Assembly Elections and By-elections 2026 Display of Election Material and Exit Polls Prohibited During the Silence Period

 

  1. निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभाओं के लिए चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया है।
  2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 (1)(ख) के अनुसार किसी भी मतदान क्षेत्र में मतदान पूरा होने के निर्धारित समय से अड़तालीस घंटे पहले से साइलेंस पीरियड (मौन अवधि) के दौरान टेलीविजन या ऐसे किसी माध्यम से चुनाव सामग्री प्रदर्शित करना प्रतिबंधित होता है।
  3. राज्यों में चुनाव नीचे दिए कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित हैं:
विधानसभा चुनाव कराए जाने वाले राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेश मतदान तिथि साइलेंस पीरियड
असम 09.04.2026 शाम 5:00 बजे (07.04.2026)

शाम 5:00 बजे तक (09.04.2026)

केरल और पुद्दुचेरी 09.04.2026 शाम 6:00 बजे (07.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (09.04.2026)

तमिलनाडु 23.04.2026 शाम 6:00 बजे (21.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (23.04.2026)

पश्चि‍म बंगाल 23.04.2026 (प्रथम चरण) शाम 6:00 बजे (21.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (23.04.2026)

29.04.2026 (द्वितीय चरण) शाम 6:00 बजे (27.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (29.04.2026)

  1. इसी अनुसार निर्वाचन आयोग ने फिर कहा है कि टीवी/रेडियो चैनल और केबल नेटवर्क सुनिश्चित करें कि उपर्युक्त अवधि के दौरान उनके द्वारा प्रसारित/दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में कोई भी ऐसी सामग्री शामिल न हो, जिसमें पैनलिस्टों/प्रतिभागियों के विचार/अपील शामिल रहें, जिन्हें किसी विशेष पार्टी या उम्मीदवार की संभावनाओं को बढ़ावा देने/विरोध करने या चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के रूप में समझा जा सकता है। इसमें किसी भी जनमत सर्वेक्षण का प्रदर्शन भी शामिल है।
  2. लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत आयोग ने अधिसूचित किया है कि अप्रैल, 2026 (बृहस्‍पतिवार) को सुबह 7:00 बजे से 29 अप्रैल, 2026 (बुधवार) को शाम 6:30 बजे के बीच एक्‍जि‍ट पोल और प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से उनके परिणामों को दिखाना प्रतिबंधित है। लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए के उल्लंघन पर दो वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  3. आयोग सभी मीडिया संस्थानों को सलाह देता है कि वे इस संबंध में दिए गए निर्देशों का पालन इसी भावना के अनुरूप करें।