डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्वोत्तर को भारत के विकास का “नया इंजन” बताते हुए कहा कि त्रिपुरा की यह पहल प्रौद्योगिकी के विकेंद्रीकरण और अवसरों के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
त्रिपुरा में एसआईएम के शुभारंभ के अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा, नीति आयोग के अध्यक्ष श्री सुमन बेरी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, योजना एवं समन्वय मंत्री श्री प्राणजीत सिंह रॉय, मुख्य सचिव श्री जितेंद्र कुमार सिन्हा, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री राजीव कुमार सेन, नेजीडी के प्रबंध निदेशक श्री किरण गिट्टे सहित वरिष्ठ अधिकारी, स्टार्टअप संस्थापक, नवप्रवर्तक, छात्र और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा में एसआईएम के शुभारंभ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित अटल नवाचार मिशन (एआईएम) की स्वाभाविक प्रगति बताया। उन्होंने याद दिलाया कि नवाचार मिशन की अवधारणा कभी सरकारी प्रणालियों में अपरिचित थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एआईएम एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में परिवर्तित हो गया है। लगभग 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) की स्थापना से लेकर हाल ही में 50,000 और लैब्स तक विस्तार करने के निर्णय तक, नवाचार प्रणाली अब जिलों और छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है, जो देश भर के स्कूली छात्रों को प्रेरित कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एआईएम और एसआईएम का विस्तार करने तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य नवाचार मिशनों को बढ़ावा देने का निर्णय सहयोगात्मक एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना को दर्शाता है। मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने इसे “दोहरे इंजन” दृष्टिकोण का उदाहरण बताया, जहां राष्ट्रीय दृष्टिकोण और राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एक साथ मिलकर काम करते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले दशक में पूर्वोत्तर के परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 2014 से इसी बात पर जोर दिया है कि संतुलित राष्ट्रीय विकास के लिए सभी क्षेत्रों में समान प्रगति आवश्यक है। उन्होंने बेहतर संपर्क, रेल और हवाई अवसंरचना के विस्तार, बढ़ते पर्यटन और अधिक राष्ट्रीय एकता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अलगाव से निकलकर भारत के विकास में मुख्यधारा की भागीदारी की ओर अग्रसर हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा में उद्यमिता के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में आज 150 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, और पिछले पांच वर्षों में स्टार्टअप मान्यता में औसतन लगभग 66 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं द्वारा संचालित है, जो पूर्वोत्तर में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले नवाचार में त्रिपुरा को अग्रणी बनाता है। उन्होंने कहा कि एसआईएम के शुभारंभ से नवोन्मेषी विचारों के व्यावसायीकरण को और बढ़ावा मिलेगा और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा के मजबूत एमएसएमई आधार की ओर भी इशारा किया, जिसके अनुसार 2026 की शुरुआत तक उद्यम पोर्टल पर 3.13 लाख से अधिक पंजीकृत एमएसएमई थे। इनमें 1.18 लाख से अधिक औपचारिक उद्यम पंजीकरण और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से समर्थित लगभग दो लाख सूक्ष्म उद्यम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एसआईएम के माध्यम से एमएसएमई के विकास को नई गति मिलेगी, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार में योगदान मिलेगा।
उन्होंने देश के व्यापक स्टार्टअप विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में 2014 में कुछ सौ स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर दो लाख से अधिक हो गए हैं। इन स्टार्टअप्स से 21 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं, जिनमें से लगभग आधे द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों से हैं। इनमें से काफी संख्या में महिला नेतृत्व वाले उद्यम हैं, जो पूरे देश में बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने त्रिपुरा की अनूठी शक्तियों, विशेष रूप से बांस और रबर संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे उच्च मूल्य वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है, जिसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुप्रयोग, एयरोस्पेस के लिए जैव ईंधन और विशेष सामग्री शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए स्थानीय शक्तियों का लाभ उठाना ही विकास के अगले चरण को परिभाषित करेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में गहन प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित उद्यमों को समर्थन देने वाली नीतिगत पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें गहन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स, सीएसआईआर समर्थित स्टार्टअप्स के लिए स्थिरता शर्तों में ढील और उद्यमों को विस्तार देने में सहायता के लिए एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड का शुभारंभ शामिल है। उन्होंने कहा कि ये उपाय जोखिम लेने, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का जिक्र करते हुए कहा कि शासन और उद्यम का भविष्य ऐसी तकनीक से तय होगा जो मानवता की सेवा करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एसआईएम त्रिपुरा, डिजिटल इंडिया और सुगम जीवन स्तर जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप, राज्य कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक को वंचितों तक पहुंचकर और वंचितों को सशक्त बनाकर समानता को बढ़ावा देना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसका लक्ष्य एक ऐसा प्रणाली तंत्र बनाना है जहां दूरदराज के गांव का छात्र, छोटे शहर का स्टार्टअप संस्थापक और राज्य विश्वविद्यालय का शोधकर्ता भारत के विकास में समान रूप से योगदान देने के लिए सशक्त महसूस करें। उन्होंने निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का आग्रह करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा सहित जिन क्षेत्रों को कभी बंद माना जाता था, वे अब व्यापक सहयोग के लिए खुल गए हैं।
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की यात्रा एक सशक्त संदेश देती है: जब दूरदृष्टि क्रियान्वयन से मिलती है और नीति में भागीदारी जुड़ती है, तो परिवर्तन अपरिहार्य हो जाता है। उन्होंने केंद्र और राज्य, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों तथा विज्ञान और समाज के बीच निरंतर सहयोग का आह्वान किया ताकि भारत का नवाचार दशक देश की निर्णायक शताब्दी बन सके।
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