Held a national-level review meeting with the tribal welfare departments of the states.
नई दिल्ली – भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने प्रमुख जनजातीय विकास पहलों की प्रगति की समीक्षा के लिए केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्यों के जनजातीय कल्याण विभागों के प्रधान सचिवों के साथ एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान(डीए–जेजीयूए), प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान(पीएम-जनमन) और भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव ने की।
Held a national-level review meeting with the tribal welfare departments of the states.

 

ये प्रमुख पहलें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 विजन पर आधारित हैं, जिसमें पीएम-जनमन 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के समग्र विकास के लिए समर्पित है, और डीए-जेजीयूए का उद्देश्य देशभर में जनजातीय समुदायों का संतृप्ति-आधारित समग्र विकास सुनिश्चित करना है। ये कार्यक्रम समावेशी विकास, अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुंच और जनजातीय(आदिवासी) नागरिकों के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

डीए-जेजीयूए के तहत तीसरे वर्ष के कार्यान्वयन की अनिवार्यता

डीए-जेजीयूए के क्रियान्वयन के तीसरे वर्ष में प्रवेश करने के साथ यह बैठक विशेष महत्व रखता है, जिसे मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने के लिए एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में पहचाना है। योजना निर्माण और संसाधन जुटाने के चरण लगभग पूरे हो चुके हैं, और अब सारा ध्यान सभी डीए-जेजीयूए गांवों में बुनियादी ढांचे तथा आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हो गया है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए जनजातीय कार्य सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि आवास, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आजीविका और सड़क संपर्क सहित सभी अधिकारों एवं सुविधाओं की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करना कोई वैकल्पिक लक्ष्य नहीं, बल्कि यह एक अनिवार्य दायित्व है। उन्होंने कहा कि आंशिक या विलंबित क्रियान्वयन को योजना के उद्देश्य से विचलन माना जाएगा तथा अब प्रदर्शन का मूल्यांकन सिर्फ खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस और मापने योग्य परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

त्रैमासिक लक्ष्य और आंकड़ों के प्रति जवाबदेही

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों हेतु क्षेत्रवार त्रैमासिक(तिमाही) लक्ष्य निर्धारित किए हैं। एमओटीए के अतिरिक्त सचिव श्री मनीष ठाकुर ने मंत्रालयों से आग्रह किया कि वे इन लक्ष्यों की जानकारी शीघ्र संबंधित राज्य विभागों को उपलब्ध कराएं, संयुक्त सचिव स्तर पर डीए-जेजीयूए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें तथा भौतिक एवं वित्तीय प्रगति से संबंधित अद्यतन आंकड़ों को प्रत्येक माह साझा करना सुनिश्चित करें।

संबद्ध मंत्रालयों को राज्य जनजातीय कल्याण विभागों के साथ स्वतंत्र अभिसरण समीक्षा बैठकें आयोजित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व वाले समीक्षा प्रणाली से आगे बढ़ाकर जवाबदेही तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

केंद्र-राज्य तालमेल को मजबूत करना

डीए-जेजीयूए की अभिसरण-आधारित संरचना पर प्रकाश डालते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि यह पहल एक ही जनजातीय बस्तियों में विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन सुनिश्चित करती है। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे इस कार्यक्रम में सक्रिय सह-स्वामित्व की भूमिका निभाएं तथा जिला स्तर पर, विशेषकर जिलधिकारी, जिला मजिस्ट्रेटों और आईटीडीए परियोजना अधिकारियों के माध्यम से, क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन और प्रगति की निगरानी के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।

नई रणनीतिक पहलों की शुरुआत

  • सचिव ने एक मानकीकृत ढांचे के तहत लागू की जाने वाली नई पहलों की एक श्रृंखला की घोषणा की। इनमें शामिल हैं:
  • सतत जनजातीय आजीविका के लिए एकीकृत संरक्षण, कृषि-प्रौद्योगिकी और मूल्य-संवर्धित जैव-संसाधन उद्यम: (सीएसआईआर-एनबीआरआई के सहयोग से)
  • जनजातीय चिकित्सकों का क्षमता निर्माण: (आसीएमआर के सहयोग से)
  • प्रोजेक्ट दृष्टि(DRISTI) के तहत जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला
  • रोग उन्मूलन मिशन: जनजातीय जिलों में मलेरिया, कुष्ठ रोग और तपेदिक(टीबी) को लक्षित करने वाले कार्यक्रम
  • डीए-जेजीयूए के तहत जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्रों की स्थापना
  • जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी मॉडल गांवों का विकास
  • जनजातीय इको-टूरिज्म पायलट प्रोजेक्ट और जनजातीय होमस्टे विकास
  • जनजातीय सौर सहायक कार्यक्रम

आदि कर्मयोगी अभियान का संस्थागतकरण

अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संचालित आदि कर्मयोगी अभियान(एकेए) पर विशेष बल दिया गया। अभियान के वर्तमान चरण में आदि सेवा केंद्रों(एएसके) का मानचित्रण किया जा रहा है, जो शिकायत निवारण और अधिकारों तक पहुंच सुनिश्चित करने वाले ग्राम-स्तरीय सुविधा केंद्र हैं। साथ ही, आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों(एकेवी) का पंजीकरण भी किया जा रहा है, जो स्थानीय आदिवासी युवा हैं और जमीनी स्तर पर सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाते हैं।

राज्यों से इन प्रयासों में सक्रिय सहयोग करने और जिला स्तर पर प्रगति की साप्ताहिक निगरानी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।

पीएम-जनमन और अनुच्छेद 275(1) की समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान(पीएम-जनमन) के तहत कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों(पीवीटीजी) के लिए समर्पित कार्यक्रम है। इसके साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली धनराशि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। बैठक में यह स्वीकार किया गया कि भौगोलिक दृष्टि से दूरस्थ और ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित पीवीटीजी बस्तियों के लिए पारंपरिक कार्यक्रमों से अलग, विशेष रूप से अनुकूलित और लक्षित सेवा वितरण तंत्र की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में मंत्रालय ने 18 राज्यों और एक-केंद्र शासित प्रदेश में पीवीटीजी परिवारों को शामिल करते हुए चलाए जा रहे व्यापक घर-घर सर्वेक्षण पर विशेष बल दिया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य व्यक्तिगत स्तर पर अधिकारों एवं बुनियादी ढ़ांचे में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करना तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और विभिन्न सरकारी सुविधाओं तक पहुंच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सेवा वितरण में सुधार की संभावनाओं का आकलन करना है।

यह सर्वेक्षण राज्य जनजातीय कल्याण विभागों(टीडब्ल्यूडी) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग प्रदान कर रहा है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि सर्वे सेतु ट्राइबल ऐप के शुभारंभ के 20 दिनों के भीतर लगभग 2 लाख परिवारों की प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि जून 2026 के अंत तक लगभग 12 लाख प्रविष्टियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय(एमओटीए) ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और “सबका साथ, सबका विकास” के विजन के अनुरूप, पीएम-जनमन के माध्यम से पीवीटीजी समुदायों के लिए लक्षित और प्रभावशाली परिणाम सुनिश्चित करने हेतु मजबूत निगरानी और डेटा-संचालित हस्तक्षेपों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के समापन पर सचिव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप समग्र और बहु-क्षेत्रीय जनजातीय विकास के प्रति जनजातीय कार्य मंत्रालय(एमओटीए) की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विभिन्न हितधारकों से सेवा वितरण ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए तथा इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय क्रियान्वयन में एक सहयोगी, संवेदनशील और जवाबदेह भागीदार की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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