
स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत देखकर तमिल दल के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने कहा कि काशी में मिल रही गर्मजोशी और आध्यात्मिक वातावरण उनके लिए अविस्मरणीय है। डमरू वादन की ध्वनि से पूरा परिसर शिवमय हो गया और काशी व तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता की झलक साफ दिखाई दी।
इस दल में शामिल लोगों ने कहा कि काशी आध्यात्मिक नगरी है। यहां बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद हम लोग एकेडमिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहां बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलेगा। कुछ ऐसे भी डेलीगेट दिखे जो काशी की धरती पर उतरते ही दंडवत लेट गए उन्होंने कहा कि यह पवित्र धरती है यहां आकर बहुत खुशी हुई है दो राज्यों के संस्कृति और भाषा का मिलन हो रहा है यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना एक भारत श्रेष्ठ भारत का मजबूत स्तंभ है।

काशी तमिल संगमम् 4.0 का आयोजन 2 दिसंबर से हो रहा है। इस आयोजन में तमिलनाडु से अलग-अलग समूह काशी, प्रयागराज और अयोध्या का भ्रमण करेगा। इस दौरान तमिल समूह को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से रुबरु कराया जाएगा।
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