केआईटीजी के पहले संस्करण में 9 खेल विधाओं में लगभग 3,800 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें एथलीट, कोच और अधिकारी शामिल हैं। इनमें 7 पदक खेल और 2 प्रदर्शन खेल शामिल हैं, जिनमें 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। आयोजन का शुभंकर ‘मोरवीर’ भारत के 700 से अधिक जनजातीय समुदायों के साहस, गौरव और शौर्य का प्रतीक है।
जनसभा को संबोधित करते हुए श्रीमती खडसे ने कहा कि खेल केवल एक प्रतिस्पर्धी गतिविधि नहीं है, बल्कि सशक्तिकरण, आत्मविश्वास निर्माण और राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली साधन है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारत की खेल विरासत को पुनर्जीवित करने, जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाने और एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए सामाजिक आंदोलन है, जहां हर गांव में एक चैंपियन हो।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2036 के ओलंपिक तक शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल होने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ शीर्ष 5 में प्रवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है और केआईटीजी जैसी पहल इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
श्रीमती खडसे ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसी पारंपरिक खेल पहलें जनजातीय क्षेत्रों में पहले से मौजूद मजबूत और जीवंत जमीनी स्तर की खेल संस्कृति को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि ये खेल मौजूदा प्रतिभाओं को पहचानने और उनका पोषण करने के लिए एक संस्थागत मार्ग प्रदान करते हैं।
महिलाओं की भागीदारी पर मंत्रालय के फोकस को रेखांकित करते हुए, उन्होंने अस्मिता लीग की सफलता का उल्लेख किया, जिसके तहत 124 लीगों ने संवेदनशील और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों सहित फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में लगभग 14,000 लड़कियों की भागीदारी को सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें खेलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की लड़कियों के लिए अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
श्रीमती खडसे ने आगे बताया कि खेलों के दौरान उभरती प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए सभी सात प्रतियोगिता स्थलों पर भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षकों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सीधे खेलो इंडिया प्रणाली में एकीकृत किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक का सुगम मार्ग प्रशस्त होगा।
भारत की सभ्यतागत खेल विरासत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय ऐतिहासिक रूप से तीरंदाजी सहित पारंपरिक खेलों में अग्रणी और बढ़िया अभ्यासकर्ता रहे हैं और ये खेल हजारों वर्षों की इस समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने और उसका जश्न मनाने का एक प्रयास भी हैं।
विभिन्न स्थानों पर उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय सशक्तिकरण, युवा विकास और राष्ट्रीय खेल उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरा है।
जगदलपुर दौरे के दौरान श्रीमती खडसे के साथ कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें श्री संजय पांडे, मेयर, जगदलपुर; श्री मयंक श्रीवास्तव, आईपीएस, डीडीजी खेलो इंडिया; श्री शलभ सिन्हा, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक; श्री आकाश छिकारा, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट; श्री प्रतीक जैन, आईएएस, सीईओ, जिला पंचायत; श्री ऋषिकेश तिवारी, एसडीएम, जगदलपुर; श्रीमती तनुजा सलाम, निदेशक (खेल), छत्तीसगढ़; सुश्री ममता श्री ओझा, निदेशक, खेलो इंडिया और श्री डोमन सिंह, आईएएस, आयुक्त, बस्तर शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों के साथ बातचीत और प्रतियोगिता स्थलों पर चल रहे प्रतिभा पहचान प्रयासों की समीक्षा के साथ हुआ।
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