
सभा को संबोधित करते हुए श्री जे.पी. नड्डा ने सत्र के थीम के महत्व पर जोर दिया और भारत की स्वास्थ्य सेवा पद्धति में रोकथाम से उपचार तक हुए बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 में हमने एक समग्र और समावेशी स्वास्थ्य नीति प्रस्तुत की, जिसमें हमने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, जेरियाट्रिक(वृद्धजन देखभाल), पुनर्वास और उपशामक देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया।”


श्री नड्डा ने बताया कि संक्रामक रोगों के मोर्चे पर देश ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि गैर-संक्रामक रोगों(एनसीडी) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके परिणाम सामने आने में अधिक समय लगता है और इस क्षेत्र में जानकारी का अभाव भी है, जिसे दूर करना अति-आवश्यक है।
देश में एनसीडी की समस्या को स्वीकार करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि “देश में कुल मृत्यु के लगभग 60% मामले एनसीडी के कारण होते हैं, इसलिए इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसे प्राथमिकता दी जा रही है।” उन्होंने आगे कहा कि “एनसीडी की रोकथाम और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक निदान और शीघ्र पहचान, स्वास्थ्य संवर्धन तथा रोग प्रबंधन और समय पर रेफरल पर विशेष ध्यान दिया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य संवर्धन एक प्रमुख क्षेत्र है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये सभी प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं।” “स्वास्थ्य संवर्धन निश्चित रूप से प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, जहां तक गैर-संक्रामक रोगों का संबंध है, ये वे मुख्य मुद्दे हैं जिन्हें हम हल करने का प्रयास कर रहे हैं।”

सरकार के प्रयासों को पर जोर देते हुए श्री नड्डा ने कहा कि “पिछले छह वर्षों में हम 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने में सफल रहे हैं, जो 1.45 अरब लोगों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच पहला संपर्क केन्द्र है। प्रत्येक आयुष्मान केंद्र पर एक आशा कार्यकर्ता होती है, और जहां संभव हो, अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मी भी तैनात होते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “वर्ष 2017 में हमने स्वैच्छिक और विस्तारित स्क्रीनिंग की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था।”
श्री नड्डा ने इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमने जिला स्तर पर लगभग 107 एनसीडी क्लीनिक और 233 कार्डियक केयर यूनिट विकसित किए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “इसी बजट में यह घोषणा की गई है कि हर जिले में एक डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किया जाएगा।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश में एनसीडी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे स्क्रीनिंग प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 से अब तक 41.5 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप(हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 7.1 करोड़ का उपचार हुआ है और 5.7 करोड़ लोगों को सूचित किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि “हमने भारत को स्वस्थ बनाने के लिए शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। उदाहरण के तौर पर, 41.3 करोड़ लोगों की मधुमेह (डायबिटीज) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 4.7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए हैं और 3.4 करोड़ लोगों का उपचार चल रहा है। मुख के कैंसर के लिए अब तक 35.3 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जिनमें 2.3 लाख लोगों में कैंसर का पता चला है और लगभग 2 लाख लोगों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, 16.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्तन कैंसर के लिए जांच की गई है।”
श्री नड्डा ने यह भी बताया कि “सर्वाइकल कैंसर के लिए 8.73 करोड़ स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें से 1.1 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला है और इनमें से लगभग 97,000 का इलाज चल रहा है।” उन्होंने कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान सुनिश्चित करने, हृदय संबंधी रोगों, गुर्दा विफलता, यकृत संबंधी समस्याओं तथा अन्य जटिलताओं के बोझ को कम करने में सरकार की सक्रिय भूमिका के बारे में भी बताया।
श्री नड्डा ने दूसरे और तीसरे स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के प्रयासों के बारे में बात करते हुए कहा कि “आज हमारे पास 880 मेडिकल कॉलेज हैं, जो पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, तथा 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) हैं, जिनमें से 20 पहले ही कार्य कर रहे हैं। इन संस्थानों में कार्डियोलॉजी के पूर्ण विकसित विभाग और सुपर-स्पेशियलिटी कैंसर विभाग उपलब्ध हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “स्वास्थ्य बुनियादे ढ़ांचे मिशन के तहत पहले और दूसरे स्तर के स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए ₹64,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।”

