The Ministry of Education organized a one-day interactive workshop with Union Territories in New Delhi.
नई दिल्ली  – शिक्षा मंत्रालय के स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने 13 मार्च 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी), नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एक साथ आए और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा से संबंधित प्रमुख प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  के सचिव श्री संजय कुमार ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया ताकि समन्वय को मजबूत किया जा सके और शिक्षा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सुधार किया जा सके। उन्होंने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की रिक्तियों को समय पर भरने, राज्‍य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान (डीआईईटी) और राज्‍य शिक्षा संस्‍थान (एसआईई) जैसे शैक्षणिक संस्थानों को सुदृढ़ करने और संसदीय मामलों एवं वित्तीय प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  की आर्थिक सलाहकार श्रीमती ए. श्रीजा ने कार्यशाला के संदर्भ में कहा कि यह मंच विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाएगा और शिक्षा क्षेत्र में केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सामना की जाने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान को सक्षम करेगा।

उद्घाटन सत्र के दौरान, स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)   के अपर सचिव श्री धीरज साहू ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और केंद्र शासित प्रदेशों में संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करने के महत्व पर जोर दिया।

इसके बाद विधि कार्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अजय गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मुकदमेबाजी और न्‍यायालयी मामलों के संचालन से संबंधित प्रमुख पहलुओं पर बात की।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) की संयुक्त सचिव श्रीमती प्राची पांडे ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों को केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध होना चाहिए।

शिक्षा मंत्रालय के प्रधान मुख्य लेखा नियंत्रक श्री भूपाल नंदा ने भी सभा को संबोधित किया और शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन और लेखा प्रणाली से संबंधित मुद्दों के बारे में बताया।

तकनीकी सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इन विषयों में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) का कार्यान्वयन, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए शैक्षिक संकेतक और डेटा रिपोर्टिंग, विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म से जोड़ना और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए संबंधित लेखांकन मामले शामिल थे। इसके अतिरिक्त, सत्रों में न्‍यायालयी मामलों की प्रभावी निगरानी में विधिक सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली (लिम्‍बस) की भूमिका के बारे में बताया गया और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) पोर्टल पर खरीद संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें सरकारी खरीद में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार पर विशेष जोर दिया गया।

जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, पुद्दुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव, लक्षद्वीप और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने न्‍यायालयी मामलों की स्थिति, विशेष शिक्षकों सहित शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की रिक्तियों, एससीईआरटी, डीआईईटी और एसआईई में रिक्तियों, समग्र शिक्षा के अंतर्गत निधि जारी करने, वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों की प्रस्तुति, संसदीय मामलों और जैम पोर्टल पर आने वाली समस्याओं पर प्रस्तुतियां दी। इन चर्चाओं से केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव साझा करने और मंत्रालय तथा अन्य हितधारकों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक चर्चा और प्रमुख निष्कर्षों के सारांश के साथ हुआ। विचार-विमर्श में शिक्षा मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेशों की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई कि वे समन्वय को मजबूत करेंगे, संस्थागत क्षमता को बढ़ाएंगे और केंद्र शासित प्रदेशों में बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए स्कूली शिक्षा पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

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