उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता
महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया
हाल में हुई बच्चे चोरी के घटना के आलोक में यदि किसी को कोई संदिग्ध व्यक्ति जो उस इलाके से बाहर हैं, नजर आते हैं, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं।:- उपायुक्त राँची
जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश, नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को दे
जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील
आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन करने की अपील
लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,22.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं की क्रमवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया तथा उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिले में स्वास्थ्य, पोषण एवं महिला कल्याण योजनाओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना को लेकर विस्तृत चर्चा।
बैठक उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा
“महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत करने के लिए इन योजनाओं का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पदाधिकारी मिलकर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें।”
योजनाओं की क्रमवार समीक्षा
टीकाकरण अभियान
राँची जिले में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर अभियान चलाकर छूटे हुए मामलों को कवर करने तथा टीकाकरण दर को 95% से अधिक करने पर विशेष जोर दिया गया।
एएनसी (Antenatal Care – गर्भावस्था पूर्व देखभाल)
गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की प्रगति पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को कम से कम चार एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान एवं हस्तक्षेप पर बल दिया गया।
संस्थागत प्रसव
संस्थागत प्रसव की दर बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा की गई। आशा कार्यकर्ताओं एवं एएनएम को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया। जिले में संस्थागत प्रसव की दर को 100% करने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
कम जन्म वजन एवं एसएएम + एमटीसी
कम जन्म वजन वाले बच्चों की पहचान एवं उपचार पर फोकस किया गया। गंभीर कुपोषण (एसएएम) से ग्रस्त बच्चों के लिए एमटीसी सेंटरों की क्षमता बढ़ाने तथा उनके पोषण प्रबंधन पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी एसएएम बच्चों को तत्काल एमटीसी में भर्ती कराया जाए।
एमएएम (Moderate Acute Malnutrition – मध्यम कुपोषण)
उपायुक्त द्वारा एमएएम बच्चों की पहचान एवं प्रबंधन की समीक्षा की गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से ऐसे बच्चों को चिह्नित कर पोषाहार वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
कम वजन वाले बच्चे
कम वजन वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए चलाए जा रहे पोषण अभियान की प्रगति पर उपायुक्त द्वारा समीक्षा किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण वाटिका विकसित करने एवं स्थानीय स्तर पर पोषक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
अपर आईडी
अपर आईडी से संबंधित मामलों की समीक्षा में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र बच्चों की आईडी अपडेट की जाए तथा किसी भी विसंगति को तुरंत दूर किया जाए।
बाहर चले गए बच्चे (प्रवासी बच्चे)
प्रवासी बच्चों की ट्रैकिंग एवं उनके कल्याण पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
बुनियादी ढांचा (भवन, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन)
आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने समयबद्ध योजना बनाकर भवन निर्माण, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने का निर्देश दिया। स्वच्छता एवं जल संरक्षण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र (Saksham AWC)
सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों की प्रगति पर विचार किया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जाए तथा पोषण एवं शिक्षा कार्यक्रमों को इनके माध्यम से और मजबूत किया जाए।
पीएमएमवीवाई (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना)
योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। योजना की कवरेज बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
बैठक में उप विकास आयुक्त रांची, श्री सौरभ भुवनिया, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, श्रीमती सुरभि सिंह, सिविल सर्जन, डॉ. प्रभात कुमार, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
जिले के नागरिकों से स्वास्थ्य के प्रति सजगता बरतने की अपील
उपायुक्त ने स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में जिले के लोगों से स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उपायुक्त ने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में तुरंत सरकारी चिकित्सालयों या योग्य डॉक्टरों से संपर्क करें तथा केवल प्रमाणित दवाओं का ही सेवन करें।
नशा मुक्ति अभियान को मजबूत करने का आह्वान
उपायुक्त ने जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को नशे से दूर रखने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में निरंतर जागरूक किया जाए। यदि कोई संदिग्ध बच्चा या युवा नशा करते हुए दिखाई दे, तो तुरंत समाज कल्याण विभाग को सूचना दें।
उपायुक्त ने विशेष चिंता जताई कि हाल के दिनों में कॉटन कैंडी में केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग बढ़ गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को ऐसे केमिकल युक्त एवं रंगीन खाद्य पदार्थों से दूर रखें तथा स्वस्थ एवं प्राकृतिक आहार पर ध्यान दें।
10 फरवरी से शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की अपील
उपायुक्त ने आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन बहुत आवश्यक है। उपायुक्त ने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में आने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से दवा अवश्य लें और पूर्ण कोर्स पूरा करें। इस कार्यक्रम के सफल संचालन से जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने में बड़ी सफलता मिलेगी।
*स्वच्छता अभियान: खुले में शौच को रोकने के ख़िलाफ़ सभी को लगातार काम करने की आवश्यकता *
उपायुक्त ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि लोग खुले में शौच बिल्कुल न करें। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में शौचालय का निर्माण एवं उपयोग अवश्य करे । शौचालय निर्माण से न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी कई संक्रामक बीमारियों से भी बचा जा सकेगा।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा पात्र लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
सभी विभागों को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश
उपायुक्त ने बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इन सभी मुद्दों पर तत्परता से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं फाइलेरिया उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जिले की जनता को स्वस्थ एवं जागरूक बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
उपायुक्त ने आम जनता से अपील की कि वे इन सरकारी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें और एक-दूसरे को जागरूक करें ताकि जिला समग्र रूप से स्वस्थ, स्वच्छ एवं नशा मुक्त बने।
उपायुक्त द्वारा अवैध शराब और बाल चोरी की घटनाओं पर सख्त निर्देश दिए गए
उपायुक्त ने ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब (भट्टी शराब) के उत्पादन और वितरण को रोकने तथा बाल चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उपायुक्त ने कहा कि समाज की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता की भागीदारी आवश्यक है। इस संबंध में जारी एक बयान में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को दी जाए।
अवैध शराब के उत्पादन पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
उपायुक्त ने जिले के ग्रामीण इलाकों में भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसे तुरंत रिपोर्ट करें। उपायुक्त ने कहा अवैध शराब न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह अपराध और सामाजिक अशांति को भी बढ़ावा देती है। जिला प्रशासन द्वारा इस मुद्दे पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। नागरिकों को सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 100 (पुलिस) या स्थानीय आबकारी अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई है। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उनके योगदान को सराहा जाएगा।
बाल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश
उपायुक्त ने जिले में बाल चोरी या अपहरण की संभावित घटनाओं पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को कोई संदिग्ध बच्चा दिखाई दे, जो चोरी या अपहरण का शिकार लगता हो, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं। जिला प्रशासन ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और पड़ोसियों तथा समुदाय के सदस्यों को भी सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें। इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें स्कूलों और ग्राम सभाओं में विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली समीक्षा बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए टीम वर्क पर विशेष ध्यान दिया जाए।
यह बैठक जिले में समाज कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
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