Sonia Gandhi targeted the government for its silence on Iran-Israel war

कहा-भारत की चुप्पी उसकी नैतिक और कूटनीतिक परंपराओं से मेल नहीं खाती

नईदिल्ली ,21 जून (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर चुप्पी को लेकर केंद्र सरकार पर निधाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत की चुप्पी कूटनीतिक चूक के साथ भारत का नैतिक और रणनीतिक परंपराओं से भी भटकाव है।
उन्होंने एक लेख में 13 जून को ईरानी क्षेत्र पर इजरायल के सैन्य हमले की निंदा करते हुए इसे अवैध और संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है।

सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में जारी मानवीय संकट और ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव को लेकर भारत की चुप्पी उसकी नैतिक और कूटनीतिक परंपराओं से मेल नहीं खाती। उन्होंने लिखा, अभी बहुत देर नहीं हुई है। भारत को चाहिए कि वह स्पष्ट रूप से अपनी बात रखे, जिम्मेदारी से काम करे और सभी कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करे ताकि तनाव को कम किया जा सके और बातचीत का रास्ता खोला जा सके।

सोनिया ने लिखा, कांग्रेस ने ईरानी धरती पर इन बम विस्फोटों और लक्षित हत्याओं की निंदा की है, जो गंभीर क्षेत्रीय और वैश्विक परिणामों के साथ एक खतरनाक वृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं। गाजा में इसके क्रूर और असंगत अभियान सहित इजरायल की कई हालिया कार्रवाइयों की तरह, यह ऑपरेशन नागरिक जीवन और क्षेत्रीय स्थिरता की पूरी तरह से उपेक्षा के साथ किया गया था। ये कार्रवाइयां केवल अस्थिरता को बढ़ाएंगी और आगे संघर्ष के बीज बोएंगी।

सोनिया ने लिखा, ईरान, भारत का पुराना और भरोसेमंद मित्र रहा है। 1994 में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव ईरान की मदद से ही रोका गया था। उन्होंने कहा, भारत और इजरायल के बीच भी पिछले कुछ दशकों में मजबूत रणनीतिक रिश्ते बने हैं। यह विशेष स्थिति उसे एक सेतु यानी पुल की भूमिका निभाने का मौका देती है, जिससे शांति का प्रयास किया जा सकता है।

सोनिया ने लिखा, भारत लंबे समय से एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन के पक्ष में खड़ा रहा है, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्वक रह सके, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस सिद्धांतवादी नीति से किनारा कर लिया है, जो बेहद चिंताजनक है।

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