Union Health Minister Shri J.P. Nadda inaugurated Artificial Intelligence (AI) based e-ICU Command Centre at Yashoda Medicity to strengthen the use of technology in critical healthcare services
नई दिल्ली – गंभीर स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन किया। यह कमांड सेंटर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केंद्रीकृत निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, ताकि नैदानिक परिणामों में सुधार हो तथा गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं समन्वित बनाया जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए 65 विभिन्न विशेषज्ञताओं में उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने तथा एक मल्टी स्पेशियलिटी तंत्र विकसित करने के लिए यशोदा मेडिसिटी की सराहना की। उन्होंने ई-आईसीयू सुविधा को एमएमजी जिला अस्पताल के साथ एकीकृत किए जाने को संस्थान की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु सहयोगात्मक प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एआई-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएं समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप, रोगों की पहचान में सटीकता तथा वास्तविक समय में निगरानी को एकीकृत करती हैं, जो आपातकालीन एवं गहन चिकित्सा परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहां तत्काल लिए जाने वाले निर्णय रोगी के उपचार परिणामों को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि एआई-की सहायता से आईसीयू प्रतिकूल नैदानिक परिस्थितियों में प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करते हैं, उच्च जोखिम वाले मामलों की बेहतर पहचान सुनिश्चित करते हैं तथा चिकित्सकों को डेटा-आधारित विश्लेषणात्मक सूचनाओं के माध्यम से अधिक प्रभावी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई आधारित ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन गंभीर देखभाल सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा रोगी सुरक्षा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केन्द्रीय मंत्री ने विस्तृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ‘डिजिटल एवं एआई-सक्षम भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण को प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने स्मरण कराया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रौद्योगिकी के माध्यम से रूपांतरित करने के उद्देश्य से डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप एक समग्र डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आधारशिला रखी थी।

 

उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में 1.81 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा चुके हैं, जिससे समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने एवं उन्हें सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनमें से 50,000 से अधिक केंद्र राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के अंतर्गत प्रमाणित किए जा चुके हैं, जो गुणवत्ता मानकों में सुधार की दिशा में ठोस प्रगति का प्रतीक है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को आगामी दो वर्षों के भीतर एनक्यूएएस प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि देशभर में प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के समान एवं उच्च गुणवत्ता मानकों को संस्थागत रूप दिया जा सके।

श्री नड्डा ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक देश भर में टेलीपरामर्श के माध्यम से 45.2 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं समावेशिता को सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए विकसित किए गए यू-विन (यू-डब्ल्यूआईएन) डिजिटल मंच का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण एवं सतत निगरानी की जाती है, ताकि समय पर प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) तथा टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि यू-विन के अंतर्गत पंजीकरण की संख्या 11.47 करोड़ से अधिक हो चुकी है। यह मंच सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत टीके के माध्यम से 12 रोगों से सुरक्षा हेतु 27 खुराकें प्रदान की जाती हैं, और जिसके परिणामस्वरूप देश में लगभग 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित किया जा रहा है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने रोग नियंत्रण में डिजिटल उपकरणों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों ने क्षय रोग (टीबी) की स्क्रीनिंग को सुदृढ़ बनाया है तथा जांच प्रक्रिया को अधिक सुलभ एवं प्रभावी किया है। उन्होंने बताया कि भारत में टीबी की घटनाओं में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत 7 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि मातृ मृत्यु दर एवं पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर से संबंधित सूचकों में भी भारत ने वैश्विक औसत से बेहतर प्रगति की है। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय डिजिटल ट्रैकिंग प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण तथा लक्षित हस्तक्षेपों के प्रभावी क्रियान्वयन को दिया।

केन्द्रीय मंत्री ने एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ‘साही’ (एस ए एच आई – स्ट्रैटेजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया) पोर्टल के शुभारंभ का भी उल्लेख किया। यह पोर्टल स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी, पारदर्शी एवं नैतिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ‘बोध’ (बी ओ डी एच – बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई) पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य एआई-आधारित स्वास्थ्य समाधानों के परीक्षण, सत्यापन एवं मानकीकरण की एक सुदृढ़ प्रणाली स्थापित करना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में इन प्रौद्योगिकियों का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि टीकाकरण एवं किफायती औषधि उत्पादन के क्षेत्र में भारत विश्व स्तर पर एक अग्रणी देश के रूप में उभरा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जहाँ पूर्व में टीकों एवं उपचारों के विकास में दशकों का समय लग जाता था, वहीं भारत ने मात्र नौ माह के भीतर दो स्वदेशी कोविड-19 टीकों का विकास किया तथा 220 करोड़ से अधिक खुराकें प्रदान कीं। यह व्यापक टीकाकरण अभियान पूर्णतः डिजिटल प्रमाणन प्रणाली के समर्थन से सफलतापूर्वक संचालित किया गया।

आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तपोषित स्वास्थ्य सहायता योजना है। इसके अंतर्गत लगभग 62 करोड़ लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक-आर्थिक स्तर के 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है। उन्होंने ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत विस्तारित वित्तीय सुरक्षा तथा उपचार तक सुव्यवस्थित पहुंच के कारण कैंसर की पहचान के 90 दिनों के भीतर उपचार प्रारंभ करना संभव हो पाया है। यह योजना समयबद्ध चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार में होने वाली देरी को कम करने में अपनी प्रभावशीलता प्रदर्शित कर रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य तंत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल नवाचार का एकीकरण एक परिवर्तनकारी नीतिगत बदलाव को दर्शाता है, जिससे देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, लागत, गुणवत्ता एवं समता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

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यशोदा मेडिसिटी में स्थापित एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर के बेस कमांड सेंटर को एमएमजी जिला अस्पताल की आईसीयू सुविधा से जोड़ता है, जिसके माध्यम से गंभीर रूप से बीमार रोगियों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित वास्तविक समय निगरानी संभव हो सकेगी। यह प्रणाली अस्पताल सूचना तंत्र एवं बेडसाइड उपकरणों को एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड से एकीकृत करती है, जहाँ एआई-आधारित विश्लेषण जोखिम वर्गीकरण में सहायता प्रदान करते हैं, नैदानिक स्थिति में गिरावट की स्थिति में प्रारंभिक चेतावनी जारी करते हैं और चौबीसों घंटे विशेषज्ञ निगरानी के माध्यम से समयबद्ध एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करते हैं।

यह पहल जिला अस्पताल स्तर पर गंभीर देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इससे नैदानिक समन्वय में सुधार, उपचार प्रोटोकॉल का मानकीकरण तथा स्थल पर कार्यरत चिकित्सकीय टीमों को ढांचागत मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकेगा। वंचित क्षेत्रों तक विशेषज्ञ निगरानी का विस्तार करते हुए यह मॉडल रोगी उपचार परिणामों में सुधार एवं गुणवत्तापूर्ण गहन चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास करता है, जो देश में डिजिटल स्वास्थ्य एवं गंभीर देखभाल से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के सरकार के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, यशोदा मेडिसिटी के प्रतिनिधि, चिकित्सक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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