Union Minister for Youth Affairs and Sports, Dr. Mansukh Mandaviya, addressed the inaugural edition of the ‘Khelo India Tribal Games,’ highlighting the rich heritage of tribal sporting talent.
नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के उद्घाटन संस्करण को संबोधित किया, जिसकी शुरुआत आज छत्तीसगढ़ के तीन शहरों में हुई और यह 3 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा।

डॉ. मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स(केआईटीजी) 2026 छत्तीसगढ़ के लिए एक स्थायी मेजबान के रूप में ऐतिहासिक शुरुआत का प्रतीक है, और इन खेलों का आयोजन बस्तर, सरगुजा और रायपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिवर्ष किया जाएगा।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिभा सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों, तटीय इलाकों और देश के दूरदराज भागों में भी मौजूद है।

उन्होंने कहा, “खेल प्रतिभा सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है; यह जनजातीय गांवों और देश के विविध क्षेत्रों में फल-फूल रही है। खेलो इंडिया जनजातीय खेलों की शुरुआत का उद्देश्य इस अप्रयुक्त क्षमता की पहचान करना और उसे बढ़ावा देना है।”

इस बात पर जोर देते हुए कि खेल सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं हैं, मंत्री ने कहा कि खेल अनुशासन, संतुलन और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं, जो देश में मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण(एसएआई) के कोच खेल स्थल पर मौजूद रहेंगे और खेलो इंडिया केंद्रों तथा उत्कृष्टता केंद्रों सहित संरचित व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रतिभाओं की पहचान करेंगे। खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

ओलंपियन दीपिका कुमारी जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने भारत की खेल विरासत में जनजातीय समुदायों के लंबे समय से चले आ रहे योगदान पर प्रकाश डाला।

डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि केआईटीजी न सिर्फ खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि बल्कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा, जिससे आने वाले वर्षों में पूरे देश और दुनिया भर से प्रतिभागी और ध्यान आकर्षित होगा।

पारदर्शिता और सुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि ‘खेल शासन विधेयक’ तथा आगामी खेलो भारत नीति जैसे सुधारों का उद्देश्य निष्पक्ष चयन प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना, समावेशिता को बढ़ावा देना और महिला तथा जनजातीय खिलाड़ियों के लिए अधिक-से-अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शन हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए और चयन प्रक्रियाएं निष्पक्ष, पारदर्शी तथा निगरानी के अधीन होंगी।

मंत्री ने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जिनमें एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स(राष्ट्रमंडल खेल) शामिल हैं, में भारत के शानदार प्रदर्शन पर भी विश्वास व्यक्त किया और कहा कि भारत एशियाई खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने खेल के क्षेत्र में व्यापक और सुव्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाकर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसी पहल मिलकर भागीदारी बढ़ाने और देशभर में प्रतिभा को निखारने में सहायक रही हैं।

डॉ. मांडविया ने वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की भारत की आकांक्षा को दोहराया और तब तक विश्व में शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में स्थान पाने का लक्ष्य व्यक्त किया, साथ हीवर्ष 2047 तक शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में शामिल होने का विजन भी रखा।

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