नई दिल्ली 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सहारा इंडिया ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन ने कंपनी पर 1,180 करोड़ रुपये के पीएफ और पेंशन बकाया को लेकर उसकी संपत्तियों की कुर्की का नोटिस जारी किया है।
ईपीएफओ का कहना है कि सहारा ने लाखों कर्मचारियों के लिए अनिवार्य भविष्य निधि अंशदान जमा नहीं किया है, जिसके चलते अब सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
लखनऊ स्थित ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय ने सहारा इंडिया को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर पूरी बकाया राशि जमा की जाए। यह बकाया मुख्य रूप से 2010 से 2012 के बीच कंपनी के उन एजेंटों से जुड़ा है, जिन्हें ईपीएफओ ने कर्मचारी की श्रेणी में माना है।
संगठन का तर्क है कि इन एजेंटों को कंपनी का हिस्सा होने के कारण पीएफ का लाभ मिलना चाहिए था। अगर सहारा तय समय में भुगतान नहीं करता, तो ईपीएफओ कानून की धारा 8बी से 8जी के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू करेगा। इसमें ब्याज और जुर्माना जोड़ने के बाद कुल देनदारी लगभग 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
यह मामला 2013 से चल रही जांच से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले वर्ष चार महीने की समय सीमा तय की थी, जिसके बाद 15 फरवरी को ईपीएफओ ने आदेश जारी किया।
सहारा ने लंबे समय तक यह दावा किया था कि उसके एजेंट कर्मचारी नहीं, बल्कि सदस्य हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें कंपनी के कर्मचारी के रूप में मान्यता दी। अधिकारियों के अनुसार, सहारा के लगभग 10 लाख से अधिक कर्मचारियों के पीएफ दावे अब भी लंबित हैं।
सहारा इंडिया ग्रुप पहले से ही कई वित्तीय विवादों में उलझा हुआ है, जिनमें सेबी बॉन्ड घोटाला, भूमि सौदेबाजी और निवेशकों के लगभग 9,000 करोड़ रुपये की वापसी का मामला शामिल है। हाल ही में झारखंड सीआईडी ने 400 करोड़ रुपये के लैंड स्कैम में सुब्रत रॉय के बेटों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
ईपीएफओ के इस नोटिस से कंपनी की रियल एस्टेट और वित्तीय संपत्तियों पर कुर्की का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वसूली की प्रक्रिया शुरू हुई, तो इससे सहारा की नकदी स्थिति और संपत्तियों की बिक्री क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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