Union Minister of Commerce and Industry, Shri Piyush Goyal, said that public sector banks are competing on a level playing field with private and foreign banks.
नई दिल्ली – केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एमएसएमई बैंकिंग उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी और विदेशी बैंकों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हुए देखना उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मजबूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों के रूप में उभरे हैं, जो भारत के विकास में सहयोग देने के लिए निजी और विदेशी बैंकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

 श्री गोयल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का सहयोग करने में बैंकिंग प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने  कहा कि समय पर और पर्याप्त ऋण तक पहुंच छोटे उद्यमियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि बैंकों ने एमएसएमई को संस्थागत वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें छोटे उधारकर्ता भी शामिल हैं, जो पहले ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर थे। अब वे व्यवसाय शुरू करने, संचालन का विस्तार करने और अपनी आजीविका में सुधार करने में सक्षम हुए हैं।

इससे पहले दिन में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ सातवां एफटीए है। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। यह उन देशों के साथ साझेदारी की ओर बदलाव को दर्शाता है जो पूरक शक्तियां और महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर प्रदान करते हैं।

श्री गोयल ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते आज व्यापक प्रकृति के हैं। इनमें न केवल वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच शामिल है बल्कि  नवोन्मेषकों, किसानों और उद्यमियों का सहयोग करने के लिए तकनीकी सहयोग भी शामिल हैं, जिससे उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि  न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में निवेश किए गए 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने कहा कि समझौते में निवेश प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने पर रियायतों को वापस लेने के प्रावधान शामिल हैं, जिससे यह केवल एक समझौता ज्ञापन के बजाय एक गंभीर और लागू करने योग्य प्रतिबद्धता बन जाती है।

मंत्री ने कहा कि इस समझौते से नवाचार, विनिर्माण और निर्यात में पर्याप्त निवेश होने की उम्मीद है, जिससे भारत न केवल न्यूजीलैंड बल्कि अन्य वैश्विक बाजारों के लिए भी एक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विकासों से सबसे ज्यादा लाभ एमएसएमई क्षेत्र को ही होगा।

उन्होंने हितधारकों से एफटीए से उत्पन्न होने वाले अवसरों को तेजी से प्राप्त करने और वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, तीन गुना और यहां तक कि चार गुना करने का लक्ष्य रखने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को लेकर पूरी तरह से महिला अधिकारियों की टीम द्वारा बातचीत की गई थी, जिससे यह महिलाओं द्वारा अंतिम रूप दिया गया पहला ऐसा समझौता बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की राजदूत भी एक महिला हैं, जो भारत के विकास पथ में महिलाओं द्वारा निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।

मंत्री ने यह भी कहा कि आज का यह दिन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसे संख्याओं के प्रबंधन में बैंकरों की भूमिका से जोड़ा जाता है जो अंततः एमएसएमई के लिए आर्थिक अवसर में बदल जाता है।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एमएसएमई, स्टार्टअप, संवर्धन केंद्र और युवा उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से मजबूत सहयोग मिलता रहेगा साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलता रहेगा।

छोटे उद्यमियों के लिए ऋण तक पहुंच को आसान बनाने के लिए की गई पहलों को याद करते हुए श्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के पहले वर्ष में शुरू की गई मुद्रा ऋण योजना और कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ऋण गारंटी उपायों का उल्लेख किया, जिसके तहत सरकार बिना किसी अतिरिक्त गारंटी के एमएसएमई ऋणों के लिए गारंटर बन गई। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुद्रा ऋणों का लगभग 70 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिया गया है। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया कि कैसे 10,000 रुपये के छोटे ऋण, जिन्हें बाद में पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर बढ़ाकर 20,000 रुपये और 50,000 रुपये कर दिया गया, ने रेहड़ी-पटरी वालों को शोषक साहूकारों से बचने और उनकी आजीविका में सुधार करने में मदद की है।

छोटे कर्जदारों को सहायता प्रदान करने में बैंकों के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री गोयल ने कहा कि ऐसी पहलें प्रधानमंत्री के ‘एमएसएमई’ यानी ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिकतम सहयोग’ के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत को लोकतंत्र, कानून के शासन, निवेशकों के साथ घरेलू व्यवहार और निर्णायक नेतृत्व की पेशकश करने वाले एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखती है। उन्होंने भारत के विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था और शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने का श्रेय यहां के लोगों और संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनुमानों के अनुसार भारत 2047 तक 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30-35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो आठ गुना वृद्धि का अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि बैंकों ने पिछले साल लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो ईमानदार उधारकर्ताओं को ऋण देने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एमएसएमई ऋण में लगभग 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है, जिसमें और भी अधिक अवसर हैं क्योंकि भारत किसानों, एमएसएमई, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए अपनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था का विस्तार कर रहा है।

बैंकों से एमएसएमई विकास का सहयोग करने के लिए उदारतापूर्वक और जिम्मेदारी से ऋण देने का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने कहा कि बैंक अब सशक्त हो गए हैं और उन्हें ईमानदारी और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने त्वरित और पारदर्शी ऋण अनुमोदन और वितरण, पूंजीगत व्यय, परिचालन व्यय और कार्यशील पूंजी के लिए पर्याप्त पूंजी की उपलब्धता और एमएसएमई को सक्रिय मार्गदर्शन देने को प्रोत्साहित किया ताकि वे विकास के दौरान सरकारी योजनाओं और पूंजी बाजारों का लाभ उठा सकें।

मंत्री ने कहा कि आज कई बड़ी कंपनियों ने अपनी यात्रा एमएसएमई के रूप में शुरू की थी और एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती ही अंततः भारत के भविष्य के विकास को निर्धारित करेगी। उन्होंने बैंकों से इस यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया और एमएसएमई और बैंकों को अविभाज्य जुड़वां बताया, जिनकी संयुक्त वृद्धि भारत को 2047 तक विकसित भारत की ओर ले जाएगी।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को एक बार फिर बधाई देते हुए अमृत काल के दौरान त्वरित, समावेशी और सतत विकास का आह्वान करते हुए वर्ष 2026 के लिए सभी बैंकरों और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

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