The Indian Navy's first training squadron has departed from Singapore.
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) 18 जनवरी 2026 को सिंगापुर से रवाना हुआ, जो जारी प्रशिक्षण अभियान के तहत तीन दिवसीय बंदरगाह प्रवास की सफल समाप्ति का प्रतीक है। इस प्रवास के दौरान, पेशेवर आदान-प्रदान, प्रशिक्षण संबंधी परस्‍पर बातचीत, खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यकलापों और सामाजिक कार्यक्रम सहित कई प्रकार की द्विपक्षीय गतिविधियां आयोजित की गईं।
The Indian Navy's first training squadron has departed from Singapore.

पेशेवर मुलाकातों के तहत, प्रथम समुद्री सेवा बल (1टीएस) के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन तिजो के जोसेफ ने आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी के कमान अधिकारियों के साथ समुद्री प्रशिक्षण एवं सिद्धांत कमान (एमअीडीसी) के कार्यवाहक कमांडर कर्नल ताय चूंग हेर्न से शिष्टाचार भेंट की। चर्चा में भारत और सिंगापुर के बीच छह दशक पुरानी साझेदारी रेखांकित की गई, जिसमें सतत सैन्य सहयोग और साझा समुद्री सुरक्षा हितों पर विशेष बल दिया गया। एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में, क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जहां प्रथम समुद्री सेवा बल के जहाजों के कमान अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

The Indian Navy's first training squadron has departed from Singapore.

सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले और आईएनएस तिर तथा आईसीजीएस सारथी पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी प्रथम टीएस ने संयुक्त रूप से एक स्वागत समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व, मिशन प्रमुखों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, राजनयिकों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कर्नल ताय चूंग हेर्न ने नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों और बातचीत के माध्यम से पोषित भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के बीच मजबूत साझेदारी की सराहना की तथा रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए सिंगापुर की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस यात्रा का एक अभिन्न अंग सांस्कृतिक गतिविधियां थीं, जिसमें भारतीय नौसेना बैंड ने आवर टैम्पाइन्स मॉल और जीआईआईएस सभागार में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। खेल आयोजनों के अंतर्गत, भारतीय नौसेना और आरएसएन प्रशिक्षुओं के बीच एक मैत्रीपूर्ण डॉजबॉल मैच आयोजित किया गया।

पेशेवर प्रशिक्षण आदान-प्रदान में डीसी सिम्युलेटर पर प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के समुद्री प्रशिक्षुओं के लिए क्षति नियंत्रण (डीसी) प्रशिक्षण और आरएसएन संग्रहालय का दौरा शामिल था, जहां उन्हें रॉयल सिंगापुर नौसेना के इतिहास और विकास की व्यापक जानकारी प्रदान की गई। अंतर्राष्ट्रीय फ्यूजन केंद्र (आईएफसी) सिंगापुर के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (आईएलओ), भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों, मेहमानों और परिवारों सहित आगंतुकों के लिए जहाज खुले थे। इससे उन्हें भविष्य के नौसैनिक नेतृत्व को आकार देने में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की भूमिका को देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

स्क्वाड्रन ने परोपकारी कार्यकलापों में भी भाग लिया, जिसमें एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री नारायण वृद्धाश्रम और नर्सरी के निवासियों के साथ परस्‍पर बातचीत करते हुए एक दोपहर बिताई, जो सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की सिंगापुर में तैनाती दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का उदाहरण है और यह महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अनुरूप है। यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को और मजबूत करता है, दक्षिण एशिया से परे हिंद महासागर और दक्षिणपूर्व एशियाई क्षेत्र में इसकी समुद्री पहुंच का विस्तार करता है। साथ ही, मित्रता को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण अनुभवों को बेहतर बनाने और एक सुरक्षित एवं सहयोगात्मक समुद्री वातावरण में योगदान देने के लिए भारतीय नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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