Goa Maritime Conclave 2026 further strengthens shared vision for maritime security in the Indian Ocean Region
नई दिल्ली – गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव का 5वां संस्करण (जीएमसी-26), 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में हिंद महासागर क्षेत्र के 15 देशों के नौसेना प्रमुखों और वरिष्ठ समुद्री नेताओं ने हिस्सा लिया। इस कॉन्क्लेव ने हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहकारी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में क्षेत्रीय भागीदारों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का मुख्य थीम आईओआर में सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ – गतिशील खतरों को कम करने के लिए प्रयासों की रेखाओं (एलएसओईको आगे बढ़ाना” था। जीएमसी-26 ने संरचित समुद्री संवाद के संयोजक और क्षेत्र में सहयोगी सुरक्षा ढांचे के सक्षमकर्ता के रूप में भारत की निरंतर भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री के महासागर-म्युचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रास रीजन्स‘  के विजन के अनुरूप आयोजित इस सम्मेलन ने ठोस परिणामों और सहयोगी कार्यान्वयन ढांचे पर केंद्रित विचार-विमर्श के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया।

अपने मुख्य भाषण में, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) ने इस बात कपर जोर दिया कि उभरता हुआ समुद्री सुरक्षा वातावरण अब एक समन्वित क्षेत्रीय प्रतिक्रिया की मांग करता है, जो रियल टाइम के सूचना आदान-प्रदान, संस्थागत समन्वय तंत्र और निरंतर क्षमता विकास पर आधारित हो। उन्होंने रेखांकित किया कि आईयूयू मछली पकड़ने, तस्करी नेटवर्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराधों जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आईओआर क्षेत्र के देशों के बीच सामूहिक स्वामित्व और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता है।

पूर्व राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक, वाइस एडमिरल जी. अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) के संचालन में आयोजित पहले सत्र में, समुद्री सूचनाओं के रियल टाइम  में आदान-प्रदान और परिचालन समन्वय को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसका उद्देश्य अवैध, बिना सूचना वाली और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों का मुकाबला करना था।

इस सत्र के वक्ता भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल टीवीएन प्रसन्ना और मालदीव के कर्नल अमानुल्लाह अहमद रशीद थे। वक्ताओं ने समुद्री डोमेन जागरूकता नेटवर्क को मजबूत करने, सूचना साझा करने वाली प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता  और विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया को सक्षम करने के लिए संरचित संस्थागत संबंधों की आवश्यकता जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रकाश डाला।

दूसरे सत्र में आईओआऱ की समुद्री एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण और योग्यता वृद्धि के लिए सहयोगी मार्गों का परीक्षण किया गया। रियर एडमिरल श्रीनिवास मद्दुला और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सीनियर फेलो कैप्टन (आईएन) रणेन्द्र एस सावन ने अपने विचार साझा किए।

इस सत्र का संचालन पूर्व नौसेना प्रमुख और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह (सेवानिवृत्त) ने किया। इस दौरान हुई चर्चाओं ने क्षेत्रीय प्रशिक्षण संसाधनों को एकजुट करने, पेशेवर विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार करने और दीर्घकालिक समुद्री लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। इस सत्र ने इस समझ को और पुख्ता किया कि आईओआर में स्थायी समुद्री स्थिरता, समन्वित क्षमता विकास और संरचित सहयोग पर निर्भर है।

सम्मेलन का समापन नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के संबोधन के साथ हुआ, जिन्होंने गतिशील समुद्री खतरों को कम करने के लिए सहयोगी प्रयासों की रेखाओं को आगे बढ़ाने पर अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए।

सीएनएस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने सभी भागीदार देशों की भागीदारी और हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुकूलनशील समुद्री खतरों के इस युग में, हमें ‘महासागर’  के दृष्टिकोण के तहत तकनीक, निर्बाध सूचना साझाकरण और केंद्रित संचालन का लाभ उठाकर ‘साझा जागरूकता’ से ‘समन्वित कार्रवाई’ की ओर बढ़ना चाहिए।

सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं में क्षेत्रीय समुद्री साझेदारी को मजबूत करने, सहयोग तंत्र को संस्थागत बनाने और सामूहिक क्षमता बढ़ाने पर मजबूत सहमति दिखाई दी।

अपने पांचवें संस्करण में, गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव ने हिंद महासागर क्षेत्र में समावेशी, परामर्शात्मक और कार्रवाई-उन्मुख समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। जीएमसी-26 ने एक बार फिर संरचित सहयोग, वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वित क्षमता विकास पहलों के माध्यम से सुरक्षित और स्थिर समुद्र बनाए रखने का संकल्प लिया।

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