Goa and Maharashtra received a grant of over ₹592 crore from the 15th Finance Commission to strengthen Panchayati Raj Institutions.
नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने गोवा और महाराष्ट्र में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पंद्रहवें वित्त आयोग के अप्रतिबंधित अनुदान (विकासात्मक धन जिसके व्‍यय के लिए कोई विशिष्ट नियम या बंधन नहीं होते) अनुदान स्वीकृत और जारी किए हैं। इसके तहत, महाराष्ट्र के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त का रूका हुआ हिस्सा, 79.82 करोड़ रुपये 12 पात्र जिला पंचायतों, 125 पात्र प्रखंड पंचायतों और 27 पात्र ग्राम पंचायतों को जारी कर दिया गया है।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त का 221.82 करोड़ रुपये का रूका हुआ हिस्सा राज्य में अतिरिक्त 12 जिला पंचायतों, 125 प्रखंड पंचायतों और 5249 ग्राम पंचायतों को जारी किया गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए महाराष्ट्र को भी बंधित अनुदान (विशिष्ट विकास कार्यों पर खर्च करने की बाध्यता होती है) जारी कर दिए हैं। इसमें पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान की पहली किस्त का रूका हुआ हिस्सा 159.32 करोड़ रुपये, अतिरिक्त 12 पात्र जिला पंचायतों 125 पात्र प्रखंड पंचायतों और 1120 पात्र ग्राम पंचायतों के लिए जारी किया गया है।
इसके अलावा, दूसरी किस्त का रूका हुआ हिस्सा 118.69 करोड़ रुपये, भी अतिरिक्त 12 पात्र जिला पंचायतों, 125 प्रखंड पंचायतों और 183 ग्राम पंचायतों के लिए जारी कर दिया गया है। वहीं, गोवा के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त 12.40 करोड़ रुपये, जारी की गई है, जिसमें राज्य की 2 पात्र जिला पंचायतों और सभी 191 पात्र ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।

भारत सरकार – पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय  के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं। अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थानों/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्‍लेखित 29 विषयों के अंतर्गत, वेतन और अन्य स्थापन लागतों को छोड़कर, स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। बंधित अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें  स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति, घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव अपशिष्‍ट प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।

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