Renewable energy is the key to climate-friendly agriculture and rural prosperity Union Minister Pralhad Joshi
नई दिल्ली –  नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार पर अंतर-मंत्रालयी संवाद को संबोधित करते हुए, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु अनुकूलता और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को कृषि एवं खाद्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

समागम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब भारत वैश्विक मंचों पर बोलता है, तो वह मानवता का लगभग एक–छठा हिस्सा और दुनिया के कुछ सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक का भी। भारत की कृषि–प्रधान भावना पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि अन्नदाता के रूप में पूजनीय किसान वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के माध्यम से भोजन और स्वच्छ ऊर्जा दोनों के प्रदाता, अर्थात् ऊर्जादाता बनते जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा पहुंच, जलवायु कार्रवाई, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को एक साथ प्रदान करने की बहुआयामी वैश्विक चुनौती का एक एकीकृत समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण महत्वाकांक्षा के साथ कार्यान्वयन पर आधारित है, जो मजबूत नीतियों, विकेंद्रीकृत कार्रवाई, समावेशी डिजाइन और मजबूत अंतर–मंत्रालयी समन्वय द्वारा समर्थित है।प्रमुख पहलों का विवरण देते हुए, श्री जोशी ने 2019 में शुरू की गई पीएम–कुसुम योजना का उल्लेख किया, जो स्टैंडअलोन सौर पंप, ग्रिड–कनेक्टेड पंपों के सौरकरण और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से कृषि में सौर ऊर्जा का एकीकरण करती है।

देश में 2025 के अंत तक, लगभग 10 लाख स्टैंडअलोन सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 11 लाख से अधिक ग्रिड–कनेक्टेड पंप सौर ऊर्जा से संचालित किए गए हैं, जो 10,200 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना ने डीजल पर निर्भरता कम की है, सिंचाई लागतों को स्थिर किया है, उत्सर्जन घटाया है और पुनरावर्ती सब्सिडी से दीर्घकालिक संपत्ति–आधारित निवेश की ओर वित्तीय समर्थन को स्थानांतरित किया है।

निजी निवेश को अनलॉक करने पर, श्री जोशी ने कहा कि नीतिगत स्थिरता और राष्ट्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि मांग के समूहन ने पैमाने, बैंक योग्यता और व्यावसायिक व्यवहार्यता में सुधार किया है। किसानों द्वारा अधिशेष सौर ऊर्जा की बिक्री, कृषि अवशेषों को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम, और छत पर सौर ऊर्जा के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसे प्रयासों ने आय के नए स्रोत बनाए हैं, आयात कम किए हैं और ग्रामीण ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।

भविष्य की योजनाओं पर नजर डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत पीएम–कुसुम 2.0 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें विकेंद्रीकृत सौर समाधानों और कृषि–फोटोवोल्टिक्स (agri-PV) पर नया जोर होगा, जो कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ संचालित करने की अनुमति देगा।

उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से डिजाइन किया गया एग्री पीवी (agri-PV ) सिस्टम फसल उपज को बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं, सूक्ष्म जलवायु को संतुलित कर सकते हैं, स्वच्छ बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और किसानों की आय को विविधीकृत कर सकते हैं।

अपने संबोधन के समापन पर, श्री जोशी ने आपसी साझेदारियों को गहरा करने और समाधानों को विस्तार देने के लिए भारत की तत्परता की पुनः पुष्टि की, यह नोट करते हुए कि प्रचुर सूर्य प्रकाश और 14.6 करोड़ से अधिक छोटे जोतों के साथ, देश नवीकरणीय ऊर्जा–सक्षम कृषि–खाद्य प्रणालियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए एक अच्छी स्थिति में है।

अंतर्राष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं सभा के साइडलाइन्स पर, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग की महानिदेशक सुश्री एलिन रोस के साथ एक भविष्योन्मुखी बैठक की। चर्चाओं का मुख्य फोकस भारत में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के हिस्से के रूप में जियोथर्मल ऊर्जा तैनाती को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

अंतरराष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) सभा के साइडलाइन्स पर आयोजित एक अन्य प्रमुख द्विपक्षीय बैठक में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने यूरोपीय आयोग में ऊर्जा की महानिदेशक सुश्री डिट्टे जूल जोर्गेंसन के साथ एक रचनात्मक बैठक की। चर्चाओं में भारत–यूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी के निरंतर गहन होने की समीक्षा की गई, जिसमें जमीन पर ठोस परिणाम देने पर साझा जोर दिया गया।

श्री प्रह्लाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात के निवेश मंत्री माननीय मोहम्मद हसन अल–सुवैदी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ अवसंरचना में भारत–यूएई सहयोग को मजबूत करने पर भी एक सकारात्मक चर्चा की। इस संवाद ने द्विपक्षीय निवेश साझेदारियों में मजबूत गति को पुनः परिभाषित किया, जो भारत के गैर–जीवाश्म ईंधन क्षमता के तेजी से विस्तार, विस्तारित घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तथा दीर्घकालिक निवेशों के लिए अनुकूल स्थिर एवं अनुमानित नीति वातावरण पर आधारित है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अबू धाबी के लुव्र संग्रहालय का भी दौरा किया, जिसे उन्होंने सांस्कृतिक संवाद और साझा मानवीय विरासत का शक्तिशाली प्रतीक बताया। केंद्रीय मंत्री ने संग्रहालय में क्यूरेटेड कलाकृतियों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदर्शित भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की गहन सभ्यतागत विरासत को प्रतिबिंबित करता है।

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