Support to women artisans and entrepreneurs through PM Vishwakarma and Small and Medium Enterprises schemes
नई दिल्ली – उद्यम रजिस्‍ट्रेशन पोर्टल (यूआरपी) और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी, 2026 तक पंजीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की कुल संख्या 3,07,42,621 है।

सरकार सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएस) लागू करती है, जिसके तहत सदस्य ऋण देने वाली संस्थाओं (एमएलआई) द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) के अंतर्गत दिए गए ऋणों के लिए बिना किसी गारंटी या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण गारंटी प्रदान की जाती है। यह योजना महिला नेतृत्व वाले एमएसई को दिए गए ऋणों के लिए सामान्य 75 प्रतिशत की तुलना में 90 प्रतिशत की बढ़ी हुई ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करती है, साथ ही गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट भी देती है।

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत, कारीगरों और शिल्पकारों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण (5-7 दिन) और उन्नत प्रशिक्षण (15 दिन या उससे अधिक) के माध्यम से क्षमता निर्माण सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें वजीफा भी शामिल होता है। प्रशिक्षण मॉड्यूल में उद्यमिता सामंजस्‍य, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ संबंधित व्यवसायों के लिए उपयुक्त आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर मार्गदर्शन शामिल है। यह योजना विपणन सहायता भी प्रदान करती है, जिसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण, उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार शामिल है, जो लाभार्थियों की क्षमताओं को मजबूत करने और सूक्ष्म उद्यम गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने में सहायक है।

इसके अलावा, पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार हेतु निधि योजना (एसएफयूआरटीआई) के तहत, क्लस्टर-आधारित पहलों के माध्यम से क्षमता निर्माण और डिजिटल मार्केटिंग से संबंधित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इनमें सामान्य जागरूकता, परामर्श, प्रेरणा और विश्वास निर्माण जैसे कई व्यावहारिक क्रियाकलाप; प्रशिक्षण मॉड्यूल के डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए मूल्य श्रृंखला में कौशल विकास और क्षमता निर्माण तथा मशीन संचालन एवं रखरखाव पर प्रशिक्षण शामिल हैं। यह योजनाओं के संस्थागत विकास, एक्सपोजर विजिट, डिजाइन और उत्पाद विकास, सेमिनार, कार्यशालाओं और प्रौद्योगिकी उन्नयन कार्यक्रमों में भागीदारी का भी समर्थन करती है। साथ ही, संबंधित नोडल एजेंसियों के माध्यम से कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल मार्केटिंग चैनलों से जुड़ने में सुविधा प्रदान की जाती है।

विनिर्माण और सेवा-उन्मुख सूक्ष्म उद्यमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम निम्नलिखित हैं:

 

  1. महिला स्वामित्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं।

 

  1. सार्वजनिक खरीद नीति के तहत सीपीएसई/मंत्रालयों/विभागों द्वारा महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए, अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत भाग महिला उद्यमियों से खरीद करना अनिवार्य है।

 

  1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ऋण से जुड़ी सब्सिडी प्रदान करता है और पारंपरिक कारीगरों और ग्रामीण/शहरी बेरोजगार युवाओं की सहायता करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को सुगम बनाता है। पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं और उन्हें गैर-विशेष श्रेणी (25 प्रतिशत तक) की तुलना में अधिक सब्सिडी (35 प्रतिशत) प्रदान की जाती है।

 

  1. कॉयर विकास योजना के अंतर्गत ‘कौशल उन्नयन और महिला कॉयर योजना’ एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य कॉयर क्षेत्र में कार्यरत महिला कारीगरों के कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

 

  1. क्रय एवं विपणन सहायता योजना के अंतर्गत व्यापार मेलों में महिला उद्यमियों की भागीदारी पर शत-प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि अन्य उद्यमियों के लिए यह सब्सिडी 80 प्रतिशत है।

 

  1. पीएम विश्वकर्मा योजना 18 व्यवसायों में लगे पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कई लाभ प्रदान करती है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

 

  1. ‘यशस्विनी’ अभियान का उद्देश्य मौजूदा और भावी महिला उद्यमियों के बीच लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है ताकि उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान की जा सके।

 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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