Akhilesh Yadav's allegation BJP-RSS weakened India's foreign policy

चीन पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय

लखनऊ 01 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा है कि वर्तमान केंद्र सरकार ने भारत की विदेश नीति को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के मित्र देशों ने भारत का साथ छोड़ दिया है और पड़ोसी देश भी सुरक्षा मामलों में साथ नहीं खड़े हुए।

अखिलेश यादव ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान पर चीन की हर प्रकार की मदद मिली थी, जबकि अमेरिका से मित्रता होने के बावजूद उस समय अमेरिका ने व्यापार पर 50 प्रतिशत टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी दी।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अब चीन की शरण में पहुंच गई है, जो भारत के लिए परंपरागत रूप से दुश्मन रहा है।उन्होंने चीन के भारत विरोधी रुख का इतिहास भी याद दिलाया और कहा कि 1962 की युद्ध में चीन ने 4 हजार भारतीय सैनिकों और अधिकारियों को कैद किया और उन्हें यातनाएँ दीं। इसके अलावा 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया और बाद में रिजंगला में भारत के वार मेमोरियल को तोड़ दिया।

फाइव फिंगर क्षेत्र पर कब्जा किया और पेंगान लेक समेत भारत के कई हिस्सों को अपने अधीन कर लिया। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार का यह कहना कि ‘कोई घुसा नहीं’ का क्या अर्थ है, जबकि दोनों देशों के बीच वार्ता चल रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि चीन के विस्तारवादी रवैये के कारण भारत व्यापारिक क्षेत्र में भी कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत चीन के कच्चे माल पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे स्वदेशी उत्पादन और आर्थिक आत्मनिर्भरता खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन सामरिक व व्यापारिक क्षेत्र में वर्चस्व कायम करने के बाद भारत को आर्थिक दृष्टि से भी कमजोर करने की पूरी कोशिश करेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चीन लगातार अपनी सीमाओं का विस्तार करता रहा है, पड़ोसी देशों को कर्ज में डुबोता रहा है और अब तक भारत के कब्जे वाले क्षेत्रों पर बातचीत में कोई ठोस रूख नहीं अपनाया है। उन्होंने कहा कि तिब्बत पर कब्जे के बाद चीन अब अरुणाचल प्रदेश, लेह और लद्दाख में भी अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है और इस कारण उस पर किसी भी स्तर पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारत को चीन पर बढ़ती निर्भरता से बाहर निकालने के लिए ठोस रणनीति अपनाई जाए और विदेशी नीति में सुधार किया जाए, ताकि देश की सुरक्षा और आर्थिक हित सुरक्षित रहें।

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