यह अच्छी बात है कि कई राज्यों में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की तीव्रता कम होने के बाद कई तरह के प्रतिबंधों में ढील दी गई है। कुछ राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही है। कोरोना संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में राजनीतिक विरोध के बावजूद स्कूल खोल दिये गये हैं। हालांकि, दिल्ली में सम-विषम के आधार पर दुकानों की बंदी और सप्ताहांत का कर्फ्यू हटाने के साथ कुछ अन्य छूट दी गई हैं लेकिन स्कूलों को खोलने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया। दिल्ली सरकार का मानना है कि किशोरों का टीकाकरण हो जाने के बाद स्कूल खोलने का उचित माहौल बन पायेगा। यह अच्छी बात है कि कुछ राज्यों में कोरोना के मामलों में गिरावट के बाद प्रतिबंधों का दायरा सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया आरंभ हुई है। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कोरोना संकट के चलते स्कूल बंद होने का बच्चों के मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों में प्राकृतिक तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। लेकिन बच्चों से अधिक भावनात्मक लगाव के कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं। तभी सरकारों ने तय किया है कि विद्यार्थी अभिभावकों की सहमति से स्कूल जा सकेंगे। स्कूलों को भी कोरोना से बचाव के उपायों पर सख्ती बरतने को कहा गया है। कोरोना संक्रमण रोकने को लगी बंदिशों का दायरा घटाने की खबरें ऐसे समय में आ रही हैं जब इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोम कंसोर्शियम के अनुसार, कोविड-19 भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति में पहुंच गया है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके बावजूद ओमीक्रोन के ज्यादा मामले हल्के-बिना लक्षण वाले हैं, जिसमें यह पता लगाना कठिन होता है कि व्यक्ति किसके संपर्क में आने से संक्रमित हुआ।
बहरहाल, ऐसी स्थिति में समाज के बीच मौजूद वायरस के संक्रमण की चेन तोडऩा कठिन होता है। यह तेजी से प्रसार करता है। तभी स्वास्थ्य मंत्रालय टेस्टिंग-टीकाकरण के साथ ही टेली कंसल्टेशन पर जोर दे रहा है, ताकि अस्पतालों में ज्यादा भीड़ संक्रमण की वाहक न बने। इसके बावजूद कई राज्यों में बंदिशों में ढील देकर जान के साथ जहान बचाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। दरअसल, पहली कोरोना लहर में सख्त बंदिशों के चलते अर्थव्यवस्था ने तेजी से गोता लगाया और करोड़ों लोग बेरोजगारी की कगार पर जा पहुंचे थे। अब संकट के बीच जीवन जीने को न्यू नॉर्मल बनाने की कोशिश हो रही है। हरियाणा में भी दसवीं से बारहवीं तक के स्कूल एक फरवरी से खोले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ठंड व कोरोना प्रकोप के चलते स्कूलों को 31 जनवरी के बाद भी 15 फरवरी तक के लिये बंद कर दिया गया है। वहीं उत्तराखंड में नौवीं तक के स्कूल जनवरी के अंत तक बंद रहेंगे। झारखंड में फरवरी से स्कूल खोले जायेंगे। इसके बावजूद सामुदायिक संक्रमण की खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं। इसके शहरों के बाद ग्रामीण इलाकों में पांव पसारने की आशंका बनी हुई है। लेकिन राहत की बात यह है कि जनवरी के तीसरे सप्ताह में संक्रमण की आर वैल्यू में गिरावट आई है जो अभी डेढ़ के करीब है और उसके एक से कम होने पर महामारी के खत्म होने का संकेत माना जायेगा। वहीं आईआईटी मद्रास के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, अगले पखवाड़े में महामारी की तीसरी लहर अपने पीक पर पहुंच सकती है। वहीं इसी बीच केंद्र सरकार ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन को कुछ शर्तों के साथ बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। ये टीके अस्पताल व क्लीनिक में उपलब्ध रहेंगे और 18 वर्ष या उससे अधिक का व्यक्ति कोविन पोर्टल पर जानकारी देकर व पंजीयन करवाकर टीके खरीद सकता है। इसके बावजूद जब देश में संक्रमितों का आंकड़ा प्रतिदिन ढाई लाख से अधिक है और चार सौ जिलों में संक्रमण की दर दस फीसदी से अधिक है तो हर स्तर पर सावधानी जरूरी है। यही वजह है कि केंद्र ने कोरोना प्रतिबंधों को 28 फरवरी तक बढ़ाया है।

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