श्री नड्डा ने जोर देते हुए कहा कि “टेली-परामर्श एक ऐसा क्षेत्र है जहां ई-संजीवनी ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता और मरीज-से-सेवा प्रदाता दोनों रूपों में उपलब्ध है। जब हम सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता की बात करते हैं, तो स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर इस बातचीत को सुगम बनाता है, अनुवाद करता है, तस्वीरें साझा करता है और विशेषज्ञ के साथ मरीज की लाइव बातचीत सुनिश्चित करता है। इसी तरह, मरीज-से-डॉक्टर संचार में मरीज सीधे प्लेटफॉर्म के माध्यम से डॉक्टर से जुड़कर बात करता है।” उन्होंने आगे कहा कि “अब तक 46.4 करोड़ से अधिक मरीजों ने टेली-परामर्श सेवाओं का लाभ उठाया है और हम इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों के बोझ को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।”
श्री नड्डा ने ने यह भी स्वीकार किया कि “लगभग 70% एनसीडी के जोखिम जीवनशैली से जुड़े होते हैं और यदि हम रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करें, तो उस बोझ के एक बड़े हिस्से को कम कर सकते हैं, जिस पर हम काम कर रहे हैं।” उन्होंने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों—जैसे “ईट राइट इंडिया” और “फिट इंडिया” पर जोर दिया।
उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस आह्वान को दोहराया कि हम अपने तेल के उपयोग को 10% तक कम करने तथा नमक और चीनी का कम सेवन करने की बात कही थी। उन्होंने सूचना, शिक्षा और संचार के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि तंबाकू के क्षेत्र में काफी जागरूकता पैदा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि “सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कानून बनाने के मामले में भारत अग्रणी देशों में से एक है और धूम्रपान में भी काफी कमी देखने को मिली है, लेकिन तंबाकू के अन्य रूपों के सेवन को अभी भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।”
श्री नड्डा ने ने शारीरिक गतिविधि के महत्व और इस दिशा में सरकार की पहलों के बारे में भी बात की। उन्होंने जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “जागरूकता की शुरुआत हमें स्वयं से करना चाहिए। हमें समझना होगा कि हमारी जीवनशैली ही सबसे अहम है, और हमें इसके लिए स्वयं, अपने परिवार तथा अपने समुदाय को जागरूक करना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सरकार योग के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है।
उफस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने एनसीडी से निपटने के लिए भारत की रणनीति और मोटापे की समस्या से निपटने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि “भारत में संक्रामक रोगों से गैर-संक्रामक रोगों—जैसे हृदय संबंधी बीमारियां, कैंसर, मधुमेह और श्वसन संबंधी रोग—की ओर बदलाव देखा जा रहा है। इनका समाधान एनपी-एनसीडी के तहत बहुआयामी, पूरे-सरकार और पूरे-समाज के दृष्टिकोण अपनाकर किया जा रहा है, जिसमें जागरूकता, जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग और देखभाल की निरंतरता शामिल है।”

उन्होंने आगे 75×25 पहल और “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” जैसी प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डालते हुए रोकथाम, बीमारी का जल्दी पता लगाने और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने मोटापे को एनसीडी का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि एनएपएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जिसमें शहरी क्षेत्रों की प्रवृत्ति और बच्चों में बढ़ता मोटापा प्रमुख चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसके लिए खान-पान की अस्वस्थ आदतें जिम्मेदार हैं, और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि वसा, तेल और प्रसंस्कृत(प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इसका मुख्य कारण है।
राष्ट्रीय प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मोटापे के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया है, जिसमें खाद्य तेल के उपयोग को कम करना भी शामिल है।” उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण(एफएसएसएआई), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और विभिन्न जागरूकता अभियानों के सहयोग से व्यवहार में बदलाव को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें अभियान, जनसंपर्क और स्कूल-आधारित पहल शामिल हैं। अपने समापन वक्तव्य में उन्होंने कार्यस्थल पर स्वास्थ्य (वर्कप्लेस वेलनेस), स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छोटे-छोटे बदलावों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान(आईएलबीएस) के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. के. सरीन ने बीमारियों के बोझ को कम करने और समग्र स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रारंभिक जांच और निवारक उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के उप-महानिदेशक डॉ. एल. स्वस्तिचरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री पुष्पेन्द्र राजपूत और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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