
सीएएस को जारी पहलों, दक्षिणी क्षेत्र की वायु रक्षा सहित प्रचालनगत तत्परता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय वायु सेना की पहुंच और क्षमताओं के निरंतर विस्तार के बारे में जानकारी दी गई। सम्मेलन की थीम ‘निर्णय स्वायत्तता के माध्यम से प्रचालनगत दक्षता’ थी, जिसने विकेंद्रीकृत नेतृत्व के माध्यम से आधुनिक युद्ध के प्रति भारतीय वायु सेना के विकसित होते दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान, सीएएस ने एसएसी के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों के फील्ड कमांडरों से परस्पर बातचीत की और गतिशील सुरक्षा वातावरण में त्वरित प्रतिक्रिया, मिशन की सफलता और प्रचालनगत लाभ बनाए रखने में विकेंद्रीकृत निर्णय लेने की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने अपील की कि विश्वास, जवाबदेही और स्पष्ट इरादे कमांडरों को रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुए स्वायत्तता का प्रयोग करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कमांडरों से नवोन्मेषण को बढ़ावा देने, संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और संयुक्तता को सुदृढ़ करने का आग्रह किया जिससे कि भारतीय वायु सेना एक शक्तिशाली और भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस शक्ति बनी रहे।
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