भारत को तनाव में कमी तथा संभावित पुनः वृद्धि—दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए: रक्षा मंत्री
“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठा रही है”
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित आईजीओएम ने 18 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में अपनी चौथी बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की तथा भारत की तैयारियों और भावी कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया। बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किन्जारापु राममोहन नायडू; पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल; विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल; श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया; तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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रक्षा मंत्री ने संघर्ष की जमीनी स्थिति को अनिश्चित एवं परिवर्तनीय बताते हुए इस बात पर बल दिया कि भारत को न केवल तनाव में कमी बल्कि संभावित पुनः वृद्धि की स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसी भी संभावित जोखिम या समस्या को कम करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठा रही है।
रक्षा मंत्री ने ‘भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल” के गठन के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दी गई मंजूरी का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत 12,980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी प्रदान की गई है, ताकि समुद्री बीमा कवरेज की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह घरेलू बीमा पूल सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से भारतीय बंदरगाहों तक तथा वापसी मार्ग में माल ले जाने वाले पोतों के लिए, यहां तक कि अस्थिर समुद्री गलियारों से गुजरते समय भी, किफायती और निरंतर बीमा कवरेज उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत के समुद्री व्यापार के लिए किफायती और निरंतर बीमा कवरेज सुनिश्चित करेगा तथा आयात-निर्यात परिचालन की सुरक्षा और स्थिरता को सुदृढ़ करेगा।
आईजीओएम को अवगत कराया गया कि वैश्विक आपूर्ति में बड़े झटके के बावजूद भारत ने ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीज़ल और एटीएफ का 60 दिनों से अधिक का भंडार उपलब्ध है, जबकि एलएनजी का लगभग 50 दिन और एलपीजी का लगभग 40 दिन का भंडार घरेलू उत्पादन के साथ बनाए रखा गया है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए सरकार ने आयात स्रोतों का विविधीकरण किया है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा लैटिन अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों से कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है। अप्रैल और मई 2026 के लिए आयात आवश्यकताएं अधिकांशतः सुनिश्चित कर ली गई हैं, जिससे आपूर्ति की निरंतरता बनी हुई है।
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जहां संभव हो, एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। मार्च 2026 से अब तक 4.76 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन प्रचालित किए जा चुके हैं तथा 5.33 लाख से अधिक नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण किया गया है। 17 अप्रैल 2026 तक 37,500 से अधिक उपभोक्ताओं ने MYPNGD.in पोर्टल के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन समर्पित कर दिए हैं, जो पीएनजी की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी संयुक्त कार्य समूह का गठन किया गया है। 1 अप्रैल 2026 के आदेश के माध्यम से सरकार ने तेल रिफाइनरी कंपनियों, जिनमें पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, को C3 एवं C4 स्ट्रीम्स की न्यूनतम मात्रा महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। फार्मास्यूटिकल्स विभाग, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (डीसीपीसी) तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुरोधों के आधार पर एलपीजी पूल से प्रतिदिन 1000 मीट्रिक टन की व्यवस्था की गई है। 9 अप्रैल 2026 से अब तक लगभग 3200 मीट्रिक टन प्रोपिलीन की बिक्री की जा चुकी है।
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मंत्रियों को अवगत कराया गया कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) तथा सभी खाद्य वस्तुओं के खुदरा मूल्य स्थिर और सीमित दायरे में हैं। आईएमसी द्वारा 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के अतिरिक्त निर्यात की सिफारिश की गई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर एलपीजी से संबंधित शिकायतों में कमी का रुझान देखा गया है। प्रोपिलीन और मेथनॉल की आपूर्ति क्रमशः बीपीसीएल कोच्चि एवं मुंबई रिफाइनरियों तथा असम पेट्रोकेमिकल्स और जीएनएफसी के साथ सुनिश्चित की गई है।
उर्वरकों के संदर्भ में, भारत के पास यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। 1 मार्च से 16 अप्रैल 2026 के बीच कुल 47.50 लाख टन उर्वरकों की आपूर्ति से भंडार और सुदृढ़ हुआ है। यूरिया उत्पादन के लिए एलएनजी की व्यवस्था पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से सफलतापूर्वक की गई है। फॉस्फोरिक एसिड की समस्या का समाधान कर लिया गया है तथा वैकल्पिक उर्वरक के रूप में अमोनियम सल्फेट के आयात की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार ने बताया कि विदेशों में भारतीय मिशन विभिन्न प्रकार के उर्वरकों और इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। जमाखोरी, कालाबाजारी और अनुचित बिक्री के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। राज्यों के साथ समन्वय बैठकों के अतिरिक्त 459 जिला स्तरीय टास्क फोर्स सक्रिय हैं तथा 1.85 लाख से अधिक निगरानी समितियां उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं।
रक्षा मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उनके साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उठाए जा रहे कदमों में एकरूपता सुनिश्चित करने तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अन्य देशों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों का भी समुचित संज्ञान लिया जाना चाहिए। नीतिगत कदमों और सर्वोत्तम प्रथाओं को व्यवस्थित रूप से प्रलेखित किया जाना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे सीख लेकर हमारी प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ किया जा सके ।
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