भारत में प्रतिवर्ष उपयोग के बाद बेकार हो चुके लगभग 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो घरों, संस्थानों और उद्योगों में उपयोग होने वाले वस्त्रों की व्यापकता और विविधता को दर्शाता है। साड़ियों और वर्दी से लेकर डेनिम और घरेलू लिनेन तक, वस्त्र शहरी अपशिष्ट प्रवाह का एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर उपेक्षित तत्व हैं। वस्त्रों की पुनर्प्राप्ति, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए शहर सुनियोजित प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता को तेजी से पहचान रहे हैं। चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण और संसाधन दक्षता पर इन दिनों ध्यान बढ़ता जा रहा है और नगरपालिकाएं ऐसे नवीन समाधानों की खोज शुरू कर रही हैं जो वस्त्रों को लैंडफिल में जाने से रोकते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत, नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है। व्यवस्थित कार्यक्रमों के जरिए वस्त्र अपशिष्ट की समस्या से निपटने के अवसर को पहचानते हुए, एनएमएमसी ने नवी मुंबई के बेलापुर में देश का पहला नगर निगम टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र (टीआरएफ) स्थापित किया। कपड़ों का विकेंद्रीकृत संग्रहण, वैज्ञानिक छंटाई, बेकार वस्त्रों का पता लगाने की क्षमता और महिलाओं के नेतृत्व में आजीविका सृजन को एकसाथ जोड़कर टीआरएफ वस्त्र अपशिष्ट को एक उपेक्षित धारा से शहरी चक्रीय अर्थव्यवस्था के एक मूल्यवान घटक के रूप में पुनर्स्थापित करता है।

नवी मुंबई में स्थित टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र (टीआरएफ) की परिकल्पना एक स्वतंत्र संग्रह केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक चक्रीय परितंत्र के रूप में की गई है जो संग्रह, छंटाई, प्रौद्योगिकी और आजीविका सृजन को एकीकृत करता है।
इस मॉडल की शुरुआत विकेंद्रीकृत संग्रहण प्रणाली से होती है, जिसके तहत सभी 8 नगर निगम वार्डों में स्थित हाउसिंग सोसाइटियों में ब्रांडेड कपड़े के कूड़ेदान रणनीतिक रूप से लगाए गए हैं। अब तक 140 कूड़ेदान स्थापित किए जा चुके हैं और अब आगे 250 कूड़ेदान लगाने का लक्ष्य है, जिससे जमीनी स्तर पर सुलभता और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

नवी मुंबई में बेलापुर के एक पुराने शहरी स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित अंतरिम टीआरएफ (अनुकरण और पता लगाने की क्षमता) में वैज्ञानिक छंटाई और पता लगाने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इकट्ठे किए गए कपड़ों का वजन किया जाता है, उन पर टैग लगाए जाते हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से पुन: प्रयोज्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य, डाउनसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में छांटकर रखा जाता है। कोशा हैंडहेल्ड स्कैनर के एकीकरण से कपास, पॉलीकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम सहित रेशों की तत्क्षण पहचान संभव हो पाती है, जिससे इनका वैज्ञानिक तरीके से छांटने के काम को मजबूती मिलती है और सामग्री की पुनर्प्राप्ति का प्रयास किया जाता है।
दाता से लेकर अंतिम उत्पाद तक वस्तु की यात्रा का मानचित्रण करने के लिए एक समर्पित एमआईएस प्लेटफॉर्म के विकास के साथ डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा मिलता है। पहचान के बाद, आगे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वस्त्रों को कपड़े के प्रकार, रंग और स्थिति के आधार पर अलग किया जाता है। छांटे गए पदार्थों को पुनः उपयोग में लाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह से कीटाणुरहित किया जाता है।
उपयुक्त कपड़ों को स्वयं सहायता समूहों की कुशल महिलाएं हस्तनिर्मित बैग, चटाई, सहायक उपकरण, परिधान और घरेलू सजावट की वस्तुओं में बदल देती हैं। इन पुनर्निर्मित उत्पादों को बाद में प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और बेचा जाता है, जिससे उन सामग्रियों को नया जीवन और उद्देश्य मिलता है जिन्हें कभी कचरा माने लिया गया था।

