Parliament Question Steps taken by the government to stop stubble burning
वायु प्रदूषण के लिए कई कारक सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैंजिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआरके उच्चघनत्व वाले आबादी वाले क्षेत्रों में मानवजनित गतिविधियों का उच्च स्तर शामिल है। विभिन्न क्षेत्रों जैसे वाहनों से होने वाला प्रदूषणऔद्योगिक प्रदूषणनिर्माण और विध्वंस परियोजनाओं से उत्पन्न धूलसड़क और खुले क्षेत्रों की धूलबायोमास जलानानगरपालिका के ठोस अपशिष्ट जलानालैंडफिल में आग लगनाबिखरे हुए स्रोतों से वायु प्रदूषण आदि के साथसाथ विभिन्न मौसम संबंधी कारकों से उत्पन्न होता है। पराली जलाने को एक ऐसी घटना के रूप में पहचाना गया है जो वायु गुणवत्ता सूचकांक को बढ़ा देती है।

धान की पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पंजाबहरियाणाउत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकारों के प्रयासों का समर्थन करने और फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी देने के लिएकृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2018-19 से फसल अवशेष प्रबंधन पर एक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की गई है।

इस योजना के तहतफसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद के लिए किसानों को 50% की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और ग्रामीण उद्यमियों (ग्रामीण युवा और उद्यमी के रूप में किसान), किसानों की सहकारी समितियों (कृषि/बागवानी/मखाना आदि), डेएनआरएलएम क्लस्टर स्तरीय संघों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओऔर पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए 80% की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

धान आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं को उच्च एचपी ट्रैक्टरकटरटेडरमध्यम से बड़े बेलररेकरलोडरग्रैबर और टेली हैंडलर जैसी मशीनरी और उपकरणों की पूंजीगत लागत पर 65% (अधिकतम 1.50 करोड़ रुपये तककी वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।

राज्यों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआरको फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों में व्यापक जागरूकता लाने के लिए सूचनाशिक्षा और संचार गतिविधियाँ चलाने हेतु वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। यह योजना फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आईसीएआर द्वारा अनुशंसित मशीनों और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देती हैचाहे वे फसल अवशेष प्रबंधन के साथसाथ स्थानीय उपयोग के लिए भी हों।

2018-19 से 2025-26 (27.11.2025 तक) की अवधि के दौरान, केंद्र सरकार द्वारा उपर्युक्त योजना के अंतर्गत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को 4,090.84 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। किसानों को 3.45 लाख से अधिक फसल अवशेष मशीनें (सीआरएम) प्रदान की गई हैं और इन राज्यों में 43,270 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्र (सीएचसी) स्थापित किए गए हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबीधान की पराली के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पेलेटाइजेशन और टोरीफिकेशन संयंत्रों की स्थापना के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करता है। पेलेटाइजेशन संयंत्र की स्थापना के मामले में28 लाख रुपये प्रति टन प्रति घंटा (टीपीएच), या टीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए विचार की गई पूंजीगत लागत का 40%, जो भी कम होप्रति प्रस्ताव 1.4 करोड़ रुपये की अधिकतम वित्तीय सहायता के साथ प्रदान किया जाता है। टोरीफिकेशन संयंत्रों की स्थापना के मामले में56 लाख रुपये प्रति टीपीएचया टीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए विचार की गई पूंजीगत लागत का 40%, जो भी कम होप्रति प्रस्ताव 2.8 करोड़ रुपये की अधिकतम वित्तीय सहायता के साथ प्रदान किया जाता है।

विद्युत मंत्रालय ने कृषि पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान हेतु कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग हेतु राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की है। कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास पेलेट्स के सहप्रज्वलन हेतु एक व्यापक नीति नवंबर2025 को जारी की गई है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरईशहरीऔद्योगिककृषि अपशिष्टों और नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से बायोगैसबायोसीएनजी/संवर्धित बायोगैसकंप्रेस्ड बायोगैसबिजली/प्रोड्यूसर या सिंथेटिक गैस उत्पादन हेतु अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हेतु केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफएप्रदान करता है। वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है :

 

● ब्रिकेट विनिर्माण संयंत्र : 9 लाख रुपये/टीपीएच, अधिकतम 45 लाख रुपये प्रति परियोजना।

 

● गैर-टोरेफाइड पेलेट विनिर्माण संयंत्र : 21 लाख रुपये/टीपीएच उत्पादन क्षमता या 1 एमटीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए पूंजीगत लागत का 30%, जो भी कम हो (प्रति परियोजना अधिकतम 105 लाख रुपये)।

 

● टोरेफाइड पेलेट विनिर्माण संयंत्र : 42 लाख रुपये/टीपीएच उत्पादन क्षमता या 1 एमटीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए पूंजीगत लागत का 30%, जो भी कम हो (प्रति परियोजना अधिकतम 210 लाख रुपये)।

 

● पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने धान की पराली के बाह्य प्रबंधन के लिए बायोमास एकत्रीकरण उपकरण की खरीद हेतु कंप्रेस्ड बायो-गैस उत्पादकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की है।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में उन्नत जैव ईंधन परियोजनाओं की स्थापना के लिए एकीकृत जैवइथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री जीवन (जैव ईंधनपर्यावरण अनुकूल फसल अपशिष्ट निवारणयोजना शुरू की हैजिसमें लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक यानी कृषि और वानिकी अवशेषऔद्योगिक अपशिष्टसंश्लेषण (सिनगैसशैवाल आदि का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनके कृषि अवशेषों के लिए लाभकारी आय प्रदान करनापर्यावरण प्रदूषण को दूर करनास्थानीय रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में योगदान देना है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएमने दिनांक 09.05.2025 के निर्देश 90 के माध्यम से राज्यों को लघु/सीमांत किसानों के लिए सीआरएम मशीनों की किरायामुक्त उपलब्धता की योजना बनाने का निर्देश दिया है। समन्वित प्रयासों सेपंजाब और हरियाणा राज्यों ने सामूहिक रूप से वर्ष 2025 में धान की कटाई के मौसम के दौरान वर्ष 2022 की इसी अवधि की तुलना में आग लगने की घटनाओं में लगभग 90% की कमी दर्ज की है।

यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरणवन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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