Government of India revises fee rules for partially operational National Highways
भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया।

इसके तहत जब कोई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक नहीं खोला जाता है, तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नियमों के अनुसार केवल पूर्ण किए गए राजमार्ग के लिए ही टोल शुल्क वसूला जाएगा।

संशोधित नियम 15 फरवरी, 2026 से प्रभावी होंगे।

नई दिल्ली – भारत सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (जो केवल आंशिक रूप से चालू हैं) के उपयोगकर्ताओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।

वर्तमान में राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर उपयोगकर्ता शुल्क पूरी लंबाई के लिए सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ता शुल्क से 25% अधिक है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का उद्देश्य आवागमन को नियंत्रित, तेज और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना है जो यात्रियों को आरामदायक यात्रा की सुविधा देता है।

यह शुल्क पूरे हो चुके हिस्से के लिए लिया जाता है, भले ही एक्सप्रेसवे अपनी पूरी लंबाई में शुरू से अंत तक पूरी तरह से खुला न हो।

नए प्रावधान के तहत जब तक राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पूरी तरह से नहीं खुल जाता, तब तक पूरी हो चुकी लंबाई के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के लिए लागू कम दर पर टोल शुल्क वसूला जाएगा।

इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के उपयोग को बढ़ावा देना है ताकि उपयोगकर्ताओं को खुले हुए हिस्सों से यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

इससे एक्सप्रेसवे के समानांतर मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग मार्गों पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी, माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी और साथ ही पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात जाम के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) (संशोधन) नियम, 2026 नामक संशोधित नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। यह नियम संशोधन के लागू होने की तारीख से एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से चालू होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

यह संशोधन भारत सरकार की एक और पहल है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के उपयोगकर्ताओं के लिए यात्रा को अधिक सुगम और किफायती बनाना है।

************************