नई दिल्ली 22 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा पर पानी और बर्फ की खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। चंद्रमा की सतह तापीय भौतिकी प्रयोग (ChaSTE) के तहत विक्रम लैंडर द्वारा किए गए तापमान मापों ने चांद की उच्च अक्षांश वाली मिट्टी में पानी और बर्फ के संभावित जमाव की ओर इशारा किया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के वैज्ञानिक के दुर्गा प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि चंद्रमा पर पानी और बर्फ की उपस्थिति भविष्य में मानव जीवन और अन्वेषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चांद का तापमान न केवल पानी और बर्फ की मौजूदगी को निर्धारित करता है, बल्कि अन्य वैज्ञानिक पहलुओं को भी प्रभावित करता है।
चंद्रयान-3 मिशन से प्राप्त यह नई जानकारी प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुई है। ChaSTE प्रयोग ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में 355K (82°C) तक तापमान दर्ज किया, जो कि अनुमानित 330K से 25K अधिक था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तापमान वृद्धि लैंडर के 6° के स्थानीय ढलान पर सूरज की ओर झुके होने के कारण हुई।
ChaSTE के अवलोकनों के आधार पर, अनुसंधान दल का मानना है कि 14° से अधिक ढलान वाले बड़े ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी और बर्फ के स्थायी भंडार मौजूद हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में सौर विकिरण कम पहुँचता है, जिसके कारण तापमान भी कम रहता है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों और संभावित मानव निवास के लिए इन्हें अधिक उपयुक्त बनाता है।
चांद पर पानी की खोज और उसके संभावित उपयोग को लेकर कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां उत्सुक हैं। चंद्रयान-3 से प्राप्त ChaSTE के यह परिणाम भविष्य के चंद्र मिशनों और चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति की संभावनाओं को नई दिशा दे सकते हैं। इसरो ने बताया कि इस महत्वपूर्ण डेटा का आगे भी विश्लेषण किया जाएगा और आगामी शोध पत्र प्रकाशित किए जाएंगे।
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