्पादों की खरीद पर 20 प्रतिशत और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। केवीआईसी का उद्देश्य त्योहारों के दौरान स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ाना और देश के लाखों कारीगरों, बुनकरों तथा ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
इस उत्सव के माध्यम से लोगों से अपील की गई है कि वे इस दिवाली स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं और स्थानीय कारीगरों के घरों में भी खुशियों की रोशनी पहुंचाने में अपना योगदान दें।
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