भारतीय रेलवे, देश की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित सेमी-हाई-स्पीड रेलगाड़ी, वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ यात्रियों की यात्रा को लगातार नया रूप दे रहा है। फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर शुरू की गई यह सेवा, मेक इन इंडिया पहल के तहत गति, आराम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है और एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क में विकसित हो गई है।
नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग सबसे व्यस्त मार्ग बना हुआ है। इस मार्ग पर अब तक 73 लाख से अधिक यात्री वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा कर चुके हैं। नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग पर लगभग 56 लाख यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो तीर्थयात्रा के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है। दक्षिण भारत में, सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम मार्ग पर 48 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है, जबकि पुरची थलाइवर डॉ. एमजीआर सेंट्रल (चेन्नई)-मैसूरु मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो मजबूत क्षेत्रीय मांग को दर्शाता है। ये सेवाएं पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरी हैं, जो प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और तटीय स्थलों तक पहुंच में सुधार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि कर रही हैं।
भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी के संपर्क को और मजबूत करते हुए जनवरी 2026 में वंदे भारत शयनयान सेवा शुरू की। परिचालन के पहले तीन महीनों में ही, इस सेवा ने 119 फेरों में 1.21 लाख यात्रियों को वंदे भारत शयनयान सेवा से यात्रा कराई, जिससे 100 प्रतिशत से अधिक की ऑक्यूपेंसी दर प्राप्त हुई, जो मजबूत मांग और प्रीमियम रात्रिकालीन रेल यात्रा में यात्रियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की नवाचार, यात्री-केंद्रित सेवा और स्वदेशी विनिर्माण के की दिशा में प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महानगरों, तीर्थ स्थलों, विरासत शहरों और उभरते आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले निरंतर विस्तार और शयनयान श्रेणी के जुड़ने से भारतीय रेलवे तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्राएं प्रदान करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और वंदे भारत एक्सप्रेस भारत में आधुनिक रेल यात्रा के परिवर्तन का नेतृत्व कर रही है।
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