MNS's concern started troubling Shiv Sena

शिव सेना को सताने लगी मनसे की चिंता. कोई डेढ़ दशक तक राजनीतिक बियाबान में भटकने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे फिर से चर्चा में हैं। भाजपा और शिव सेना का तालमेल टूटने के बाद से ही भाजपा के नेता उनको अपने साथ मिलाने की कोशिश में लगे थे। अब जाकर उनको कामयाबी मिली है। भाजपा और मनसे के बीच राजनीतिक साझीदारी बन रही है और इससे शिव सेना की चिंता बढ़ी है।

अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से लेकर सांसद संजय राउत तक को राज ठाकरे पर बयान देने की जरूरत नहीं होती। उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे पर बहुत तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि बाला साहेब ठाकरे जैसे कपडे पहन कर कोई बाला साहेब नहीं बन जाता है। उद्धव ने कहा है कि राज ठाकरे भाजपा की डी टीम हैं।

उनकी हनुमान चालीसा की राजनीति पर हमला करते हुए संजय राउत ने कहा है कि शिव सेना के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार इस मामले को जिस तरह से संभाल रही है, अगर बाला साहेब होते तो इसकी तारीफ करते। राज ठाकरे की सक्रियता से एक तरह से फिर से बाला साहेब की विरासत पर दावेदारी की जंग छिड़ गई है। राज ठाकरे पांच मई को अयोध्या जा रहे हैं, जहां वे रामलला के दर्शन करेंगे और लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे।

उनके अयोध्या जाने के फैसले से शिव सेना में चिंता बढ़ी है। अब तक उद्धव ठाकरे अयोध्या जाते थे और 30 साल पहले हुए बाबरी विध्वंस में शिव सैनिकों की भूमिका का श्रेय लेते थे। लेकिन राज ठाकरे भी अब यह श्रेय लेंगे क्योंकि तब वे भी शिव सेना में ही थे और उस समय उनको ही बाल ठाकरे का उत्तराधिकारी माना जाता था। वहां से लौटने के बाद वे भाजपा के साथ तालमेल पर फैसला करेंगे।

अगर दोनों पार्टियों में आधिकारिक रूप से तालमेल होता है तो कट्टर हिंदू वोटर शिव सेना से दूर जा सकता है। वैसे भी वह कांग्रेस और एनसीपी से तालमेल की वजह से नाराज है।

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