Tripura CM chairs 2nd meeting of High-Level Task Force on “Infrastructure, Logistics Cost and Connectivity in North-Eastern Region”

केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में त्रिपुरा के माननीय मुख्यमंत्री श्री माणिक साहा द्वारा बुलाई गई लॉजिस्टिक्स, अवसंरचना और कनेक्टिविटी पर उच्च-स्तरीय कार्य बल की बैठक में भाग लिया।

 

इस बैठक में मिजोरम के माननीय मुख्यमंत्री लालदुहोमा, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय तथा पूर्वोत्तर राज्यों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

विचार-विमर्श पूर्वोत्तर में सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के जरिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी में तेजी लाने पर केंद्रित रहा। कार्य बल ने ट्रेड कॉरिडोर को मजबूत करने, सीमा पर अवसंरचना को उन्नत करने, अंतिम-छोर तक संपर्क में सुधार करने और क्षेत्र के लिए एक एकीकृत मैक्रो-ग्रिड बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, क्षेत्रीय विद्युत पारेषण गलियारे, बेहतर अंतर-राज्यीय अवसंरचना सुनिश्चित करने और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए पूर्वोत्तर के रणनीतिक प्रवेश द्वार का लाभ उठाने पर भी चर्चा की गई।

त्रिपुरा के माननीय मुख्यमंत्री ने 6 अगस्त 2025 को हुई पहली एचएलटीएफ बैठक के दौरान माननीय केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री द्वारा निर्धारित पांच सूत्रीय एजेंडे और तीन राज्य के नेतृत्व वाली पहलों समेत एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के सामने आने वाली मुख्य कनेक्टिविटी चुनौतियों का भी उल्लेख किया, जिसमें सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में गैप, जलमार्ग और बॉर्डर ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं, डिजिटल कनेक्टिविटी में कमियां, और विभिन्न भौगोलिक व संरचनात्मक बाधाएं शामिल हैं।

मिजोरम के माननीय मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आवश्यक अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए चार-सूत्रीय एजेंडे का प्रस्ताव रखा:

      1. विद्युत, परिवहन और डिजिटल कॉरिडोर को एकीकृत करके एनईआर इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रिड के विकास के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करना।
      2. परिवहन और परिचालन लागत को कम करने के लिए रणनीतिक क्षेत्रीय जगहों की पहचान करके और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं डिजिटल नेटवर्क को एकीकृत करके मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) स्थापित करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करना।
      3. अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए विद्युत और डिजिटल अवसंरचना के साथ-साथ परिवहन के सभी साधनों- सड़क, रेलवे, वायुमार्ग, जलमार्ग- को बेहतर बनाना।
      4. एमएमएलपी के बेहतर इस्तेमाल, बेहतर कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, हर मौसम के लिए ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के माध्यम से से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना।

केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने तीन प्रमुख पहलों के बारे में बताया जिन्हें एचएलटीएफ को शुरू करने की ज़रूरत है:

  1. एक एकीकृत मैक्रो ग्रिड के रूप में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करना। बाधाओं और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों की पहचान की जानी चाहिए तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
  2. केन्द्र सरकार द्वारा वित्तपोषित की जाने वाली अवसंरचना विकास परियोजनाओं का राज्यवार मैट्रिक्स तैयार करना, जिसमें हर राज्य के लिए प्रत्येक क्षेत्र (जैसे सड़क, रेलवे, वायुमार्ग, विद्युत, अंतर्देशीय जलमार्ग) दो प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को सूचीबद्ध किया जाएगा।
  3. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपीके लिए उपयुक्त अवसंरचना परियोजनाओं का राज्य-वार मैट्रिक्स तैयार करना, जिसमें हर राज्य के लिए प्रत्येक क्षेत्र (जैसे, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन आदि) के लिए एक प्राथमिकता वाली परियोजना की पहचान की जाएगी।

इस साल की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने आठ उच्च-स्तरीय कार्य बल का गठन किया, जिनमें से प्रत्येक की अध्यक्षता एक मुख्यमंत्री करता है, जिसमें केंद्रीय मंत्री (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय) और अन्य राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य हैं। यह पहल 21 दिसंबर, 2024 को अगरतला में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद के 72वें पूर्ण सत्र के दौरान बनी आम सहमति से शुरू हुई है। केंद्र और राज्य के अधिकारियों ने मिलकर कनेक्टिविटी आधारित विकास को तेज़ करने और निवेश, नौकरियों और क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भविष्योन्मुखी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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