From liquor ban to land rights protection bill, the J&K assembly is abuzz with debates.

श्रीनगर,28 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । जम्मू-कश्मीर में शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध सहित 41 निजी विधेयक आज विधानसभा में पेश किए जाने हैं.

विधानसभा सचिवालय के अनुसार आज का दिन निजी विधेयकों के लिए रिजर्व रखा गया है. इनमें केंद्र शासित प्रदेश में लोकायुक्त की स्थापना से लेकर मानवाधिकार मंच और घाटी में फ्रोजन फूड के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध तक शामिल हैं.

ये विधेयक सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों द्वारा पेश किए गए हैं. शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के दो विधायकों सहित चार विधायकों ने पेश किया है.

एनसी विधायक अली मोहम्मद सागर उनमें से एक हैं जिन्होंने क्षेत्र में शराब की बिक्री, विज्ञापन और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है.

पीडीपी के मोहम्मद फैयाज मीर पिछले बजट सत्र में सबसे पहले इस विधेयक को पेश करने वाले व्यक्ति थे. उनके बाद एनसी के अहसान परदेसी और अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक शेख खुर्शीद ने इस प्रतिबंध के लिए सामाजिक, धार्मिक और सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता का हवाला दिया.

ये विधेयक तब पारित नहीं हो सके और इन्हें आज के विधायी एजेंडे में रखा गया है. इस क्षेत्र में शराब पीने पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से इसका सेवन वर्जित माना जाता है. इसके अलावा निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भूमि अधिकार विधेयक भी आज के विधायी एजेंडे में शामिल हैं.

एनसी विधायक मुबारिक गुल जो विधानसभा में एनसी के प्रमुख हैं ने सदन में बहुमत दल के मुख्य सचेतक के वेतन और भत्तों की मांग के लिए एक विधेयक पेश किया है.

निजी सदस्यों के विधेयकों के पारित होने की संभावना कम है क्योंकि रिकॉर्ड बताते हैं कि 1980 के बाद से सदन में केवल तीन विधेयक ही पारित हुए हैं, जिनमें से आखिरी विधेयक 2007 में पारित हुआ था.

इसका कारण समर्थन की कमी बताया जा रहा है. कोई विधेयक किसी मंत्री या विधायक द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है. पहले मामले में इसे सरकारी विधेयक और दूसरे मामले में इसे निजी सदस्य का विधेयक कहा जाता है.

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