मंत्री महोदय 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में देश भर के अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) के स्कूली छात्रों के साथ बातचीत कर रहे थे।
विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के छात्रों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, जिसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है। उन्होंने कहा कि यह जनसांख्यिकीय शक्ति अवसर और जिम्मेदारी दोनों लेकर आती है। आने वाले दशक, विशेष रूप से वर्ष 2047 का विजन, आज के छात्रों के विचारों, कौशल और नवाचार करने के उनके आत्मविश्वास से आकार लेगा।
मंत्री ने समझाया कि अटल इनोवेशन इकोसिस्टम की परिकल्पना जीवन में जल्दी ही इस आत्मविश्वास को जगाने के लिए की गई थी, जिससे छात्र अपनी ताकत को पहचान सकें, वास्तविक दुनिया की समस्याओं का पता लगा सकें और तकनीक के माध्यम से समाधान विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल युवा मस्तिष्क को निष्क्रिय शिक्षण (पैसिव लर्निंग) से समस्या-समाधान, टीम वर्क और प्रयोग की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
छात्रों के साथ खुलकर संवाद करते हुए, मंत्री महोदय ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे तकनीक को केवल उपभोग के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सृजन के एक मंच के रूप में देखें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा अब पूरी तरह से भौतिक पुस्तकालयों या कोचिंग केंद्रों पर निर्भर नहीं है, क्योंकि डिजिटल पहुंच ने ज्ञान का लोकतांत्रीकरण कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह है तकनीक का समझदारी, उत्पादकता और नैतिकता के साथ उपयोग करने की क्षमता।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरुआती वर्षों के दौरान मार्गदर्शन (मेंटरिंग) के महत्व पर भी बात की और उल्लेख किया कि किशोरावस्था वह चरण है जहाँ रुचियाँ, क्षमताएँ और जीवन के मार्ग आकार लेना शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब्स जैसे व्यवस्थित नवाचार मंच छात्रों को यह पहचानने में मदद करते हैं कि वे क्या सबसे बेहतर कर सकते हैं, बजाय इसके कि वे एक समान या पारंपरिक करियर विकल्पों के पीछे भागें।
संवाद के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, पर्यावरण और पीयर-टू-पीयर लर्निंग (सहपाठियों से सीखना) जैसे विषयों पर छात्रों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों की विस्तृत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ये विचार दर्शाते हैं कि नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने गौर किया कि आज भारत के लगभग आधे स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, और यह बदलाव निरंतर संस्थागत सहयोग और अवसरों तक समान पहुंच के कारण संभव हुआ है।
मंत्री ने छात्रों को क्षेत्र-विशिष्ट नवाचारों को खोजने के लिए भी प्रोत्साहित किया और कहा कि स्थानीय भूगोल और संसाधन अनूठी संभावनाएँ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि तटीय, द्वीप, पहाड़ी और खनन क्षेत्रों के छात्र ऐसे समाधान विकसित करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं जो दूसरे नहीं कर सकते, जिससे एक अलग पहचान और टिकाऊ नवाचार मार्ग तैयार होते हैं।
नवाचार और उद्यमिता के बढ़ते मेल पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों को केवल प्रोटोटाइप (नमूनों) से आगे सोचने और उनके विस्तार (स्केलेबिलिटी), बाजार संपर्कों और दीर्घकालिक व्यवहार्यता की दिशा में काम करने की सलाह दी। उन्होंने युवा नवाचारियों के लिए बढ़ते सहायता तंत्र के बारे में बात की, जिसमें विभिन्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के माध्यम से वित्त पोषण, परामर्श, पेटेंट सुविधा और उद्योग जगत से जुड़ाव शामिल है।
नवाचार को एक निरंतर यात्रा बताते हुए, मंत्री ने छात्रों से सहयोग करने, विचारों का आदान-प्रदान करने, सहकर्मी समूह बनाने और सामूहिक रूप से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा सहयोग न केवल समाधानों को मजबूत करता है, बल्कि नेतृत्व, संचार और उद्यमशीलता के कौशल भी विकसित करता है जो भविष्य के कार्यबल के लिए आवश्यक हैं।
संवाद के अंत में मंत्री ने छात्रों को वर्तमान दशक में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और इसे व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय परिवर्तन दोनों के लिए एक निर्णायक चरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिज्ञासा, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ, आज के युवा नवाचारी एक आत्मनिर्भर, तकनीक-संचालित और समावेशी भारत को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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