300 से अधिक महिलाओं ने फाइबर की पहचान, पृथक्करण प्रोटोकॉल, मरम्मत तकनीक और अपसाइक्लिंग कौशल की जानकारी देने के लिए बनाए गए 8 दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) मॉड्यूल में भाग लिया है। 150 से अधिक महिलाएं अब प्रमुखता से कपड़ा छंटाई, सिलाई और उत्पाद रूपांतरण के माध्यम से प्रति माह 9,000 रुपए से 15,000 रुपए के बीच कमा रही हैं।
इस पहल से एक क्रांतिकारी बदलाव आया है – इसने गृहिणियों को कुशल चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रणेता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। यह सुविधा एक समर्पित अपसाइक्लिंग केंद्र के रूप में कार्य करती है जहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य पुनः प्राप्त वस्त्रों से बैग, कपड़े, पाउच और घरेलू सजावट के उत्पाद बनाते हैं। वस्त्र पुनर्चक्रण एक सुनियोजित आजीविका का साधन बनकर उभरा है – यह हरित रोजगार सृजित करता है, स्थानीय उद्यम को मजबूत करता है और शहरी स्थिरता के ढांचे के भीतर श्रम की गरिमा को सुदृढ़ करता है।

टीआरएफ मॉडल ने उपभोक्ता के इस्तेमाल किए गए 30 मीट्रिक टन कपड़ा अपशिष्ट को इकट्ठा करने में मदद की है, जिसमें से 25.5 मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से छांटा गया है। प्रतिदिन औसतन लगभग 500 वस्तुओं की दर से 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया गया है। इस पहल के जरिए 1,14,575 से अधिक परिवारों तक पहुंचा गया है, 75 से अधिक आईईसी कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं और 350 से अधिक समाज प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जो मजबूत नागरिक भागीदारी और संस्थागत जुड़ाव को दर्शाता है। 400 से अधिक अपसाइकल्ड उत्पाद नमूने विकसित किए गए हैं, जिनमें अस्वीकृत कपड़ा अपशिष्ट से निर्मित कागज का एक सफल प्रायोगिक बैच भी शामिल है – जो संसाधन पुनर्प्राप्ति में नवाचार को दर्शाता है।
जागरूकता बढ़ाने और बाज़ार के अवसरों का विस्तार करने के लिए, टीआरएफ ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से भाग लिया है। इन मंचों ने उपभोक्ता के उपयोग किए गए वस्त्रों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही महिला कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर भी प्रदान किए हैं।
नवी मुंबई में टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र के कार्यान्वयन में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं, जिनमें कूड़ेदान लगाने का विरोध, वस्त्र पृथक्करण के बारे में सीमित जागरूकता और मिश्रित रेशों की छंटाई में जटिलताएं शामिल थीं। इन चुनौतियों को चरणबद्ध कार्यान्वयन, निरंतर नागरिक सहभागिता, अंतर-एजेंसी समन्वय और फाइबर-स्कैनिंग तकनीक को अपनाने के माध्यम से दूर किया गया।
बेलापुर में अंतरिम टीआरएफ की सफलता के आधार पर, अगले चरण में निसर्ग उद्यान के पास कोपरखैरान में एक स्थायी, उच्च क्षमता वाली कपड़ा पुनर्प्राप्ति सुविधा की परिकल्पना की गई है।
नवी मुंबई स्थित टेक्सटाइल रिकवरी केन्द्र यह दर्शाता है कि पारंपरिक रूप से बेकार समझे जाने वाले अपशिष्ट पदार्थों को आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्य के चालक के रूप में पुनः स्थापित किया जा सकता है। यह स्वच्छ भारत 2.0, स्मार्ट सिटी मिशन और सतत विकास लक्ष्य 12 – जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन – के सिद्धांतों के अनुरूप है।
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