उपर्युक्त 22 पूर्ण परियोजनाओं ने माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाकर, तटीय जहाजरानी को बढ़ावा देकर, रसद लागत और टर्नअराउंड समय को कम करके भारत की समुद्री व्यापार प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है, जिससे देश के निर्यात, आयात और आयात व्यापार और आर्थिक विकास में योगदान मिला है।
सागरमाला परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित करना, इससे जुड़ी अवसर लागतों से कहीं अधिक लाभदायक है। यह निवेश सागरमाला के विभिन्न स्तंभों, जैसे- बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, तटीय समुदाय विकास, तटीय जहाजरानी और अंतर्देशीय जल परिवहन, जहाज मरम्मत और पुनर्चक्रण, और द्वीप विकास से संबंधित परियोजनाओं में रणनीतिक रूप से किया जाएगा।
ये सभी स्तंभ मिलकर डिजिटल अवसंरचना का विकास, तटीय समुदायों के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन, अंतर्देशीय जल परिवहन और निर्यात-आयात व्यापार प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए बंदरगाह से जुड़ी अवसंरचना का विकास करते हैं। इससे तटीय समुदायों को सहायता मिलेगी और बहु-आयामी लॉजिस्टिक्स पार्क, जहाज मरम्मत क्लस्टर और हरित हाइड्रोजन ईंधन हब जैसे सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इन पहलों से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर मजबूत प्रभाव पड़ेगा, साथ ही आजीविका, क्षेत्रीय विकास और समुद्री क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और समुद्री अमृत काल विजन (एमएकेवी) 2047 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी
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