- वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना: हितधारकों को बुनियादी वित्तीय अवधारणाओं, उत्तरदायी वित्तीय व्यवहार और वित्तीय सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के बारे में शिक्षित करना है।
- निवेशकों में जागरूकता बढ़ाना: निवेशकों के अधिकारों, निवेश जोखिमों और सोच-समझकर निर्णय लेने के बारे में जानकारी को बढ़ावा देना है।
- वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बारे में जागरूक करना: घोटालों, धोखाधड़ी कर बैंक खातों से रािश निकालने का प्रयास करने वालों से सतर्क करने, धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं और डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
- IV. सुरक्षित डिजिटल वित्तीय कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना: डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल भुगतान और ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- आम लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना: आम लोगों को धोखाधड़ी वाली वित्तीय गतिविधियों की पहचान करने, उनसे बचने और उनकी रिपोर्ट करने के लिए उन्हें जागरूक करना है।
ये आईएपी कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किए जाते हैं। इनमें ग्रामीण और अल्प सुविधा वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आईएपी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का चयन विशिष्ट मानदंडों के आधार पर किया जाता है, जैसे कि अल्प सुविधा वाले क्षेत्रों, दूरस्थ क्षेत्र जिनमें टियर-2 और टियर-3 के कस्बे और गांव शामिल हैं। इन स्थानों पर लगभग 75% कार्यक्रम इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करके संचालित किए जाते हैं।
आईईपीएफए द्वारा पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान इस उद्देश्य के लिए उपयोग की गई धनराशि का विवरण 16.92 करोड़ रुपये है और चालू वित्तीय वर्ष में (अब तक) 2.69 करोड़ रुपये है।
यह जानकारी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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